हिंदी ब्‍लॉगिंग में यह क्‍या हो रहा है ?

प्राय: दूसरों का विश्लेषण करना और उनके व्यक्तित्व को श्रेणियों में वर्गीकृत करना सरल होता है . अपने आप को सच्ची ईमानदारी के साथ उसी विश्लेषण के प्रकाश में देखना प्राय: कठिन मालूम पड़ता है , ऐसा मैंने कई बार महसूस किया है . उसी के विपरीत जब आप समूह को आयामित करने की दिशा आगे कदम बढ़ाते हैं तो आपके  कदमों के समानांतर हजारों-लाखों कदम अपने आप आगे बढ़ने लगते हैं , इसी को कहते हैं सामूहिक शक्ति . इसी सामूहिक शक्ति को ब्लॉग से जोड़कर हिंदी साहित्य निकेतन,परिकल्पना समूह और नुक्कड़ डॉट कॉम ने कल शनिवार 30 अप्रैल को एक बड़े आयोजन को मूर्त रूप देने हेतु संयुक्त रूप से अपने  कदम बढाएं और इसकी चर्चा सर्वत्र हो रही है , इसकी एक बानगी आप यहाँ देखिये :

आज तो मेरी ही चर्चा है चहुं ओर

दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में आज दिनांक २९.०४.२०११ को प्रकाशित पीयूष पांडे का विस्तृत विवेचन हिंदी ब्लॉग सम्मलेन के बहाने 

10 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लोगिंग और सोशल नेट्वर्किंग चाहे फेसबुक हो या फिर ट्विटर उनकी एक तराजू में नहीं तौला जा सकता है. दोनों के क्षेत्र अलग अलग हैं. सेलिब्रिटी की सोशल नेट्वर्किंग अलग है. ब्लोगिंग जरूरी नहीं किसी सेलिब्रिटी के द्वारा ही की जाय.

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  2. हिन्दी ब्लागिंग के भविष्य के प्रति सार्थक सोच...

    वाकई आज की प्राथमिक आवश्यकता है ।

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  3. सार्थक चिंतन..........अच्छे सुझाव

    हिंदी ब्लागिंग के क्षेत्र में यह आयोजन मील का पत्थर साबित होगा |

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  4. bahut shandaar chintan aur manan..
    safas aayojan ke liye haardik shubhkamnayen..

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  5. ब्लाग्स बहुत सशक्त माध्यम हैं अभिव्यक्ति का..

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  6. बहुत बढ़िया..ये आयोजन बेहद सफल रहेगा और इसके बाद ब्लोगिंग एक नए व प्रभावी तरीके से अपनी पहचान जन-जन की आवाज बनकर बनाएगा...ब्लोगिंग का भविष्य उज्जवल है..

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  7. badhiya report..blogging ka swrnim daur chal raha hai..aur ham sab ko aur aage le jana hai..

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