परिकथा में परिकल्पना और परिकल्पना में चर्चा ५०० से ज्यादा सक्रिय ब्लोगरों की

जी हाँ ,
परिकथा के नवंबर-दिसंबर अंक में प्रवक्ता, अनवरत, हिंद युग्म की हिंदी खबर, चिट्ठा चर्चा, औब्जेक्सन मी लॉर्ड, जगदीश्वर चतुर्वेदी के साथ परिकल्पना के शब्द सभागार की चर्चा हुई है !
ये तो हुई परिकथा में परिकल्पना की बात ।
और अब आपको यह बता दूं कि आज परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण के अंतर्गत वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय
५०० से ज्यादा साहित्यकारों की चर्चा हुई है ।
यदि आप साहित्य कर्म से जुड़े हैं और हिंदी ब्लोगिंग में इस वर्ष सक्रिय रहे हैं तो आप अवश्य शामिल होंगे इस विश्लेषण में .....
तो देर किस बात की आईये चलते हैं आज के विश्लेषण पर एक नज़र डालने ......लिंक के लिए यहाँ किलिक करें
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उजळी और जेठवा की प्रेम कहानी

११वीं-१२वीं शताब्दी की उजळी व जेठवा की अमर प्रेम कहानी और अपने प्रेमी जेठवा की मृत्यु के बाद उजळी द्वारा विरह में लिखे मर्मस्पर्शी दोहे पढने के लिए ज्ञान दर्पण पर निम्न पते पर जाएँ -
उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे | ज्ञान दर्पण
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आज हंसी दिवस है, खूब खिलकर खिलखिलायें

हंसी दिवस हो सबका जन्‍मदिवस
अब तक जिन्‍होंने दी है जन्‍मदिन पर मेरे शुभकामना, नहीं भी दी है पर लाईन में लगे हैं, बहुत सारे तो अपनी नींद में बेसुध सोये हैं, जागकर देंगे, यह निश्‍चय कर के सोये हैं, सबका नंबर आयेगा, पर मैं तो कुछ काम कर लूं, धन्‍यवाद, शुक्रिया, खुशामदीद अपना सबको अर्पण कर दूं। 

कुछ कहना चाहें तो माउस से यहां पर क्लिकिलायें 
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चोरों का डाटा चोरी करने की तकनीक

नईदुनिया में दिनांक 13.12.2010 को प्रकाशित मेरा व्यंग्य चोरों का डाटा चोरी करने की तकनीक पढ़े व्यंग्य और व्यंग्यलोक पर।
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आपका ब्लॉग स्वयं बोलेगा अपने बारे में इस विश्लेषण के दौरान




यदि आप सक्रिय ब्लोगर हैं और सार्थक ब्लोगिंग करते हुए सकारात्मक गतिविधियों में संलग्न हैं तो पूरे वर्ष भर के लेखा-जोखा में आप भी शामिल होईए, ढूंढिए विश्लेषण में अपना और अपने ब्लॉग का नाम , यदि दिखाई न दे तो कॉमेंट बॉक्स में डाल दें अपने ब्लॉग का नाम और पता , आपका ब्लॉग स्वयं बोलेगा अपने बारे में इस विश्लेषण के दौरान , तो देर किस बात की ये लीजिये लिंक जहां आपको पहुँचना है-
http://www.parikalpnaa.com/
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darane laga hain ye shahar

(सुनील कुमार) http://www.sunilvani.blogspot.com/


डर लगने लगा है इस शहर से,

हर घडी, हर पहर में

राह चलते डराती हैं उनकी नजरें

बस अब तो हर चेहरे में

अपराधी और बदमाश ही नजर आता है मुझे।

भ्रष्टाचार, बलात्कार और अत्याचार,

बन गई है इस शहर की पहचान,

अब तो हर अपना भी,

अनजान लगने लगा है मुझे।

जिन गलियों में गुजरते थे बेवाकी से

शाम ढलते ही बेगाना सा हो जाता है

क्या बताऊं तुझे ऐ शहर

अब तो अपना दरवाजा भी बेगाना लगने लगा है मुझे

13दिसंबर
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काव्‍यांचल कलैण्‍डर : लोकार्पण समारोह : एक आपको भी मिलेगा पर आईये तो ...

मैं कलैण्‍डर हूं काव्‍यांचल


मैं कलैण्‍डर हूं
मुझसे बात करना चाहते हैं
या मिलना चाहते हैं मुझसे
मिलने की इच्‍छा तो होगी ही
मुझे अपने घर भी ले जाना चाहेंगे
जहां घूमती हैं छिपकलियां
वहां टांग देंगे मुझे
पर मैं निडर हूं
गिरने पर भी डरता नहीं
पल पल न सही
दिनों का रखता हूं हिसाब
इसलिए लोग चाहते हैं
ले जाना बेहिसाब
पर आप आइये
तो हिन्‍दी भवन जनाब
मैं आपका कर रहा हूं
इंतजार।
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हिन्‍दी के ब्‍लॉगरों विवेक रंजन श्रीवास्‍तव ने यह क्‍या लिख दिया


विवेक रंजन श्रीवास्‍तव
ये पंक्तियां अंतिम चार हैं, इससे ऊपर दर्जन भर पंक्तियां आपकी राय का कर रही इंतजार हैं।
कॉपी करने की सुविधा न होने के कारण फोटो खींचकर चोरी की है
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'मूर्ख' को भारत सरकार सम्मानित करेगी...खुशदीप


सच कह रहा हूं
विश्‍वास न हो तो
शीर्षक पर क्लिक करें
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पत्रिका में प्रकाशित व्यंग्य- सुने ना सुने

व्यंग्य और व्यंग्यलोक में पढ़े मेरा पत्रिका में प्रकाशित व्यंग्य सुने ना सुने

प्रमोद ताम्बट
भोपाल
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कविता वाचक्‍नवी इंदौर में हैं : आप इन्‍दौर में हैं तो संपर्क कर सकते हैं, मेरठ वाले भी तैयार रहें

http://www.facebook.com/kvachaknavee
11 दिसम्‍बर तक इन्‍दौर में ही रहेंगी। संपर्क कर सकते हैं : नौ शून्‍य एक तीन सात सात शून्‍य पांच पांच शून्‍य पर।

इमेज पर क्लिक करेंगे तो सब जान जायेंगे।
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अविनाश वाचस्‍पति मूर्ख है

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ब्‍लॉग गायब हो रहे हैं, सावधानी बरतें : फिर मत कहियेगा खबर न हुई

कल एक मासूम ब्‍लॉगर का अमन का पैगाम गायब हो गया और आज अरूण सी. राय के सरोकार के निराकार होने की सूचना लिखचीत पर मिली है। एक दो जगह टिप्‍पणियों में भी ऐसे ही समाचार मिल रहे हैं। यह दुखद हैं परंतु नियति पर सिर्फ सावधानी का ही बस है। 
इमेज पर क्लिक करके देखें
नीचे दिए गए स्‍नैप शॉट देख लें। अपने ब्‍लॉग के डेशबोर्ड में जाकर सैटिंग्‍स पर क्लिक करें। फिर ब्‍लॉग का निर्यात करें पर क्लिक करें परंतु और भी अधिक सावधानी के साथ अगर, गलती से भी ब्‍लॉग हटाएं पर क्लिक हो गया तो सब मटियामेट हो जाएगा। जिससे बचने के लिए कार्यवाही की जा रही है, मतलब अपने हाथों से ही अपने ब्‍लॉग की खुदकुशी हो जाएगी। जो जाहिर है खुदखुशी से नहीं की गई होगी। 
क्लिक करें और देखें
इसके बाद ब्‍लॉग डाउनलोड पर क्लिक करे और नीचे देखें 
क्लिक करें और देखें
लिखा दिखलाई दे रहा होगा This type of file can harm your computer. Are you sure you want to download blog-12-09-2010,xml? आप save पर क्लिक कर लें। कुछ ही समय में फाईल डाउनलोड हो जाएगी। अब आप डाउनलोड की गई तिथि तक सुरक्षित हैं। ऐसी फाईलें सीधे कंप्‍यूटर पर नहीं खोली जा सकती हैं परंतु आप एक और ब्‍लॉग बनाकर उन्‍हें अपलोड कर सकते हैं। 

अब आपके ब्‍लॉग की सामग्री आपके कंप्‍यूटर की हार्डडिस्‍क में सुरक्षित है।
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हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है ।

हिंदी ब्लोगिंग वर्ष-२०१० में ७ वर्ष पूर्ण कर चुकी है । यह सुखद पहलू है कि विगत कई वर्षों की तुलना में वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है । इस वर्ष लगभग ८ से 10 हजार के बीच नए ब्लोगर्स का आगमन हुआ है , किन्तु सक्रियता के मामले में इस वर्ष आये ब्लोगर्स में से केवल ५०० से १००० के बीच ही सक्रिय हैं और सार्थक लेखन के मामले में ३०० के आसपास ।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि तपी जमीन को कुछ ठंडक देने का काम हुआ , लेकिन विकासक्रम की द्रष्टि से अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत संतोषप्रद नहीं कहा जा सकता । हिंदी ब्लोगिंग की सात वर्षों की इस यात्रा में अमूमन यही देखा गया कि यह ब्लॉगरों के लिए एक ऐसा धोबीघाट रहा ,जहां बैठकर वे अपने घर से लेकर गली-मोहल्ले तक की तमाम मैली चादरों को धोने का काम करते रहे और सुखाते रहे ।

पूरा आलेख पढ़ने के लिए यहाँ किलिक करें .......
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बच्चों का व्यवहार बदलते विज्ञापन ........!


आज के दौर में बचपन हजार खतरों से घिरा है। उनमें से एक विज्ञापनों की वो भ्रामक दुनिया भी है जो बिन बुलाये मेहमान की तरह हमारे जीवन के हर हिस्से पर अधिकार जमाये बैठी है। चाहे अखबार खोलिए या टीवी, इंटरनेट हो या रेडियो, इतना ही नहीं एक पल को घर की छत या बालकनी में आ जाएं जो साफ सुथरी हवा नहीं मिलेगी पर दूर- दूर तक बङे बङे होर्डिंग्स जरूर दिख जायेंगें जो किसी न किसी नई स्कीम या दो पर एक फ्री की जानकारी बिन चाहे आप तक पहुचा रहे हैं। यानि हर कहीं कुछ ऐसा जरूर दिखेगा जो दिमाग को सिर्फ और सिर्फ कुछ न कुछ खरीदने की खुजलाहट देता है। जिसका सबसे बङा शिकार बन रहे है वो मासूम बच्चे जिनमें इन विज्ञापनों की रणनीति को समझने का न तो आत्म बोध है और न ही जानकारी।


हालांकि इस विषय पर कई बार पढने-सुनने को मिलता है पर आजकल अभिभावकों के विचार और बच्चों के व्यवहार को देखकर तो लगता है बिन मांगे परोसी जा रही यह जानकारी बच्चों को शारीरिक , मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर बीमार बना रही है। खासतौर पर टीवी पर दिखाये जाने वाले ललचाऊ और भङकाऊ विज्ञापनों ने बच्चों के विकास की रूपरेखा ही बदल दी है। खाने से लेकर खेलने तक उनकी जिंदगी सिर्फ और सिर्फ अजब गजब सामानों से भर गयी है। बच्चों को विज्ञापनों के जरिये मिली सीख ने जीवन मल्यों को ही बदल कर रख दिया है । इसी का नतीजा है कि बच्चों के स्वभाव में जरूरत की
जगह इच्छा ने ले ली है। इच्छा जो हर हाल में पूरी होनी ही चाहिए नहीं तो............ नहीं तो क्या होता है हर बच्चे के माता-पिता जानते हैं........ :)

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बुरा मत मानें, गर ब्‍लॉगवाणी बंद हो गया है और चिट्ठाजगत खफा है

अगर आपके लिखचीत बॉक्‍स में कोई भी अपनी नई पोस्‍ट का लिंक देता है।
मैं तो ऐसे लिंक्‍स का सदा स्‍वागत करता हूं, चाहे एग्रीगरेटर खफा रहे या रहे खुश।
आप भी ऐसा ही कीजिए।

मान लीजिए आपका दरवाजा कोई खटखटाता है
या डोरबैल बजाता है
तो आप दरवाजा खोलते हैं
कौन हैं
यह तो पूछते हैं
तो फिर लिखचीत (चैट) बॉक्‍स पर
ऐसा क्‍यों नहीं करते हैं

क्‍योंकि वहां पर पता रहता है
कि कौन लिंक दे रहा है
धन्‍यवाद तो दे सकते हैं
हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की बेहतरी के
हम सबको जिम्‍मेदार होना होगा

ऐसे ऐसे फंडे अपनाने होंगे
मैं तो अपना रहा हूं
और आप ....
जो नाराज हो जाते हैं
लिंक छोड़ने पर
वे बतला दिया करें
तो बेहतर रहेगा

पर अगर कोई उपाय भी बतलायें
तो और भी बेहतर लगेगा।
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चिट्ठाजगत क्‍यों खफा है आजकल, दर्शन नहीं हो रहे हैं कई दिनों से

खफा हो गया है
कुछ तो हुआ है
वायरल है या
वायरस है
निकल रहा
इसके न होने से
हिन्‍दी ब्‍लॉगरों का
जीवन रस है

आओ आओ
चिट्ठाजगत
जल्‍दी आओ
इतना मत
तरसाओ

बरसाओ
बरसाओ
अपना स्‍नेह
निरंतर बरसाओ

हिन्‍दी ब्‍लॉगर
पुकार रहे हैं
कुछ तो नेह
बरसाओ
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निकम्‍मी नहीं, लुटेरी है सरकार : डीएलए में आज पढि़ए

कॉमनमैन के लिए लुटना कंपल्‍सरी है। सरकार से लुटने के अनेक फायदे हैं। सरकार चाकू नहीं मारती है, वो मुर्गी नहीं काटती, अंडे सहेजती है, फिर इकट्ठे कर बाजार में बेचती है। आम आदमी को मार दिया गया तो सरकार की वे योजनाएं, जो आम आदमियों के लिए हैं, धरी की धरी रह जायेंगी।


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आओ सब मिलकर कहें कार्ला ब्रूनी हाय-हाय

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की माडल पत्नी कार्ला ब्रूनी अपने कार्यों से ज्यादा अपनी अदाओं और कारगुजारियों के लिए सुर्ख़ियों में रहती हैं.कभी अपने कपड़ों को लेकर तो कभी नग्न पेंटिंग के लिए ख़बरों में रही कार्ला ने अपने एक बयान से भारत सरकार और कई स्वयंसेवी संगठनों की सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया है.कार्ला ने आगरा के पास स्थित फतेहपुर सीकरी में एक मशहूर दरगाह पर अपने लिए बेटे की मन्नत मांगी.अपने लिए दुआ करना या कोई ख्वाहिश रखने में कोई बुरे नहीं है पर उस इच्छा को सार्वजनिक करना भी उचित नहीं ठहराया जा सकता.हमारा देश सदियों से “पुत्र-मोह” का शिकार है और इसका खामियाजा जन्मी-अजन्मी बेटियां सालों से भुगत रही हैं.कभी दूध में डुबोकर तो कभी अफीम चटाकर उनकी जान ली जाती है.अब तो आधुनिक चिकित्सा खोजों ने बेटियों को मारना और भी आसान बना दिया है.अब तो कोख में ही बेटियों की समाधि बना देना आम बात हो गयी है.

आगे पढ़े:www.jugaali.blogspot.com
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अविनाश वाचस्‍पति गोवा से दिल्‍ली आ पहुंचे हैं और साथ लाये हैं खूब सारी सुनहरी स्‍मृतियां


आप जानते होंगे और आपने
शनिवार को गोवा में हुआ हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन, अब रविवार को रोहतक में होगा हिन्‍दी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन
यह पोस्‍ट भी पढ़ी होगी
। अब इस पोस्‍ट को भी पढ़ लीजिए। अविनाश जी गोवा से अकेले नहीं आए हैं। शनिवार को आये हैं शुक्रिया साथ लाये हैं
।

अविनाश जी के हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के विकास के लिए जो कर रहे हैं, वो नि:संदेह अद्भुत है। समर्पण भाव देखते ही बनता है। आप भी देखिए।

यहां पर क्लिक कीजिए।
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