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ब्‍लॉगवाणी और चिट्ठाजगत एग्रीगेटरों के आगमन की सच्‍चाई

अगर यह सच है कि
ब्‍लॉगवाणी और चिट्ठाजगत एग्रीगेटर का पुन: अवतरण हो रहा है
सोच रहा हूं
ब्‍लॉग और चिट्ठों पर हो रहे घमासान
युद्ध मान लेते हैं
का क्‍या होगा ?


चिट्ठाजगत आए
या आए ब्‍लॉगवाणी
आओ मिलकर फैसला करें
पाठकवाणी
ब्‍लॉगजगत के वासी।


अपनी राय दें
क्‍या चाहते हैं
क्‍या हो
क्‍या न हो
खामियां क्‍या पहले रहीं
अब जो चाहते नहीं ।


वह भी अवश्‍य बतलाएं
तनिक न शर्माएं
जिससे बाद में
न उलझें उलझाएं।


सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है सूरत यह बदलनी चाहिए। 
एक फेमस कवि की पंक्तियां। 
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क्‍या ब्‍लॉगवाणी और चिट्ठाजगत को सक्रिय करने की कोशिशें शुरू की जानी चाहिएं ???

यदि आप इस प्रश्‍न का उत्‍तर 'हां' में देना चाहते हैं तो सबसे पहले इन दोनों एग्रीगेटरों में से एक पर अपनी पूरी सहमति दीजिए और आप शनिवार 24 दिसम्‍बर 2011 को अंतरराष्‍ट्रीय सांपला चिट्ठा संगोष्‍ठी में शिरकत कर रहे हैं तो इस मुद्दे पर पूरी गंभीरता से विचार विमर्श कीजिए और एक नेक राह निकालिये। 

आप परिचित ही हैं कि इस चिट्ठा संगोष्‍ठी में चिट्ठा जगत के बेताज बादशाह शामिल हो रहे हैं। जिनमें अलबेला खत्री, राज भाटिया, ललित शर्मा, संगीता पुरी, अन्‍तर सोहिल, राजीव तनेजा, रूपचंद शास्‍त्री, दिनेश राय द्विवेदी,   योगेन्‍द्र मौद्गिल, वीरु भाई, शाहनवाज, खुशदीप सहगल और सतीश सक्‍सेना जी इत्‍यादि प्रमुख हैं। इसलिए कोई वजह नहीं बनती कि संगोष्‍ठी में चिट्ठा जगत के उन्‍वान के लिए फैसला लिया जाए और उस पर अमल करने में कोई कठिनाई हो। 

और कोई निर्णय हो, न हो, कोई बात हो, न हो लेकिन इस संबंध में लिए गए फैसले के बहुत ही दूरगामी परिणाम सामने आयेंगे। इसलिए संगोष्‍ठी में भाग लेने वाले चिट्ठाकार इस अवसर को मत गंवाइयेगा क्‍योंकि इस तरह सबके मिल बैठने और फैसले लेने के मौके बहुत कम ही आते हैं। मेरी इस संबंध में लिए गए सभी प्रकार के निर्णय में सहमति समझी जाए। 

एक बहुत ही अच्‍छी खबर का हिन्‍दी चिट्ठाजगत इंतजार कर रहा है। उसे निराश मत कीजिएगा अलबेला खत्री और टीम जी।
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दैनिक जनसंदेश टाइम्‍स ऑनलाईन उपलब्‍ध है : लापरवाही न करें सुबह ही पढ़ लें


जी हां
पर क्लिक करें
और अपने फेवरिट में जोड़ लें
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आठ नंबर पन्‍ना
बुधवार यानी कल
ब्‍लॉगवाणी है
इसे सभी ब्‍लॉगर साथी
और अन्‍य पाठक पढ़ सकते हैं

आप भी पढि़ए
ब्‍लॉग्‍सइनमीडिया भी ध्‍यान दे
इसका लिंक सेव कर ले।

अभी इसके पिछले दिनों के अखबार नेट पर नहीं पढ़े जा सकते हैं लेकिन कार्य चल रहा है और शीघ्र ही आर्काइव में पढ़ा जा सकेगा।
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ब्‍लॉगवाणी पर नापसंद की गई पोस्‍टों को भी अलग से दिखलाया जाना चाहिए

इस पोस्‍ट पर नापसंद का चटका अवश्‍य लगाएं और नापसंदगी का एक नया कीर्तिमान बनाएं

मैंने महसूस किया है कि बहुत दिनों से ब्‍लॉगवाणी की कार्यप्रणाली को लेकर काफी चिंतन किया जा रहा है। मैंने जो पाया है वो ये है कि ब्‍लॉगवाणी ने जिस तरह हॉट, पसंद किये गये, पढ़े गए, टिप्‍पणी प्राप्‍त कॉलम बनाए हैं, उसी प्रकार से नापसंद की गई पोस्‍टों के बारे में भी एक कॉलम बना लें। विश्‍वास है अगर ऐसा कॉलम बनाया जाता है तो फिर सारे चाहेंगे कि उनका ब्‍लॉग नापसंद की गई पोस्‍टों में अवश्‍य शामिल हो क्‍योंकि सभी जरूर जानना चाहेंगे कि नापसंद की गई पोस्‍टों में कौन कौन सी पोस्‍टें शामिल की जा रही हैं। माननीय मैथिली जी और सिरिल जी इस पर विचार कर इसे अमल में लाएंगे तो अच्‍छा लगेगा। इससे नापसंद के चटके लगने से ग्रस्‍त लोग अपनी एक अलग पहचान बनने से अवश्‍य संतुष्‍ट दिखलाई देंगे।
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हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत में आज दीवाली है (अविनाश वाचस्‍पति)

ब्‍लॉगवाणी के लौटने से
छा गई खुशहाली है
मान लो सभी ब्‍लॉगरों
आज दीवाली है।

शुभ ब्‍लॉगवाणी
शुभ दीपावली
फिर न कहें ऐसी बात
जो कभी किसी को खले।

ब्‍लॉगजगत में हिंदी
छाये भरपूर हुजूर
मेरी मानो तो
आज दीवाली है।

ब्‍लॉगवाणी के लौटने से
दीप चेहरों पर जल उठे हैं
मैथिलीजी और सिरिलजी
को धन्‍यवाद देकर हम
उनके योगदान को कम आंकेंगे।

इसीलिए दीपावली से इस
नेक काम की करेंगे तुलना
क्‍या अब भी किसी को
मन में कोई ग्‍लानि है।

हिन्‍दी और ब्‍लॉगजगत में
आज सच्‍ची दिवाली है
शुभ दीपावली
शुभ ब्‍लॉगवाणी।
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नुक्‍कड़ की अप्रैल - पोस्‍ट की चर्चा दैनिक भास्‍कर के ब्‍लॉगर्स पार्क में (अविनाश वाचस्‍पति)

शहरों में पार्क तो हैं
पर पार्किंग
समस्‍या है
क्‍योंकि पार्क में
पार्किंग है वर्जित।

ब्‍लॉगर्स लूट सकते हैं
पार्क में पार्किंग का
असीम सुख
जो नुक्‍कड़ ने लूटा है
दैनिक भास्‍कर के
ब्‍लॉगर्स पार्क में।

इस पार्क में
ब्‍लॉग पार्क होते हैं
विचरण भी करते हैं
इस पार्किंग पर
नहीं लगता है
कोई शुल्‍क।

वाहन पार्किंग से
हट जाए अगर
पार्किंग शुल्‍क
अच्‍छा हो जाए
साड्डा मुल्‍क।

अपनी टिप्‍पणी का खर्चा
मत बचाएं यहां पर तो
अपनी टिप्‍पणी बेदर्दी से
खूब जीभर के लुटाएं
ब्‍लॉगवाणी पर पसंद
नापसंद होने पर भी
चटकाएं और एक बार
अप्रैल फूल मनाने का
आनंद फिर लूट ले जाएं।
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ब्लॉगिंग करने पर ब्लॉगरों पर टैक्स लगेगा ? अब सर पर बैठेगी कार

ब्लॉगिंग करना जुर्म तो नहीं होने वाला परन्तु तेजी से इसकी लोकप्रियता के मद्देनजर इसे टैक्स के दायरे में लाने का सरकार ने मन बना लिया है। पर कर का यह कहर सिर्फ हिन्दी ब्लॉगिंग पर ही क्यों, जबकि हिन्दी ब्लॉगिंग तो अभी अपने बचपन में ही है और इससे आय होना भी आरंभ नहीं हुई है।

पता चला है कि सरकार, जिसके जितने ब्लॉग उससे उसी के अनुसार कर लिया जाएगा, की पद्धति के तहत कर वसूलने की तैयारी कर रही है। सरकार को लगता है कि देश को आर्थिक मंदी की मार से बाहर निकालने के लिए यह एक कारगर कदम हो सकता है। इसे लागू करने के लिए सरकार चुनाव के समय दी जाने वाली रियायतों से भी दूर रखेगी क्योंकि ऐसे मामले आचार संहिता के दायरे में बहुत जल्दी आते हैं। यह तो वैसे भी देशहित से जुड़ा हुआ मसला है।

सरकार हिन्दी प्रेमी ब्लॉगरों से ईमानदारी की उम्मीद करती है। उसका मानना है कि जो हिन्दी से सच्चे। मन से प्रेम करता है। हिन्‍दी के लिए तन और धन न्‍यौछावर करने वाला हिन्‍दी सेवी है। वो अपने हिन्दी प्रेम की मिसाल ब्लॉगिंग पर कर चुका कर दे सकता है। ब्लॉगर्स को असुविधा न हो इसके लिए सरकार एक ऑनलाईन खाता शुरू कर रही है।

यह कानून वित्तीय वर्ष 2009-2010 में प्रभावी हो जाएगा। इसके तहत ब्लॉग की लोकप्रियता और प्राप्त टिप्पणियों के अनुसार कर देय होगा। मतलब साफ है कि जिसके जितने अधिक ब्लॉग और जितनी अधिक लोकप्रियता होगी तथा जिस पोस्ट अथवा ब्लॉग पर अधिकाधिक टिप्पणियां पाई जाएंगी, उन्हें उसी हिसाब से अधिक राशि का भुगतान करना होगा।

जिस ब्लाग के जितने अधिक फालोअर्स होंगे, उससे उसी हिसाब से अधिक टैक्स वसूल किया जाएगा क्योंकि यही उनकी लोकप्रियता का पैमाना होता है। वो बात दीगर है कि जो जितने अधिक ब्लागों का फालाओर होगा उसे टैक्स देयता में छूट मिलेगी। परन्तु अधिक टिप्पणी करने वाले ब्लॉ्गरों को इस छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा।

ब्लॉगवाणी/चिट्ठाजगत इत्यादि एग्रीगरेटर्स पर पसंद पर क्लिक करने वाले ब्लॉगर्स को प्रति क्लिक के हिसाब से सरकार द्वारा भुगतान भी किया जाएगा। इस नीति का जिन ब्लॉगरों ने स्वालगत किया है वे सभी अंग्रेजी के हैं। परन्तु फंडा यह है कि जिस ब्लॉग की अधिक पसंद क्लिक होंगी उनसे सरकार को टैक्स भी तो अधिक मिलेगा। अब तक अपनी पोस्ट‍ पर ब्लॉगरों द्वारा पसंद चटकाने और टिप्पणी की मांग में मंदी आने की संभावना है। बल्कि टैक्स से बचने के लिए ब्लॉंगर्स एग्रीगरेटर्स की सुविधाएं न लेने पर भी विचार करने लगें और टिप्पणी की सुविधा ही रोक दें तो क्या आश्चर्य ? और अपनी पोस्ट की सूचना ई मेल के जरिए ही देने लगें और टिप्पणियां भी ई मेल पर ही मंगवाएं। जिससे टैक्स से बचाव हो सके।

जो ब्लॉग सिर्फ कविता को समर्पित होंगे अथवा जो ब्लॉंगर अपनी टिप्पणियां कविता में देते हैं उन्हें इस टैक्स से‍ निजात मिल सकेगी। इससे इंटरनेट पर हिन्दी कविता का भविष्य स्वर्णिम होने की आशा जगी है। आपकी इस संबंध में क्या राय है और आप इस करदेयता के पक्ष में हैं तो क्यों और अगर नहीं हैं तो भी क्यों ? अपनी राय जाहिर करें।

विदेश में रहकर हिंदी ब्लॉगिंग में जुटे ब्लॉगर प्रसन्न न हों। वे भी भारतीय हिंदी ब्लॉगरों की भांति सन्न हों।
प्रिंट मीडिया के धुरंधरों ने सरकार के इस कदम का सहर्ष स्वागत किया है और प्रिंट मीडिया के दोबारा से फलने फूलने की आशा व्यक्त की है। यही स्थिति चैनलों की भी है। चैनलों की घटती साख और टी आर पी में भी सरकार के इस असरकारी कदम से तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।

मेरा भी यह निवेदन है कि जब तक पसंद का कीड़ा टैक्स से बाहर है, आप उसे अपने माउस से हिट कर सकते हैं और कीबोर्ड का प्रयोग करके टिप्पणियों की गति बढ़ा सकते हैं। कल के बारे में कौन जाने ?
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250वीं पोस्‍ट है नुक्‍कड़ पर और टिप्‍पणियां अपार : कौन शोध करेगा

इस पोस्‍ट के साथ ही नुक्‍कड़ पर 250 पोस्‍ट पूरी हो गई हैं। नुक्‍कड़ अपने सभी साथी लेखकों, पाठकों, ब्‍लॉगर साथियों का इस उपलब्धि के लिए आभार करता है। आप सबको जानकर असीम प्रसन्‍नता होगी कि हिन्‍दी ब्‍लॉग्‍स यानी चिट्ठों की संख्‍या प्राप्‍त सूचना के अनुसार 10000 के उपर चढ़ चुकी है। इससे पता लग रहा है कि हिन्‍दी कितनी बढ़ चुकी है। इस चढ़ने, बढ़ने और अंग्रेजी से लड़ने, लड़ने नहीं, मनों में धमकने के लिए आप सबकी भूमिका को नहीं भुलाया जा सकता है। एक बार फिर सभी का आभार। करते रहें नुक्‍कड़ को इसी तरह प्‍यार। मार्च में वित्‍तीय वर्ष की समाप्ति तक 300 पोस्‍ट का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए कीबोर्डबद्ध रहें सभी नुक्‍कड़ग्रहवासी।

एक निवेदन और आप लोग सदा इस बात का ध्‍यान रखें कि पोस्‍ट को 24 घंटे प्रमुखता से एग्रीगेटर्स पर जमे रहने के लिए अधिकाधिक पसंद पर चटका लगाने और टिप्‍पणी लगाने यानी राय प्रकट करने की भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए आप सभी का सहयोग सदा की तरह मिलता रहेगा। इसी विश्‍वास के साथ। फिर नुक्‍कड़ पर। हिन्‍दी को आगे बढ़ाने की इस मुहिम में लगे एग्रीग्रेटर्स की महती भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

नुक्‍कड़ पर यदि कोई ब्‍लॉगर साथी शोध करना चाहे और बतलायें कि अब तक की अवधि में इस ब्‍लॉग की पोस्‍टों की क्‍या विविधता रही, टिप्‍पणियों में क्‍या रहा, इसे और अधिक पाठकों तक पहुंचाने के लिए क्‍या किया जा सकता है, किन और लेखकों को इससे जोड़ा जाना चाहिए, और भी ऐसी संभावनाओं पर आप सबकी राय बेबाकी से सदा की तरह आमंत्रित हैं।

चलते चलते बतला रहा हूं कि साहित्‍य शिल्‍पी पर होली के अवसर पर जारी की गई कार्टूनक्रीड़ा में यह कार्टून जारी किया गया है। जिसे जो न देख पाए हों, इसे देखें और होली के बाद भी इसका आनंद लें। और अधिक आनंद लेने के मूड में हों तो इसे भी पढ़ें हिलियाना और जूतियाना पर टिप्‍पणी देने से न डरें और न पसंद पर चटका लगाने से।
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नुक्‍कड़ के लेखक एवं पाठक ध्‍यान दें : वैसे जनहित का मामला है

मैं आप और सब
चाहते हैं यही
कामना रहती है
पढ़ें सब ही
जो लिखें हम
मिले टिप्‍पणी।

भूलें न कभी
करें सदा यही
आपको लगती हैं
पोस्‍टें जो भी अच्‍छी
आती हैं पसंद तो
चटकाएं ब्‍लॉगवाणी में
पसंद संख्‍या को।

इससे नंबर बढ़ेगा
और पोस्‍ट पूरे दिन
सामने नजर आएगी
खूब पढ़ी जाएगी
पसंद नंबर पर
चटकाने की सुविधा
ब्‍लॉग पर भी है
और ब्‍लॉगवाणी
तो इसका घर है।

तो नुक्‍कड़ ही नहीं
जो भी जिस भी
पोस्‍ट को पसंद करें
उसे चटकाएं अवश्‍य।

जब सभी ऐसा करेंगे
तो आप पाएंगे अपनी
पोस्‍टों को दिन भर
मौजूद सामने।

बतला रहा हूं इसलिए
हम में से अधिकतर
को इस संबंध में
जानकारी नहीं है
तो जानें खुद और
समझाएं सबको
लाभ उठाएं सब।
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