हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का जंतर मंतर : आप भी एक मंतर फूंकिए

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • My Photoहैरान मत होइये

    हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के
    जंतर मंतर पर आयेंगे
    तो खाली हाथ नहीं जायेंगे
    वहां पर शेष पायेंगे
    और विशेष ले जायेंगे
    फिर आप ही नारायण कहलायेंगे

    तो यहां पर क्लिक कीजिए
    और सीधे मिल लीजिए
    अपनी बात वहीं कहिए
    और अच्‍छी लगे तो
    पढ़ने के लिए आते रहिए

    फिर मत कहिएगा
    खबर न हुई

    2 टिप्‍पणियां:

    1. बसन्तपञ्चमी की शुभकामनाएँ!
      क्लिक करके देखते हैं साहिब!

      उत्तर देंहटाएं
    2. जानदार और शानदार विवेचना हेतु आभार।
      =====================
      कृपया पर्यावरण संबंधी इस दोहे का रसास्वादन कीजिए।
      ==============================
      शहरीपन ज्यों-ज्यों बढ़ा, हुआ वनों का अंत।
      गमलों में बैठा मिला, सिकुड़ा हुआ बसंत॥
      सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

      उत्तर देंहटाएं

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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