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लुप्त होते संस्कार और मीडिया का योगदान

कल शाम को मै यूँ ही बुद्धू बक्से के सामने बैठ गया. तभी किसी खबरिया चैनल पर एक डिफ्रेंट टाइप का विज्ञापन दिखाई दिया. जो दिखाता है कि एक विदेशी पर्यटक के साथ किसी लोकल (स्थानीय) ने बुरा व्यवहार किया और हमारे गज़नी खान यानी आमिर खान जी लोगॉ को सिखाते है कि अगर हम विदेशी यात्रियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करेंगे तो वे क्या सोचेंगे भारत के बारे मॅ. और आस-पास का जन-समूह भावनाओं मॅ बहकर उस लोकल की पिटाई करने लगते हैं, फिर आमिर साहब यह समझाते हैं कि हमें अतिथि के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए. बड़ा अटपटा लगा मुझे वह विज्ञापन देख कर, सोचने लगा कि हम क्या होते जा रहे हैं? फिर सोचा कि इतनी मूलभूत व्यावहारिक बातॅ भी अब किसी जन-जागृति कार्यक्रम के माध्यम से सीखनी पड़ेंगी।
फिर रात को सोने के बाद मैंने सपना देखा कि बच्चे अपने बड़ों से ठीक से व्यवहार करें। इसे सिखाने के लिये एक टी.वी. कार्यक्रम शुरू हुआ है और उसमें एक नाटिया के माध्‍यम से सिखाया जा रहा है जिसमें एक बच्चा अपने पिता से बोलता है,” अबे बुढऊ, ज़रा सुन तो मुझे तुझसे कुछ काम है.” और तभी कोई ग़ज़नी खान कहता है, “हमें अपने बड़ों से तमीज़ से पेश आना चाहिए.” दूसरे चैनल पर एक स्त्री को अपनी संतान से प्रेम करने और उससे दुलार से पेश आने की सलाह दी जा रही है, उसे माता होने का अर्थ समझाया जा रहा है। तीसरे चैनल को देखा तो उस पर किसी युवती से बात की जा रही है, “क्या आप माँ बनना पसंद करेंगी?” वह जवाब देती है, “अभी तक इस बारे मॅ सोचा नहीं है। हाँ, अगर मै माँ ना भी बनूँ तो इससे क्या फर्क पड़ता है??”.....मैं सपने मॅ हैरान-परेशान हो रहा हूँ.
मेरे घर से मेरे मोबाइल पर टेलीफोन आता है(सपने में) लाइन पर मेरी बेटी है, कहती है डैडी, मुझे आपको कुछ बताना है?? और मेरे जवाब को सुने बगैर बोलती है, “मैं माँ बनने वाली हूँ....पिछले महीने टोनी के साथ ट्रिप पर गई थी ना, वहीं यह सब हुआ था....पर घबराने की कोई बात नहीं है... मैं गायने से बात कर चुकी हूँ...यह अबोर्ट हो जायेगा....मैं वहीं जा रही थी...तो सोचा कि कम से कम आप को इंफार्म तो कर ही दूँ...” मैं घबरा उठ बैठा। तो पाया मेरी 11 साल की बेटी पास ही अपना होम-वर्क पूरा करने में व्यस्त है....मैं चैन की सांस लेते हुए फिर टी.वी. खोलता हूँ और पाता हूँ कि मरे हुए एक कुत्ते की लाश को फोकस मॅ लिये एक संवाददाता जनता से यह गुहार लगा रहा है “इस कुत्ते की शक्ल देख कर लगता है कि इस कुत्ते की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, मगर नहीं...हमारी टीम ने बड़ी मेहनत से यह वीडियो हासिल किया है जो इस राज़ का पर्दाफाश करता है कि इस कुत्ते को कितनी बेदर्दी से मारा गया है...” मैं टीवी बंद कर देता हूँ कि कहीं फिर से कोई सच्चाई मेरे सपने में आकर मुझे ना डरा दे।
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‘प्रथम’ के ब्लॉग-स्वामी अंकित का मोबाईल- जादू


मैं पिछले तीन साल से परेशान था कि अपने मोबाईल नोकिया 7610 के मेल-बॉक्स सेटिंग को कैसे सक्रिय करूँ । जब कोई उपाय न सूझा और न किसी का परामर्श ही काम आया तो हारकर मैंने gmail का सॉफ्टवेयर अपने मोबाईल में लोड कर लिया। पर यह क्या, वह तो सिर्फ़ text में ही मेल भेजता या प्राप्त करता है ! अगर मुझे चित्र, फाईल इत्यादि किसी सज्ज्न को भेजना हो तो मुझे मोबाईल छोड़कर अपने कंप्यूटर की सेवा में हाज़िर होना पड़ता है । यह कठिनाई हमेशा मेरे मन में सालती थी कि कब वह दिन आयेगा जब मैं कहीं भी, कभी भी अपने मोबाईल से ही फाईल, वेब-फाईल,चित्रादि भेज पाऊंगा। इसी बीच कुछ दिन पहले हिंदी के जाने-माने व्यंग्यकार और चर्चित ब्‍लॉगर
अविनाश वाचस्पति जी की साईट www.tetalaa.blogspot.com पर
http://hi.pratham.net की खबर मिली। फिर क्या था , मैंने इसके स्वामी, जो खुद कंप्यूटर साईंस के द्वितीय वर्ष के अत्यंत होनहार छात्र भी हैं , को एक ईमेल भेजकर अपनी समस्या से रू-ब-रू कराया । मेल मिलते ही उन्होंने मुझसे संपर्क किया और तत्क्षण मेरी समस्या हल कर दी।
उन्होंने live window mail की तर्ज़ पर मोबाईल के मेलबॉक्स का सेटिंग भेजकर उसे सक्रिय कर दिया। बस क्या था, धड़ाधड़ उसमें मेल आना शुरु हो गया और मेल अपडेट होने लगा ! उसके ऑप्शन में जाकर जब मैंने फाईल,वेब-फाईल और मोबाईल में पहले से रक्षित किये गये फोटो को भेजना शुरु किया तो वे मेल प्राप्तकर्ता को आसानी से मिलने लगे। मेरी तो खुशी का ठिकाना न रहा!
यहाँ तक कि मोबाईल के कैमरे से तुरंत खींचे गये फोटो को भी ईमेल पर भेजने में सफल हो गया। यानि आप यही समझिए कि अब मैं अपने मोबाईल को कंप्यूटर की तरह उपयोग कर रहा हूँ। मैं आभारी हूँ अंकित जी का। पर वे बड़े खुदगर्ज़ हैं। आभार लेना नहीं चाहते, सिर्फ़ देना जानते हैं।
खैर... आज ऐसे युवा वैज्ञानिकों समाज और देश को जरुरत है। मैं उन्नीस वर्ष की अल्पायु के इस युवा का आभार कैसे व्‍यक्‍त करूं ? ।- सुशील कुमार(sk.dumka@gmail.com)
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