नुक्‍कड़ के लेखकों से विनम्र अनुरोध

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • मैंने कुछ दिन पूर्व विनम्र निवेदन किया था कि अन्‍य ब्‍लॉग पर लगाई गई अपनी पोस्‍टें नुक्‍कड़ पर पूरी प्रकाशित न किया करें और जब उसके कुछ अंश का उल्‍लेख करें तो उसका टिप्‍पणी बॉक्‍स बंद कर दिया करें। अब मैं यह भी कहने को विवश हुआ हूं कि वे लेखक जो अन्‍य ब्‍लॉग पर लगाई गई पूरी पोस्‍टें, नुक्‍कड़ पर तो पोस्‍ट करते ही हैं अन्‍य ब्‍लॉग के लिंक भी पोस्‍ट के साथ जोड़ देते हैं। आप अपनी पूरी पोस्‍ट की जगह पर सिर्फ पोस्‍ट की दो या तीन पंक्तियां लगाएं और पूरी पोस्‍ट का लिंक दे दें। पर उस पर अमल नहीं किया गया है।

    आप सबसे पुन: अनुरोध है कि अति-पोस्‍टवादिता से बचें और ऐसा भी न करें कि एक भी पोस्‍ट न लगाएं। शीघ्र ही एक आकलन किया जाएगा और ऐसे लेखकों के पोस्‍ट लेखक के अधिकार निरस्‍त कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जिन लेखकों ने एक भी पोस्‍ट आज तक इस ब्‍लॉग पर नहीं लगाई है, उनके नाम भी लेखकों की सूची से निकाल दिए जाएंगे।

    यदि आपको इस संबंध में कुछ कहना है तो यहां पर टिप्‍पणी बॉक्‍स में खुलकर कहें। विवाद की स्थिति में नुक्‍कड़ ब्‍लॉग को बंद करने पर भी विचार किया जा सकता है। इसे अन्‍यथा मत लीजिएगा। नुक्‍कड़ को बंद करने की स्थिति में जुड़े हुए लेखकों को अन्‍य ब्‍लॉग की सदस्‍यता दी जा सकेगी।

    14 टिप्‍पणियां:

    1. sahi he.. पांच छ जगह एक ही पोस्ट देखर सभी ब्लॉग को देखना बंद कर दिया..

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    2. आपके विचार सही है .. सप्‍ताह में एक बार मैं नुक्‍कड पर पोस्‍ट करने की कोशिश करती हूं !!

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    3. नुक्‍कड़ एक लोकप्रिय ब्लॉग है इसे बंद करने की बात कह कर आपने दुःखी कर दिया।

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    4. एक ही पोस्ट बार बार पढ़ कर या देख कर अच्छा नहीं लगता. वैसे अधिकार है लेकिन हमारी लेखन शक्ति की ओर ही इंगित करता है.

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    5. मैं भी आपकी बात से सहमत हूँ. मैंने नुक्कड़ पर एक भी पोस्ट नहीं लगाई है क्योंकि यह एक साहित्यिक मंच है और मैं साहित्य जैसा कुछ नहीं लिख पाती. आप चाहे तो मेरा नाम लेखक सूची से हटा सकते हैं.

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    6. बहुत बधाई!
      आप कभी इशारा तो करें ज़नाब!
      पोस्ट नुक्कड़ पर लगी मिलेगी!

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    7. अविनाश भाई नुक्कड़ ब्लॉग को कैसे चलाया जाए इस पर हम बात कर सकते है और जो आपत्तिया आपने उठाई है उन पर एक मत से निर्णय लेकर आगे के लिए स्वस्थ परिपाटी डाली जा सकती है. इसमे तो किसी को आपत्ति नही होनी चाहिए कि अगर एक से अधिक जगह आप ब्लॉग एक साथ छाप रहे है तो इस लोकप्रिय ब्लॉग पर उसकी लिंक दे दी जाए जिसे पढ़ना होगा जरूर पढ़ लेगा. सभी सह ब्लोगरो से आशा है कि नुक्कड़ को अपना प्यार भी दे और पोस्ट भी लेकिन अति से बचे ताकि नुक्कड़ का स्टार भी उंचा ही उठता रहे. एक बात अपनी तरफ से कहना चाहता हू कि इस तरह के सामूहिक ब्लॉग पर किसी भी ब्लोगर या ब्लॉग के खिलाफ पोस्ट ना लिखी जाए और ना ही धर्म या किसी अन्य संकीर्णता को नुक्कड़ पर जगह दी जाये.

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    8. अविनाश भाई, आप सही कह रहे हैं। मैंने आपके पहले वाले अनुरोध के बाद दो तीन बार इस ओर सब लोगों का ध्‍यान खींचा था,लेकिन शायद कुछ साथी इस तरफ ध्‍यान नहीं दे रहे हैं। अच्‍छा हुआ जो आपने फिर से यह बात कही।
      सच तो यह है कि मैंने भी बहुत दिनों से नुक्‍कड़ पर कुछ नहीं लिखा।
      बल्कि अब तो नुक्‍कड़ पर आपकी भी बहुत कम पोस्‍ट आती हैं। बाकी साथी भी नहीं लगा रहे हैं। कारण शायद यह है कि सब अपने स्‍वयं के ब्‍लाग में इतने व्‍यस्‍त हो गए हैं कि अलग से लिखने का समय ही नहीं होता। मुझे लगता है नुक्‍कड़ का एक काम पूरा हो गया है। बहुत सारे लोग नुक्‍कड़ पर जमा हुए और फिर अपने अपने ब्‍लाग की ओर चले गए।
      मेरा सोचना है कि नुक्‍कड़ के स्‍वरूप में थोड़ा परिवर्तन किया जाए। बहुत से ऐसे विषय होते हैं जिन पर विमर्श की जरूरत होती है। सब लोग अपने अपने ब्‍लाग पर उसके बारे में नहीं लिखते, हां किसी ने लिखा हो तो टिप्‍पणी कर लेते हैं। मुझे लगता है नुक्‍कड़ पर किसी एक विषय पर आरम्भिक भूमिका देकर साथियों के विचार जो पोस्‍ट के रूप में होंगे आमंत्रित करने चाहिए।
      बहुत संभव है कि इससे हमें एक नए तरीके से सोचने को मिलेगा।

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    9. ओह.. मतलब जल्दी से एक पोस्ट लगाना पड़ेगा यहाँ.. अपनी जान बचाने के लिए.. :)

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    10. वैसे हंसी मजाक से इतर, मेरे विचार भी मुक्ति जैसे ही हैं..

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    11. कोई पोस्ट अगर किसी लेखक के ब्लॉग पर हैं और वो उस पोस्ट को नुक्कड़ पर भी लगा देता हैं तो आखिर इतनी आपत्ति क्यों??? भाई फिर नुक्कड़ का मतलब क्या रह जाता हैं??? नुक्कड़ बनता ही लोगो के एक जगह मिलने से और अगर मिलने वाली जगह किसी ने अपनी बात कह भी दी तो क्या हो जाता हैं!!!!

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    12. अविनाश भाई आप का कहना ठीक है.मर्यादा आवश्यक है.मैं जल्दी ही अपनी पोस्ट लगाऊंगा .धन्यवाद.

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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