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सुशील कुमार को जानते हैं आप
पहचानते हैं उनकी कविताओं को भी
समीक्षक भी करारे हैं और पाठको
प्रिंट और बेव पत्रिकाओं के प्यारे हैं
छपी हैं सुशील की छह छह कवितायें
आप पढ़ें और बतलायें कि कैसी हैं
आप नहीं, जो कविताएं पढ़ी हैं वे
वैसे आपने पहले भी पढ़ी होंगी पर
दोबारा भी पढ़नी हैं और बतलानी है
और देनी है अपनी बेबाक राय
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सुशील कुमार कहते हैं कि
''कविता के बीज मेरे मन में कब गिरे और कैसे फलित हुए, ठीक-ठीक नहीं कह सकता । किन्तु जनपदीय धूल-धक्कड़ से सने श्रमशील श्वांसों में धड़कते अपने लोकजीवन और समय के स्पंदन को कहीं महसूसता हूँ तो वह कविता में ही, क्योंकि वह मुझे बेहद भाता है जहाँ कि मैं जन्मा-पला हूँ।''
इन्होंने अपना एक ब्लॉग भी बनाया है,
आप वहां पर आकर भी कुछ उपयोगी पत्ते पा सकते हैं -
पतझड़
बिल्कुल हम तो पहले से ही पढ रहे हैं इनकी रचनाएं।
जवाब देंहटाएंअविनाश वाचस्पति जी,
जवाब देंहटाएंआज जन्म-दिन आपका है और उपहार आपने मुझे दिये हैं। आपको जन्म-दिन पर, आपके स्वर्ण-जयंती यानि पचास की वय पूरी होने पर ढ़ेर सारी बधाईयाँ। आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण हों,आप स्वस्थ-सुखी रहें! -सुशील कुमार।
... बिलकुल सही लिखा है।
जवाब देंहटाएंआने वाला साल आपके लिये उत्तम स्वास्थ्य का खज़ाना लाये, आप प्रसन्नचित और प्रफुल्लित रहे
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