जलीकट्टू और सिर पर उगे नुकीले सींग

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  • Nirmal Gupta
  • अढाई हज़ार साल से हम जलीकट्टू खेलते हुए मरखने बैलों को साध रहे हैं।सैकड़ों बरसों से हम एक दूसरे के कंधे पर पाँव रख कर दही की हांडी चकनाचूर कर रहे हैं।गत अनेक  दशकों से हम अपने बच्चों को भविष्य  के लिए प्रशिक्षित करने के नाम पर तोते जैसी रटंत विद्या में प्रवीण बना रहे हैं।वर्तमान में हम अतीत के  चोटिल परन्तु महिमामंडित संस्कृति  में संतति के लिए गोलमटोल ‘पे पैकेज’ टटोल रहे हैं।बदलते वक्त के साथ हम खुद को लेशमात्र बदलने को तैयार नहीं।गंदगी से बजबजाती नालियों को हम इसलिए साफ़ करने को तैयार नहीं क्योंकि स्वच्छता से हमारी युगीन असहमति रही है।जीवन मूल्य तेजी से उल्ट पलट हो रहे हैं लेकिन हम अपनी परम्पराओं के वैभव के समर्थन में  डटे  हैं।हमारे सिरों पर  नुकीले सींग उग आये हैं।
    बैल के सींग पर लटके सोने चांदी के सिक्के पाने या लूटने पर हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। लूटपाट ही हमारी महत्वकांक्षा है।आकाश में लटकी हांडियों  को फोड़ कर उसमें रखे द्रव्य को पाने की वीरता  सर्वकालिक है। लेकिन इसमें  जोखिम  है।सबको पता है कि नो रिस्क ,नो गेम।जिस काम में रिस्क फैक्टर न हो वह तो घर की चौखट पर बैठकर लडकियों द्वारा खेले जाने वाले गिट्टू का खेल है।बेहद निरापद।अतिशय मासूम।एकदम घरेलू।निहायत स्त्रैण।
    एक समय था जब लड़के गली मोहल्ले में गुल्ली डंडा खेलते थे ।लडकियाँ घर आंगन में इक्क्ल दुक्कल खेलती थीं।लड़के उद्दंड होते हैं।तब भी होते होंगे।खेल ही खेल में झगड़ पड़ते।परस्पर मारपीट कर बैठते।लडकियाँ सहेलियों से किसी बात पर नाराज होती हैं,तो रूठ जाती।मुंह फुला लेती।अबोला कर लेती।ऐसा करते करते कब ये खेल समय बाहर हुए,पता ही नहीं लगा।न कोई सवाल उठा।न किसी ने इन खेलों के खत्म होने को लेकर गुस्सा जताया।
    जलीकट्टू पर लगे बैन को लेकर सांस्कृतिक विरासत के हलवाहे ऐसे  बैचैन थे  जैसे कोई ऐतिहासिक साहस का क्या बनेगा।
    कोई भी न्याय पद्धति बैल या दही हांडी से बड़ी  कैसे हो सकती  है?
    @निर्मल गुप्त



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    भारतीय ब्लॉगरों और साहित्यकारों ने न्यूजीलैंड में फहराई हिन्दी की पताका

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  • ravindra prabhat

  • ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) .विगत 23 दिसंबर 2016 से 01 जनवरी 2017 के बीच न्यूजीलैंड के ऑकलैंड, हेमिल्टन, रोटोरूआ आदि शहरों में आयोजित सातवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में फिजी के शिक्षा मंत्रालय के हिन्दी प्रतिनिधि श्री रमेश चन्द्र, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी, न्यूजीलैंड नेशनल पार्टी की सांसद डॉ परमजीत परमार तथा हिन्द मेडिकल कॉलेज लखनऊ के निदेशक डॉ ओ. पी. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। 

    सभा का प्रारंभ कोरियन ड्रमबीट के द्वारा बड़े ही सकारात्मक रूप से हुआ। इस अवसर पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि आज जहां पूरा विश्व विकास और प्रगति की अंधी दौड़ में इस कदर भाग रही है कि मनुष्य का आंतरिक और भावनात्मक पहलू गौण होता जा रहा है। ऐसे में लखनऊ के एक ब्लॉगर रवीन्द्र प्रभात के द्वारा अपनों को अपनों के साथ मिलन कराने तथा भारतीय महाद्वीप की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया में फैलाने की दिशा में कार्य करना गर्व महसूस कराता है। परिकल्पना को मेरी शुभकामनायें और भारतीय ब्लॉगरों को बहुत-बहुत बधाइयाँ। न्यूजीलैंड की सत्ताधारी नेशनल पार्टी की सांसद श्रीमती परमजीत परमार ने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है अपने भारतवासियों को न्यूजीलैंड की धरती पर अपने मध्य पाकर। मैं अभिभूत हूँ कि हमारे भारतवासी पूरी दुनिया में घूम घूमकर ब्लॉगिंग के माध्यम से हिन्दी और भारतीय भाषाओं को प्रमोट कर कर रहे हैं। यह परंपरा बनाए रखने की जरूरत है। 

    उन्होने अपने भाषण में आगे कहा कि भारत और हिंदी भाषा से उनका विशेष लगाव रहा है, मुझे बहुत ख़ुशी है कि इस न्यूजीलैंड के जमीन पर भी भारतवासी अपनी मातृभाषा हिंदी का प्रचार- प्रसार और लेखन कार्य बड़े ही सफलतापूर्वक कर रहें हैं। वहीं फिजी से आये श्री रमेश चंद ने फिजी में होने वाले हिंदी सम्मेलन में सबको आमंत्रित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि पुस्तकों और समाचारपत्रों में लेखन कार्य की अपनी सीमाएं होती है लेकिन ब्लॉगर के माध्यम से लेखक शुद्ध रूप से अपनी बात पाठकों तक पहुँचा सकता है, उसमें किसी प्रकार का बनावटीपन नहीं होता। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर श्रीमती कुसुम वर्मा की मिश्रित कला प्रदर्शिनी भी आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण कला और भारतीय परंपरा का बड़ा ही मनोरम चित्र प्रस्तुत किया गया। 

    उसके पश्चात् इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, जिसमें भारत, न्यूजीलैंड, ओस्ट्रेलिया तथा फ़िजी के कवियों ने हिस्सा लिया। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सभा को मंत्र मुग्ध किया। इस अवसर पर हैदराबाद की कवयित्री और ब्लॉगर श्रीमती सम्पत देवी मुरारका तथा रायपुर छतीसगढ़ की कथाकार और ब्लॉगर डॉ उर्मिला शुक्ल को क्रमश: डॉ अमर कुमार स्मृति परिकल्पना सम्मान तथा अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना सम्मान से अलंकृत और विभूषित किया गया। इस विशेष सम्मान के अंतर्गत उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और 11 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गयी। 

    25 दिसंबर 2016 को ऑकलैंड के हेंडरसन में स्थित केलस्टन कम्यूनिटी हॉल न्यूजीलैंड में आयोजित सातवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में श्रीमती मुरारका के अतिरिक्त भारत के विभिन्न हिस्सों से आए मसलन संस्कार टीवी, दिल्ली के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर रवि कान्त मित्तल, आजतक और इंडिया टुडे की समाचार संपादक सीमा गुप्ता, कबीर कम्यूनिकेशन की क्रिएटिव हेड सर्जना शर्मा, रेवान्त पत्रिका की संपादक डॉ अनीता श्रीवास्तव, लोक गायिका कुसुम वर्मा, उद्घोषिका श्रीमती रत्ना श्रीवास्तव, कथाकार डॉ अर्चना श्रीवास्तव, कवयित्री डॉ निर्मला सिंह निर्मल, पुरातत्वविद डॉ रमाकांत कुशवाहा ‘कुशाग्र‘, शिक्षाविद डॉ विजय प्रताप श्रीवास्तव आदि भी सम्मानित किए गए। 

    इस अवसर पर भारतीय सभ्यता-संस्कृति को आयामित करती लोक कला प्रदर्शनी, नृत्य, गीत के साथ-साथ परिकल्पना की स्मारिका, डॉ अर्चना श्रीवास्तव की सद्य प्रकाशित कृति थाती, डॉ निर्मला सिंह निर्मल की यह व्यंग्य नहीं हकीकत है और श्रीमती सम्पत देवी मुरारका की व्यंग्य यात्रा तृतीय का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। परिचर्चा सत्र के दौरान अपने उद्वोधन के क्रम में ब्लॉग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर शांति-सद्भावना की तलाश विषय पर बोलते हुये श्री रवीकान्त मित्तल ने कहा कि यही एक माध्यम है जो पूरी तरह वैश्विक है। आपके विचार चंद मिनटो में पूरी तरह वैश्विक हो जाती है और उस पर प्रतिक्रियाएँ भी आनी शुरू हो जाती है। यदि ब्लॉगर चाहे तो अपने सुदृढ़ विचारों के बल पर पूरी दुनिया में शांति-सद्भावना को स्थापित कर सकता है। आज जरूरत इसी बात की है। इस परिचर्चा में लगभग आधा दर्जन ब्लॉगरों ने हिस्सा लिया। 

     नव वर्ष से पूर्व यानी 30 दिसंबर 2016 को  भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के वरिष्ठ सांसद श्री कंवलजीत सिंह बख्शी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से विभिन्न देशों तथा समुदायों के बीच संस्कृतियों का आदान प्रदान होता है। आप सभी का हम न्यूजीलैंड की इस खूबसूरत भूमि पर स्वागत करते हैं। इस अवसर पर अवधि की प्रसिद्ध लोकगायिका कुसुम वर्मा द्वारा लोकगायन और नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन लखनऊ की श्रीमती रत्ना श्रीवास्तव ने किया।
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    डॉ उर्मिला शुक्ल को अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना दशक सम्मान

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  • ravindra prabhat

  • जैसा कि आप सभी को विदित है कि विगत दस वर्षों मे परिकल्पना परिवार ने अपने दो महत्वपूर्ण साथियों को खोया है। एक डॉ अमर कुमार और दूसरे अविनाश वाचस्पति । इन दोनों शख़्सियतों का जाना किसी करिश्मे का ख़त्म होने जैसा रहा है। उन दोनों विभूतियों के अचानक अलविदा कह देने से केवल हिन्दी ब्लॉगिंग को ही नहीं बल्कि इंसानियत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ । डॉ अमर कुमार ने जहां अपनी चुटीली टिप्पणियों से ब्लॉग पर नए-नए मुहबरे गढ़कर अपनी स्वतंत्र छवि विकसित की थी वहीं अविनाश वाचस्पति ने ब्लॉग पर नए-नए प्रयोगों को प्रतिष्ठापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
    परिकल्पना द्वारा इन दोनों विभूतियों की स्मृति में ग्यारह हजार रुपये के दो पुरस्कार क्रमश"अमर कुमार स्मृति परिकल्पना दशक  सम्मान" हैदराबाद, तेलांगना से सम्पत देवी मुरारका को तथा "अविनाश वाचस्पति  स्मृति परिकल्पना दशक सम्मान" रायपुर, छतीसगढ़ की डॉ. उर्मिला शुक्ल को देने का निर्णय लिया गया है। आज उसकी सूची निर्णायकों ने सौंप दी है। दोनों महत्वपूर्ण सम्मान महिला ब्लॉगर के हिस्से में गया है, जिन्हें आगामी क्रमश: 25 दिसंबर 2016 को न्यूजीलैंड की आर्थिक राजधानी ऑकलैंड और 31 दिसंबर 2016 को न्यूजीलैंड की सांस्कृतिक राजधानी वेलिंगटन में सम्मानित होने का सौभाग्य प्राप्त होगा। एक ब्लॉगर उत्तर भारत से और एक दक्षिण भारत से हैं।
    हिंदी में यात्रा वृतांत की सुपरिचित हस्ताक्षर हैदराबाद (तेलंगाना) निवासी श्रीमती सम्पत देवी मुरारका, जिन्होने 2011 में बहुवचन नामक ब्लॉग प्रारम्भ किया जिसमें नेपाल, थाईलैंड, हांगकांग, सिंगापुर, लन्दन, बेल्जियम, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, इटली, फ्रांस, न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, बफलो, फिलाडेल्फिया, वाशिंगटन डी.सी., वर्जीनीया, लॉस एन्जलस, लॉस वेगास, नेवेडा ग्रेंड केनन, सोलावेंग, हर्ष कैशल, सेन फ्रांसिस्, बर्सटोव, थौस्मिट नैशनल पार्क, लन्दन ब्रीज, सेंडीगो, 9सी वर्ल्ड), बाल्टीमोर, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन दुबई,आबूधाबी और युएई आदि देशों की यात्रा कर उन्होने वहाँ के सुखद संस्मरणों को अंकित करते हुये सृजन को नया आयाम देने की कोशिश की। वे एकसाथ कई विधाओं में सार्थक हस्तक्षेप रखती हैं। उन्हें 15 से 18 जनवरी 2015 के दौरान भूटान में आयोजित चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान से अलंकृत और विभूषित किया गया था। इसके अलावा वे पूर्व में भारतीय संस्कृति निर्माण परिषद्, हैदराबाद का महारानी झांसी पुरस्कार, भारतीय वांगमय पीठ, कोलकाता का सारस्वत सम्मान, जैमनी अकादमी पानीपत, हरियाणा का रामधारी सिंह दिनकर सम्मान, भारतीय संस्कृति निर्माण परिषद्, हैदराबाद का जन जागृति सद्भावना पुरस्कार, तमिलनाडू हिंदी साहित्य अकादमी, चेन्नई का साहित्य सेवी सम्मान आदि से अलंकृत और समादृत हो चुकी है।

     हिंदी कहानी और कविता की सुपरिचित हस्ताक्षर रायपुर (छतीसगढ़) निवासी डॉ उर्मिला शुक्ल ने 2011 में मनस्वी नामक ब्लॉग प्रारम्भ किया जिसमें स्त्री शक्ति और लोकरंग को उन्होने प्रमुखता के साथ उठाते हुये सृजन को नया आयाम देने की कोशिश की। वे एकसाथ कई विधाओं यथा कहानी ,कविता , समीक्षा , शोध पत्र , यात्रा संसमरण आदि पर सार्थक हस्तक्षेप रखती हैं। उनकी पुस्तक ‘हिंदी अपने अपने मोर्चे पर‘ म. प्र. साहित्य परिषद द्वारा 1995 में पाण्डुलिपि प्रकाशन योजना के तहत पुरष्कृत एवं प्रकाशित हुयी है। उनकी प्रकाशित कृतियों में हिंदी अपने अपने मोर्चे पर, फूलमती तुम जागती रहना आदि प्रमुख है। उन्हें विगत 25 मई 2015 को कोलंबो (श्रीलंका) में आयोजित पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में परिकल्पना सार्क सम्मान से अलंकृत और विभूषित किया गया था। अभी हाल ही में कलमकार फाउंडेशन नई दिल्ली की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में उनकी कहानी ‘सलफी का पेड़ नहीं औरत‘ को पुरस्कार के लिए चुना गया था। छत्तीसगढ़ से चुनी जाने वाली ये एकमात्र कहानी है। बस्तर पर आधारित ये कहानी-कहानी जगत में छत्तीसगढ़ को रेखांकित करती है।
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  • by
  • नुक्‍कड़
  • With profound grief and sadness, we regret to inform you the sad demise of our beloved  Shri Avinash Vachaspati  (s/o Lt shri Dinesh Chander Vachaspati) who left for heavenly abode on 8th February 2016.
    Avinash vachaspati ko shradhanjali

    Shoksabha and Rasam pagdi will be held at 4 to 5 pm on Friday, 19 February 2016 at Swami Sivanada Bhawan , Amar Colony Lajpat Nagar - IV New Delhi 110024 (Near Amar Colony Market and Allahabad Bank) Nearest metro Station
    Kailash Colony

    GRIEF STRICKEN:
    Chander Prabha Rani (Mother)
    Sarvesh Vachaspati (Wife)
    Arvind Vachaspati & Sunita Vachaspati (Brother & sister-in-law)
    Mukul Vachaspati & Sarita Vachaspati (Brother & sister-in-law)
    Anshul Vachaspati & Parul Vachaspati (Son and daughter-in-law)
    Raman Vachaspati (Son)
    Sanchita Viyulie & Sunny Viyulie (Daughter and son-in-law)
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    मैं मरा नहीं, जिंदा हूँ ......अविनाश वाचस्पति

  • by
  • नुक्‍कड़
  • जी हाँ, मैं वही अविनाश हूँ जिसने बीमारी की गोद में बैठकर जिंदगी के साथ खूब आँख-मिचोनी खेला और अब लोग कहते हैं कि मैं मर गया हूँ। मैं मरा नहीं, जिंदा हूँ आपकी-उनकी-सबकी यादों में...। मैं जिंदा रहूँगा उन लोगों के बीच जिन्हें मैंने जान से ज़्यादा प्यार किया है और जिनसे मैंने खुद को बचाए रखने की उम्मीद की है।

    यह सच है कि मेरे व्यंग्य में पितृसत्ता-धर्मसत्ता और राजसत्ता के हर छ्द्म, हर पाखण्ड के खिलाफ अपरम्पार गुस्सा, तीखी घृणा दिखती रही है। मेरी कविताओं में रचा मेरा पाठ हर उस शोषक, हर उस आततायी को तिलमिलाती रही है और रहेगी जिसे अपनी बदमाशियों को छिपाने के लिए संस्कृति की पोशाक चाहिए। मैंने अस्तित्व को तलाशते हिन्दी ब्लॉग की आत्मा में प्रवेश किया और उसकी चाहतों का ऐसा अपूर्व विप्लवी, अछोर संसार रचा जो पूरे हिन्दी ब्लॉगजगत में अनन्य है।

    ठीक से देखो मैं जिंदा हूँ अपनी इकलौती पोती राव्‍या की आँखों में, मासूम गलबहियाँ करते हुये। मैं जिंदा हूँ अपनी पत्नी,अपनी पुत्री और अपने पुत्र की आँखों में जिनकी खुशी में मुझे खुशी मिलती थी और जिनके दुख से मैं दुखी हो जाता था। मैं जिंदा हूँ बतरा अस्‍पताल के डाक्‍टर शरद अगरवाल और उनके नरसिंग स्‍टाफ की आँखों में जिन्होने मेरी साँसों को अपनी जान से ज्यादा हिफाजत से रखी।

    यह अलग बात है कि हम किसी के दिल में धड़कते रहे तो किसी की आँखों में खटकते भी रहे। यह मानव स्वभाव है, एक व्यंग्यकार के नाते मैंने कभी इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया। लेने की जरूरत भी क्या है। यह सब न हो तो जिंदगी का मजा भी तो नहीं है। किसी शायर ने ठीक ही कहा है-कर लेता हूँ बर्दाश्त हर दर्द इसी आस के साथ..
    कि खुदा नूर भी बरसाता है … आज़माइशों के बाद”..।

    हिन्दी ब्लॉग जगत ने मुझे बहुत प्यार दिया, यह अलग बात है कि किसी को मैं समझ में आया और किसी को नहीं। लेकिन क्या कहूँ इतना, आसान हूँ कि हर किसी को समझ आ जाता हूँ, मगर जिसने पन्ने छोड़ छोड़ कर पढ़ा है मुझे, वह मुझे शायद नहीं समझ पाया।

    वे मित्र जो मुझसे भावनाओं के साथ जुड़े रहे, अपने को अकेला महसूस न करे। वे भले ही मुझे न देख पा रहे हैं मगर मैं साये की तरह उनके साथ हूँ। मैं मरा नहीं हूँ जिंदा हूँ अपने मित्रों की यादों में।

    यह मत कहना कि नुक्कड़ अनाथ हो गया है। जिस नुक्कड़ के साथ डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल,रवीन्द्र प्रभात, पी के शर्मा, राजीव रंजन प्रसाद, प्रेम जनमेजय, प्रमोद तांबट, पंकज त्रिवेदी, चंडी दत्त शुक्ल, गिरीश बिललोरे मुकुल,रेखा श्रीवास्तव, असीम त्रिवेदी, डॉ कविता वाचक्नवी,उपदेश सक्सेना, नरेंद्र व्यास, शाहनवाज़, इरफान, मयंक, डॉ अशोक शुक्ल, रवीन्द्र पुंज, आशीष खंडेलवाल, विवेक रस्तोगी,वीणा, अजीत वाडनेरकर, प्रतिभा कुशवाहा, श्रीश बेंजवाल शर्मा, अमिताभ श्रीवास्तव,खुशदीप सहगल, संजीव तिवारी, निर्मल गुप्ता, सतीश सक्सेना आदि चर्चित ब्लॉगर जुड़े हों वह ब्लॉग अनाथ कैसे हो सकता है।

    फिर मिलूंगा अपनी भावनाओं के साथ इसी नुक्कड़ पर-
    आपका-
    अविनाश वाचस्पति
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    नुक्कड़ भी अचानक से ही अनाथ हो गया - सतीश सक्सेना

  • by
  • Satish Saxena

  • ब्लॉगिंग सभा सञ्चालन में अविनाश वाचस्पति 
    नुक्कड़ भी अचानक से , ही अनाथ हो गया ! 
    ऐसा भी क्या हुआ, ये चमन ख़ाक हो गया !

    अविनाश के जाते ही,कुछ सुनसान सा लगे 
    ब्लॉगिंग में मुन्नाभाई भी, इतिहास हो गया !

    कितने दिनों से लड़ रहा था, मौत से इकला
    जीवन में जी लिए हैं, ये  अहसास हो गया !

    दर्दों में भी हँसता रहा, अविनाश अंत तक 
    आखिर ये ज़ज़्बा मस्त भी खलास हो गया !

    इक दिन तो मुन्ना भाई,वहां हम भी आएंगे,
    अखबार में छपेगा  कि , अवसान हो गया ! !
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    अविनाश वाचस्पति को विनम्र श्रद्धांजलि।

  • by
  • ravindra prabhat
  • कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके विचार तो महान होते हैं, पर जीवन महान नहीं होता। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका जीवन तो महान होता है, पर विचार महान नहीं होते। लेकिन विरले ही सही एक व्यक्ति ऐसा मिल ही जाता है, जिसके जीवन और विचार दोनों महान होते हैं। ऐसा ही थे अविनाश वाचस्पति। अविनाश का एक व्यंग्य है "रावण का होना खलता नहीं है", मगर हमारे बीच अविनाश का न होना "पूरे ब्लॉग जगत" को खलेगा इसमें कोई संदेह नहीं है। कुछ दिन पूर्व यानि 11 जनवरी को मैंने अविनाश जी को फोन करके कहा कि अब आपकी तबीयत कैसी है ? उन्होने ठहाका और कहा कि "प्रभात भाई हेपिटाइटिस सी नामक जानलेवा बीमारी से तो मुझे इश्‍क हो गया है। अब इससे क्या डरना, जिस दिन जाएगी मुझे भी साथ लेकर जाएगी। मैंने कहा ऐसा नहीं कहते, समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। 22 जनवरी को जब मैं थाईलैंड से लौटा तो उन्होने मुझे फोन किया कि कैसी रही यात्रा। मैंने कहा कि आपकी कमी खाली। इस बार फिर उन्होने ठहाका लगाया और कहा कि कमी तो मेरी बीमारी को भी मुझसे अलग होकर होती है। खैर एक खुशखबरी है कि मैं अब ठीक हो गया हूँ, आपसे जल्दी ही मिलता हूं। एक दो दिन में मैं मिलने की योजना बना ही रहा था, कि यह दुखद समाचार मिला कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह सुनकर मैं कुछ देर समझ ही नहीं पाया कि यह कैसे हो गया? मेरा एक प्यारा और आत्मीय मित्र मुझे छोडकर चला गया और इसी के साथ आज ब्लाॅग जगत का एक स्तंभ ढह गया। मैंने साथ-साथ मिलकर हिन्दी ब्लॉग जगत मे कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, हिन्दी ब्लॉगिंग: अभिव्यक्ति की नई क्रांति पुस्तक और परिकल्पना ब्लॉगोत्सव उनमें से एक है। उन्हीं के शब्दों में- परिकल्पना परिवार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
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    वात्‍सल्‍य निर्झर - कविता - अविनाश वाचस्‍पति

  • by
  • नुक्‍कड़
  • आपका प्रकाश एन जी ओ का प्रतीक चिन्‍ह
    #‪#‎वात्‬‍सल्‍यनिर्झर
    वायु चिकित्‍सा
    एयर सर्जरी
    संभव है
    मेधा से
    किए जाते हैं
    सभी चमत्‍कार
    समझते हैं हम
    चमत्‍कार
    पर न उसमें
    चमक होती है
    पर न होती है
    उसमें कार
    की चमकार
    कार के मायने
    जो समझते हैं
    चौपहिया वाहन
    पर करते हैं सवारी
    जबकि कार का
    जीवन कार्य
    कारण या कारक
    हाेना है
    कारक वो जो सदा
    सच्‍चे मन से किया जाए
    सद्गुणों का अंबार लगाएं
    अंबार लगाना
    व्‍यापार सजाना
    नोट कमाना
    अपने उचित रूप में
    सही कहलाता है
    कारनामा
    वही तो है
    वात्‍सल्‍य निर्झर
    जो पल पल झरता रहे
    पुष्‍पों की तरह
    महकता रहे
    खुशबू की तरह
    उड़ता रहे तितली की तरह
    न कि पतझड़ की तरह
    जबकि पतझड़ में
    पत्‍तों का टूटकर
    जमीन पर गिरना
    नीचे सूखी-हरी घास पर
    भी सकारात्‍मक है
    पर काकरोचों की
    किलमिलाहट चीख पुकार
    गूंज में कैसे करोगे
    सकारात्‍मकता का आवाह्न।
    --- अविनाश वाचस्‍पति
    9560981946
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    सूर्य दिवस भी है मन मतलब मन का दिवस कविता अविनाश वाचस्पति

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  • नुक्‍कड़
  •  
    ##SunMon

    आज सिर्फ १३ दिसम्बर ही नहीं
    सन यानी सूर्य दिवस भी है
    मन मतलब मन का दिवस भी है

    वैसे आने वाले कल मायने १४
    दिसम्बर २०१५ को जन्मदिन
    के ५७ बरस पूरे होने को हैं
    और
    मेरे शरीर से क्रानिक हेपेटाइटिस
    सी ने सी फोर चिपटन से दे दी है
    मुक्ति
    अब अपना रहा हूँ युक्ति ताकि
    कमजोरी तथा डायबिटीज भी
    मेरे शरीर रूपी घर को खाली करें।
    - अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई 
    मोबाइल फोन नंबर ९५६०९८१९४६.
     — celebrating my birthday at Nehru Plac भी है

    वैसे आने वाले कल मायने १४
    दिसम्बर २०१५ को जन्मदिन
    के ५७ बरस पूरे होने को हैं
    और
    मेरे शरीर से क्रानिक हेपेटाइटिस
    सी ने सी फोर चिपटन से दे दी है
    मुक्ति
    अब अपना रहा हूँ युक्ति ताकि
    कमजोरी तथा डायबिटीज भी
    मेरे शरीर रूपी घर को खाली करें।
    - अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई
    मोबाइल फोन नंबर ९५६०९८१९४६.
     — celebrating my birthday at Nehru Place

    57वें जन्मदिवस पर अविनाश वाचस्पति ने अपने आवास साहित्यकार सदन, संत नगर, नयी दिल्ली ११००६५ में प्रात: ९ बजे नाश्ते की व्यवस्था की है। आप सभी सादर आमंत्रित हैं। कृपया शर्मायें नहीं, कड़ाके की ठंड से।
    अविनाश वाचस्पति का मोबाइल फोन नंबर ९५६०९८१९४६
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    इसमें धन का रस है - सच्‍ची कविता - अविनाश वाचस्‍पति

  • by
  • नुक्‍कड़
  • ##FutureGenerali


    बड़ा बाजार का नाम सुना है
    सुना नहीं होगा तो पढ़ा जरूर होगा
    दैनिक अखबारों के पन्‍नों पर
    बड़ा बाजार में लगती है
    बड़ी सेल

    बड़ा बाजार यानी बिग बाजार
    स्‍वामी हैं इसके किशोर बियाणी
    बाजार बड़ा कीमतें मस्‍त
    खरीदारों को बनाए चुस्‍त
    फुर्ती अाए खरीदारी करवाए
    बचत ही नहीं, महाबचत हो

    पिछले सात बरस से
    इंश्‍योरेंस की हो रही है बारिश
    मनी बैक पॉलिसी
    सबको भा रही है
    पांच बरस करो भुगतान
    दस बरस पाओ अवदान
    दस साल फिर सिर्फ लेना ही लेना है
    देना नहीं 6ठवें बरस से प्रीमियम का
    एक भी पैसा है

    यही तो एश्‍योरेंस है
    जो कहलाती इंश्‍योरेंस है
    इसमें धन का रस है
    जो बनता प्रेम रस है
    रस यह सरस है

    अगर चाहो इससे जुड़ना
    अागे बढ़ कर करो फोन
    09560981946 मोबाइल पर।

    मौका चूक न जाना
    मोबाइल की घंटी जरूर बजाना
    अपना आई डी, कैंसिल चैक
    और एकमुश्‍त राशि तैयार रखना
    रखना अपना एक चित्र भी तैयार
    धन से करने को प्‍यार
    धन हो पास तो जीवन सहज हो जाएगा
    जिंदगी जीने का खूब आनंद आएगा।

    - अविनाश वाचस्‍पति
    मोबाइल 09560981946

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    तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा सबको भा रहा है - कविता - अविनाश वाचस्‍पति

  • by
  • नुक्‍कड़

  • हंसने रोने की कविता
    कभी जोर जोर से
    हंसती है
    और कभी उससे भी जोर से
    रो पड़ती है दया भाभी की तरह।

    पर कितना भी वह
    रो या हंस जाए
    तारक मेहता का चश्‍मा
    उल्‍टा ही रहता है।

    इस उल्‍टे चश्‍मे की
    एक झलक देखने के लिए
    और खुद को छिपाने के लिए
    बोल बच्‍चन से लेकर
    सलमान खान और चोटी के सितारे
    तथा अभिनेत्रियां शामिल होकर
    धन्‍य हो जाती हैं।

    काफी अच्‍छा और कॉमेडी
    तथा जीवन अनुभवों से भरपूर
    धारावाहिक यह
    धाराप्रवाह प्रवाहित हो रहा है।

    पसंद बड़ों की
    मुरीद बने हैं बच्‍चे इसके
    सारे संसार को हंसा रहा है
    सब कुछ है इसमें
    इसमें न समा सके
    ऐसा कुछ नहीं जग में।

    - अविनाश वाचस्‍पति
    मोबाइल 9560981946
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    जी हां दुनिया गोल घूमती है

     
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