काव्‍यांचल कलैण्‍डर : लोकार्पण समारोह : एक आपको भी मिलेगा पर आईये तो ...

मैं कलैण्‍डर हूं काव्‍यांचल


मैं कलैण्‍डर हूं
मुझसे बात करना चाहते हैं
या मिलना चाहते हैं मुझसे
मिलने की इच्‍छा तो होगी ही
मुझे अपने घर भी ले जाना चाहेंगे
जहां घूमती हैं छिपकलियां
वहां टांग देंगे मुझे
पर मैं निडर हूं
गिरने पर भी डरता नहीं
पल पल न सही
दिनों का रखता हूं हिसाब
इसलिए लोग चाहते हैं
ले जाना बेहिसाब
पर आप आइये
तो हिन्‍दी भवन जनाब
मैं आपका कर रहा हूं
इंतजार।

7 टिप्‍पणियां:

  1. अविनाश जी बहुत बहुत शुभकामनायें और हार्दिक बधाई।

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  2. हिन्दी भवन का पता बताया जाए या स्पीड पोस्ट से केलेण्डर भिजवाया जाए

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  3. अविनाश जी बहुत सुंदर, आप को बधाई,धन्यवाद

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  4. हिन्‍दी भवन के पते के लिए उपर इमेज की मेज पर माउस से क्लिक कीजिए। क्लिक करते ही आपके घर की दीवार पर कलैण्‍डर नमूदार हो जाएगा।

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  5. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (13/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  6. बहुत ही खुबसुरत रचना.......मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना"at http://satyamshivam95.blogspot.com/ साथ ही मेरी कविताएँ हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" पर प्रकाशित....आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे....धन्यवाद।

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