परिकल्पना-सम्मान को कुछ नियमों में बांधना ज़रूरी !

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  • संतोष त्रिवेदी
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  • कुछ तो ब्‍लॉगर कहेंगे, ब्‍लॉगरों का काम है कहना !

     “इस वर्ष के समापन के साथ ही हिन्दी ब्लॉग जगत नए दशक मे प्रवेश कर जाएगा, इसलिए परिकल्पना समूह के द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि परिकल्पना सम्मान के साथ दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉग और दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉगर का भी सारस्वत सम्मान किया जाये। इसके लिए आपका वोट हमें दिशा देगा । हिचकिचाइए मत, केवल एक ब्लॉगर और केवल एक ब्लॉग को चिन्हित करते हुये अपना वोट अवश्य दीजिये .....आपका वोट हमारे लिए महत्वपूर्ण है : रवीन्द्र प्रभात” 

     यही वह वाक्य है जिसके माध्यम से रवीन्द्र प्रभात जी ने द्वितीय परिकल्पना सम्मान की उद्घोषणा की और पूरे ब्लॉग जगत को आंदोलित कर दिया एकबारगी। फिर चला वाद-विवाद का सिलसिला । एक ब्लॉगर ने कहा कि “आपकी सूची में किसी भी दलित ब्लॉगर का कोई ब्लॉग नहीं है।“ रवीन्द्र जी खामोश रहे । तभी इसके प्रतिउत्तर मे आई एक टिप्पणी “तब तो एक ब्लॉग "मुस्लिम ब्लॉगर" का, एक ब्लॉग ईसाई ब्लॉगर का, एक ब्लॉग "बच्चों के नाम से चलने" वाले ब्लॉग का भी नामित होना चाहिए…:) :)… जय हो।“ रवीन्द्र जी एक कुशल ब्लॉगर के नाते फिर भी खामोश रहे । तभी एक और टिप्पणी आई कि “ ब्लॉग की दुनिया को दलित-सवर्ण वाले खाँचे में मत बांटो भाई. वरना मुस्लिम ब्लागर, ब्रह्मण ब्लॉगर,बनिया ब्लॉगर, कुर्मी ब्लॉगर, गुप्ता ब्लॉगर, साहूं ब्लागर, नारी ब्लॉगर, किन्नर ब्लॉगर, 'गे'ब्लागर आदि-आदि श्रेणियां बन जायेंगी. ब्लॉगर मतलब केवल ब्लॉगर।“ मतलब हंगामा उठा है तो मेरी राय है कि सूरत भी बदलनी चाहिए।

    इसी क्रम मे एक ब्लॉगर ने सवाल यह भी उठाया कि रवींद्र प्रभात जैसे लोगों के लिए सम्मान कहाँ है? कौन करेगा..? किसी अखबार या बड़ी संस्था को यह काम करना चाहिए. वरना वही होगा' औरों को पिलाते रहते हैं और खुद प्यासे रह जाते हैं''।इस तरह कई अन्य लोगों ने अव्यवहारिक और लंबी-लंबी सूचियाँ ,जिनमें उनके अपने रिश्तेदार और भक्त ज़्यादा थे,जारी करना शुरू कर दिया.इससे वह पैटर्न ज़्यादा दिखा कि ,''तू मुझे सपोर्ट कर,मैं तुझे करूँ ".इस तरह से पूरी प्रक्रिया भानमती के पिटारे जैसी दिखने लगी.इसमें कुछ अच्छी सलाहें भी आईं,पर ऐसे वाद-विवाद का अंत नहीं है.इसे इंडियन-आइडल की तरह अपने पक्ष में खूब एस एम एस भिजवाकर टाइटल जीतने की तरह किया जाने लगा.फिर भी मेरा विश्‍वास है कि सम्‍मान देकर महान बनना, सम्‍मान पाकर महान बनने से बेहतर है। 

     एक ब्लॉगर ने कहा कि “ब्लॉग पुरुस्कारों के बारे में मचे समर के बारे में जिज्ञासा से पढ़ रहा हूँ। कुछ प्रश्न मस्तिष्क में आ रहे हैं सो। ज़ाहिर कर ही दूं ,ब्लॉग पुरस्कार का पैमाना क्या होना चाहिए यह चर्चा का विषय है। कौन कितने साल से लिख रहा है,? इस से क्या फर्क पड़ता है अगर लिखना सार्थक या रोचक नहीं है। लेखन की गुणवत्ता का महत्त्व होना चाहिए। कितने विषयों पर लिखा है ,यह भी महत्वपूर्ण मानता हूँ। साथ ही टिप्पणियों को तो महत्‍व देना ही नहीं चाहिए,क्योंकि मैंने देखा है, लोग बिना पढ़े ही टिप्पणी कर देते हैं,या खुद के ब्लॉग को पढने का निमंत्रण देने के लिए टिप्पणी करते हैं। या फिर तुम मुझे माला पहनाओ मैं तुम्हें माला पहनाऊंगा की तर्ज़ पर की गयी टिप्पणियाँ ,वही चुनिन्दा ब्लॉगर एक दूसरे के लेखन पर वाह वाह करते नहीं थकते। यह भय भी निर्मूल नहीं है कि पुरस्‍कारों की दौड़ की होड़ में कहीं आपसी छीटाकशी प्रारम्भ नहीं हो जाए ? मेरा विचार है पुरस्कार अवश्य दिए जाने चाहिए, अपितु किसी से पूछने की बजाय 5 या 7 प्रबुद्ध ब्‍लॉगरों का पैनल बनाया जाए और ब्लॉगरों का चयन किया जाए ,प्रारम्भिक चयन, जिस प्रकार पहले किया गया है वैसे ही करा जाए, पर वर्षों को या वरिष्ठता को दरकिनार कर दिया जाना चाहिए।"

     बात यहीं खत्म नहीं हुयी है, बहुत दूर तक गयी ये बात । अचानक जाल भ्रमण के दौरान रवीन्द्र जी की नज़र दिव्या जी की एक पोस्ट पर पड़ी कि “ सर्वप्रथम नामों की एक सूची जारी करनी चाहिए । उसमें नामांकन ब्लॉगर द्वारा स्वयं होना चाहिए । फिर उन नामों पर अन्य ब्‍लॉगरों द्वारा वोटो के मिलने पर उसकी गणना होनी चाहिए । ब्‍लॉगरों से यह अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए कि वह अपना मत, अपने लिए इस्तेमाल कर सके । कभी-कभी यही एक मत निर्णायक साबित होता है ।“ रवीन्द्र जी ने सोचा कि 41 और ब्लॉगर की सूची उन्हें जारी करनी ही है तो क्यों नहीं इस प्रयोग को भी आज़मा लिया जाये ? लेकिन उनका यह फैसला गलत साबित हुआ। फिर उन्होने उपरोक्त चयन हेतु सुझाव आमंत्रित किए । मगर नतीजा सिफर निकला । इसमें और ज्यादा विवादित टिप्पणियों का रसास्वादन हुआ, जिसने कभी एक भी कहानी नहीं लिखी उन्हें श्रेष्ठ कथाकार के, जिसने कभी एक-दो कवितायें ही लिखी उन्हें श्रेष्ठ कवि या कवयित्री के, जिसने कभी भी ब्लॉग की समीक्षा नहीं लिखी उन्हें ब्लॉग समीक्षक के सम्मान हेतु नामित किया गया,जबकि नामित समीक्षक ने उसी समय इसका प्रतिवाद किया.एक ही ब्लॉगर को कई श्रेणियों के लिए एक अकेले ब्लॉगर ने नामित कर दिया.इससे प्रतीत होता है कि हिन्दी ब्लॉग जगत अभी भी कितना अपरिपक्व है? वरिष्ठ गीतकार सतीश सक्सेना जी ने इसी घमासान के मद्देनज़र ऐसे आयोजनों को ठीक नहीं माना.वरिष्ठ ब्लॉगर अजय कुमार झा ने आपसी बातचीत में इस पर चुटकी लेते हुए इन्हें 'स्टार-परिवार' अवार्ड की तरह नवाज़ा,जिसमें कोई भी खाली हाथ नहीं जाता । 

    मैं तो यही कहूँगा कि रवीन्द्र जी कि आपके सारे प्रयोग विफल करने की सुनियोजित तरीके से मुहिम चलाई जा रही है, उसे समझने की कोशिश कीजिये और वैसे ही कीजिये जैसे आपने अपने कुछ निर्णायकों की मदद से पिछले वर्ष किया था। आपकी नियत पर जो संदेह कर रहे हैं उनकी परवाह करने की कोई जरूरत नहीं। आपकी तथा आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . उम्‍मीद करता हूं कि अब अवश्‍य ही कुछ सार्थक निकलकर हिंदी ब्‍लॉग जगत के हित में सामने आएगा,फिर भी रवीन्द्रजी,आपका निर्णय अंतिम और मान्य होगा,आप जैसा उचित समझें,वैसा करें । 

    परिकल्पना-सम्मान समारोह के लिए शुभकामनाओं सहित !

    34 टिप्‍पणियां:

    1. ..बेहतरीन और बेहतर माट साब । एकदम्मे सटीक लिखे आप । मैं भी शुरू से देख रहा था और जब नहीं रहा गया तो अपनी पोस्ट पर लिख ही दिया । रविंद्र प्रभात जी की मंशा पर सवाल उठाना फ़िज़ूल की बात है , और जब अपमान लगातार किया कराया जा सकता है तो फ़िर सम्मान तो कतई नहीं रुकना चाहिए । ब्लॉगर यानि ब्लॉगर , बडा छोटा , मोटा खोटा कुछ नहीं ...और मैं पिछले वर्ष इस समारोह का आंखों देखा भागीदार भी रहा था और पहले भी कह चुका हूं कि हिंदी , हिंदी ब्लॉगिंग , हिंदी ब्लॉगर को प्रोत्साहित और सम्मानित करने की हर छोटी बडी कोशिश का समर्थन करता हूं और करता रहूंगा , इसलिए इस बार भी उन्हें मेरा पूरा समर्थन है । रही सम्मान के लिए चयन प्रणाली और चयनकर्ताओं की बात तो ये पूरी तरह उनका सर्वाधिकार है ,सुझाव सुझाव की तरह दिया जाना चाहिए , विवाद या कटाक्ष की तरह । वैसे ही यहां एक दूसरे का अपमान करने की संस्कृति ज्यादा पनपा ली गई है इसलिए बेहतर हो कि एक दूसरे का सम्मान करना भी सीखा सिखाया जाए । बाद में हुठे हुंआं हूं और लंबी लामबंद सूचियों के कारण ही मैंने ये कहा था कि कहीं ये स्टार परिवार अवार्ड न बने , हालांकि वो भी सम्मान ही है और खासा लोकप्रिय ।

      सौ बात की एक बात आपने कह ही दी है ।
      "मैं तो यही कहूँगा कि रवीन्द्र जी कि आपके सारे प्रयोग विफल करने की सुनियोजित तरीके से मुहिम चलाई जा रही है, उसे समझने की कोशिश कीजिये और वैसे ही कीजिये जैसे आपने अपने कुछ निर्णायकों की मदद से पिछले वर्ष किया था। आपकी नियत पर जो संदेह कर रहे हैं उनकी परवाह करने की कोई जरूरत नहीं। आपकी तथा आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों."

      आपसे पूरी तरह सहमत

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    2. आउर हां हमें ई वरिष्ठ उरिष्ठ ब्लॉगर नय कहा करिए महाराज । हम तो अभियो ठेमहुनिया देके चल रहे हैं , गुडकते रहते हैं एन्ने से ओन्ने । यहां सिर्फ़ पढने , लिखने और फ़िर पढने और फ़िर लिखने के लिए आए हैं , आते रहेंगे बकिया त सब आना जाना है जी । रविंद्र जी को शुभकामनाएं अग्रिम ही दे रहे हैं कार्यक्रम की सफ़लता के लिए ।

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      1. आप कईठो ब्लॉग को एकै साथ साधे हुए हैं तो वरिष्ठ हुए ही.इहाँ तो एक में ही पसीना छूटता है !

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    3. सिद्ध हो गया कि मास्‍टर वास्‍तव में मास्‍टर ही होते हैं। हिंदी ब्‍लॉगरी को भी नितांत कुशल मास्‍साबों की घनघोर जरूरत है। वह बात अलग है कि आजकल शिक्षकों को सम्‍मान देने की प्रवृत्ति का पतन हो गया है लेकिन मास्‍टर कभी अपने कर्तव्‍य से चूका नहीं करते। काश, मुझे भी कोई मास्‍टर बना दे। लेकिन अब तो लगता है कि दूसरा जन्‍म ही लेना होगा।

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      1. आप तो मास्टरों के मास्टर हैं जी !

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      2. संतोष जी, मैंने मास्‍टरों के मास्‍टर शब्‍द को इंटरनेट पर सर्च किया लेकिन कुछ समझ नहीं आया। या तो हैडमास्‍टर बतलाया है या प्रिंसीपल। जबकि मैं तो खुद अभी सीख रहा हूं।

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    4. आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

      करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

      --

      बुधवारीय चर्चा मंच |

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      1. ब्लॉगर भी बँटने लगे, भैया क्या इस बार |
        बाँट-बूट के पॉलटिक्स, जैसा बंटाधार |

        जैसा बंटाधार, बदलिए रविकर फितरत |
        बँटते रहे सदैव, होइए अभिमत सम्मत |

        होवे जड़ चैतन्य, पहल रचनात्मक सादर |
        जुड़े लोकहित आय, एकजुट रहिये ब्लॉगर ||

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    5. हम आपके सुझावों से पूर्णत: सहमत हैं संतोष जी, यह विलकुल सही है कि रवीद्र प्रभात जी के इस महत्वपूर्ण पहल को सुनियोजित ढंग से विफल करने की साजिश रची जा रही है । मैं भी रवीद्र जी से निवेदन करूंगा कि वे आपके इस सुझाव पर अवश्य अमल करें कि “अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . उम्मी द करता हूं कि अब अवश्यय ही कुछ सार्थक निकलकर हिंदी ब्लॉषग जगत के हित में सामने आएगा,फिर भी रवीन्द्रजी, आपका निर्णय अंतिम और मान्य होगा……।

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      1. बहुत मुश्किल काम है यह इतने सारे ब्लॉगर्स को नियमित पढ़ना और उनमे से चयन करना कि कौन श्रेष्ठ है। जिस तरह से लोग टिप्पणी द्वारा एक दूसरे के नाम दे रहे हैं लगता है सम्मान नही मूँगफली बट रही है। फैसला तो रविंद्र जी को ही लेना है वो समझदार है और जानते भी हैं कि इनमें से कितने लोग हैं जो वास्तविक रूप से सम्मान के हकदार हैं। जो भी हो उन्होनें लेखकों को सम्मानित करने का बीड़ा उठाया तो सही वरना यहाँ तो एक दूसरे की टाँग खिंचाई या पोस्ट खिंचाई होते हुए देखते हैं। चलिये हर कार्य इश्वर के विधान के अनुसार ही होता है जो भी होगा अच्छा ही होगा। और चूंकि यह हमारे ब्लॉग जगत का फ़ैंक्शन है हमें भी स्टार अवार्ड की तरह ही निर्विवाद शामिल होना चाहिये।

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    6. एकदम्म सटीक लिखें हैं आप, रवीन्द्र जी को यह सुझाव मानना ही चाहिए ।

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    7. बढियां सुझाव है -
      एक यह भी -
      अगर आप को लगता है कि आपके ब्लॉग की जनता जनार्दन नोटिस नहीं लेती तो एक ठो काम करिए न -एक पुरस्कार आयोजन कर लीजिये जिसमें खुद के बजाय दीगर ब्लागों की पसंदगी नापसंदगी मांग लीजिये -
      ,कम से कम आपका अपना मूल्यांकन न होने से इज्ज़त तो बची रहेगी ! :)

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      1. अरविन्द जी,हम तो पुरस्कारों की दौड़ से बाहर ही हैं या कहिये कि कोई हमें देगा ही क्यूँ ?
        पर क्या बिना ईनाम पाए हमरे ब्लॉग को आप पढेंगे भी नहीं ?
        सादर !

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      2. हमारी टिप्पणी क्यों नही दिख रही भैय्या स्पैम की भेंट तो न चढ़ गई :)

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    8. ब्लॉगर भी बँटने लगे, भैया क्या इस बार |
      बाँट-बूट के पॉलटिक्स, जैसा बंटाधार |

      जैसा बंटाधार, बदलिए रविकर फितरत |
      बँटते रहे सदैव, होइए अभिमत सम्मत |

      होवे जड़ चैतन्य, पहल रचनात्मक सादर |
      जुड़े लोकहित आय, एकजुट रहिये ब्लॉगर ||

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    9. रवीन्द्र जी कि आपके सारे प्रयोग विफल करने की सुनियोजित तरीके से मुहिम चलाई जा रही है.
      kya asar parta hai. nice

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    10. सन्तोष जी से सहमत। आप निर्णायक मण्डल का गठन कर निर्णय लें। आलोचकों की परवाह न करें।

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      1. निर्णायक मंडल के गठन पर भी इतना ही हंगामा मचने की संभावना है या कम, आओ सट्टा खेलें। हिंदी ब्‍लॉगिंग को इस अच्‍छाई से कैसे बचा रहने दें।

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      2. आभार श्रीश जी एवं अविनाश जी !

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    11. अब भारत सरकार के पास जाइये और कहिये कि लगे हाथ राष्ट्रपति चुनाव के साथ ही 'ब्लॉगर तोपचंद' का भी चुनाव कर दिया जाय :)

      भाई आपने सुझाव तो बेशक नेक नीयत से दिया है पर क्या उनपर अमल होगा? कुछ सुझाव मैंने भी '१० में दिया था, उस समय बड़ा जालिमाना सलूक हुआ, लीजिये लिंक में स्थिर-मति होकर देखिये :) http://www.batkahi.com/2010/12/blog-post_19.html

      फिर भी रवीन्द्र प्रभात कुछ ठीक-ठाक करें, आप लोग बढ़िया करवाएं, मेरी शुभकामनाएं! मैं भी यही चाहता हूँ!

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      1. आपकी शुभेच्छाओं की सख्त ज़रूरत है !

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    12. संपूर्ण घटनाक्रम पर मेरी निगाह है संतोष जी, कुछ लोग बिना मतलब राय दे रहे हैं... कई लोगों का कहना है की यह सब आपकी पहल के खिलाफ साजिश है..... पर मेरे ख्याल से यह सब होता रहता है..मुझे या मेरे शुभचिंतकों पर इसका फर्क नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि राय रखने का हक सबको है । अलग-अलग और अजीब-अजीब राय तो हमेशा ही मिलती रहती है । अब मुझे और निर्णायक मण्डल को निर्णय देना है की कौन है हमारी नज़र मे बेहतरीन ब्लॉगर ।

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    13. @"आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . "

      संतोष जी,आपकी इन बातों से सहमत ।

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    14. फिर देर काहे की रवीन्‍द्र जी। प्रभात होने दें दोपहर में ही। परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्‍सव पर इस आशय की अंतिम पोस्‍ट, आज पोस्‍ट कर ही दें और मुख्‍य कार्य आरंभ करें। काफी संवाद हो गया अब।

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    15. आपकी तथा आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . उम्‍मीद करता हूं कि अब अवश्‍य ही कुछ सार्थक निकलकर हिंदी ब्‍लॉग जगत के हित में सामने आएगा,फिर भी रवीन्द्रजी,आपका निर्णय अंतिम और मान्य होगा,आप जैसा उचित समझें,वैसा करें ।
      निष्‍कर्ष में दम है ....

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    16. सार्थकता लिए हुए सटीक प्रस्‍तुति ... आभार ।

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    17. अविनाश जी, शुभ मुहूर्त देखकर घोषणा करता हूँ , ताकि अब फिर कोई कोई बिघ्न- वाधा न उत्पन्न हो ।

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    18. आज सांय 4 बजे अन्‍नाबाबा की श्रद्धांजलि सभा में आप सादर आमंत्रित हैं। नुक्‍कड़ और फेसबुक पर इसका आयोजन किया गया है।

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    19. रोचक परिचर्चा ,सुझाव और प्रति -सुझाव .एक मौजू शैर अर्ज़ किया है -अभी तो और भी रातें सफर में आयेंगी ,चरागे शव ,मेरे महबूब संभाल के रख .सम्मान करना देना चाहिए सम्मान से ही खुद का भी सम्मान है .
      कृपया यहाँ भी पधारें -
      ram ram bhai
      मंगलवार, 22 मई 2012
      :रेड मीट और मख्खन डट के खाओ अल्जाइ -मर्स का जोखिम बढ़ाओ
      http://veerubhai1947.blogspot.in/
      और यहाँ भी -
      स्वागत बिधान बरुआ :आमंत्रित करता है लोकमान्य तिलक महापालिका सर्व -साधारण रुग्णालय शीयन ,मुंबई ,बिधान बरुआ साहब को जो अपनी सेक्स चेंज सर्जरी के लिए पैसे की तंगी से जूझ रहें हैं .
      http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
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