चिट्ठाजगत क्‍यों खफा है आजकल, दर्शन नहीं हो रहे हैं कई दिनों से

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • खफा हो गया है
    कुछ तो हुआ है
    वायरल है या
    वायरस है
    निकल रहा
    इसके न होने से
    हिन्‍दी ब्‍लॉगरों का
    जीवन रस है

    आओ आओ
    चिट्ठाजगत
    जल्‍दी आओ
    इतना मत
    तरसाओ

    बरसाओ
    बरसाओ
    अपना स्‍नेह
    निरंतर बरसाओ

    हिन्‍दी ब्‍लॉगर
    पुकार रहे हैं
    कुछ तो नेह
    बरसाओ

    15 टिप्‍पणियां:


    1. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

      आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

      आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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    2. शायद चिट्ठाजगत मेन्टेनेंस पर है।

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    3. .
      .
      .
      हम तो बहुत ही परेशान हैं अविनाश जी,

      तब तक के लिये कोई अच्छा विकल्प यदि हो नजर में तो सुझाइये...


      ...

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    4. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति , ......

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    5. हिन्‍दी ब्‍लॉगर
      पुकार रहे हैं
      कुछ तो नेह
      बरसाओ

      उत्तर देंहटाएं
    6. sunder ati sunder !
      हिन्‍दी ब्‍लॉगर
      पुकार रहे हैं
      कुछ तो नेह
      बरसाओ
      aabhar

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    7. सुन्दर रचना …………मगर चिट्ठाजगत के बिना सभी परेशान तो हो रहे हैं।

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    8. avinashji..aapki post se pata chala ki chiththa jagat band hai....mein bhi kai dino se pareshan ho rahi thi....

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    9. अब तो एक ही तरीक़ा रह गया है कि ज़्यादा से ज़्यादा ब्लोग्स को फ़ॉलो किया जाए...

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    10. परेशानी वाजिब है ...आपकी अभिव्यक्ति ...लाजबाब ...शुक्रिया

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    11. क्या कहूं-कुछ समझ में नही आता है कि आपके लिए किस विशेषण का प्रयोग करूँ।

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    12. चिटठा जगत के अभाव में बेचारे टापर्स ज्यादा परेशान होंगे.
      अरे भाई जी, लेखन कर्म करते रहो फल जरूर मिलेगा .

      - विजय तिवारी

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    13. इससे तो मैं खुद त्रस्त हूँ ५० बार तो अपना ब्लॉग जोड़ने की रिक्वेस्ट भेज चुकी

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    14. चिट्ठे लिखते रहिएगा तो जगत बचा रहेगा वर्ना तो हम होते ही रहते हैं सो ये भी खो जाएगा। और फिर सर्वप्रिय चिट्ठाजगत की कमी बहुत बहुत खलेगी। मालिक से गुज़ारिश है कि इसे तो कम-अज़-कम किसी की बदनज़र ना लगे। आमीन।

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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