परिकल्पना की वार्षिक महासभा में याद किए गए अविनाश वाचस्पति

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  • रवीन्द्र प्रभात
  • लखनऊ (25 अगस्त) :  हिन्दी भाषा की विविधता, सौन्दर्य, डिजिटल और अंतराष्ट्रीय स्वरुप को विगत 14 वर्षों से वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठापित करती आ रही लखनऊ की संस्था परिकल्पना के 13वीं वार्षिक महासभा में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपने उद्वोधन में कहा कि ‘‘परिकल्पना एक ऐसी संस्था है, जो गैर हिन्दी प्रदेशों के साथ-साथ विदेशों में हिन्दी के प्रचार प्रसार में प्रतिबद्ध है। यह संस्था हिन्दी को वैश्विकता प्रदान करने में पिछले कई वर्षों से लगातार सक्रिय है। सामाजिक संस्थाओं की उपयोगिता और आवश्यकता हर जमाने में रही है, लेकिन कुछ ही संस्थाएं अपने लक्ष्य, अपने मिशन में कामयाब हो पाती है। मुझे खुशी है कि हमारे शहर की यह संस्था वैश्विक पहचान बनाने में कामयाब रही है। मुझे यह कहते हुये गर्व का अनुभव हो रहा है कि यह संस्था हिन्दी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने की दिशा में बड़ा काम कर रही है। यह संस्था हिन्दी भाषा को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा हेतु विगत कई वर्षों से संघर्षरत है। यह संस्था पूरी दुनिया में हिन्दी को नयी ऊंचाई देने में सफल रही है।‘‘ 
    विशिष्ट अतिथि महाराष्ट्र विश्व विद्यालय जलगांव के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी ने कहा कि ‘‘मैं हिन्दी के प्रचार, राष्ट्रभाषा के प्रचार को राष्ट्रीयता का मुख्य अंग मानता हूँ। मैंने भारत की बहुत सारी संस्थाओं को करीब से देखा है जो हिन्दी के प्रचार-प्रसार में प्रतिबद्ध है, लेकिन हमारी परिकल्पना सही मायानों में हिन्दी के उत्थान कि दिशा में अनुकरणीय भूमिका निभा रही है।‘‘ 
    इस एक दिवसीय संगोष्ठी में आगत अतिथियों का स्वागत कराते हुये अवधि के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम बहादुर मिश्र ने कहा कि ‘‘जहां हिन्दी है, वहीं परिकल्पना है और जहां परिकल्पना है वहीं हिन्दी है। परिकल्पना संस्था नहीं एक वैश्विक परिवार है जो वसुधईव कुटुंबकम कि भावना को चरितार्थ करती है।‘‘ 
    अपने उद्वोधन में अभिदेशक पत्रिका के संपादक डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी ने कहा कि ‘‘परिकल्पना ने हिन्दी को पूरी दुनिया में जिस प्रकार से फैलाने का कार्य किया है वह अविस्मरणीय है। यह परिवार हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने कि दिशा में पूरी दृढ़ता के साथ सक्रिय है। यह बहुत बड़ा काम है जिसे अपने सार्थक कदमों से साधने का काम कर रहा है यह परिवार।‘‘ 
    परिकल्पना समय के प्रधान संपादक डॉ रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि ‘‘परिकल्पना संस्था अबतक विश्व के 11 देशों में क्रमशः ‘‘ब्लोगोत्सव‘‘ और ‘‘अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव‘‘ का आयोजन कर चुकी है। पिछला अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव 26 मई 2019 को भारतीय महावाणिज्य दूतावास वियतनाम, वियतनाम स्थित भारतीय बीजनेस चेम्बर ऑफ कोमर्स के सहयोग से वियतनाम की आर्थिक राजधानी हो ची मिनह में मनाया गया था। भारतीय भाषाओँ के विकास और उनके वैश्विक प्रारूप को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है परिकल्पना। 
    सभाध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मिथिलेश दीक्षित ने कहा कि ‘‘परिकल्पना जिन पवित्र उद्देश्यों को लेकर काम कर रही है वह बहुत बड़ा काम है। परिकल्पना की सदस्य होने के नाते यदि मैं कहूँ कि परिकल्पना मुझमें बसती है और मैं परिकल्पना में तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।‘‘ 
    भारतीय भाषाओँ के विकास और उनके वैश्विक प्रारूप को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध संस्था परिकल्पना की अध्यक्ष माला चैबे ने कहा, ‘‘यह संस्था हिन्दी भाषा और साहित्य की तकनीकी प्रगति को समर्पित है। यह संस्था एक वैश्विक परिवार है जिससे जुड़कर आप अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। यह वह मंच है जहां तुलसी के पत्ते की तरह सबको समान अवसर और सबको समान सम्मान प्रदान करती है।‘‘
    इस इस अवसर पर परिकल्पना परिवार के संस्थापकों मे से एक स्वर्गीय अविनाश वाचस्पति की स्मृति मे श्रीमती कुसुम वर्मा को परिकल्पना के द्वारा 11 हजार रुपये नकद के साथ अविनाश वाचस्पति सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही परिकल्पना की नयी कार्यकारिणी का गठन हुआ और नए उत्तरदायित्व ग्रहण करने वाले सदस्यों को पद और गोपनियता की शपथ दिलाई गयी। 
    इस अवसर पर लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता और लोकसंघर्ष पत्रिका के सलाहाकार मोहम्मद शुएब ने कहा कि "परिकल्पना से मैं भावनात्मक रूप से जुड़ा हूँ, आज मैं परिवार के बीच हूँ यह मेरे लिए गौरव की बात है। "
    इसके पश्चात परिकल्पना के जानकीपुरम, लखनऊ स्थित नए परिसर का लोकार्पण भी सुनिश्चित हुआ।
    संस्था के नव नियुक्त पदाधिकारियों में प्रमुख रहीं गाजियावाद से पधारीं डॉ मीनाक्षी सक्सेना कहकशां जिन्हें महिला प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गयी। इसके अलावा लखनऊ की डॉ मिथिलेश दीक्षित को मानद अध्यक्ष, प्रमुख समाजसेवी सत्या सिंह को उपाध्यक्ष (सामाजिक गतिविधियां), आगरा की डॉ सुषमा सिंह को उपाध्यक्ष (वैश्विक प्रसार), बाराबंकी के एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन को उपाध्यक्ष (मीडिया सह विधिक प्रभारी), वाराणसी के श्री शचिंद्रनाथ मिश्र को उपाध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ), लखनऊ की श्रीमती शीला पाण्डेय को सचिव (कार्यक्रम संयोजन), लखनऊ के श्री राजीव प्रकाश को सचिव (सेंट्रल उत्तर प्रदेश प्रभारी), मधेपुरा बिहार के डॉ अमोल रॉय को सचिव (बिहार प्रभारी), नयी दिल्ली के श्री गगन शर्मा को सचिव (दिल्ली प्रभारी), गाजियाबाद के डॉ अरुण कुमार शास्त्री को सचिव (पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी), लखनऊ की श्रीमती नीता जोशी को सचिव (महिला प्रकोष्ठ), लखनऊ कि श्रीमती कनक लता गुप्ता को सचिव (सामाजिक गतिविधियां), लखनऊ कि श्रीमती कुसुम वर्मा को सचिव (सांस्कृतिक गतिविधियां), लखनऊ के डॉ उदय प्रताप सिंह को सचिव (मीडिया प्रभारी), लखनऊ की श्रीमती आकांक्षा यादव को सह सचिव (महिला प्रकोष्ठ) और लखनऊ की श्रीमती आभा प्रकाश को सह सचिव (सांस्कृतिक गतिविधियां) का दायित्व प्रदान किया गया।
    इसके अलावा श्री नकुल दुबे, डॉ सुनील कुलकर्णी, डॉ राम बहादुर मिश्र, डॉ चम्पा श्रीवास्तवतथा डॉ प्रभा गुप्ता को संस्था का संरक्षक और श्री शिव सागर शर्मा, डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी,डॉ ओम प्रकाश शुक्ल अमिय,श्री कृष्ण कुमार यादव, डॉ अनीता श्रीवास्तव और डॉ बालकृष्ण  पाण्डेय को मार्गदर्शक मण्डल में शामिल किया गया।
    तत्पश्चात आगरा से पधारे कवि शिवसागर ने अपने सुमधुर आवाज़ मे कविता प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं के बीच खूब बहबही बटोरी।    मंच संचालन लोक गायिका कुसुम वर्मा ने किया।
    (मीडिया रिपोर्ट: डॉ उदय प्रताप सिंह)
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    हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने के संकल्प के साथ मॉरीशस में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव संपन्न

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  • parikalpnaa


  •  वाएं से विश्व हिन्दी सचिवालय के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र, मॉरीशस के सांसद श्री विकास ओरी, भारतीय उच्चायुक्त श्री अभय ठाकुर, हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के प्रधान श्री यन्तु देव बुद्धू, मंत्री श्री धनराज शंभू और सभा को संबोधित करते परिकल्पना समय के प्रधान संपादक श्री रवीन्द्र प्रभात।
    पोर्ट लुई: परिकल्पना लखनऊ, भारतीय उच्चायोग मॉरीशस और हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के संयुक्त तत्वावधान में 2 सितंबर से 8 सितंबर तक मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में आयोजित दसवां अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में लखनऊ की नौ विभूतियों सहित उत्तर प्रदेश से कुल 19 विभूतियाँ शामिल हुईं। इसके अलावा भारत के विभिन्न प्रदेशों से तथा मॉरीशस से शताधिक हिन्दी विद्वान, साहित्यकार, टेक्नोक्रेट, ब्लोगर्स तथा संस्कृतिकर्मियों ने हिस्सा लिया। इस उत्सव में भारत तथा मॉरीशस के लगभग 42 हिन्दी सेवियों को सम्मानित किया गया तथा एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इसके साथ ही हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य पर भारत और मॉरीशस के विद्वानों ने चर्चा की। साथ ही मुंबई के सागर त्रिपाठी, मॉरीशस के डॉ. हेमराज सुंदर, लखनऊ की डॉ. मिथिलेश दीक्षित तथा अमेठी के जगदीश पीयूष की अध्यक्षता में चार काव्य संध्याएँ सम्पन्न हुईं। 


    परिकल्पना समय मासिक के प्रधान संपादक लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात ने बताया कि इस उत्सव में लखनऊ से अवधी की लोकगायिका कुसुम वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मिथिलेश दीक्षित, शिक्षाविद डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, साहित्यकार व समाजसेवी सत्या सिंह 'हुमैन', हिन्दी विकिपीडिया की प्रबन्धक माला चौबे, नाट्यकर्मी राजीवा प्रकाश, संस्कृतिकर्मी आभा प्रकाश, परिकल्पना के कोषाध्यक्ष शुभ चतुर्वेदी 'शुभेन्दु' सम्मिलित हुये। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से साहित्यकार व शिक्षाविद डॉ. मीनाक्षी सक्सेना 'कहकशाँ' और डॉ. अरुण कुमार शास्त्री, इलाहाबाद से नाट्यकर्मी डॉ. प्रतिमा वर्मा व मास्टर अर्णव वर्मा, सुल्तानपुर से वरिष्ठ अवधी साहित्यकार डॉ. राम बहादुर मिश्र, आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप और डॉ. ओंकार नाथ द्विवेदी, कानपुर से डॉ. ओम प्रकाश शुक्ल अमिय अमेठी से जगदीश पीयूष वाराणसी से दीनानाथ द्विवेदी रंग, सचीन्द्र नाथ मिश्र और अभिलेश वर्मा देवरिया से पुरातत्वविद डॉ. रमाकांत कुशवाहा गोंडा से शिव पूजन शुक्ल और आगरा से डॉ. सुषमा सिंह, डॉ पूनम तिवारी, डॉ प्रभा गुप्ता और डॉ रमेश सिंह धाकरे आदि ने अपनी उपस्थिती दर्ज कराई। वहीं उत्तराखंड से बिमल बहुगुणा और मुंबई से सागर त्रिपाठी की भी सार्थक उपस्थिति रही। 


    सभी परिचर्चा सत्र और काव्य संध्याओं का आयोजन मॉरीशस के ली ग्राँ ब्ले सभागार में तथा मुख्य कार्यक्रम हिन्दी भवन लॉन्ग माउंटेन में आयोजित हुये। इस कार्यक्रम में मॉरीशस सरकार में मंत्री विकास ओरी, मॉरीशस के भारतीय उच्चायुक्त श्री अभय ठाकुर, विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस के जेनरल सेक्रेटरी प्रो. विनोद कुमार मिश्र, हिन्दी प्रचारिणी सभा के प्रधान यन्तु देव बुद्धू, मंत्री धनराज शंभू और रवीन्द्र प्रभात मंचासीन थे। इस अवसर पर लखनऊ की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मिथिलेश दीक्षित और इलाहाबाद की डॉ प्रतिमा वर्मा को ग्यारह हजार रुपये, सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह के अंतरराष्ट्रीय शीर्ष उत्सव सम्मान प्रदान किया गया। वहीं मॉरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम देव धुरंधर को ग्यारह हजार रुपये का परिकल्पना शीर्ष कथा सम्मान, पाँच हजार रुपये का परिकल्पना साहित्यभूषण सम्मान तथा दो हजार पाँच सौ रुपये का परिकल्पना भाषा सम्मान और परिकल्पना साहित्य सम्मान क्रमश: मॉरीशस के साहित्यकार यंतू देव बुद्धू और धनराज शंभू को प्रदान किया गया। 


    इसके अलावा मॉरीशस के साहित्यकार सूर्यदेव सुबोरत, हनुमान दुबे गिरधारी, कल्पना लालजी, इंद्रदेव भोला इन्द्रनाथ, टहल रामदीन और परमेश्वर बिहारी को क्रमश: परिकल्पना हिन्दी सम्मान, परिकल्पना सृजन सम्मान, परिकल्पना काव्य सम्मान, परिकल्पना संस्कृति सम्मान, परिकल्पना प्रखर सम्मान और परिकल्पना प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया। 

    इस अवसर पर भारत के लगभग 30 साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, ब्लॉगरों तथा नाट्यकर्मियों क्रमश: जगदीश पीयूष, डॉ. राम बहादुर मिश्र, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, कुसुम वर्मा, सागर त्रिपाठी, दीनानाथ द्विवेदी ‘‘रंग‘‘, सत्या सिंह ‘‘हुमैन‘‘, डॉ. सुषमा सिंह, डॉ॰ अर्चना श्रीवास्तव, राजेश कुमारी ‘‘राज‘‘, डॉ. मीनाक्षी सक्सेना ‘‘कहकशां‘‘, डॉ.रमाकांत कुशवाहा ‘‘कुशाग्र‘‘, डॉ. प्रभा गुप्ता, डॉ. अरुण कुमार शास्त्री, डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ. पूनम तिवारी, अदया प्रसाद सिंह ‘‘प्रदीप‘‘, शिवपूजन शुक्ल, डॉ. ओम प्रकाश शुक्ल ‘‘अमिय‘‘, विमल प्रसाद बहुगुणा, सचिंद्रनाथ मिश्र, अभिलेश वर्मा, शुभ चतुर्वेदी, अर्णव वर्मा, डॉ. अरुण कुमार शास्त्री, माला चौबे आदि को अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव सम्मान प्रदान किया गया। 

    इस अवसर पर परिकल्पना समय का सितंबर 2018 अंक का लोकार्पण हुआ जो मॉरीशस में हिन्दी भाषा और संस्कृति के विकास और विस्तार पर केन्द्रित है। इसके प्रधान संपादक हैं रवीन्द्र प्रभात तथा इस अंक के अतिथि संपादक हैं डॉ. राम बहादुर मिश्र। इसके अलावा त्रैमासिक पत्रिका ‘‘प्रस्ताव‘‘ के हाइकू विशेषांक जिसकी अतिथि संपादक हैं डॉ. मिथिलेश दीक्षित, रवीन्द्र प्रभात का चैथा उपन्यास लखनऊवा कक्का, डॉ. मीनाक्षी सक्सेना ‘‘कहकशा‘‘ की कविताओं का संग्रह एहसास के जूगनू, डॉ मिथिलेश दीक्षित एवं रवीन्द्र प्रभात की संपादित पुस्तक हिन्दी के विविध आयाम,  डॉ रमाकांत कुशवाहा कुशाग्रकी कविताओं का संग्रह ढूँढे किसको बंजारा,  श्री अद्या प्रसाद सिंह प्रदीप का खंडकाव्य ‘‘तुलसीदास‘‘, अभिदेशक त्रैमासिक पत्रिका जिसके संपादक हैं डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ मिथिलेश दीक्षित की पुस्तक हिन्दी हाईकू संदर्भ और विमर्श, सागर त्रिपाठी का काव्य संग्रह शब्दबेध के साथ-साथ हिन्दी प्रचारिणी सभा की हस्तलिखित पत्रिका दूरगा का मुद्रित अंक, डॉ हेमरज सुंदर और राज हीरामन की पुस्तकों के साथ मॉरीशस के लगभग आधा दर्जन साहित्यकारों को पुस्तकों का भी लोकार्पण संपन्न हुआ। साथ ही इस अवसर पर श्रीमती कुसुम वर्मा के रेखाचित्र और पेंटिंग्स, आभा प्रकाश की एम्ब्राइडरी तथा डॉ. अर्चना श्रीवास्तव के विचारों पर आधारित कला वीथिका की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहा। 


    इसमें चार परिचर्चा सत्र थे, प्रथम परिचर्चा सत्र का विषय था  ‘‘हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य के निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका‘‘, द्वितीय परिचर्चा सत्र का विषय था ‘‘हिन्दी के वैश्विक प्रसार में महिलाओं की भूमिका‘‘, तृतीय परिचर्चा सत्र का विषय था ‘‘मॉरीशस में अवधी तथा भोजपुरी बोलियों के प्रभाव में कमी‘‘ तथा चतुर्थ सत्र था ‘‘हिन्दी में हाइकु की दिशा और दृष्टि‘‘  

    प्रसिद्ध रंगकर्मी, टेली धारावाहिक एवं हिन्दी फिल्म अभिनेत्री डॉ. प्रतिमा वर्मा की नाट्य प्रस्तुति ‘‘अकेलापन‘‘ तथा हॉलीवूड, वॉलीवूड और उत्तरांचली फिल्मों के अभिनेता श्री बिमल बहुगुणा द्वारा पंडवानी की तरह उत्तरांचली काव्य कवितावली की प्रस्तुति भावभंगिमा के साथ की गयी। संयुक्त परिवार पर आधारित राजीवा प्रकाश और कुसुम वर्मा की नाट्य प्रस्तुति दर्शकों को भाव विभोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही इस अवसर पर कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है, जिसमें मॉरीशस और भारत के लगभग दो दर्जन कवियों ने भाग लिया।


    सभा के मुख्य अतिथि मॉरीशस के सांसद व पीपीएस मंत्री श्री विकास ओरी ने रामचरित मानस और हिन्दी की महत्ता को प्रतिपादित करते हुये कहा कि "रामायण और हिन्दी के बिना मॉरीशस अधूरा है।"

    सभा को संबोधित करते हुये मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त श्री अभय ठाकुर ने कहा कि "हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु हम प्रयासरत हैं। यह कार्य तभी संभव होगा जब सभी देश अपनी ओर से सहयोग राशि दें जो कठिन तो है, किन्तु असंभव भी नहीं है। हम इसी लक्ष्य कि ओर बढ़ रहे हैं। कुछ अड़चने हैं जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।"


    विश्व हिन्दी सचिवालय के महासचिव प्रो विनोद कुमार मिश्र ने मॉरीशस में स्थापित विश्व हिन्दी सचिवालय की गतिविधियों का उल्लेख करते हुये अपने संबोधन में कहा कि "भविष्य में हिन्दी सेवी संस्थाओं के सहयोग से हम विश्व स्तर पर इस प्रकार के आयोजनों की शृंखला आयोजित करेंगे। इस पर काम चल रहा है और निकट भविष्य में क्रियान्वित होने की संभावना है। 

    इस अवसर पर हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के प्रधान यन्तु देव बुद्धू ने हिन्दी प्रचारिणी सभा को हिन्दी सेवियों का तीर्थस्थल बताते हुये सभा की उपलब्धियों को रेखांकित किया और आगत अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि "यह हमारा सौभाग्य है कि हम आज इस कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दी को वैश्विक फ़लक पर प्रतिष्ठापित करने हेतु एक संकल्पित प्रयास कर रहे हैं।" 

    प्रतिनिधि मण्डल के नेतृत्वकर्ता और परिकल्पना के सस्थापक रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि "हिन्दी की पढ़ाई आज विश्व के 130 विश्वविद्यालयों में होती है, किन्तु इस देश में मुझे एक अभाव खटक रहा है कि यहाँ राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी का कोई दैनिक अखबार नहीं है। यदि ऐसा हो जाये तो हम हिन्दी को जन जन तक ले जाने में सफल हो सकते हैं। इससे हमारी नयी पीढ़ी को भी अपनी भाषा और संस्कृति आत्मसात करने में सुविधा होगी।" 

    वैश्विक संदर्भ में हिन्दी विषय पर आयोजित विचार सभा में अपना अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुये डॉ राम देव धुरंधर ने कहा कि "साहित्य की ऐसी कोई भी रचना नहीं होनी चाहिए जो दुनिया को बांटे, मानवता को बांटे। सद्भावना, प्रेम और मानवता का स्वर ही साहित्य की भाषा का लक्ष्य होना चाहिए।
    हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के मंत्री धनराज शंभू ने कहा कि "वैश्विक हिन्दी साहित्य में विश्व मानवता की परिकल्पना है, जिसे विदेशी विद्वानों ने भी अपनाया है। हिन्दी दुनिया के पाँच महाद्वीपों में व्याप्त है, जिसे पूरी दुनिया में एक नए आयाम पर ले जाने की आवश्यकता है।"


    हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के कोषाध्यक्ष टहल रामदीन ने अपने भावपूर्ण उद्वोधन में कहा कि " हिन्दी हमारे रग-रग में है। हम हिन्दी के लिए जीते हैं और हिन्दी के लिए मरते भी हैं।"

    इसके अलावा डॉ हेमराज सुंदर, डॉ मिथिलेश दीक्षित, डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ रमाकांत कुशवाहा, डॉ अर्चना श्रीवास्तव, श्रीमती कल्पना लाल जी ने भी विचार सभा को संबोधित किया। परिचर्चा सत्र का संचालन डॉ राम बहादुर मिश्र, कवि सम्मेलन का संचालन सागर त्रिपाठी तथा उदघाटन सत्र का संचालन धनराज शंभू और सुनीता प्रेम यादव ने किया। विषय परिवर्तन रवीन्द्र प्रभात ने किया। 

    इस अवसर पर हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस तथा परिकल्पना के द्वारा हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु संकल्पित प्रयास करने पर बल दिया गया। 

    दोनों देशों के राष्ट्रगान के साथ सभा की शुरुआत हुयी तथा अंत में मॉरीशस के दिवंगत साहित्यकार स्व. अभिमन्यु अनत को श्रद्धांजलि अर्पित कर सभा का समापन हुआ।

    (मॉरीशस से डॉ राम बहादुर मिश्र की रपट)
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    रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म

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  • रवीन्द्र प्रभात के कृतित्व और व्यक्तित्व पर आधारित शोध पुस्तक
     "रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म " 
    लेखक: डॉ॰ सियाराम
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    DDA Ground Narela Chhathh Pooja : नरेला छठ पूजा शुरू

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  • डा गिरिराजशरण अग्रवाल
  • 1
    मुझे जिसकी इक-इक गली जानती है
    वो बस्ती मुझे अजनबी जानती है
    कला हम भी पुश्ते बनाने की सीखें
    जमीं काटना गर नदी जानती है
    गिरी ओस लेकिन न अधरों से फूटी
    कली कैसी जालिम हँसी जानती है
    अँधेरे हों, कोहरा हो, बन हो, भँवर हो
    बिताना समय जिदगी जानती है
    लपट-सी उठी और नजरों से ग़ायब
    अँधेरा है क्या रोशनी जानती है

    2
    मधुरता में तीखा नमक है तो क्यों है
    किसी का भी जीवन नरक है तो क्यों है
    कसक में तड़पने से कुछ भी न होगा
    यह सोचो कि दिल में कसक है तो क्यों है
    अकेले हो, इसका गिला क्या, यह सोचो
    किसी से मिलन की झिझक है तो क्यों है
    जरा-सा है जुगनू तुम्हारे मुकाबिल
    मगर उसमें इतनी चमक है तो क्यों है
    लचकती है आँधी में, कटती नहीं है
    हरी शाख़ में यह लचक है तो क्यों है
    वो हो लालिमा, चाँद या फूल कोई
    सभी में तुम्हारी झलक है तो क्यों है

    3
    आँखों में स्वप्न, ध्यान में चहरे छिपे हुए
    बेरंगियों में रंग हैं कितने छिपे हुए
    कोई नहीं कि जिसमें न हो जिदगी की आग
    पत्थर में हमने देखे पतंगे छिपे हुए
    पाया निराश आँखों में अंकुर उमीद का
    रातों में हमने देखे सवेरे छिपे हुए
    कुछ देर थी तो खोजते रहने की देर थी
    बीहड़ वनों के बीच थे रस्ते छिपे हुए
    फैली जरा-सी धूप तो बाहर निकल पड़े
    पेड़ों की पत्तियों में थे साये छिपे हुए

    4
    अगर स्वप्न आँखों ने देखा न होता
    समझ लो कि मौसम यह बदला न होता
    जमीनों से उगतीं चिराग़ों की फ़सलें
    निराशा न होती, अँधेरा न होता
    कमर आदमीयत की ऐसे न झुकती
    समाजों से ऊपर जो पैसा न होता
    जमीं नफ़रतों के शरारे उगलती
    दिलों में जो चाहत का दरिया न होता
    जरा सोचिए हम गिला किससे करते
    जमाने में गर कोई अपना न होता

    5
    चलते रहो मंजिल की दिशाओं के भरोसे
    जलते हुए दीपों की शिखाओं के भरोसे
    पतवार को हाथों में सँभाले रहो माँझी
    छोड़ो नहीं किश्ती को हवाओं के भरोसे
    सच यह है कि दरकार है रोगी को दवा भी
    बनता है कहाँ काम, दुआओं के भरोसे
    सूखा ही गुजर जाए न बरसात का मौसम
    तुम खेत को छोड़ो न घटाओं के भरोसे
    ख़ुद अपना भरोसा अभी करना नहीं सीखा
    जीते हैं अभी लोग ख़ुदाओं के भरोसे

    डा. गिरिराजशरण अग्रवाल
    7838090732  
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    सुर्खियाँ

    जी हां दुनिया गोल घूमती है

     
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