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नुक्‍कड़ डॉट कॉम के प्रकाशन सौजन्‍य से दूसरी पुस्‍तक प्रकाशित : काँटे गुलाब के - एच एन मिश्रा

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कहां से मंगवाएं, जानकारी यहां पर है


प्रकाशन संबंधी जानकारी के लिए nukkadh@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।
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कांटे गुलाब के : कवि एच. एन. मिश्रा का प्रथम काव्‍य संग्रह अयन प्रकाशन से नुक्‍कड़डॉटकॉम के सौजन्‍य से प्रकाशित



नुक्‍कड़डॉटकॉम से अयन प्रकाशन की संधि
आप इसे मिलीभगत भी कह सकते हैं
मिलीभगत के मायने हैं
मिलकर पूजा कार्य में संलग्‍न रहना।

शब्‍दों की पूजा
मिलकर करें
और मिलीभगत कहलाए
तो उससे परहेज करें

जी नहीं
ऐसा तनिक भी नहीं है
शब्‍दों की, वाक्‍यों की, विचारों की
साहित्‍य की प्रत्‍येक विधा की उन्‍नति
न्‍यू मीडिया के समन्‍वयन से
करना अयन और नुक्‍कड़ का ध्‍येय है।
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'व्‍यंग्‍य का शून्‍यकाल' बतला रही है अपने बारे में, आप भी जान लीजिए

'व्‍यंग्‍य का शून्‍यकाल' पुस्‍तक की प्रकाशकीय जानकारी 'व्‍यंग्‍य यात्रा' के ताजा अंक में श्री संतोष त्रिवेदी की समीक्षा के साथ प्रकाशित होने से रह गई है, जबकि पुस्‍तक की फोटू छप गई है। अत: पुस्‍तक के जानकारी संबंधी पेज को आपसे साझा कर रहा हूं। 
'अयन प्रकाशन' डाक व्‍यय सहित भारत में पुस्‍तक की प्रति 130/- रुपये में भिजवा रहे हैं। इससे पहले की पेपरबेक संस्‍करण की तरह इस पुस्‍तक को पाने से आप वंचित रह जाएं। आप इस पुस्‍तक को पाने के लिए अपने आदेश सीधे 'अयन प्रकाशन' को उनके ई मेल आई डी अथवा पते पर फोन करके दे दें। पुस्‍तक अगस्‍त 2012 माह के अंतिम सप्‍ताह तक 'आपजी साब के कोलों आकर जफ्फी पा लउगी।' — DrAmit Tyagiऔर 12 अन्य के साथ।





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पुस्‍तक पहुंच रही है उसतक ?


पुस्‍तक कैसे पहुंचे उसतक
उसतक ही सच्‍चा पाठक है
यह उस कौन है
जो पुस्‍तक खरीदते वक्‍त
नहीं करता है उफ ....

आप पुस्‍तक खरीदते 
वक्‍त खुश होते हैं
और पढ़ते समय महाखुश
आप हैं सच्‍चे पुस
जो पुस्‍तक को 
करते हैं पुश। 

यह पुश करना 
धकेलना नहीं है
धकेलना है भी
भीतर दिमाग के तंदूर में
जहां सिंकते हैं विचार
आपको पकाते नहीं
पकते हैं विचार।

पुस्‍तक कैसे पहुंचती है उसतक
आप बतलाएंगे, बतलाना चाहेंगे
या कायम रखेंगे
पीएम की तरह मौन।
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व्‍यंग्‍य का शून्‍यकाल



क्‍या आप भी पीएम की तरह मौन रहेंगे।
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