


सुशील कुमार को जानते हैं आप
पहचानते हैं उनकी कविताओं को भी
समीक्षक भी करारे हैं और पाठको
प्रिंट और बेव पत्रिकाओं के प्यारे हैं
छपी हैं सुशील की छह छह कवितायें
आप पढ़ें और बतलायें कि कैसी हैं
आप नहीं, जो कविताएं पढ़ी हैं वे
वैसे आपने पहले भी पढ़ी होंगी पर
दोबारा भी पढ़नी हैं और बतलानी है
और देनी है अपनी बेबाक राय




सुशील कुमार कहते हैं कि
''कविता के बीज मेरे मन में कब गिरे और कैसे फलित हुए, ठीक-ठीक नहीं कह सकता । किन्तु जनपदीय धूल-धक्कड़ से सने श्रमशील श्वांसों में धड़कते अपने लोकजीवन और समय के स्पंदन को कहीं महसूसता हूँ तो वह कविता में ही, क्योंकि वह मुझे बेहद भाता है जहाँ कि मैं जन्मा-पला हूँ।''
इन्होंने अपना एक ब्लॉग भी बनाया है,
आप वहां पर आकर भी कुछ उपयोगी पत्ते पा सकते हैं -
पतझड़


