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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग और सोशल मीडिया एक दूसरे के पूरक बन चुके हैं : ब्‍लॉगिंग संगोष्‍ठी में सबने एकमत से स्‍वीकारा


हिन्‍दी एवं हिंदी ब्‍लॉगिंग के हित में इस समाचार का प्रकाशन समाचार पत्र/पत्रिकाओं, ब्‍लॉगों, वेबसाइटों इत्‍यादि पर किया जा सकता है।
यह फोटो किसने खींची

नई दिल्‍ली, भारत की राजधानी के दिल कनॉट प्‍लेस के द एम्‍बेसी रेस्‍तरां में एक हिंदी ब्‍लॉगर संगोष्‍ठी लखनऊ से पधारे हिन्‍दी के मशहूर ब्‍लॉगर सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी के सम्‍मान में सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़डॉटकॉम के तत्‍वावधान में शनिवार को आयोजित की गई। इस मौके पर हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के प्रभाव को सबने एकमत से स्‍वीकारा। देश विदेश में हिंदी के प्रचार प्रसार में हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के महत्‍व को सबने स्‍वीकार किया और इसकी उन्‍नति के मार्ग में आने वाली कठिनाईयों पर व्‍यापक रूप से विचार विमर्श किया गया। संगोष्‍ठी में दिल्‍ली, नोएडा, गाजियाबाद के जाने माने हिंदी ब्‍लॉगरों ने शिरकत की। सोशल मीडिया यथा फेसबुक, ट्विटर को हिंदी ब्‍लॉगिंग का पूरक माना गया। एक मजबूत एग्रीगेटर के अभाव को सबने एक स्‍वर से महसूस किया और तय किया गया कि इस संबंध में सार्थक प्रयास किए जाने बहुत जरूरी हैं। फेसबुक आज एक नेटवर्किंग के महत्‍वपूर्ण साधन के तौर पर विकसित हो चुका है। इसका सर्वजनहित में उपयोग करना हम सबकी नैतिक जिम्‍मेदारी है।

खुद ही पहचान लीजिए...?
सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़ के मॉडरेटर एवं चर्चित व्‍यंग्‍यकार  अविनाश वाचस्‍पति ने हिंदी ब्‍लॉगिंग को समाज की बुराईयों से बचाने और प्राइमरी कक्षाओं में इसके पाठ्यक्रम आरंभ करने को वक्‍त की जरूरत के मामले को इस अवसर पर भी दोहराया। जिसका सभी उपस्थिति ब्‍लॉगरों ने सर्वसम्‍मति से समर्थन किया।  एक और हिंदी ब्‍लॉगर संतोष त्रिवेदी ने कहा कि बहुत ही छोटे से नोटिस पर दूर दराज से ब्‍लॉगरों का इस संगोष्‍ठी में शामिल होना साबित करता है कि हिंदी ब्‍लॉगिंग का प्रभाव शिखर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कंटेंट के स्‍तर पर आ रही गिरावट पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए जनसत्‍ता के संपादकीय विभाग में कार्यरत् फजल इमाम मल्लिक ने माना कि ऐसी स्थितियां तो प्रत्‍येक तकनीक के आरंभ में  आती ही हैं। यह एक ऐसा मंच है जिसका पूरी जिम्‍मेदारी के साथ तभी उपयोग किया जा सकता है जबकि इस प्रकार के मेल मिलाप होते रहें। उन्‍होंने सबसे आवाह्न किया कि ब्‍लॉगर अपने अपने क्षेत्रों में इस प्रकार के भरसक प्रयास करें।
भड़ासफॉरमीडिया के मॉडरेटर यशवंत सिंह ने जानकारी दी कि आगरा में एक ब्‍लॉगर अपने तकनीक ब्‍लॉग के जरिए एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह तक कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा भी कई जगहों पर ब्‍लॉगिंग से कमाई हो रही है। यह स्थिति निश्‍चय ही सुखद है। प्रत्‍यक्ष न सही, परंतु परोक्ष रूप से हिंदी ब्‍लॉगिंग से हो रही कमाई को अविनाश वाचस्‍पति ने भी स्‍वीकारा।
गिलास भी भरे थे
स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी ब्‍लॉगों के मॉडरेटर के. राधाकृष्‍णन, पी 7 से जुड़े हर्षवर्द्धन त्रिपाठी, स्‍वतंत्र पत्रकार विष्‍णु गुप्‍त, अयन प्रकाशन के भूपाल सूद, डॉ. टी. एस. दराल, हिंद युग्‍म के शैलेश भारतवासी, सुलभ सतरंगी, कुमार कार्तिकेयन, अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, खुशदीप सहगल इत्‍यादि ने हिंदी ब्‍लॉगिंग के स्‍वस्‍थ विकास के लिए कई पहलुओं पर उद्देश्‍यपूर्ण चिंतन किया।इस अवसर पर डॉ.दराल  द्वारा उठाये गए विषय "फेसबुक के ब्लॉगिंग को खा जाने की आशंका" पर विमर्श भी हुआ और इसी पर खुशदीप जी ने एक डायलॉग सुनाया,"मेरे पास फेसबुक है,ट्विटर है,ब्लॉगिंग है,तुम्हारे पास क्या है ? ...काम-धंधा ".यह सुनते ही सब ठठाकर हंस पड़े !
सबने माना कि फिजूल की अश्‍लील एवं धार्मिक उन्‍माद संबंधी पोस्‍टों पर जाने से हर संभव बचा जाए। इस दूषित प्रवृत्ति पर भी चिंता प्रकट की गई कि चार पोस्‍टें लिखकर स्‍वयं को साहित्‍यकार समझने वालों को अपनी आत्‍ममुग्‍धता से निजात पानी चाहिए। यह बुराईयां स्‍वस्‍थ ब्‍लॉगिंग के विकास के लिए हितकर नहीं हैं।

इसे कहते हैं ... क्‍या कहते हैं ?
...
प्रेषक : पवन चंदन, 1/12, रेलवे कालोनी, सेवा नगर, नई दिल्‍ली 110003 फोन 9990005904


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कल दो अक्‍टूबर को राजघाट पर मिलेंगे हिन्‍दी ब्‍लॉगर

मिलेंगे मतलब मिलेंगे
यह मत समझना
खाने को समोसे मिलेंगे
हां, आप अपने
ला सकते हैं
खुद खा सकते हैं
जो खाना चाहें
उन्‍हें खिला सकते हैं

मिलना मतलब
सिर्फ खाना पीना नहीं होता
मिलना मतलब
जुलना भी होता है

विचार मिलते हों
मन मिलते हों
फूल मन में खिलते हों
फिर तो मिलने का
खूब मजा आता है

बिना समोसे और चाय
अथवा कोल्‍ड ड्रिेंक के भी
मिलना अच्‍छा लगता है

जब कल मिलोगे
तो सब अपने अनुभव कहोगे
अन्‍नाभाई बुला रहा है
देखते हैं
कल राजघाट पर
मिलने के लिए कौन
कौन आ रहा है

मुझे मालूम है
बापू तो आयेंगे
मैं भी आऊंगा
और आयेंगे आप भी
इतना तो है

विश्‍वास जी।
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हिन्‍दी ब्‍लॉगर टोपी की नई कहानी सुनेंगे


आईना हूं

एक तरफ बाबा और एक तरफ टोपी वाला … दोनों तरफ से बंदरों पर दबाव बढ़ने लगा… यहाँ तक कि उन्हें मनुष्यों के वेश में रहना मुश्किल हो गया… और खीज में एक दिन बंदरों की मूल प्रवृत्ति उजागर हो ही गयी और खिसियाये हुए बंदर एक साथ इनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए भगवाधारी बाबा पर खौंखिया कर दौड़ पड़े… … बाबा इस अप्रत्याशित हमले से जैसे तैसे जान बचा कर निकले … उधर टोपी वालों ने अलग नाक में दम कर रखा था… रोज़ धरने की धमकी… अनशन की चेतावनी… बंदरों ने अपने कुछ चालाक और कुटिल प्रतिनिधियों को छाँट कर टोपी वालों से निपटने के लिए एक गोल बनाई और जैसे कभी इंसान ने बंदरों को लालच दिया था… आज बंदरों ने टोपीवालों को लालच दी… और टोपी वाले उनकी चाल में फंस गए… पूरा पढ़ने और टिप्‍पणी करने के लिए क्लिक कीजिएगा

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दिविक रमेश पर है केन्द्रित कल्‍पांत का मई 2011 अंक


कल्‍पांत पत्रिका का मई 2011 अंक केन्द्रित है दिविक रमेश पर। दिविक रमेश को आप जानते हैं। अच्‍छी तरह हिन्‍दी ब्‍लॉगर भी उन्‍हें पहचानते है। उनके बारे में और भी जानिए। मानिए मेरी तो कल्‍पांत मंगा लीजिए। पढ़ लीजिए। कीमत मात्र पन्‍द्रह रुपये है। पर मेरे पास नहीं मिलेगी। वो मिलेगा
1962/151, Trinagar, Delhi-110035.
आप मंगवा लीजिए
मैं भी मंगवा रहा हूं
8826392844
फोन मैं भी कर रहा हूं
आप भी कर लीजिए
एक झलक आप यहां पर ले लीजिए।
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प्रभासाक्षी ने बतला रहा है कि हिन्‍दी ब्‍लॉगर ........... दिल्‍ली में हिन्‍दी भवन में .......

प्रभासाक्षी

उपर क्लिक करें और पढ़-जान लें
चौंसठ हिन्‍दी ब्‍लॉगर एक साथ हिन्‍दी में सम्‍मान
मान लीजिए सच है बिल्‍कुल
हिन्‍दी भवन में  आकर
अपनी आंखों से देख लीजिए
आपको बतला रहे हैं
बालेन्‍दु शर्मा दाधीच 




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हिंदी ब्‍लॉगिंग में यह क्‍या हो रहा है ?

प्राय: दूसरों का विश्लेषण करना और उनके व्यक्तित्व को श्रेणियों में वर्गीकृत करना सरल होता है . अपने आप को सच्ची ईमानदारी के साथ उसी विश्लेषण के प्रकाश में देखना प्राय: कठिन मालूम पड़ता है , ऐसा मैंने कई बार महसूस किया है . उसी के विपरीत जब आप समूह को आयामित करने की दिशा आगे कदम बढ़ाते हैं तो आपके  कदमों के समानांतर हजारों-लाखों कदम अपने आप आगे बढ़ने लगते हैं , इसी को कहते हैं सामूहिक शक्ति . इसी सामूहिक शक्ति को ब्लॉग से जोड़कर हिंदी साहित्य निकेतन,परिकल्पना समूह और नुक्कड़ डॉट कॉम ने कल शनिवार 30 अप्रैल को एक बड़े आयोजन को मूर्त रूप देने हेतु संयुक्त रूप से अपने  कदम बढाएं और इसकी चर्चा सर्वत्र हो रही है , इसकी एक बानगी आप यहाँ देखिये :

आज तो मेरी ही चर्चा है चहुं ओर

दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में आज दिनांक २९.०४.२०११ को प्रकाशित पीयूष पांडे का विस्तृत विवेचन हिंदी ब्लॉग सम्मलेन के बहाने 
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दामिनी की कलम से विकास का धुंधलका कविता में महसूसिए

बड़े बड़े कारखानों की लालच में
दिखते ही किसे हैं उनक मटमैले छप्पर
धू धू कर जला देते हैं सबकुछ
उनका एक अकेला सुन्दर घर



पूरी कविता पढ़ने और अपनी राय देने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए
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हिन्‍दी ब्‍लॉगर तो नहीं कर रहे हैं आमरण अनशन ?

लेकिन भ्रष्‍टाचार को तो मिटाना है ऐसे
कि उसके दाग भी न उभरें दोबारा से
पर क्‍या सफलता मिलेगी ...
अलख तो जगेगी ...


अगली 5 अप्रैल सुबह 10 बजे से देश के प्रसिद्ध समाज-सेवी अन्ना हज़ारे दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू करने जा रहे हैं...वही अन्ना हज़ारे जिन्होंने 1965 के युद्ध में अपनी यूनिट के सारे सिपाही शहीद होने के बाद अपनी नई ज़िंदगी समाज के नाम कर दी....शादी नहीं की...संपत्ति के नाम पर पर बस कपड़ों की कुछ जोड़ियां हैं...न कोई बैंक बैलेस...एक मंदिर में रहते हैं...अन्ना हज़ारे ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी जानकारी और इस अनशन में शामिल होने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए
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बुधवार 23 मार्च 2011 को भूल न जाना : आपस में मिलने और जुलने आना : हिन्‍दी ब्‍लॉगर भी मिलेंगे



23 मार्च 2011 को सायं 5.00 बजे हिन्‍दी भवन में बुला रहे हैं हम आपको।
हम भी आ रहे हैं और आ रहे हैं
जिनके नाम प्रकाशित हैं कार्ड पर
लेकिन वे भी आ रहे हैं
जिनके नाम प्रकाशित नहीं हैं कार्ड पर
कार्ड पर कभी सभी भागीदारों के नाम
प्रकाशित नहीं होते हैं


समारोह साहित्‍यकारों के सम्‍मान का है
पुस्‍तकों पर दिए जा रहे हैं सम्‍मान
जैसे भवानी प्रसाद मिश्र सम्‍मान दिया जा रहा है चिमनी पर टंगा चांद पुस्‍तक पर कवि सुरेश यादव को
और
डॉ. रामलाल वर्मा सम्‍मान दिया जा रहा है
डॉ. हरीश अरोड़ा को उनकी पुस्‍तक
इलैक्‍ट्रोनिक मीडिया लेखन पर।

पुस्‍तकें और भी हैं
सम्‍मान और हैं
लेने वाले नेक हैं
देने वाले एक हैं
लेने वाले अनेक हैं
अनेकता में एकता
इसे ही तो कहते हैं
आप विशेष हैं

आप इस लेन देन के साक्षी बनेंगे
हम आपको वहीं मिलेंगे
आकर पहचानना।

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हम+हिन्‍दी ब्‍लॉगर+लोग और हास्‍य की उपजती हरी हरी घास

जिसे सब लोग ह्रासात्‍मक विकास और विकासात्‍मक ह्रास कह रहे रहे थे, उस समय अविनाश वाचस्‍पति इसे हास्‍य की उपजती हरी घास कह रहे थे। यह स्‍वयं अविनाश वाचस्‍पति और राजीव तनेजा ने बातचीत में मुझे बतलाया।

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सरकार और प्रिंट मीडिया ने हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की उपयोगिता को समझ लिया है : मालामाल होने वाले हैं हिन्‍दी ब्‍लॉगर

होली की हंगामेदार शुभ रंग कामनाएं सभी हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को, नॉन-हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को और जो ब्‍लॉगिंग नहीं करते हैं उनको भी (क्‍योंकि कल से वे भी ब्‍लॉगिंग शुरू कर रहे हैं) तथा उनको भी जो ब्‍लॉगिंग कर रहे हैं और कल से उसमें घनघोर तेजी लाने वाले हैं। 

सबका दिल मचल रहा होगा कि मुन्‍नाभाई को इतने रंग डालें कि वे अगली होली तक छुड़ाने के लिए मचलते रहें, तो आप अपने दिल को मचलने दीजिए क्‍योंकि आप इतने प्‍यार से जो मनभावन रंग मुझ पर डालेंगे तो मेरी क्‍या मज़ाल कि मैं उन्‍हें अपने चेहरे से उतारने के लिए तनिक सी कोशिश भी करूं। 

रंग खुशी का प्रतीक हैं, काला रंग काली खुशी का सिम्‍बल है। खुशी खुशी होती है। काली खुशी घनघोर होती है। काले धन के माफिक। सब चाहते हैं कि काला धन मिले। इसलिए काली खुशी में शामिल होने की ख्‍वाहिश रखने वालों को अपना मन सफेद रखना होगा परंतु सफेदपोशों की तरह नहीं। 

मन को मेज बनाएं जिस पर सारे अच्‍छे विचार आकर ठहर जाएं और उन्‍हें देखकर बुरे विचार वहां तक पहुंचने की सोचें भी मत। इसी भावना को दीजिए अपना अमूल्‍य मत। मत मत कीजिएगा, इससे सहमत होइयेगा।

भूल जाऊंगा इसलिए बीच में एक ब्रेक लेते हुए आपको सूचित कर रहा हूं कि रविवार 20 मार्च 2011 को सांय 8 बजे अपने अपने टीवी के आगे बैठकर ध्‍यानमग्‍न हो जाएं और हमलोग कार्यक्रम को अपना कार्यक्रम ही समझें। जैसे मैं समझ रहा हूं जबकि उसमें हरदिल अजीज हिन्‍दी ब्‍लॉगर राजीव तनेजा और शाहनवाज सिद्दिकी ठहाके लगा रहे होंगे। हास्‍य रचनाओं पर नहीं, हास्‍य क्‍यों गायब हुआ है, कहां से गायब हुआ है, इस पर चर्चा को सुनकर ठहाके लगाने का दिल किसका नहीं चाहेगा क्‍योंकि वे नहीं जानते कि क्‍या कह रहे हैं, हास्‍य गायब नहीं हुआ बल्कि हाई टेक हो गया है। आज हास्‍य इंटरनेट पर है, मोबाइल पर है और हिन्‍दी ब्‍लॉगों पर है। नुक्‍कड़ पर है। चौराहे पर है। मोहल्‍ले पर है। भड़ास पर है। बहकूं नहीं तो क्‍या करूं, होली का शरूर चढ़ने लगा है शरीर पर धीरे धीरे हौले हौले आहिस्‍ता आहिस्‍ता बना रहा है आपके मन तक पहुंचने का रस्‍ता। 

अब ब्रेक से बाहर उसी तय लय पर आता हूं। मैं आपको बतलाता हूं कि आज दिन भर प्रिंट मीडिया के ठेकेदारों और हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की नामचीन हस्तियों की एक बैठक संपन्‍न हुई। सफल हुई या नहीं, इस पर आप अपनी राय टिप्‍पणियों में दीजिएगा। जिनका दिल रंग डालने का कर रहा है, वे हिन्‍दी होली के इस हाई टेक युग में उन्‍हें अपनी अपनी टिप्‍पणियों से रिप्‍लेस कर दें। सचमुच बहुत आनंद आएगा, टिप्‍पणी का तेवर उसके रंग का आभास खुद ही करा देगा। 

बैठक में सरकार से गुजारिश की गई कि हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग पर प्रतिबंध नहीं लगेगा तो सरकार मान गई। अधिसूचना शीघ्र ही दीवाली तक जारी हो जाएगी। 

सरकार ने मन बना लिया है कि हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग को प्रोत्‍साहन देने और परवान चढ़ाने के लिए सरकारी खजाने से उन सभी हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को जिन्‍होंने 31 मार्च 2011 तक अपने ब्‍लॉग बनाए हुए हैं और उन पर दीवानगी की हद तक सक्रिय हैं,  प्रतिमाह 10,000 की दर से भत्‍ता दिया जाएगा। क्‍योंकि सिर्फ सांसद ही उल जुलूल भत्‍तों के हकदार नहीं है, कुछ हक तो हिन्‍दी ब्‍लॉगरों का भी बनता है और सरकार ने इस पर सहमति जारी कर दी है। 

इस मद में 70,000 हजार करोड़ रुपये की राशि की व्‍यवस्‍था की गई है। अगर इसमें अधिक घोटाले अथवा घपले हुए तो इस राशि को दोगुनी या दस गुनी तक किया जा सकता है।

हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की संस्‍तुति के लिए नामचीन हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को एक समिति में शामिल किया जा रहा है। जो उन ब्‍लॉगरों के नाम उनके ब्‍लॉग पोस्‍टों और टिप्‍पणियों का अध्‍ययन करने के बाद सुझायेंगे।

ऐसे ही कुछ प्रयास विशुद्ध टिप्‍पणीकारों के लिए भी किए जा रहे हैं। इनकी घोषणा होली के 22 दिन बाद की जाएगी।

वे ब्‍लॉगर जो स्‍वयं को इस योग्‍य समझते हों और सरकार पर ये आरोप भी न लगायें कि सरकार उनको खरीदने का मन बना रही है, अपने नाम तुरंत नीचे टिप्‍पणियों में और अपने ब्‍लॉग पर नई पोस्‍ट के तौर पर भी दे सकते हैं। 

एक महत्‍वपूर्ण फैसले से सहमति रखते हुए प्रिंट मीडिया मान गया कि जिन भी हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की पोस्‍टों से रचना का निर्माण किया जाएगा, शब्‍दों पर गौर कीजिएगा, उन्‍हें प्रति प्रकाशित पोस्‍ट एक हजार नकद भुगतान किया जाएगा। यह राशि अखबार की प्रतिष्ठता के अनुसार पांच हजार रुपये प्रति पोस्‍ट तक की जा सकेगी।  जिन ब्‍लॉगरों की पोस्‍टें पिछले दिनों प्रकाशित हुई हैं, उन्‍हें इसका एरियर भी दिया जाएगा। इसके लिए उन्‍हें अपना एक बिल प्रस्‍तुत करना होगा। जिस पर दो नामचीन ब्‍लॉगरों से संस्‍तुति करवानी होगी।
होली की शुभकामनाओं के साथ हाजिर हैं

कौन कह रहा था कि हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग से कमाई नहीं हो रही है या निकट भविष्‍य में नहीं होने वाली है,  वे आयें और सरकार और प्रिंट मीडिया को इन फैसलों के विरोध में रोषपत्र जारी करें।  वे रोषपत्र नुक्‍कड़ और चौराहों अथवा मोहल्‍लों और भड़ास पर नहीं हों तो बेहतर रहेगा। ऐसे विरोध अपने अपने ब्‍लॉगों पर ही करें। 

इस होली पर नुक्‍कड़ को होलीस्‍थल ही बना रहने दें, इसे टिप्‍पणीयुद्धस्‍थल न बनायें।

चलते चलते ....... एक महत्‍वपूर्ण घोषणा 
अगले माह से नुक्‍कड़ पर लेखक के रूप में जुड़ने और कार्य करने के लिए प्रति पोस्‍ट एक सौ रुपये का भुगतान अनिवार्य होगा क्‍योंकि सरकार सामूहिक ब्‍लॉगों के लेखकों को अलग से पांच पांच हजार रुपया दिया करेगी। 

अतएव, इसके लिए सभी ब्‍लॉगर बंधुओं से अनुरोध है कि वे तुरंत अभी जाकर बैंकों में अपने खाते खोल लें जो कि उस नाम से हों, जिस नाम से ब्‍लॉग हो। सरकार और प्रिंट मीडिया ब्‍लॉग के नाम से चैक/ड्राफ्ट जारी करेगी।

इसे हास्‍य मत समझिएगा, हास्‍य समझ लीजिएगा तो रोना पड़ेगा। गंभीर रहिए। 

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दिल थाम कर बैठें हिन्‍दी ब्‍लॉगर : आज एक बड़ी महाखबर फिर से आ रही है

कुछ कुछ ऐसा आभास मिल रहा है कि प्रिंट मीडिया वालों की होली के हंगामे के दौरान एक गुप्‍त बैठक जारी है जिसमें उन हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को कम से कम एक हजार रुपये प्रति पोस्‍ट और अधिक से अधिक पांच हजार रूपये हैं,  पारि‍श्रमिक दिए जाने पर फैसला लिया जाना है, जिनकी पोस्‍टों को रचना का रूप देकर प्रकाशित किया जाता है, शब्‍दों पर गौर कीजिएगा .... विस्‍तार से विवरण बैठक संपन्‍न होने पर। बैठक आज ही संपन्‍न होगी उसमें उन्‍हीं हिन्‍दी ब्‍लॉगों को लिया जाएगा जो 31 मार्च 2011 तक बना लिए गए होंगे।

मुझे यह पांच हजार रुपये वाली सीमा बिल्‍कुल पसंद नहीं है।

जिन लोगों को ब्‍लॉग बनाने में मदद चाहिये हो वो हिन्‍दी ब्‍लॉगरों से बेझिझक संपर्क करें।


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सामूहिक ब्‍लॉग बोले तो ...


1.सामूहिक ब्‍लॉग किसे माना जाए ?
2.सामूहिक ब्‍लॉग में कम से कम कितने लेखक होने चाहिए ?
3.सामूहिक ब्‍लॉग के पाठकों के विषय में भी कोई नियम हैं ?
4.एक सामूहिक ब्‍लॉग को एक ही विषय पर कार्य करना चाहिए क्‍या ?
5.सामूहिक ब्‍लॉग के लिए एग्रीगेटर की जरूरत होती है क्‍या ?
6.सामूहिक ब्‍लॉग के कम से कम कितने फॉलोअर्स होने चाहिए ?
7.सामूहिक ब्‍लॉग एक दिन में कितनी पोस्‍ट प्रकाशित कर सकते हैं ?
8.सामूहिक ब्‍लॉग बिना चित्रों के पोस्‍ट क्‍यों नहीं प्रकाशित कर सकते हैं ?
9.सामूहिक ब्‍लॉग को सामूहिक ब्‍लॉग क्‍यों कहा जाता है ?
10.सामूहिक ब्‍लॉग में पुरुष महिला ब्‍लॉगरों का प्रतिशत कितना होना चाहिए ?
11.सामूहिक ब्‍लॉग पर कम से कम कितनी टिप्‍पणियां प्रकाशित होनी आवश्‍यक होती हैं ?
12.सामूहिक ब्‍लॉग के क्‍या उद्देश्‍य होते हैं ?
13.सामूहिक ब्‍लॉग की अनिवार्यता पर कम से कम 100 शब्‍दों में उपयोगिता बतलायें ?
14. स्त्रियों का सर्वाधिक शक्तिशाली सामूहिक ब्‍लॉग कौन सा है और क्‍यों ?

और अंत में
1. आप नुक्‍कड़ को सामूहिक ब्‍लॉग क्‍यों मानते हैं ?
2. अपने उत्‍तर टिप्‍पणी में सिर्फ 5 शब्‍दों में दें
सर्वमान्‍य उत्‍तर को पुरस्‍कृत किया जाएगा।

जो कम से कम 15 से 25 सर्वाधिक सक्रिय सामूहिक ब्‍लॉगों के नाम और यूआरएल बतलायेंगे
उन्‍हें विशेष वरीयता दी जाएगी ।

संगठन में शक्ति है, को हिन्‍दी ब्‍लॉग के संबंध में परिभाषित कीजिए। जबकि एक ब्‍लॉग अकेला ही भाड़ फोड़ सकता है।
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30 अप्रैल 2011 को दिल्‍ली के हिन्‍दी भवन में : हिन्‍दी हिन्‍दी हिन्‍दी हिन्‍दी हिन्‍दी हिन्‍दी # अपने मित्रों का नाम ढूंढिए



http://www.srijangatha.com/Vyangya1-20Mar_2k10
इस अवसर पर लगभग 400 पृष्ठों की पुस्तक ( हिंदी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति), हिंदी साहित्य निकेतन की द्विमासिक पत्रिका  ‘शोध दिशा’ का विशेष अंक ( इसमें ब्लॉगोत्सव -२०१० में प्रकाशित सभी प्रमुख  रचनाओं को शामिल किया गया है) मेरा हिंदी उपन्यास (ताकि बचा रहे गणतंत्र ), रश्मि प्रभा के संपादन में प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका (वटवृक्ष ) के प्रवेशांक के साथ-साथ और कई महत्वपूर्ण किताबों का लोकार्पण होना है !
इस कार्यक्रम में विमर्श,परिचर्चाएँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र होंगे। पूरे कार्यक्रम का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के माध्यम से पूरे विश्व में किया जाएगा विस्‍तृत जानकारी के लिए क्लिक कीजिए

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पता चला है नुक्‍कड़ पर सांड घुसा : किसने देखा


पता चला कि हुजूर खुद ने बछड़े को पाला पोसा बड़ा सांड़ बनाया और उसके साउथ-एवेन्यू-माल पे त्रिशूल गुदवा दिया था. उसी बछड़े ने सींग उठाए तो अपने ब्लागर भाई बैल्ट कस के कानी-हाउस में बेड़ आए उसे अगर आनंद आना आरंभ हो गया है तो पूरे आनंद के लिए चूहे से कटवाइये
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प्रदीप पंत को व्‍यंग्‍यश्री सम्‍मान : जुटेंगे हिन्‍दी ब्‍लॉगर भी : लौटे हैं जो यमुनानगर अंतरराष्‍ट्रीय प्रवासी हिन्‍दी साहित्‍य संगोष्‍ठी में शामिल होकर

आज की शाम वेलेंटाइन दिवस की सुहानी संध्‍या है।
व्‍यंग्‍यश्री से वेलेंटाइन होगा आज मशहूर व्‍यंग्‍यकार प्रदीप पंत का।
वैसे तो वे संत हैं। पर शाम सुहानी है।
प्रेम जनमेजय भी मिलेंगे
मैं भी पहुंचूंगा और पहुंच रहे हैं पंकज सुबीर भी

हिन्‍दी ब्‍लॉगर सबको जानते हैं
जो नहीं जानते हैं
वे हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को जान जायेंगे
जब व्‍यंग्‍यश्री सम्‍मान समारोह में
देशी विदेशी हिन्‍दी ब्‍लॉगरों/साहित्‍यकारों को
वहां पर मौजूद पायेंगे

शामिल हो रहे हैं हरीश अरोड़ा भी
समारोह हिन्‍दी भवन में होगा
हिन्‍दी भवन दिल्ली में है
और दिल्‍ली में दिलदार हिन्‍दी ब्‍लॉगर
आप सब आमंत्रित हैं सहर्ष सादर।

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समीर लाल जी ने कहा और हिन्‍दी ब्‍लॉगरों ने सुना, आप भी पढि़ए

हमें लगातार सकारात्मक बने रहना है,क्योंकि सकारात्मक गतिविधियाँ हीं हिंदी ब्लोगिंग को ऊँचाई प्रदान करेगी !" अविनाश वाचस्पति ने कहा कि "आने वाले समय में ब्लॉग ही अभिव्यक्ति का मुख्य माध्यम होगा !"अजय कुमार झा ने पत्रकारिता और ब्लोगिंग की समानताओं से जहां रूबरू कराया वहीं खुशदीप सहगल ने कुछ सुखद संस्मरण पूरा पढ़ने और अपनी बात कहने के लिए क्लिक कीजिए
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चिट्ठाजगत की धमाकेदार वापसी : आप भी जांच लीजिए


चुप चुप चुप चुप

गुप चुप गुप चुप
कब तक रहेंगे
ब्‍लॉगर हैं, कहेंगे
सब कुछ कहेंगे

आज दिल्‍ली में हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की सरगर्मी रही है। जिसके चित्र और चित्र, विचार और विचार आप जल्‍द ही पोस्‍टों में देखेंगे। वहीं पर यह मालूम हुआ है कि चिट्ठाजगत आज वापिस प्रकट हो गया है। गति थोड़ी धीमी है। जल्‍द ही उसकी गति बढ़ाने के लिए टॉप गियर डाला जायेगा।

समाचार शुभ है। 
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ब्‍लॉगर से ब्‍लॉगर मिले : शाम हो गई हसीन

(उपदेश सक्सेना)
आज का दिन जब शुरू हुआ था तब यह आशा नहीं थी कि इसकी सांझ इतनी हसीं होगी. दोपहर बाद अचानक अविनाश जी का फोन आया...कहाँ आफिस में हैं? मैंने कहा हाँ तो वे बोले- हम भी पास ही हैं, मैंने कहा स्वागत है. कुछ समय पश्चात ही अविनाश वाचस्‍पति जी के साथ अजय कुमार झा और रवीन्द्र प्रभात सामने नमूदार हो गए, बड़ी आत्मीयता के साथ चाय-पान के बीच ब्लोगिंग पर सार्थक चर्चा हुई।  काफी नई तकनीकी जानकारियों का आदान प्रदान हुआ, महज एक घंटा न जाने कब बीत गया. रवीन्द्र जी को लखनऊ वापस लौटना था, सो मजबूरी में सभी को विदा करना पड़ा. हाँ, इस अल्प काल में जो आत्मीयता सभी में देखने को मिली, उसका कायल हो गया हूँ. सुनील वाणी के सुनील कुमार और अजीत झा भी इस दौरान मौज़ूद थे, चित्र इसकी बानगी है.
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ऊर्जावान युवा हिन्‍दी ब्‍लॉगर नीशू तिवारी को नुक्‍कड़ से कुछ दिनों के लिए अवकाश पर भेजा गया

लोकसंघर्ष को लोकार्पित करते नीशू तिवारी
नीशू तिवारी 
इससे पहले कि नीशू तिवारी को कोई गलतफहमी हो और वे कोई हंगामा मचायें। सबकी जानकारी में यह लाया जाता है कि नुक्‍कड़ ब्‍लॉग की लेखन सदस्‍यता से उन्‍हें कुछ समय के लिए अवकाश पर भेज दिया गया है क्‍योंकि सब परिचित ही हैं कि वे आजकल ऊर्जा सहेजने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। जैसे ही उनमें ऊर्जा का असीम प्रवाह देखा जायेगा, उन्‍हें नुक्‍कड़ से जुड़े हुए अन्‍य किसी ब्‍लॉग का आमंत्रण भेज दिया जायेगा ताकि वे अपनी सक्रियता से इस समूह के किसी हिन्‍दी ब्‍लॉग को लोकप्रियता की ऊंचाईयों तक पहुंचा सकें।

विश्‍वास है कि नीशू तिवारी के प्रशंसक और वे स्‍वयं इसको अन्‍यथा नहीं लेंगे और सहयोग बनाये रखेंगे।
इस आशय की सूचना उन्‍हें ई मेल के जरिए भेज दी गई है। ज्ञातव्‍य है कि प्रिय नीशू तिवारी हिन्‍दी साहित्‍य मंच, मीडिया व्‍यूह, साइबर संसार, शब्‍दकार, नीशू के अल्‍फाज़ ब्‍लॉगों से और महाशक्ति समूह,  जूनियर ब्‍लॉगर एसोसिएशन के संस्‍थापकों में से एक हैं।
श्री गिरीश बिल्‍लौरे 'मुकुल' को उनके स्‍थान पर नुक्‍कड़ से जोड़ा गया है। यह परिवर्तन नुक्‍कड़ में 100 सदस्‍य लेखक पूरे होने के कारण किया गया है। वैसे हमें मांग करनी चाहिये कि ब्‍लॉगस्‍पॉट को सामूहिक ब्‍लॉगों के लेखकों की सदस्‍यता 100 से बढ़ाकर 1000 कर देनी चाहिये। तभी हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का त्‍वरित विकास हो सकेगा।
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