जून कवियों की ले रहा है जान
कैसे रह सकते हैं इससे अंजान
आज चले गए हैं
अल्हड़
कैसे मचाएं हम हुल्लड़
चले गए
हास्यकवि एक और
कैसा चल रहा है यह दौर
उनकी कविताएं उनकी याद दिलाएंगी
याद रूलाएगी तो कविताएं हंसाएंगी।
कम ही जानते हैं कि अल्हड़ बीकानेरी जी ने हरियाणवी फिल्म छोटी साली के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी दमदार कदम रखा था। नुक्कड़ की विनम्र श्रद्धांजलि। परमपिता परमात्मा शोक संतप्त परिवार-साहित्य जनों को संबल प्रदान करे।
काका हाथरसी ने लिखा था कि
अल्हड़ जी का स्वर मधुर, गोरा-चिट्टा चाम।
‘श्यामलाल’ क्यों रख दिया, घरवालों ने नाम।
घर वालों ने नाम, ‘शकीला’ पीटे ताली।
हमको दे दो, मूँगफली वाली कव्वाली।
इसे मंच पर गाने में जो होगी इनकम।
आधी तुम ले लेना, आधी ले लेंगे हम।
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