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श्री विष्णु नागर का ब्लॉग
"कवि" यह है सुप्रसिद्ध कवि, व्यंग्यकार, पञकार श्री विष्णु नागर का ब्लॉग। लिंक है http://alochak.blogspot.com/ उनका यह ब्लॉग वर्ष 2008 से बंद पड़ा है। उनका कोई निकट व्यक्ति उनसे निवेदन करने का कष्ट करे कि कृपया अपना ब्लॉग पुन: चालू करें ताकि एक बड़ी संख्या में उपलब्ध नेट पाठक, जो लोग उन्हें नहीं पढ़ पाते हैं, पढ़ सकें। वैसे वे आजकल "शुक्रवार"नामक पञिका के सम्पादक है मगर उसमें सम्पादकीय के अलावा उनका कुछ पढ़ने को नहीं मिलता।
एक हिन्दी ब्लॉग ने खुदकुशी कर ली
गूगल पुलिस ने इस संबंध में जो वक्तव्य दिया है, वो वास्तव में हैरान करने वाला है। वक्तव्य में कहा गया है कि ब्लॉग चाहे तो भी स्वयं खुदकुशी नहीं कर सकता है। इसमें जरूर उस ब्लॉगर का षडयंत्र शामिल है, जिसने उस ब्लॉग का निर्माण किया था।
यह भी बतलाया गया है कि टिप्पणियों की कम संख्या के मद्देनजर ब्लॉग ने यह आत्मघाती कदम उठाया है।
इससे उन ब्लॉगों के ब्लॉगर डरे हुए हैं, जिनके ब्लॉगों पर कम टिप्पणियां या बिल्कुल टिप्पणियां नहीं आती हैं।
कुछ ब्लॉगरों ने तो इस दुर्घटना के लिए ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि अगर दोनों एग्रीगेटर बंद न होते तो ब्लॉग को खुदकुशी के लिए ऐसा गैर-जिम्मेदाराना कदम नहीं उठाना पड़ता।
कुल मिलाकर स्थिति भी सोचनीय है कि क्यों गूगल उस ब्लॉग को जीवनदान दे देता है। उस पर ऐलोवेरा की पोस्ट लगाने से ब्लॉग में प्राण वापिस लौट सकते हैं।
इस हादसे पर कनाडा स्थित उड़नतश्तरी ब्लॉग के मॉडरेटर ने कहा है कि वे तो सदा से ही टिप्पणियां बिना किसी भेद भाव के देते रहे हैं, उन्हें पहले से ही अंदेशा था, कि ब्लॉग जगत में कभी कुछ ऐसा घट सकता है। सामूहिक ब्लॉग नुक्कड़ ने इस घटना/दुर्घटना की जिम्मेदारी तो सब ब्लॉगरों को सूचित करने की जिम्मेदारी तो ली है परंतु उसका नाम बतलाने से पहले ही ठिठक गया है। अब आप बतलायें कि वो ब्लॉग कौन सा है, उस ब्लॉगर का क्या नाम है ?
नुक्कड़ के लेखक एवं पाठक ध्यान दें : वैसे जनहित का मामला है
मैं आप और सब
चाहते हैं यही
कामना रहती है
पढ़ें सब ही
जो लिखें हम
मिले टिप्पणी।
भूलें न कभी
करें सदा यही
आपको लगती हैं
पोस्टें जो भी अच्छी
आती हैं पसंद तो
चटकाएं ब्लॉगवाणी में
पसंद संख्या को।
इससे नंबर बढ़ेगा
और पोस्ट पूरे दिन
सामने नजर आएगी
खूब पढ़ी जाएगी
पसंद नंबर पर
चटकाने की सुविधा
ब्लॉग पर भी है
और ब्लॉगवाणी
तो इसका घर है।
तो नुक्कड़ ही नहीं
जो भी जिस भी
पोस्ट को पसंद करें
उसे चटकाएं अवश्य।
जब सभी ऐसा करेंगे
तो आप पाएंगे अपनी
पोस्टों को दिन भर
मौजूद सामने।
बतला रहा हूं इसलिए
हम में से अधिकतर
को इस संबंध में
जानकारी नहीं है
तो जानें खुद और
समझाएं सबको
लाभ उठाएं सब।
Read More...
चाहते हैं यही
कामना रहती है
पढ़ें सब ही
जो लिखें हम
मिले टिप्पणी।
भूलें न कभी
करें सदा यही
आपको लगती हैं
पोस्टें जो भी अच्छी
आती हैं पसंद तो
चटकाएं ब्लॉगवाणी में
पसंद संख्या को।
इससे नंबर बढ़ेगा
और पोस्ट पूरे दिन
सामने नजर आएगी
खूब पढ़ी जाएगी
पसंद नंबर पर
चटकाने की सुविधा
ब्लॉग पर भी है
और ब्लॉगवाणी
तो इसका घर है।
तो नुक्कड़ ही नहीं
जो भी जिस भी
पोस्ट को पसंद करें
उसे चटकाएं अवश्य।
जब सभी ऐसा करेंगे
तो आप पाएंगे अपनी
पोस्टों को दिन भर
मौजूद सामने।
बतला रहा हूं इसलिए
हम में से अधिकतर
को इस संबंध में
जानकारी नहीं है
तो जानें खुद और
समझाएं सबको
लाभ उठाएं सब।
नुक्कड़ ब्लॉग/ब्लॉगर गोष्ठी का आयोजन
प्रतिक्रिया पर प्रतिप्रतिक्रिया दीजिए
जैसे दी है मैंने
और दीजिए ज्ञान
इसी से आगे खुलेंगे
आंख, नाक और कान।
बच्चा काफी समझदार है
नटखट नाम तो है इसका
पर काम दिमाग खटखटाने के कर रहा है
पर विदेशी या विदेश में रहने वाले इस
प्यारे से खटखट बच्चे को ढेर सारा प्यार।
सही खटखटाया है इसने दिमाग का दरवाजा
ऐसी नौबत ही न आने दें कि हो झगड़ा
करें ऐसा कि झगड़े का न हो तनिक रगड़ा
नुक्कड़ संगोष्ठी में आने का हो पक्का इरादा
वे पूरा होमवर्क अभी से करना कर दें शुरू
कह सकते हैं गुरू हो जायें शुरू
चाहे हों वे मौजूद इन चुरू
पर करनी है जिन मुद्दों पर चर्चा
उस पर अभी से दिमाग का कर लें खर्चा
अपने विषय सुझायें उस पर राय भी बतलायें
सब अपना अपना आइडिया इसी प्लेटफार्म पर लायें
उस पर अपने विचार बतलायें, सबके विचार सुनें
मनन करें, मंथन करें और निकालें निष्कर्ष
तभी संगोष्ठी का सोपान बनेगा नया उत्कर्ष
सिर्फ मिलने के लिए मिलना
अपने घरों से इतनी दूर निकलना
मेरा घर पास है तो इसका मतलब
यह तो नहीं है कि मुझे अन्यों की
चिंता नहीं है, जबकि आज खाली कोई नहीं है
वैसे भी समय खराब करने के लिए
नेटजगत से अच्छा कोई और प्लेटफार्म नहीं है
पर सभी नहीं कर रहे हैं समय खराब
और
न ही करना है हम सबने बेकार
चाहे कार में न आयें पर बेबस भी न हों
रचें, लिखें, मथे, ऐसा जो जचे जमाने को
बदल दे कहानी को, पूरी रवानी को
ऐसा माहौल बनाना है, अच्छे विचारों को
जगमगाना है, ब्लॉग का सदुपयोग करके
सबको करके दिखलाना है
नुक्कड़ चाहे न बने मिसाल, पर न खराब हो इसमें लगे साल
साल दर साल नहीं तो यूं ही बढ़ते रहेंगे
पर सच्चाई में पीछे हटते रहेंगे
इसलिए अच्छी तरह सोचें
अपनी योजनायें नुक्कड़ पर लगायें
जिसमें अपना संपूर्ण ज्ञान आजमायें
सबकी मानें और अपनी मनवायें
जो भी हों अच्छी सच्ची बातें
नहीं तो कल यही बच्चा हमें डांट रहा होगा
कहेगा अंकल, देखना मैं करता हूं क्या कल
पर उसे न होने दें विकल
और पर्यावरण अनुकूल चलायें शब्दों की साईकिल।
मैं इस साईकिल से उतरता हूं
अब दूसरा बैठे और अपनी बात कहे।
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जैसे दी है मैंने
और दीजिए ज्ञान
इसी से आगे खुलेंगे
आंख, नाक और कान।
बच्चा काफी समझदार है
नटखट नाम तो है इसका
पर काम दिमाग खटखटाने के कर रहा है
पर विदेशी या विदेश में रहने वाले इस
प्यारे से खटखट बच्चे को ढेर सारा प्यार।
सही खटखटाया है इसने दिमाग का दरवाजा
ऐसी नौबत ही न आने दें कि हो झगड़ा
करें ऐसा कि झगड़े का न हो तनिक रगड़ा
नुक्कड़ संगोष्ठी में आने का हो पक्का इरादा
वे पूरा होमवर्क अभी से करना कर दें शुरू
कह सकते हैं गुरू हो जायें शुरू
चाहे हों वे मौजूद इन चुरू
पर करनी है जिन मुद्दों पर चर्चा
उस पर अभी से दिमाग का कर लें खर्चा
अपने विषय सुझायें उस पर राय भी बतलायें
सब अपना अपना आइडिया इसी प्लेटफार्म पर लायें
उस पर अपने विचार बतलायें, सबके विचार सुनें
मनन करें, मंथन करें और निकालें निष्कर्ष
तभी संगोष्ठी का सोपान बनेगा नया उत्कर्ष
सिर्फ मिलने के लिए मिलना
अपने घरों से इतनी दूर निकलना
मेरा घर पास है तो इसका मतलब
यह तो नहीं है कि मुझे अन्यों की
चिंता नहीं है, जबकि आज खाली कोई नहीं है
वैसे भी समय खराब करने के लिए
नेटजगत से अच्छा कोई और प्लेटफार्म नहीं है
पर सभी नहीं कर रहे हैं समय खराब
और
न ही करना है हम सबने बेकार
चाहे कार में न आयें पर बेबस भी न हों
रचें, लिखें, मथे, ऐसा जो जचे जमाने को
बदल दे कहानी को, पूरी रवानी को
ऐसा माहौल बनाना है, अच्छे विचारों को
जगमगाना है, ब्लॉग का सदुपयोग करके
सबको करके दिखलाना है
नुक्कड़ चाहे न बने मिसाल, पर न खराब हो इसमें लगे साल
साल दर साल नहीं तो यूं ही बढ़ते रहेंगे
पर सच्चाई में पीछे हटते रहेंगे
इसलिए अच्छी तरह सोचें
अपनी योजनायें नुक्कड़ पर लगायें
जिसमें अपना संपूर्ण ज्ञान आजमायें
सबकी मानें और अपनी मनवायें
जो भी हों अच्छी सच्ची बातें
नहीं तो कल यही बच्चा हमें डांट रहा होगा
कहेगा अंकल, देखना मैं करता हूं क्या कल
पर उसे न होने दें विकल
और पर्यावरण अनुकूल चलायें शब्दों की साईकिल।
मैं इस साईकिल से उतरता हूं
अब दूसरा बैठे और अपनी बात कहे।
नुक्कड़ ब्लॉग/ब्लॉगर गोष्ठी का आयोजन
यह किया जाना है तय
कि मिलें ब्लॉगर्स
दिल्ली में।
करें शुरूआत
मिलने की
जुलने की।
न कि लड़ने की
भिड़ने की
फिर गिरने की।
क्या दिल्ली में
नेहरू प्लेस के
आस्था कुंज में
मिलना रहेगा
ठीक।
रहे ठीक तो
लगे कीबोर्ड
यह भी बतलायें
कि कब मिलें
कितनी देर मिलें
और क्यूं मिलें।
राय और आदेश
आमंत्रित हैं।
Read More...
कि मिलें ब्लॉगर्स
दिल्ली में।
करें शुरूआत
मिलने की
जुलने की।
न कि लड़ने की
भिड़ने की
फिर गिरने की।
क्या दिल्ली में
नेहरू प्लेस के
आस्था कुंज में
मिलना रहेगा
ठीक।
रहे ठीक तो
लगे कीबोर्ड
यह भी बतलायें
कि कब मिलें
कितनी देर मिलें
और क्यूं मिलें।
राय और आदेश
आमंत्रित हैं।
जन्मदिन पवन चंदन का - चौखट वाले चंदन
आज जन्मदिन है
पवन चंदन तुम्हारा

वैसे जन्मदिन मनाना
बचपन का शगल है पर
पचपन में भी आनंद है
पसंदीदा खेल है
मस्ती है, कुश्ती है
जीवन में आती
जिससे चुस्ती है।
दिन यह भी और
सभी दिनों की तरह
ही होता है परन्तु
सबको प्रिय होता है
जैसे आप प्रिय हैं।
सब मुस्कराते हैं
खिलखिलाते हैं
आजकल ब्लॉग्स पर
टिपियाते हैं यानी
अपनी भावना मन की
जन के सामने लाते हैं।
आपके ब्लॉग चौखट को
सब सराहते हैं, पढ़ते हैं
टिप्पणियां करते हैं
आपकी चंद लाईनें
जो कभी कभी तो
चार भी नहीं होतीं
पर बना देती हैं अचार
तीखा और जायकेदार।
कम शब्दों में कहना
सबसे बड़ा है गहना
ब्लॉग पर बने रहना
सहन में सभी सहना।
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पवन चंदन तुम्हारा

वैसे जन्मदिन मनाना
बचपन का शगल है पर
पचपन में भी आनंद है
पसंदीदा खेल है
मस्ती है, कुश्ती है
जीवन में आती
जिससे चुस्ती है।
दिन यह भी और
सभी दिनों की तरह
ही होता है परन्तु
सबको प्रिय होता है
जैसे आप प्रिय हैं।
सब मुस्कराते हैं
खिलखिलाते हैं
आजकल ब्लॉग्स पर
टिपियाते हैं यानी
अपनी भावना मन की
जन के सामने लाते हैं।
आपके ब्लॉग चौखट को
सब सराहते हैं, पढ़ते हैं
टिप्पणियां करते हैं
आपकी चंद लाईनें
जो कभी कभी तो
चार भी नहीं होतीं
पर बना देती हैं अचार
तीखा और जायकेदार।
कम शब्दों में कहना
सबसे बड़ा है गहना
ब्लॉग पर बने रहना
सहन में सभी सहना।
सुकवि सुशील कुमार की चर्चित और ताजातरीन कवितायें



सुशील कुमार को जानते हैं आप
पहचानते हैं उनकी कविताओं को भी
समीक्षक भी करारे हैं और पाठको
प्रिंट और बेव पत्रिकाओं के प्यारे हैं
छपी हैं सुशील की छह छह कवितायें
आप पढ़ें और बतलायें कि कैसी हैं
आप नहीं, जो कविताएं पढ़ी हैं वे
वैसे आपने पहले भी पढ़ी होंगी पर
दोबारा भी पढ़नी हैं और बतलानी है
और देनी है अपनी बेबाक राय




सुशील कुमार कहते हैं कि
''कविता के बीज मेरे मन में कब गिरे और कैसे फलित हुए, ठीक-ठीक नहीं कह सकता । किन्तु जनपदीय धूल-धक्कड़ से सने श्रमशील श्वांसों में धड़कते अपने लोकजीवन और समय के स्पंदन को कहीं महसूसता हूँ तो वह कविता में ही, क्योंकि वह मुझे बेहद भाता है जहाँ कि मैं जन्मा-पला हूँ।''
इन्होंने अपना एक ब्लॉग भी बनाया है,
आप वहां पर आकर भी कुछ उपयोगी पत्ते पा सकते हैं -
पतझड़
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