रवीन्द्र प्रभात लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रवीन्द्र प्रभात लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सदाबहार हाइकु : रवीन्द्र प्रभात

(एक)
मोहे भाए ना
मौसम बदजात
कभी आए ना ।

(दो)
पियासी रही
समंदर पीकर
नदी बेचारी।

(तीन)
साजन आया
दूर देश से लेके
नई बीमारी।

(चार)
अंध रेत में
बिला गई है गंगा
कौन ले पंगा?

(पांच)
नदी गहरी
डूबते का सहारा
छोटा तिनका।

(छ:)
दर्द जो मिले
उसको ढो लीजिए
यही ज़िन्दगी।

(सात)
सगुन उठा
धूप को लगी हल्दी
ओट में सर्दी।

(आठ)
चार दिन की
चांदनी थी, फिर से
अंधेरी रात।

(नौ)
बजाए कान्हा
बियावान में बंशी
राधिका खोई।

(दस)
लेटी है धूप
रखें कहां पइयां
बोलो न सैयां।

(ग्यारह)
छिपा है चांद
बादलों की ओट में
आंख चुराके।
Read More...

आप जितना शांत होते जायेंगे उतना ही अधिक सुन सकेंगे : राम दास

"तस्माद वा एतस्माद आत्मनः आकाशः संभूतः" यानी सृष्टि रचना में सबसे पहले आकाश बना। आकाश ही पंचतत्वों में पहला तत्व है और हम जानते है कि आकाश गूंगा है अर्थात आकाश एक निर्वात है जिसमे शब्द विचरण नहीं होते। जिसका अर्थ हुआ कि मौन होना, चुप होना एक ऐसा गुण है जो सृष्टि रचना के साथ ही आया था. इसीलिए गीता में श्री कृष्ण कहते है कि "मौनं चैवास्मि गुह्यानां" अर्थात गोपनीय भावों में मैं मौन हूँ. कबीर दास कहते है "कबीरा यह गत अटपटी, चटपट लखि न जाए, जब मन की खटपट मिटे, अधर भया ठहराय" अर्थात होंठ वास्तव में तभी ठहरेंगें, तभी शान्त होंगे, जब मन की खटपट मिट जायेगी. मौन शब्दहीनता नहीं है यह शब्द का भी कारण विचार की अनुपस्थिति है यानी विचारहीनता है. "शब्द साकार है और इसीलिए सीमित भाव और अर्थ वाले है, शब्द जन्म लेते और मरते है, अर्थात अस्थायी है, मरणशील है जबकि मौन निराकार है, इसीलिए असीमित भाव और अर्थ वाला है जो सृष्टि के प्रारंभ से विद्यमान है, स्थायी है, अमर है अर्थात स्वयं प्रकृति का प्रतीक है."

किसी शायर ने ठीक ही कहा है, कि -
"कह रहा है शोर - ए - दरिया से समंदर शकूर, जिसमें जितना ज़र्फ़ है वह उतना ही खामोश है।"

आज सड़कें वीरान हैं, पूरे कायनात में सन्नाटा पसरा है। एक मुकम्मल खामोशी है चारों तरफ। प्रकृति अपने दर्द की दबा स्वयं लेे रही है खामोश होकर। मगर -"कल वीरान इन सड़को पर रोशनी का क़ाफ़िला होगा ,
वक्त की चुप्पी टूटेगी फिर ख़ुशियों का सिलसिला होगा ।।"
   
Read More...

पूर्णता अपूर्ण होने की इच्छा है-- लाओत्सू

इस परिवर्तनशील और मरणशील सृष्टि मे हमें अपूर्णता का बोध होता है , इसलिए  हमारी समस्त इन्द्रियां पूर्णता की खोज करती है जैसे आँखे सर्वोत्तम दृश्य, नाक सर्वोत्तम सुगंध, जीभ सर्वोत्तम स्वाद आदि। हम भी सर्वोत्तम साथी, मित्र आदि की खोज करते ही है. लेकिन यह तो अपूर्ण से पूर्ण होने की बात है। क्या ऐसा भी हो सकता है जैसा लाओत्सू कह रहे है कि पूर्ण अपूर्ण होना चाहता है। जी हाँ चूँकि  प्रकृति ही एकमात्र पूर्ण है जिसकी पूर्णता पर कोई संदेह नहीं परन्तु देखिये कि उपनिषद् कह रहे है तत् सृष्ट्वा तदेवानुप्राविशत्‌ अर्थात वह सृष्टि की रचना के बाद स्वयं भी सृष्टि में समाहित हो गया। प्रकृति पूर्ण होने बाद भी इस अपूर्ण जगत में, सृष्टि में समाहित हो गया अर्थात वह पूर्ण से अपूर्ण होना चाहता था। परन्तु उपनिषद् यह भी कहते है कि पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् , पूर्ण मुदच्यते, पूर्णस्य पूर्णमादाय, पूर्ण मेवा वशिष्यते अर्थात वह प्रकृति पूर्ण है, यह जगत उसी प्रकृति से उत्पन्न हुआ और चूँकि पूर्ण से पूर्ण की ही उत्पत्ति हो सकती है इसीलिए यह जगत भी पूर्ण है।

इसलिए आज हम जो कोरोनावायरस अर्थात कोविड़ -19 के डर से घरों में दुबके है और खुद को संभावित खतरों से महफूज़ रखने की कोशिश कर रहे हैं, वह कुछ और नहीं प्रकृति के द्वारा दी जाने वाली चेतावनी है, जिसे हमें समय रहते समझ जाना होगा। प्रकृति के दोहन से बचना होगा, नहीं तो कल न प्रकृति होगी और न हम होंगे। आइए प्रकृति को हर हाल में बचाए रखने का संकल्प लें। क्योंकि प्रकृति नहीं तो हम नहीं।
Read More...

कश्मीर के शर्मनाक ऐतिहासिक पहलूओं की पड़ताल करता एक नया उपन्यास


यह मेरा पाँचवाँ उपन्यास है, जो कश्मीर के सामाजिक तानेबाने को समय के साथ ध्वस्त होने की कहानी बयान करता है। साथ ही कश्मीर के शर्मनाक और दहशतनाक ऐतिहासिक पहलूओं की गहन पड़ताल भी करता है। किस्सागोई शैली में लिखा गया यह उपन्यास आम पाठक के लिए काफी रोचक और पठनीय है। कश्मीर जैसे ज्वलंत विषय पर बिना किसी पूर्वाग्रह और बोझिल विश्लेषण से बचते हुए  मैंने पुस्तक की जानकारियों को स्वाभाविक अंदाज में संप्रेषित किया है। 

कश्मीर पर आधारित यह उपन्यास ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर जम्मू कश्मीर को दो भागों में बाँट दिया है और इसको लेकर भारत पाकिस्तान के बीच एक बार फिर संवादहीनता की स्थिति बनी है। सत्य घटनाओं पर आधारित यह उपन्यास इंसानी जूझारूपन की एक ऐसी कहानी है जो हर भारतीय के दिल में शांति इंसानियत और न्याय के सहअस्तित्व के प्रति विश्वास को बल प्रदान करता है, वहीं कश्मीरी हिन्दुओं की व्यथा को औपन्यासिक कलेवर में बांधकर प्रस्तुत भी करता है। कश्मीर के मसले को देखने–समझने वाली एक पीढी जब लगभग समाप्त हो चुकी है तब नई पीढी के लिए इस वक्त में इस उपन्यास का आना काफी प्रासंगिक है ।

इन वेबसाइटों पर जाकर इस उपन्यास को खरीदा जा सकता है- 
प्रकाशक की वेबसाईट- https://notionpress.com/read/kashmir-370-kilometer
फ्लिपकार्ट पर-
https://www.flipkart.com/kashmir-370-kilometer/p/itm66fd24029a1e3?pid=9781647609320&affid=editornoti
Read More...

लोक मेधा के कलमकारः रवीन्द्र प्रभात


() डॉ. रामबहादुर मिश्र 

विगत पाँच छः वर्षों में साहित्यकार रवीन्द्र प्रभात की छवि साहित्य जगत में एक ब्लॉगर, ब्लॉग विश्लेषक एवं लगभग आठ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन के संयोजक के रूप में स्थापित हो गयी है जबकि उन्होने साहित्य की अनेकानेक विधाओं में प्रभावी लेखन किया है। एक सहृदय कवि, लोक कथाकार, कुशल निबंधकार, सफल संपादक और सार्थक संगठनकर्ता भाई रवीन्द्र प्रभात के बारे में लिखते समय तय नहीं कर पाता कि उनकी किस सृजनधर्मिता को उत्कृष्ट या उल्लेखनीय कहूँ-‘को बड़ छोट कहत अपराधू'। यह किसी भी कलमकार की प्रतिभा का कमाल है कि जिस विषय पर भी कलम चलाया पाठकों की बाहबाही मिली। ऐसा प्रभात जी के साथ है। उन्होने गजल संग्रह ‘मत रोना रमजानी चाचा‘, गीत-गजल संग्रह ‘हम सफर‘, कविता संग्रह ‘स्मृति शेष‘, उपन्यास ‘प्रेम न हाट बिकाय‘ और ‘ताकि बचा रहे लोकतन्त्र‘ समीक्षात्मक पुस्तक ‘हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास‘, हिन्दी मासिक ‘परिकल्पना समय‘ और संपादित पुस्तक ‘समकालीन नेपाली साहित्य‘ और सह संपादित ‘हिन्दी ब्लॉगिंगः अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति‘ के माध्यम से साहित्य जगत को अपनी बहुमुखी प्रतिभा से परिचित कराया है। उनका सर्वाधिक चर्चित व्यंग्य धारावाहिक ‘धरती पकड़ निर्दलीय‘ बहुचर्चित रहा जिसे वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने प्रयोगधर्मी उपन्यास की संज्ञा दी है। 

रवीन्द्र प्रभात के लेखन की विशेषता है कि वे जिस जीवन और समाज से अनुभव बटोरते हैं उससे अगाध प्रेम भी करते हैं। वे उस परिवेश का चित्रण ही नहीं करते अपितु उसे जीते भी हैं। सीतामढ़ी बिहार जहां उनका जीवन बीता उसे छोड़े हुये एक युग बीत गया किन्तु आज भी उनके मन में रचा-बसा है उनका गाँव, वहाँ की संस्कृति, वहाँ के सुख-दुःख। धरती पकड़ निर्दलीय (उपन्यास) का बढ़ाईपुरवा गाँव प्रकारांतर से उनका गाँव है-गाँव की समृद्धि की कामना, विवशता, अभाव, अशिक्षा, रूढ़ियाँ, संस्कृति प्रेम, संस्कृति में निहित प्रतिरोध क्षमता, राजनीति का पतन, राष्ट्रीय सुरक्षा, दलाली-ठेकेदारी, भ्रष्ट नौकरशाही, वोट का व्यापार, स्वार्थपरता, अमरीकी दादागिरी, पाँच परमेश्वर बनाम प्रपंच परमेश्वर, जनता की संपत्ति का बंदरबान्त, दिल्ली का बिचित्र चरित्र, पारस्परिक विद्वेष, गाँव में बढ़ता असंतोष, अनाचार, अन्याय, अपराध, भ्रष्ट पुलिस, मंहगाई, कठिन जीवन यापन, सरकारी तंत्र, जन प्रतिनिधियों के कारनामे, गाँव में आते नए परिवर्तन, गांवो का शहरीकरण, गांवो में पहुँचती संचार क्रान्ति, वैश्वीकरण-बाजारीकरण, राजनैतिक भ्रष्टाचार और सबकुछ होने के बावजूद जीता जागता गाँव। यह सब व्यक्त करना कठिन होता यदि रवीन्द्र प्रभात के पास भोगा हुआ यथार्थ न होता। 

गाँव की जनता संचार क्रान्ति में वह सबकुछ जानती है, प्रादेशिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सभी मुद्दों पर वह स्वस्थ बहस करती है। धरती पकड़ निर्दलीय का एक प्रसंग दृष्टव्य है- ‘‘ई त बड़ी दूर की बात कहत हौ निर्दलीय जी। नेतवन हो या ब्यूरोक्रेसी या फिर नककटवा सबका चरित्र हो गया है हमारे देश मा तवायफ के गजरा जइसा। रात को पहनो सुबह को उतार दो। सब ससुरा समझ लिया है ई देश को रामजी की चिरई रामजी का खेत।‘‘ लोकतन्त्र की ताकत का अहसास है हर आदमी को - ‘‘ई जो पब्लिक है राम भरोसे सब जानत है। सभके पहचानत है। चाहे महामाया हो चाहे सोनिया चाची। आज तक केहू पब्लिक के वार से कबौ बचल चाची? नोएडा से लखनऊ तक बहिन जी खाके खिलाके सोशल इंजीनियरिंग के हाथी दाँत के पाठ जनता के पढ़ौली सब धन बाईस पसेरी वाला हिसाब तोता नियन रटौली। मगर एन मौके पर सब गुड गोबर हो गइल। चुनाव आयोग मतदान खातिर महिना गलत चुन लिहले। फागुन मा वोट डाले से ससुरा सब गड़बड़ हो गइल। भंग के तरंग में उड़ गइल धज्जी सोशल इंजीनियरिंग के आ गइल प्रदेश मा अखिलेश का नया साम्राज्य।‘‘ 

कुल मिलाकर देखा जाये तो रवीन्द्र जी लोकभाषा की ताकत को भलीभाँति समझते हैं और उसका सटीक प्रयोग भी करते हैं। 

 अध्यक्षः अवध भारती संस्थान, लोकसदन, नरौली, हैदरगढ़, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)
Read More...

परिकल्पना-सम्मान को कुछ नियमों में बांधना ज़रूरी !

कुछ तो ब्‍लॉगर कहेंगे, ब्‍लॉगरों का काम है कहना !

 “इस वर्ष के समापन के साथ ही हिन्दी ब्लॉग जगत नए दशक मे प्रवेश कर जाएगा, इसलिए परिकल्पना समूह के द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि परिकल्पना सम्मान के साथ दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉग और दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉगर का भी सारस्वत सम्मान किया जाये। इसके लिए आपका वोट हमें दिशा देगा । हिचकिचाइए मत, केवल एक ब्लॉगर और केवल एक ब्लॉग को चिन्हित करते हुये अपना वोट अवश्य दीजिये .....आपका वोट हमारे लिए महत्वपूर्ण है : रवीन्द्र प्रभात” 

 यही वह वाक्य है जिसके माध्यम से रवीन्द्र प्रभात जी ने द्वितीय परिकल्पना सम्मान की उद्घोषणा की और पूरे ब्लॉग जगत को आंदोलित कर दिया एकबारगी। फिर चला वाद-विवाद का सिलसिला । एक ब्लॉगर ने कहा कि “आपकी सूची में किसी भी दलित ब्लॉगर का कोई ब्लॉग नहीं है।“ रवीन्द्र जी खामोश रहे । तभी इसके प्रतिउत्तर मे आई एक टिप्पणी “तब तो एक ब्लॉग "मुस्लिम ब्लॉगर" का, एक ब्लॉग ईसाई ब्लॉगर का, एक ब्लॉग "बच्चों के नाम से चलने" वाले ब्लॉग का भी नामित होना चाहिए…:) :)… जय हो।“ रवीन्द्र जी एक कुशल ब्लॉगर के नाते फिर भी खामोश रहे । तभी एक और टिप्पणी आई कि “ ब्लॉग की दुनिया को दलित-सवर्ण वाले खाँचे में मत बांटो भाई. वरना मुस्लिम ब्लागर, ब्रह्मण ब्लॉगर,बनिया ब्लॉगर, कुर्मी ब्लॉगर, गुप्ता ब्लॉगर, साहूं ब्लागर, नारी ब्लॉगर, किन्नर ब्लॉगर, 'गे'ब्लागर आदि-आदि श्रेणियां बन जायेंगी. ब्लॉगर मतलब केवल ब्लॉगर।“ मतलब हंगामा उठा है तो मेरी राय है कि सूरत भी बदलनी चाहिए।

इसी क्रम मे एक ब्लॉगर ने सवाल यह भी उठाया कि रवींद्र प्रभात जैसे लोगों के लिए सम्मान कहाँ है? कौन करेगा..? किसी अखबार या बड़ी संस्था को यह काम करना चाहिए. वरना वही होगा' औरों को पिलाते रहते हैं और खुद प्यासे रह जाते हैं''।इस तरह कई अन्य लोगों ने अव्यवहारिक और लंबी-लंबी सूचियाँ ,जिनमें उनके अपने रिश्तेदार और भक्त ज़्यादा थे,जारी करना शुरू कर दिया.इससे वह पैटर्न ज़्यादा दिखा कि ,''तू मुझे सपोर्ट कर,मैं तुझे करूँ ".इस तरह से पूरी प्रक्रिया भानमती के पिटारे जैसी दिखने लगी.इसमें कुछ अच्छी सलाहें भी आईं,पर ऐसे वाद-विवाद का अंत नहीं है.इसे इंडियन-आइडल की तरह अपने पक्ष में खूब एस एम एस भिजवाकर टाइटल जीतने की तरह किया जाने लगा.फिर भी मेरा विश्‍वास है कि सम्‍मान देकर महान बनना, सम्‍मान पाकर महान बनने से बेहतर है। 

 एक ब्लॉगर ने कहा कि “ब्लॉग पुरुस्कारों के बारे में मचे समर के बारे में जिज्ञासा से पढ़ रहा हूँ। कुछ प्रश्न मस्तिष्क में आ रहे हैं सो। ज़ाहिर कर ही दूं ,ब्लॉग पुरस्कार का पैमाना क्या होना चाहिए यह चर्चा का विषय है। कौन कितने साल से लिख रहा है,? इस से क्या फर्क पड़ता है अगर लिखना सार्थक या रोचक नहीं है। लेखन की गुणवत्ता का महत्त्व होना चाहिए। कितने विषयों पर लिखा है ,यह भी महत्वपूर्ण मानता हूँ। साथ ही टिप्पणियों को तो महत्‍व देना ही नहीं चाहिए,क्योंकि मैंने देखा है, लोग बिना पढ़े ही टिप्पणी कर देते हैं,या खुद के ब्लॉग को पढने का निमंत्रण देने के लिए टिप्पणी करते हैं। या फिर तुम मुझे माला पहनाओ मैं तुम्हें माला पहनाऊंगा की तर्ज़ पर की गयी टिप्पणियाँ ,वही चुनिन्दा ब्लॉगर एक दूसरे के लेखन पर वाह वाह करते नहीं थकते। यह भय भी निर्मूल नहीं है कि पुरस्‍कारों की दौड़ की होड़ में कहीं आपसी छीटाकशी प्रारम्भ नहीं हो जाए ? मेरा विचार है पुरस्कार अवश्य दिए जाने चाहिए, अपितु किसी से पूछने की बजाय 5 या 7 प्रबुद्ध ब्‍लॉगरों का पैनल बनाया जाए और ब्लॉगरों का चयन किया जाए ,प्रारम्भिक चयन, जिस प्रकार पहले किया गया है वैसे ही करा जाए, पर वर्षों को या वरिष्ठता को दरकिनार कर दिया जाना चाहिए।"

 बात यहीं खत्म नहीं हुयी है, बहुत दूर तक गयी ये बात । अचानक जाल भ्रमण के दौरान रवीन्द्र जी की नज़र दिव्या जी की एक पोस्ट पर पड़ी कि “ सर्वप्रथम नामों की एक सूची जारी करनी चाहिए । उसमें नामांकन ब्लॉगर द्वारा स्वयं होना चाहिए । फिर उन नामों पर अन्य ब्‍लॉगरों द्वारा वोटो के मिलने पर उसकी गणना होनी चाहिए । ब्‍लॉगरों से यह अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए कि वह अपना मत, अपने लिए इस्तेमाल कर सके । कभी-कभी यही एक मत निर्णायक साबित होता है ।“ रवीन्द्र जी ने सोचा कि 41 और ब्लॉगर की सूची उन्हें जारी करनी ही है तो क्यों नहीं इस प्रयोग को भी आज़मा लिया जाये ? लेकिन उनका यह फैसला गलत साबित हुआ। फिर उन्होने उपरोक्त चयन हेतु सुझाव आमंत्रित किए । मगर नतीजा सिफर निकला । इसमें और ज्यादा विवादित टिप्पणियों का रसास्वादन हुआ, जिसने कभी एक भी कहानी नहीं लिखी उन्हें श्रेष्ठ कथाकार के, जिसने कभी एक-दो कवितायें ही लिखी उन्हें श्रेष्ठ कवि या कवयित्री के, जिसने कभी भी ब्लॉग की समीक्षा नहीं लिखी उन्हें ब्लॉग समीक्षक के सम्मान हेतु नामित किया गया,जबकि नामित समीक्षक ने उसी समय इसका प्रतिवाद किया.एक ही ब्लॉगर को कई श्रेणियों के लिए एक अकेले ब्लॉगर ने नामित कर दिया.इससे प्रतीत होता है कि हिन्दी ब्लॉग जगत अभी भी कितना अपरिपक्व है? वरिष्ठ गीतकार सतीश सक्सेना जी ने इसी घमासान के मद्देनज़र ऐसे आयोजनों को ठीक नहीं माना.वरिष्ठ ब्लॉगर अजय कुमार झा ने आपसी बातचीत में इस पर चुटकी लेते हुए इन्हें 'स्टार-परिवार' अवार्ड की तरह नवाज़ा,जिसमें कोई भी खाली हाथ नहीं जाता । 

मैं तो यही कहूँगा कि रवीन्द्र जी कि आपके सारे प्रयोग विफल करने की सुनियोजित तरीके से मुहिम चलाई जा रही है, उसे समझने की कोशिश कीजिये और वैसे ही कीजिये जैसे आपने अपने कुछ निर्णायकों की मदद से पिछले वर्ष किया था। आपकी नियत पर जो संदेह कर रहे हैं उनकी परवाह करने की कोई जरूरत नहीं। आपकी तथा आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . उम्‍मीद करता हूं कि अब अवश्‍य ही कुछ सार्थक निकलकर हिंदी ब्‍लॉग जगत के हित में सामने आएगा,फिर भी रवीन्द्रजी,आपका निर्णय अंतिम और मान्य होगा,आप जैसा उचित समझें,वैसा करें । 

परिकल्पना-सम्मान समारोह के लिए शुभकामनाओं सहित !
Read More...

न आना इस देश बापू !


(शहीद दिवस पर विशेष )

!! न आना इस देश बापू !!

शान्ति का  उपदेशक
सत्य-अहिंसा में आस्था रखना छोड़ दिया है
और  जम्हूरियत
बन गयी है खानदानी वसीयत का पर्चा
सिपहसलार-
कर गया  है सरकारी खजाना
सगे-संवंधियों के नाम......

संसद के केन्द्रीय कक्ष में
व्हिस्की के पैग के साथ
होती रहती  है कभी  राम राज्य तो कभी भ्रष्टाचार पर चर्चा
बापू !
वह स्थान भी सुरक्षित नहीं बचा
जहां बैठकर गा सको -
वैष्णव जन.............पीर पराई जाने रे......!

तुम्हारे समय से काफी आगे निकल चुका है यह देश
इस देश के लिए सत्य-अहिंसा कोई मायने नहीं रखता अब
टूटने लगे हैं मिथक
चटखने लगी है आस्थाएं
और दरकने लगी है-
हमारी बची-खुची तहजीब
इसलिए लौटकर फिर -
न आना इस देश बापू !

() रवीन्द्र प्रभात
Read More...

हिन्दी भाषा और साहित्य में चिट्ठाकारिता की भूमिका -अभिव्‍यक्ति में रवीन्द्र प्रभात ने पेश किया है, अवश्‍य पढि़एगा

साभार अभिव्‍यक्ति
वर्ष-२०१० में हिंदी चिट्ठाकारिता के चहुमुखी विकास में पूरे वर्ष भले ही अवरोध की स्थिति बनी रही, किन्तु बुद्धिजीवियों का एक बड़ा तबका अपने इस आकलन को लेकर करीब-करीब एकमत है कि आने वाला कल हमारा है यानी हिंदी चिट्ठाकारिता का है। इसकों लेकर किन्तु-परन्तु हो सकता है कि हिंदी चिट्ठाकारिता का विकास अन्य भाषाओं की तुलना में धीमा रहा, लेकिन इसे लेकर किसी को संशय नहीं होना चाहिए कि हिंदी चिट्ठाकारी उर्जावान चिट्ठाकारों का एक ऐसा बड़ा समूह बनता जा रहा है जो किसी भी तरह की चुनौतियों पर पार पाने में सक्षम है और उसने अपने को हर मोर्चे पर सिद्ध भी किया है । वस्तुत: विगत वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि और साथ ही आशा की किरण यह रही है कि चिट्ठों के माध्यम से वातावरण का निर्माण केवल वरिष्ठ चिट्ठाकारों ने ही नहीं किया है ,अपितु एक बड़ी संख्या नए और उर्जावान ब्लोगरों की भी आई है,जिनके सोचने का स्तर परिपक्व है। वे सकारात्मक सोच रहे हैं,सकारात्मक लिख रहे हैं और सकारात्मक गतिविधियों में शामिल भी हो रहे हैं। पूरा पढ़ने व प्रतिक्रिया देने के लिए क्लिक कीजिए, यह आपका ही मामला है 
Read More...

डेली न्यूज़ में परिकल्पना-अमरेन्द्र त्रिपाठी प्रकरण


ऊपर :
2 जनवरी 2011 को जयपुर से प्रकाशित डेली न्यूज़ में परिकल्पना-अमरेन्द्र प्रकरण
सहित पिछले वर्ष की हिन्दी ब्लॉगिंग का जायजा लेता सुश्री प्रतिभा कुशवाहा का  आलेख.......
=================================================================
नीचे :
लोकसंघर्ष  पर पुनर्प्रकाशित परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-२०१० की चर्चा स्वाभिमान टाईम्स ( 9 जनवरी 2011 को स्वाभिमान टाईम्स के नियमित स्तंभ ‘अन्तर्जाल’ ) में .....
 
स्वाभिमान टाईम्स में लोक संघर्ष
Read More...

मुद्दों पर हिंदी ब्लॉगजगत की रणनीति और वर्ष की हलचलें

नि:संदेह भारत ने एक संप्रभुता संपन्न राष्ट्र के रूप में बड़ी-बड़ी उपलब्धियां प्राप्त की । आई टी सेक्टर में दुनिया में उसका डंका बजा । चिकित्सा,शिक्षा, वाहन, सड़क, रेल, कपड़ा, खेल, परमाणु शक्ति, अंतरिक्ष विज्ञान आदि क्षेत्रों में बड़े काम हुए । परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का रुतवा भी हासिल हुआ । तेजी से यह देश आर्थिक महाशक्ति बनने को अग्रसर है । मगर राष्ट्र समग्र रूप से विकसित हो रहा है इस दृष्टि से विश्लेषण करें तो बहुत कुछ छूता हुआ भी मिलता है, विकास में असंतुलन दिखाई देता है एवं उसे देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिली है । जिससे भावनात्मक एकता कमजोर हो रही है , जो किसी राष्ट्र को शक्ति संपन्न , समृद्धशाली,अक्षुण बनाए रखने के लिए जरूरी है । यह समस्या चिंता की लकीर बढाती है ।

हमारे देश में इस वक्त दो अति-महत्वपूर्ण किंतु ज्वलंत मुद्दे हैं - पहला नक्सलवाद का विकृत चेहरा और दूसरा मंहगाई का खुला तांडव । जहां तक ब्लॉग पर प्रमुखता के साथ मुद्दों को प्रस्तुत करने की बात है, इस वर्ष प्रमुखता के साथ छ: मुद्दे छाये रहे हिंदी ब्लॉगजगत में । पहला बिभूती नारायण राय के बक्तव्य पर उत्पन्न विवाद, दूसरा नक्सली आतंक,तीसरा मंहगाई,चौथा अयोध्या मामले पर कोर्ट का फैसला,पांचवां कॉमनवेल्थ गेम में भ्रष्टाचार और छठा बराक ओबामा की भारत यात्रा ।इन्हीं छ: मुद्दों के ईर्द-गिर्द घूमता रहा हिंदी ब्लॉगजगत पूरे वर्ष भर ।

कौन-कौन से मुद्दों पर हिंदी ब्लॉगजगत ने कैसी रणनीति बनायी, सार्वजनिक रूप से क्या कहा और भ्रष्टाचार आदि मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया रही हिंदी ब्लॉग जगत की, जानने के लिए चलिए चलते हैं परिकल्पना पर जहां आजकल वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण प्रकाशित किये जा रहे हैं -
वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-१ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-२ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-३ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-४ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-५ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-६ )

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण (भाग-७ )
Read More...

पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत करने हेतु आगे आएं ब्लोगर

पर्यावरण, ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अमूल्य उपहार है जो संपूर्ण मानव समाज का एकमात्र महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य भौतिक तत्वों - पृथ्वी, जल, आकाश, वायु एवं अग्नि से मिलकर पर्यावरण का निर्माण हुआ हैं। इसे सुरक्षित और संरक्षित रखना हमारा परम कर्त्तव्य है ।
हमारे एक सम्मानित ब्लोगर बन्धु शिवम् मिश्रा ने सामूहिक पहल की है इस दिशा में ......तो आईये पर्यावरण की सुरक्षा के दृष्टिगत चेतना जागृत करने हेतु चलाये जा रहे इस अभियान में हम सभी शामिल होते हैं ।
Read More...

आपका ब्लॉग स्वयं बोलेगा अपने बारे में इस विश्लेषण के दौरान




यदि आप सक्रिय ब्लोगर हैं और सार्थक ब्लोगिंग करते हुए सकारात्मक गतिविधियों में संलग्न हैं तो पूरे वर्ष भर के लेखा-जोखा में आप भी शामिल होईए, ढूंढिए विश्लेषण में अपना और अपने ब्लॉग का नाम , यदि दिखाई न दे तो कॉमेंट बॉक्स में डाल दें अपने ब्लॉग का नाम और पता , आपका ब्लॉग स्वयं बोलेगा अपने बारे में इस विश्लेषण के दौरान , तो देर किस बात की ये लीजिये लिंक जहां आपको पहुँचना है-
http://www.parikalpnaa.com/
Read More...

हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है ।

हिंदी ब्लोगिंग वर्ष-२०१० में ७ वर्ष पूर्ण कर चुकी है । यह सुखद पहलू है कि विगत कई वर्षों की तुलना में वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है । इस वर्ष लगभग ८ से 10 हजार के बीच नए ब्लोगर्स का आगमन हुआ है , किन्तु सक्रियता के मामले में इस वर्ष आये ब्लोगर्स में से केवल ५०० से १००० के बीच ही सक्रिय हैं और सार्थक लेखन के मामले में ३०० के आसपास ।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि तपी जमीन को कुछ ठंडक देने का काम हुआ , लेकिन विकासक्रम की द्रष्टि से अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत संतोषप्रद नहीं कहा जा सकता । हिंदी ब्लोगिंग की सात वर्षों की इस यात्रा में अमूमन यही देखा गया कि यह ब्लॉगरों के लिए एक ऐसा धोबीघाट रहा ,जहां बैठकर वे अपने घर से लेकर गली-मोहल्ले तक की तमाम मैली चादरों को धोने का काम करते रहे और सुखाते रहे ।

पूरा आलेख पढ़ने के लिए यहाँ किलिक करें .......
Read More...

ये हैं हिंदी चिट्ठाकारी के जाने-माने स्तंभ

पहचानिए ये हैं हिंदी चिट्ठाकारी के जाने-माने स्तंभ
जिन्हें अलंकृत किया गया है -
वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लोगर के रूप में
यहाँ ....किलिक करें
और शुभकामनाएं दें
यदि इनके बारे में विस्तार से जाना हो तो -
यहाँ किलिक करें
Read More...

वर्ष के दो प्रखर ब्लोगर

वर्ष के दो प्रखर ब्लोगर, दोनों युवा एक देश में एक विदेश में ....
दोनों हुए एक साथ सम्मानित ब्लोगोत्सव में
आईये मिलते हैं एक से यहाँ
और दूसरे से यहाँ
शुभकामनाएं देते हैं एक को यहाँ
और दूसरे को यहाँ
Read More...

अपने फ़न में माहिर दो ब्लोगर



पहचानिए इन्हें, ये हैं हिंदी ब्लॉग-जगत के दो ऐसे धुरंधर

जिन्हें महारत हासिल है अपने फ़न में

एक अपनी तकनीकी कार्यशैली के लिए मशहूर हैं तो दूसरे सम सामयिक गतिविधियों

पर चुटीली टिप्पणियों के लिए -

एक हैं वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लोगर

तो दूसरे हैं वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लोगर

इनसे मिलने के लिए यहाँ किलिक करें

Read More...

श्रेष्ठता की कसौटी पर आज दो सकारात्मक ब्लोगर



पहचानिए ये हैं वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष )
और ये हैं वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला)

उन्हें यदि शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो -
यहाँ किलिक करें- (१) वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष)
(२) वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला)

वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर से मिलने के लिए यहाँ किलिक करें
वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर से मिलने के लिए यहाँ किलिक करें
Read More...

एक ऐसा सम्मान जो शायद पहलीवार सृजित हुआ है


एक ऐसा सम्मान जो शायद पहलीवार सृजित हुआ है और उसे प्राप्त करनेवाला विश्व का पहला सम्मान धारक हैं -
यहाँ किलिक करें
विस्तार से जानने के लिए यहाँ किलिक करें
एक ऐसी महिला जो पहली बार हिंदी ब्लोगिंग में आई और
वर्ष के श्रेष्ठ महिला चिन्तक होने का सौभाग्य प्राप्त की -
जानते हैं कौन है वो ?
जानने के लिए यहाँ किलिक करें
विस्तार से जानने के लिए यहाँ किलिक करें

Read More...

ब्लॉग जगत में मची है धूम....हो रही है इनकी चर्चाएँ खूब


ब्लॉग जगत में मची है धूम....हो रही है इनकी चर्चाएँ खूब
पहचानिए ये हैं क्रमश: वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक और वर्ष के श्रेष्ठ विचारक ,
जिनकी हो रही है चर्चाएँ -
आईये आप भी दीजिये इन्हें शुभकामनाएं
बस एक किलिक की दूरी पर हैं-
वर्ष के श्रेष्ठ विचारक
वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक
साथ ही -
ब्लोगोत्सव में सितारों की महफ़िल में हैं -
श्री जी. के .अवधिया
और श्री गिरीश पंकज
Read More...

ये हैं श्री राजीव तनेजा और ये हैं श्री पवन चन्दन



ये हैं श्री राजीव तनेजा और ये हैं श्री पवन चन्दन
आज ये दोनों उपस्थित हैं सितारों की महफ़िल में .....
ब्लोगोत्सव-२०१० पर
सितारों की महफ़िल में आज राजीव तनेजा
सितारों की महफ़िल में आज पवन चन्दन

क्यों ?
यह जानने के लिए ऊपर अंकित नाम पर किलिक करें ....!
======================
Read More...
 
Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz