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भारत सरकार 'बाल भवन' का नाम बदलकर 'डॉ. हरिकृष्‍ण देवसरे बाल भवन' घोषित करे

 
'बाल भवन' के दिन 14 नवम्‍बर 2013 को अपनी नश्‍वर देह को त्‍याग बाल साहित्‍य में प्रथम पी.एचडी. लब्‍ध साहित्‍यकार डॉ. हरिकृष्‍ण देवसरे का जाना बाल साहित्‍य की सचमुच में ऐसी क्षति है, जिसकी पूर्ति संभव नहीं है। परन्‍तु 'पराग' मासिक बाल पत्रिका में उन्‍होंने वर्षों तक बाल साहित्‍य के संवर्द्धन के लिए अप्रतिम कार्य किया। बाल साहित्‍य में उनके मौलिक योगदान के कारण सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़ और उसके सम्‍मानित लेखक यह मांग करते हैं कि  भारत सरकार 'बाल भवन' का नाम बदलकर 'डॉ. हरिकृष्‍ण देवसरे बाल भवन' घोषित करे। डॉ. देवसरे को यही सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी जिससे प्रेरणा पाकर बाल साहित्‍य के विकास के लिए और उल्‍लेखनीय कार्य किए जा सकेंगे।
 
- अविनाश वाचस्‍पति एवं नुक्‍कड़ के समस्‍त सम्‍मानित लेखक।
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ढम ढम पोस्‍ट

तानाशाही की परिभाषा को कायदे से कौन परिभाषित करेंगे
ब्‍लॉगर या फेसबुकिए
देख रहे हैं सब लोग।


धमाकेदार पोस्‍ट की तलाश में आए हो
धमाका तो होकर रहेगा
ब्‍लॉगरों और फेसबुकधारकों की जंग
देखते हैं कौन निकलेगा संगदिल।

ऐ मेरे वतन के लोगों
आंख में पानी मत भरो
जो बाढ़ का पानी भरा है
पहले उसे खाली करने का यत्‍न करो।

जय जय ...............

रिक्‍त स्‍थान की आपूर्ति यहां नहीं
नीचे कमेंट में पहुंचकर करें। 
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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग को छोड़ो , सोशल मीडिया से नाता जोड़ो (कविता नहीं सच)


मैं छोड़ रहा हूं अंतर्जाल
मैं मतलब नुक्‍कड़ब्‍लॉगडॉटकॉम
यह मत सोचिएगा कि मौजूद रहेगा
नुक्‍कड़ब्‍लॉगस्‍पॉटडॉटकॉम
जी हां, वह भी नहीं रहेगा
नहीं है जरूरत अब नुक्‍कड़ की
सब मुखिया बनना चाहते हैं
मुख्‍यधारा में बहना चाहते हैं
नुक्‍कड़ किसी को नहीं भाता
इसकी पोस्‍टों पर कमेंट करना नहीं सुहाता
मजबूरी में चले आते हैं
जिससे कोई जानकारी चाहिए हो तो
वह मिल जाए
कुछ नए रास्‍ते हो विचारों के
तो वह खुल जाएं
सब अब गूगल बाबा के पास मौजूद है
मैं दोहराव क्‍यों करूं
समय के साथ बदलूं।

सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्‍व में
अब नहीं है कोई औचित्‍य ब्‍लॉग के बने रहने का
लगता है अब यह इतरा रहा है
फूला नहीं समा रहा है
इसलिए निकाल रहा हूं इसकी हवा
जिसकी नहीं मिलेगी कोई दवा

हां अगर कोई मित्र चाहते हों
यह बचा रहे
इसे भी जीने का
बने रहने का अधिकार है
तो वह इसका हक ले लें
और इसके साथ चाहे जैसे बिहेव करें

सब कुछ करें पर इस हकीकत को पढ़ कर
कमेंट मत करें
जब यह स्‍वचालित पद्धति से
प्रकाशित हो फेसबुक पर
ट्विटर पर, लिंकेदिन पर
या जहां भी यह पढ़ी जाए
तो इसे पढ़कर यूं ही दे सरकाय
जैसे देखा ही नहीं
मतलब करें अनदेखा
लाइक, अनलाइक भी मत करें।

इसे भी महसूस होना चाहिए
कि इसे ढोया जा रहा है
बोया गया था जिसके लिए
वह कार्य संपन्‍न हो चुका है
इसके करने के लिए
अब कुछ नहीं बचा है
इसके दिन बीत गए हैं
सुनहरे थे पहले
अब वह दिन रीत गए हैं।

एक एक करके सारे ब्‍लॉग कर दूंगा बंद
फेसबुक पर मैं भी मजे से विचरण करूंगा
यहां से जो समय बचेगा उसे भी सौंप दूंगा
आपको नहीं , फेसबुक को, ट्विटर को
पिंत्रेस्ट !

तकनीक और बदलाव के साथ बदलना बहुत जरूरी है
जैसे बंद किया गया है तार
जैसे उपयोगिता घटी है लैंडलाइन फोन की
पेजर की, चिट्टी की
वैसे ही ब्‍लॉग उपयोगी नहीं रहे।

अविनाश वाचस्‍पति
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ताज साहित्‍य उत्‍सव 2013 : साहित्‍य की विशेष धारा (विधा) है ‘फायकू’


ब्‍लॉग एवं समाचार पत्र/पत्रिकाएं इत्‍यादि इस समाचार को 'साहित्‍य हित' में प्रकाशित कर सकते हैं। 



आगरा। साहित्य में लोकतंत्र बन रहा है, नयी तकनीक के जरिये। फेसबुक, ट्विटर पर लिखने वाले लेखक किसी खलीफा, किसी मठाधीश से पूछ कर, उससे सहमति स्वीकृति लेकर नहीं लिख रहे हैं। ये नये लेखक प्रयोग कर रहे हैं, ये साहित्य का लोकतंत्र है,जो बन रहा है। ताज साहित्य उत्सव में नयी तकनीक और साहित्य के संबंधों को लेकर व्यंग्यकार, लेखक आलोक पुराणिक ने यह बात कही। आलोक पुराणिक ने कहा कि हो सकता है कि नये मंचों, नये माध्यमों पर जो आये, वह कच्चा हो, सुघड़ ना हो। पर समय की छलनी में छनकर जो कुछ भी सार्थक है, काम का है, बचा रह जायेगा। फेसबुक मठाधीशों को नागवार गुजर रहा है। लेखक कह रहा है, पाठक देख रहा है, बीच के मठाधीश इससे नाराज हैं।

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि हिंदी समाज अपनी भाषा की दुर्गति होते देख रहा है। हिंदी भाषा समेत तमाम भारतीय भाषाओं में वह धमक नहीं है, जो अंग्रेजी की है।  हिंदी के पत्रकार अंग्रेजी के शब्दों का बहुत प्रयोग करते हैं। अंग्रेजी के पत्रकार हिंदी के शब्दों का  उतना प्रयोग नहीं करते हैं। भाषा के साथ यह खिलवाड़ ठीक नहीं है। राहुल देव ने कहा कि अखबारों में जो हिंदी देखने में आ रही है, वह दरअसल हिंदी की हत्या है। राहुल देव भारतीय भाषाओं के भविष्य के प्रति आश्वस्त नहीं हैं। अंग्रेजी की घुसपैठ को उन्होने चिंतनीय माना। 

हिंदी और इंगलिश साहित्य के गहन अध्येता अरविंद जोशी ने कहा कि फेसबुक और ट्विटर पर जो लिखा जा रहा है, वह एक तरह से क्षणभंगुर हो रहा है। हम खानाबदोशों की तरह का लेखन कर रहे हैं।  किसी एक विषय पर,ट्रेंड पर लोग टूट पड़ते हैं। फिर किसी और नयी ट्रेंड की तरफ चले जाते हैं। नयी तकनीक में ऐसा हो रहा है। अरविंद जोशी ने कहा कि नयी तकनीक, नये मंचों को पहचान मिल रही है। विदेशों में इंटरनेट पर लिखे गये साहित्य के लिए अलग पुरस्कारों की व्यवस्था हो रही है। किताबों के बाहर के साहित्य के लिए जगह बन रही है।

महोत्सव के दौरान साहित्य की कसौटी पर सोशल मीडिया के मंचों पर लिखत-पढ़त और सोशल मीडिया की भाषा,सरोकार और उपयोगिता के आयाम विषयों पर चर्चा के दौरान तमाम महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विमर्श हुआ। इस दौरान आई एम फिल्म के सह निर्माता और ब्लू माउंटेन फिल्म के निर्माता राजेश जैन ने कहा कि फेसबुक के जरिए आजकल फंड जुटाया जा रहा है, और उनके जैसे हस्तशिल्प निर्यातक को फेसबुक के जरिए ही फिल्म निर्माता बनने का मौका मिला। यह सोशल मीडिया की उपयोगिता का एक अलग आयाम है। 

देश में हिंदी के शुरुआत के ब्लाग लिखने वालों में से एक प्रतीक पांडे ने कहा कि तकनीक ने लेखन-साहित्य का लोकतंत्रीकरण किया है। अब तो नया साहित्य नया लेखन पंसारी की दुकान करने वाले, पान की दुकान करने वाले भी रचेंगे। लेखन का अभिजातीकरण खत्म हो रहा है। तकनीक ने इसे संभव बनाया है। साहित्य किसी सीनियर आलोचक की बपौती नही है, जो ये लाइसेंस दे कि कौन लेखक और कौन कवि। तकनीक ने हर किसी का  लेखक कवि होना संभव किया है। किसने कैसा लिखा, यह समय तय कर देगा।

वरिष्ठ पत्रकार और सोशल साइट्स के विशेषज्ञ पीयूष पांडे ने चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों को रेखांकित किया। पीय़ूष पांडे ने सोशल साइट्स की भाषा पर सवाल उठाये कि यह नयी भाषा एक नयी दिशा ले रही है। इसमें अनुशासन का अभाव दिखता है। अपनी मर्जी की भाषा इंटरनेट पर लिखी जा रही है। पीयूष पांडे ने कहा कि हालांकि हमें ये भी समझ लेना चाहिए इंटरनेट पर भाषा पर किसी किस्म की बंदिश लगाना तकनीकी तौर पर असंभव है। ऐसी सूरत में हमें रास्ता निकालना है कि कोई इंटरनेट, फेसबुक का अनुचित इस्तेमाल ना कर जाये। पीय़ूष पांडे ने चर्चा के संचालन के दौरान यह कहा कि धीमे धीमे ये सहमति बन रही है कि ये नया माध्यम नये लेखकों के लिए बहुत सकारात्मक साबित हो रहा है। पर इसके खतरों को समझा जाना भी जरुरी है।

वरिष्ठ ब्लॉगर एवं चर्चित व्‍यंग्‍यकार अविनाश वाचस्पति ने कहा कि इंटरनेट फेसबुक पर रचनात्मकता की नयी विधाएं पैदा हो रही हैं। उन्होने एक नयी साहित्यिक विधा ‘फायकू’ का जिक्र किया, जिसमें बहुत थोड़े शब्‍दों में कारगर तरीके से सलीकेदार बात की जा रही है। अविनाश वाचस्पति ने बताया कि नये प्रयोग फेसबुक पर संभव है क्‍योंकि बहुत सस्ते में ही अपनी बात देश विदेश के पाठकों तक रखने की संभावना फेसबुक ने मुहैया कराई  है।

कवि और अहा जिंदगी पत्रिका के फीचर संपादक चंडीदत्त शुक्ल ने अपनी बात जगजीत सिंह की गजल के सहारे से रखी। गजल उद्धृत करते हुए उन्होने कहा कि प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है। श्री शुक्ल ने कहा कि  अभी ये नये माध्यम हैं इन्हे बनने-विकसित होने में वक्त लगेगा।

श्रोताओं की तरफ से एक महत्वपूर्ण सवाल पुनीत पांडे ने पूछा कि अगर कुछ शब्द अंग्रेजी के हिंदी में आ जायें, तो क्या इसे हिंदी का भ्रष्ट होना माना जायेगा। इस सवाल को गंभीर बहस का सवाल मानते हुए कहा गया कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किये जाने की जरुरत है। 


नुक्‍कड़ टीम प्रस्‍तुति।
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'ताज साहित्‍य उत्‍सव 2013' आगरा के नाम साहित्‍य उत्‍सव के मंच से 'फायकू' लेखन विधा सार्वजनिक हो रही है


ताज साहित्‍य उत्‍सव 2013

फायकू क्‍या है : 

अविनाश वाचस्‍पति के अनुसार : 

फायकू साहित्‍य की विधा (विशेष धारा) है। जिस प्रकार साहित्‍य में काव्‍य, कहानी, नाटक, उपन्‍यास, एकांकी, व्‍यंग्‍य इत्‍यादि का आर्विभाव हुआ है, उसी प्रकार फायकू विधा है। इसकी सहज व सरल अभिव्‍यक्ति सब पाठकों को रचनात्‍मकता के अवसर प्रदान कर रही है। यह इतनी सरल विधा है और इस तेजी से विकसित हुई है कि आप भी इसे आजमा सकते हैं। चाहे आप सिर्फ पाठक हैं, फेसबुक पर यह खूब प्रचारित और प्रसारित तथा पसंद की जा रही है। इसे सीखने और लिखने की रचनात्‍मक और सकारात्‍मक कोशिशें न्‍यू मीडिया और सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं। यह विधा निश्चित तौर पर रचनात्‍मकता के संसार में एक नई क्रांति लाएगी। अपनी भावनाओं को सच्‍चाई के साथ जितने लघु स्‍वरूप में रचनाकार अपनी अभिव्‍यक्ति दे सकता है, वही विधा और रचनाकार सफलता के नए सोपान विकसित करता है।

पहले फायकू सप्‍तक में सात रचनाकार हैं, जिनके नाम पुस्‍तक के बैक कवर पर दिखलाई दे रहे हैं।

फायकू सप्‍तक के संपादक अमन कुमार त्‍यागी लिखते हैं : 

HAYKO
में HAY का अर्थ है, सूखी घास।

FAYKO
में FAY का अर्थ है तलछट। 

यह भी सामने आया है कि आयरिश महिलाएं अपने नाम के बाद FAYKO शब्‍द का प्रयोग करती हैं। आयरिश में FAYKO का मतलब TO BLOW, WIND है। रोचकता बनाये रखने के लिए फायकू भले ही हायकू सा लगता हो। मगर इसकी व्‍याकरण हायकू से भिन्‍न है। फायकू का संबंध संगीत से भी है, मगर यहां प्रस्‍तुत विधा का नाम मात्र ही विदेशी प्रतीत होता है, जबकि यह पूर्णत: नवोदित व भारतीय है। फायकू समुचित रूप से समर्पण का भाव है। 


फायकू की व्‍याकरण :

प्रथम पंक्ति में चार शब्‍द अनिवार्य हैं, जबकि दूसरी पंक्ति में तीन और अंतिम पंक्ति में मात्र दो। अंतिम पंक्ति के लिए दो शब्‍द 'तुम्‍हारे लिये' हैं। इन्‍हें रचनाकार अपनी रुचि के अनुसार तय कर सकते हैं। 'तुम्‍हारे लिये' बदलकर अगली बार संभवत: 'हमारे लिये' हो जबकि इसमें स्‍वार्थी भाव नहीं रहेगा। यह एक मिसाल है :


अविनाश वाचस्‍पति के कुछ लोकप्रिय फायकू : 

बरसात में ओढ़ी छतरियों 
पर शहर बसाए
तुम्‍हारे लिये। 

विज्ञान से हटायेंगे गरीबी
सबके पीएम सिर्फ
तुम्‍हारे लिये। 

मौसम बरफ हो रहा
बरफी हो जाये
तुम्‍हारे लिये। 

खा लिए अखरोट बादाम
पूछ लूं दाम
तुम्‍हारे लिये। 

करतूतें महाबालिग की करूं
मैं नाबालिग हूं
तुम्‍हारे लिये।


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ताज साहित्‍य उत्‍सव 2013 : 1 से 3 फरवरी 2013 तक आगरा में आयोजित किया जा रहा है

इमेज को  डाउनलोड करके सेव करें और पूरे आकार में पढ़ें 

ताज साहित्‍य उत्‍सव 2013 

उपर लिंक पर क्लिक करके पूरी जानकारी लें।
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पॉर्न वीडियो के खिलाफ सख्‍त कानून बनाने की जरूरत है


डीएनए 23 जनवरी 13 पेज 8 
आप मथुरा या राजस्‍थान अथवा ऐसी जगहों पर जहां पर गली-गली में मंदिरों में भगवान बसते हैं, में ऐसा कुकर्म करके क्‍या संदेश समाज को देना चाह रहे हैं। जबकि ऐसे कुकर्म समाज में कहीं पर भी स्‍वीकार्य नहीं हैं। चोरी छिपे पॉर्न वीडियो बनाना और उन्‍हें साइटों पर अपलोड करके धन अर्जित करना समाज के लिए तो घातक है ही, जिनकी ऐसी वीडियो बनाई जाती हैं, उन्‍हें काफी शर्मिन्‍दगी का सामना करना पड़ता है। जबकि यह कुकर्म इंटरनेट तकनीक की देन है। तकनीक और विज्ञान ने  मनुष्‍य के जीवन को काफी ऊंचाईयां दी हैं और समाज का विकास हुआ है परंतु आरंभ से ही तकनीक और विज्ञान के नुकसान समाज को होते रहते हैं। अब जो हो रहा है वह तकनीक के कारण नए नुकसानों में से है। अभी पिछले दिनों बलात्‍कार के दुष्‍कर्मियों को सख्‍त सजा देने की मांग, प्रत्‍येक जायज तरीके से और खूब जोर शोर से मोमबत्तियां जलाकर जनता कर चुकी है, इस क्षेत्र में अनेक विभागों में सकारात्‍मक कदम उठाए भी गए हैं।

अब समय आ गया है कि वैसी ही डिमांड आप सबको पॉर्न वीडियो संबंधी मामलों पर रोक लगाने के लिए भी करनी चाहिए। यह कोई अच्‍छी बात नहीं है कि पॉर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट साइटों पर अपलोड कर दी जाती है और लाखों लोगों उसे देखते हैं, जिनके निजी पलों को इस प्रकार सार्वजनिक किया जाता है, वे जीवित हैं और समाज में रह रहे हैं। वे हों अथवा न हों परंतु ऐसे दुष्‍कर्मियों को सजा अवश्‍य दिलवाई जानी चाहिए।  अगर किसी भी प्रकार का पापकर्म हुआ है तो उसके लिए सख्‍त सजा दी ही जानी चाहिए। समाज में दुष्‍कर्म की जितनी घटनाएं होने लगी हैं जबकि उनमें से कितनी ही घटनाएं तो तकनीक की वजह से बढ़ गई हैं और उनके लिए अभी तक सजाएं भी तय नहीं की जा सकी हैं। इससे साबित होता है कि कानून बनाने वाले और उन्‍हें लागू करवाने वाले तकनीक के मुकाबले बहुत ही धीमी गति से अपना कार्य कर रहे हैं। तकनीकी खरगोश के जमाने में कछुआ गति ठीक नहीं कही जा सकती है। बल्कि वे डाल-डाल चलते हैं तो आपकी पात-पात चलने की जिम्‍मेदारी बनती है, न कि पेड़ देखा और अनदेखा करके साइड से खिसक लिए।

ऐसी व्‍याधियां हमारी नौकरशाही की वजह से कैंसर बन जाती हैं और तब हम उनकी चिकित्‍सा करनी शुरू करते हैं। इन बीमारियों का होना दरअसल इंसान का मानसिक रूप से विकृत होना है।  जितनी तेजी से तकनीक पर विजय पाई जा रही है और उससे समाज को नफा हो रहा है,  उससे भी अधिक तेज गति से मानसिक विकृतियां पैदा हो रही हैं और इनसे मुकाबला करने के लिए हम तैयार नहीं हैं या हमने मन नहीं बनाया है। तो दोषी तो हम भी हुए न। इस प्रकार से आर्थिक लाभ कमाना ठीक नहीं है परंतु आज विलासी जीवन जीने के लिए बेहिसाब धन चाहिए और उस धन को हासिल करने के लिए गंदी मनोवृति।  इसलिए धन कमाने के लालच में यह कुकर्म किए जा रहे हैं।

एक और कुप्रवृत्ति जो देखने में आ रही है कि आपसी संबंधों में दहेज की डिमांड पूरी न होने पर एक पति ने अपनी पत्‍नी की ही वीडियो और फोन नंबर इंटरनेट पर डाल दिया, क्‍या इस दुष्‍कर्म के लिए पति को सम्‍मानित किया जाना चाहिए। अगर नहीं तो कानून कड़े होने चाहिए जिससे डर कर अन्‍य लोग इस मनोवृति को अपनाने से बचें। कुछ प्रेमी शारीरिक हवस पूरी करने के लिए इस कदर गिर जाते हैं कि वे अपनी तथाकथित प्रेमिकाओं के आपत्तिजनक वीडियो और एमएमएस बनाकर बांट देते हैं।

ऐसे अपराधियों की नंगी फोटो इंटरनेट पर डाल दी जानी चाहिए। जिससे ये लोग शर्म महसूस करें और समाज में अपनी पहचान बतलाने से भी डरें। ये जिस व्‍यवसाय अथवा नौकरी में हैं तो इसकी सूचना वहां पर भी आवश्‍यक तौर पर दी जानी चाहिए जिससे इन्‍हें वहां से तुरंत बर्खास्‍त कर दिया जाए। इसके साथ ही जेल भेजने व अन्‍य कड़ी सजाएं देने का भी प्रावधान होना चाहिए। यह नहीं कि इन्‍हें आम मामलों की बढ़ने दिया जाता रहे। कोई कार्रवाई न होना या देर से होना इस प्रकार की घटनाओं की बढ़ोतरी में सहायक होता है।

समाज में इनके खिलाफ जागृति लाने के लिए तेजी से अभियान चलाने की जरूरत है। आप जिस प्रकार भी इस प्रकार के मामलों को रोकने में सहायक बन सकते हैं, आपको तुरंत अपने-अपने स्‍तर पर कारगर कदम उठाने चाहिए, यही समय की मांग है।

अगर आप महसूस करते हैं कि इस पोस्‍ट को साझा किया जाना चाहिए, तो सिर्फ सोचते मत रहिए, कमेंट देने से जरूरी इसे साझा करना है। 
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ढंग के इस बेढ़गे ढंग को बंद करो जी


आज मोहब्‍बत बंद है’ गीत फिजा में गूंज रहा है जबकि कल भारत बंद था। भारत बंद होने पर मोहब्‍बत पर तो अपने आप ही लॉक लग जाएगा। गीत का सकारात्‍मक संदेश है कि मोहब्‍बत बंद हो सकती है लेकिन हिंसारक्‍तपातखून खराबामारपीटी शुरू होने के बजाय महंगाई बंद होनी चाहिए। इसके विपरीत भारत बंद हुआ क्‍योंकि महंगाई ने नंगपना मचा रखा हैजिसमें नाच देखने वालों और नाचने वालों में नेताओं के शागिर्द होते हैं। इन्‍हें आप भाईजीगुंडेबाउंसरसक्रिय कार्यकर्ता इत्‍यादि नामों से पहचानते हैं। बहरहाल, सच्‍चाई यह है कि धरती का आधार प्रेम है। प्रेम से ताकतवर कुछ नहीं है। प्रेम के बिना झगड़े भी नहीं है। किसी से प्रेम होगा तो किसी से उसी प्रेम के लिए झगड़ा भी होगा। यही इस सृष्टि का सनातन सत्‍य है।

भारत बंद महंगाई रूपी बुराई को हटाने के लिए प्रेम का शक्ति प्रदर्शन है। महात्‍मा गांधी ने अनशन का रास्‍ता अपनाया। बे-सत्‍ता वालों ने भारत बंद का। भारत बंद के लिए किसी भारत घर की व्‍यवस्‍था नहीं है। काले धन की तरह इसे किसी विदेशी भूमि पर बंधक नहीं बनाया जा सकता है। चिडि़याघर काफी लंबे चौड़े होते हैं लेकिन उसमें से चिडि़यों को बाहर निकालेंतब भारत को बंद करने की सोचें। परंतु चिडि़याएं कौओं के लिए अपना घर खाली करने से रहीं। व्‍यंग्‍यकार का कवि मन कह रहा है कि वे प्रतीक तौर पर भारत बंद का शोर मचाते हैं। करते तो हों दुकानें बंदमार्केट बंदआफिस बंदयातायात बंदसिनेमा हाल बंद और चिल्‍लाते हैं कि कर दिया भारत बंद। माना कि भारत दुकानों में बसता है और दुकानों में सर्वसुखदायक करेंसी नोट। न्‍यू मीडिया पर अभी सरकार का ही बस नहीं चल रहा है। जबकि सरकार ने घोषणा कर दी है कि ‘न्‍यू मीडिया’ को बंद करने के लिए वे तत्‍पर हैं। अच्‍छी चीजें बंद और बुरी रखें खुली।

भारतभारत न हुआ कोई गुनहगार हो गया या दिल्‍ली ने जुर्म किया है, इसे तुरंत हिरासत में बंद कर दो। पेट्रोल के रेट कैसे बढ़ाएसीएनजी के रेट क्‍यों बढ़ाएडीजल में कीमतों का तड़का क्‍यूं लगाया, कीमतों को बंद नहीं करके रखा इसलिए भारत या राजधानी दिल्‍ली को तो बंद होना ही होगा। बंद करना है तो पुलिस के अत्‍याचारोंब्‍यूरोक्रेसी में भ्रष्‍टाचार फैलाने वालों,अच्‍छाईयों के दुश्‍मनों को करो। उन पर आपका बस कहां चलता है। वहां पर तो आप सिरे से पैदल चलना शुरू कर देते हैं। भारत बंद का शोर मचाते हैं और बुरे विचारों पर लगाम नहीं लगा पाते। दिल्‍ली बंद करते हैं परंतु दिल में से काले धन और कोयले के साक्षात दीदार हो रहे हैं।

सचमुच में बंद करने का इतना ही मन है तो कन्‍या भ्रूण हत्‍या को करोप्रसव पूर्व लिंग जांच को करोमिलावटी दवाईयों को करोक्‍या आप नहीं जानते कि एक चूहे को चूहेदानी में बंद करने के लिए भी कितनी मशक्‍कत करनी होती है। भारत बंद करने का आशय देश की सक्रियता को किडनैप करके देश को नुकसान पहुंचाने से है। मैं तो नहीं चाहता कि बंद रूपी ग्रहण का वायरस  मोहब्‍बत या भारत को लगेमहंगाई को यह कैंसर की मानिंद जकड़ लें, आप भी कुछ ऐसा ही महसूस कर रहे हैं क्‍या ?
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परिकल्‍पना सम्‍मान से पहले अन्‍नाबाबा बोल गए

अस्‍सी वर्षीय अन्‍नाबाबा अपने अंतिम पैग को ग्रहण करते हुए
मैं अन्‍नाबाबा के लेपटाप का ऑटोमैटिक कंप्‍यूटर साफ्टवेयर हूं

अन्‍नाबाबा के सभी  मित्रों को बाबा के सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़ से

सूचित कर रहा हूं कि

आज दिन दहाड़े दारूपान के चलते बाबा बोल गए

अब क्‍या बोल गए कार्यक्रम के अतिरिक्‍त कहीं
यह डाटा फीड नहीं हो पाया

बाबा ने अपने पुनर्जन्‍म के लिए तिथि भी बतलाई है

पर वह संदिग्‍ध है

अन्‍नाबाबा के एक प्रशंसक ने उनके जाने से पहले
की अस्‍सी वर्षीय छवि को याददाश्‍त में कैद कर लिया


वह स्‍कैचचित्र बनाकर भिजवाया है

उनके खास मित्रों को टैग किया जा रहा है

जिनके लिए बाबा ने वसीयत में लिखा था


आज सांय चार बजे से उनकी श्रद्धांजलि सभा का
आयोजन नुक्‍कड़ पर किया गया है

आप सब इसमें जबर्दस्‍ती आमंत्रित हैं

बे-आमंत्रित, बे-टैग मित्र/दुश्‍मन भी आकर

अपने बेबाक विचार प्रकट कर सकते हैं

जिनका बाद में प्रिंट आउट निकाल कर

स्‍वर्गीय/नरकीय अन्‍नाबाबा के पास

भिजवा दिया जाएगा

उनकी यादों, स्‍मृतियों, संस्मरणों का एक
अभिनंदन ग्रंथ भी प्रकाशित करवाया जाएगा

जिसे सभी को नि:शुल्‍क भिजवाया जाएगा


अन्‍नाबाबा की ऐसी ही तमन्‍ना थी।
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हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को दिए गए परिकल्‍पना सम्‍मान समारोह रद्द

नुक्‍कड़ पर इस बेतरह गर्मी में महाकुंभकर्णी नींद लग गई। इतनी भयंकर गर्मी में नुक्‍कड़ पर गर्म हवाओं की चपेटों के बीच नींद लेना वाकई एक कला है। लेकिन इस नींद में चकाचक गर्मी में भी ख्‍वाबों ने आना नहीं छोड़ा। ख्‍वाब झूठे होते हैं पर नींद में आए नींदचलचित्र कुछ अच्‍छे होते हैं। मानो सूचना जारी हो। आंखें लग रही थीं मानो बंद आंखों से परिश्रम किया जा रहा हो। 

ख्‍वाब में जो नींदचित्र दिखलाई दिया उसमें रचनात्‍मक कारीगरी पवित्र पूजारंभ के बाद सबसे पहले परदे पर प्रभात की मानिंद रवीन्‍द्र जी गोचर हुए। हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में रवीन्‍द्र वही हैं, जिन्‍होंने परिकल्‍पना सम्‍मान को वास्‍तविकता का जामा पहनाकर कमाल कर रखा है। सबसे पहले उन्‍होंने हाथ जोड़कर सबको अभिवादन करते हुए घोषणा की कि आप सबकी भावनाओं की कद्र करते हुए मैंने तय किया है कि पिछले वर्ष प्रदान किए गए परिकल्‍पना सम्‍मान वापिस लेने के लिए अभियान चलाऊं। इसमें आप सब ब्‍लॉगरों को तन और मन से भरपूर सहयोग देना होगा क्‍योंकि जो गत् वर्ष सम्‍मानित हिंदी ब्‍लॉगर अपना सम्‍मान पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि वापिस नहीं देना चाहें, उन्‍हें हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत के पहलवान ब्‍लॉग बाऊंसर और बाऊंसरनियां छीन झपेट कर वापिस ले आएं। छीना झपटी से हासिल सभी सम्‍मानों को तुरंत प्रभाव से रद्द करके, दोबारा से बाऊंसर ब्‍लॉगर और ब्‍लॉगरानियों को नए रूप स्‍वरूप में जारी कर दिया जाएगा।

इनका वितरण उन सभी से करवाया जाएगा जिन्‍होंने इस बार किसी भी रूप में 'परिकल्‍पना सम्‍मान समारोह' में विवाद के जरिए नि:शुल्‍क प्रचार किया है।  कार्यक्रम सम्‍मान पाने वाले ब्‍लॉगर और ब्‍लॉगरनी के आवास पर संपन्‍न कराया जाएगा। जिसमें सख्‍त ताकीद की जाएगी कि समारोह में शामिल होने वाले अपने खर्चे पर चित्र एवं वीडियोग्राफी संपन्‍न करवाएंगे। जो सम्‍मान पाने वाले और समारोह में शामिल होने वालों के पेट में चूहे कूद रहे हों, वे अपने लिए जलपान, चाय, नमकीन और यदि दारूपान में यकीन रखते हों तो सभी व्‍यवस्‍था खुद करके आएं। उन्‍हें एक पुरातन ब्‍लॉगर बनाम नवीन प्रकाशक के छत पर कड़ी धूप में सेवन के लिए स्‍थल की व्‍यवस्‍था एकमुश्‍त भुगतान पर उपलब्‍ध कराई जा सकेगी। जिस तक पहुंचने के लिए वाहन इत्‍यादि की जिम्‍मेदारी पेट में कूद रहे चूहों और अपने लिए उनकी स्‍वयं की होगी। 

विशेष : इसमें आप जो सोच रहे हैं, वही चिर-परिचित किरदार हैं और उनका संपूर्ण हिन्‍दी ब्‍लॉग संसार की वास्‍तविकता से सीधा संबंध है। इसे मज़ाक मत समझिएगा क्‍योंकि ब्‍लॉग जगत में किसी को मजाक पसंद नहीं है।

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सारे हिंदी ब्‍लॉग कर रहा हूं बंद, फेसबुक पर टिप्‍पणियां मिलती हैं दे दनादन

जी हां
सोच तो यही रहा हूं
नुक्‍कड़ से हो रही है परेशानी
बढ़ नहीं रही है उनकी कहानी
दीवानी नहीं हो रही है जवानी

विचार यही बन रहा है
सारे ब्‍लॉग अब कर दूं बंद
फेसबुक पर मिलती हैं टिप्‍पणियां
और हो रही है खूब कमाई
फिर यहीं पर क्‍यों
उलझा रहूं भाई

या दूं बेच
बंद करते  करते
माल बटोर लूं
या दान ही कर दूं
लोकप्रिय होने के लालची
हिंदी ब्‍लॉगरों को
बिना किए धरे जो चाहते हैं नाम
रूतबा, पैसा और शब्‍दों का जादू ।

कितने ही हैं फरियादी
फरियाद उनकी पूरी कर दूं
छोड़ दूं ब्‍लॉग का जीवन
फेसबुक का जंगल अपना लूं
मैं तो उलझ गया हूं
आप ही निर्णय लेने में मदद करें
वैसे मानूंगा नहीं किसी की
बदनाम हूं इसी बात के लिए
बुराई पसंद आती नहीं है
जान तक लड़ा देता हूं
अच्‍छाई के लिए।

फिर भी न जाने क्‍यों
बच जाती है जान
अभी  देवताओं के यहां
नहीं खुले हैं ब्‍लॉग
इसलिए बुलावा नहीं आया है
लेकिन आने वाला है
अन्‍य लोकों पर भी
हिंदी ब्‍लॉगिंग का भविष्‍य
अब स्‍वर्णिम दिखाई दे रहा है।

आपको यह अजीब अजीब सा
क्‍या अहसास हो रहा है ?
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हर नुक्‍कड़ पर आग लगी है, हाथ सेकने चलते हैं : चौराहा, मोहल्‍ला और कस्‍बा

नुक्‍कड़ नुक्‍कड़ आग लगी है
सर्दी में आग अच्‍छी  भली  है

अविनाश वाचस्‍पति नुक्‍कड़
आज लोहड़ी है, संक्रांति है
आज नहीं तो कल
मत हो बेकल
शुभ की कामना कर
होकर अविचल
नेकी कर कुंए में मत डाल
कुंआ कहां ढूंढेंगा
मिलेगा नहीं
इसलिए नेकी कर
भूल जा
सारा जहां है अच्‍छा।

आग लगी है
जी आग लगी है
जी में आग लगी है
2 जी में आग लगी है
3 जी में आग लगी है
4 जी में आग लगेगी
जी को अपने बचा

चंडीदत्‍त शुक्‍ल चौराहा, राह बंद है
नेकी कर
दरिया में डाल
दरिया भी न मिले
तो दिल को बना दरिया
उस दरिया को मान ले दरी
और बिछा ले
हर नुक्‍कड़ पर
चौपाल जमा
हर चौराहे पर
एक चौराहे पर मिलेंगे
चंडीदत्‍त शुक्‍ल
वह कहेंगे अहा जिंदगी
मौहल्‍ले पर बिछा
वहां मिलेंगे
अविनाश दास मोहल्‍लालाइव
अविनाश दास
होंगे उदास
मोहल्‍ले में न हो हल्‍ला
तो भरेगा कैसे गल्‍ला
गल्‍ला जो नोटों का नहीं
विचारों का है
कस्‍बे पर आ
रवीश कुमार मिलेंगे
टीवी पर विचार तापते मिलेंगे

नुक्‍कड़
चौराहा
मोहल्‍ला
और
कस्‍बा
रवीश कुमार कस्‍बाधारक
मिलकर बनता है
सुखद जहां
जहां में रहता है इंसान
इंसान को हैवान मत बना
इंसान ही रहने दे

शुभ कामनाएं चाहे मत दे
पर शुभ कर्म में कमी मत रहने दे
आग की ताप में नमी मत रहने दे
ताप ले
ताप दे
विचारों का प्रताप दे।
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पटौदी चले गए

नुक्‍कड़ का नमन
मौन श्रद्धांजलि।

कार्यों का बखान
सब कर रहे हैं
हम उन्‍हें पढ़
मान रहे हैं।
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हिंदी ब्‍लॉगिंग में यह क्‍या हो रहा है ?

प्राय: दूसरों का विश्लेषण करना और उनके व्यक्तित्व को श्रेणियों में वर्गीकृत करना सरल होता है . अपने आप को सच्ची ईमानदारी के साथ उसी विश्लेषण के प्रकाश में देखना प्राय: कठिन मालूम पड़ता है , ऐसा मैंने कई बार महसूस किया है . उसी के विपरीत जब आप समूह को आयामित करने की दिशा आगे कदम बढ़ाते हैं तो आपके  कदमों के समानांतर हजारों-लाखों कदम अपने आप आगे बढ़ने लगते हैं , इसी को कहते हैं सामूहिक शक्ति . इसी सामूहिक शक्ति को ब्लॉग से जोड़कर हिंदी साहित्य निकेतन,परिकल्पना समूह और नुक्कड़ डॉट कॉम ने कल शनिवार 30 अप्रैल को एक बड़े आयोजन को मूर्त रूप देने हेतु संयुक्त रूप से अपने  कदम बढाएं और इसकी चर्चा सर्वत्र हो रही है , इसकी एक बानगी आप यहाँ देखिये :

आज तो मेरी ही चर्चा है चहुं ओर

दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में आज दिनांक २९.०४.२०११ को प्रकाशित पीयूष पांडे का विस्तृत विवेचन हिंदी ब्लॉग सम्मलेन के बहाने 
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सवा लाख एक और ग्‍यारह हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को सम्‍मानित कर रहा है नुक्‍कड

http://www.nukkadh.com/
आप सोच रहे होंगे
सवा लाख हिंदी ब्‍लॉगर
हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में हैं
फिर तो जी बल्‍ले बल्‍ले

हैं जरूर
बस मन में झांकिए हुजूर
फिर बतलाइये
ग्‍यारह की तो कर दी है घोषणा
सवा लाख एक की कर देंगे

पर पहले सवा लाख
उन हिंदी ब्‍लॉगरों का नाम
पूछ रहे हैं हम

इसे पहेली मान लें
और अगर हम ठान लें
तो दो बरस में ही
हो जाएगी तमन्‍ना पूरी

पहले पहेली करिए जी पूरी।
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कथादेश के मीडिया विशेषांक से ध्वस्त होती कई परम्पराएँ


कथादेश के मीडिया विशेषांक से ध्वस्त होती कई परम्पराएँ: "कथादेश का मीडिया विशेषांक - राडिया का अंधेरा है तो विकिलीक्स का उजाला भी

यह खालिस पत्रकारिता है. बिलकुल रॉ. कोई लाग लपेट नहीं. बिलकुल सीधी. खरी – खरी, सपाट, नंगी. यह विकीलीक्स की पत्रकारिता है. यह उस व्यक्ति की पत्रकारिता है, जिसने कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया और नेताओं, अफसरों और पत्रकारों की बातचीत के टेप यूट्यूब और फेसबुक पर डाल दिए. जिसे डाउनलोड करके कई लाख लोगों ने राडिया टेप के बारे में जाना, जबकि पांच महीने तक मुख्यधारा का प्रेस और चैनल इन टेप पर बैठे थे और इनके बारे में एक शब्द भी बोलने – बताने को तैयार नहीं थे.

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माताजी निर्मला देवी नेक मन के नुक्‍कड़ पर मौजूद रहेंगी

ध्यान के रूप ‘सहज योग’ का पूरे विश्व में प्रसार करने वाली माताजी निर्मला देवी का निधन हो गया। माताजी निर्मला देवी सहज योग न्यास ने कहा है कि 88 वर्षीय माताजी ने जेनेवा में अंतिम साँस ली।

माताजी का जन्म साल 1923 में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार में हुआ था और उन्होंने आजादी की लड़ाई में भाग लिया था। बाद में उन्होंने विश्व निर्मला धर्म की स्थापना की और सहज योग की प्रणेता बनीं।

न्यास ने बताया कि माताजी का सहज योग 120 देशों में प्रचलित है। उनके निधन के बाद विश्व भर में फैले उनके अनुयायियों ने गहरा दु:ख व्यक्त किया है।

नुक्‍कड़ परिवार की विनम्र श्रद्धांजलि।
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परिधि आर्ट ग्रुप ने सोलह शख्सियतों को सम्‍मानित किया


नई दिल्ली। परिधि आर्ट ग्रुप के 25 वर्ष पूरे होने परपरिधि एचीवर्स अवार्ड का आयोजन किया गया। भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी को समर्पित इस आयोजन में राजस्थानी लोक गीतों, कथक-नृत्य, नाटक व सूफी गायन की प्रस्तुतियां हुई।
समारोह में अरविंद केजरीवाल को सूचना का अधिकार जैसी व्यस्था को देश भर में स्थापित करने के लिए देश के नाम अवार्ड दिया गया। किरन बेदी को उपेक्षित महिलाओं के उत्थान के लिए किये गए उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्व शांति अभियान के सूत्रधार महामंडलेश्वर श्री श्री सोहम बाबा , लोकप्रिय टीवी व फिल्म अभिनेत्री जोयश्री अरोड़ा, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्युट ऑफ इंडिया के निदेशक व कवि- साहित्यकार पंकज राग, वरिष्ठ आईएस अधिकारी व लेखिका लीना महेंडले, कवयित्री सविता सिंह, प्रवासी भारतीय संस्कृतिकर्मी धनंजय कुमार, कवि-साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, सूफी कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी, प्रसिद्ध चित्रकार कृष्ण कन्हाई, समाजसेवी ग्रेस अशोक ठक्कर, मूर्तिकार सुशील सखूजा, यंग एचीवर सुशील बदरवाल, पवन कौशिक व पवन कार्टूनिस्ट को कला, संस्कृति, साहित्य व समाज में अपने विशिष्ट योगदान के लिए परिधि आर्ट ग्रुप द्वारा सम्मानित किया गया।
समारोह में युवा नृत्यांगना अरूषी निशंक द्वारा शिवस्तुति पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति हुई तो दूसरी तरफ बालीवुड का लोकप्रिय युवा गायक ऐश्वर्य निगम ने अपने गीतों से कार्यक्रम में समां बांध दी। अकबर-आजम द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक फ्यूचर बाजारने आने वाले समय की एक झलक उपस्थित की तो दूसरी तरफ अरविंद गौड़ के नाटक ‘इंटरफेथ ’ ने समकालीन विषयों को सहज संवादों में लोगों के दिलों तक पहुंचाया। पूरे कार्यक्रम का संगीत नेत्रहीन कलाकारों की मंडली ने दी। कंचन, अनंत और राजू के ग्रुप ने अपने धुनों से कार्यक्रम को संगीतमय बनाने के साथ-साथ दर्शकों के सामने एक आदर्श भी स्थापित किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुदगल, राजी सेठ, कवि पंकज सिंह, दार्शनिक प्रो. रिपुसूदन श्रीवास्तव, संस्कृति कर्मी अनिल जोशी, वरिष्ठ रंगकर्मी सलिम आरिफ, सांसद अर्जुन राय, प्रसिद्ध उद्योगपति सतेन्द्र कुमार जैन सहित कला- संस्कृति से कई जानी-मानी हस्तियां उपस्थित थीं।
संस्था के अध्यक्ष निर्मल वैद ने कहा कि 25 साल के इस सांस्कृतिक सफर में कला-संस्कृति को बेहतर तरीके से प्रमोट करने के लिए हमने नाटकों का सहारा लिया। नुक्कड़ नाटक से लेकर बच्चों के लिएथियेटर वर्क शॉपके आयोजन के माध्यम से परिधि आर्ट ग्रुप की शुरूआत हुई थी।
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