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रोज दिखावे करते हैं, बस झूठी शोहरत के खातिर

रोज दिखावे करते हैं, बस झूठी शोहरत के खातिर,

ज़ख़्मों पे मरहम धरते हैं,बस झूठी शोहरत के खातिर.


घर तक है नीलाम पड़ा,दारू की ठेकेदारी में,

देखो फिर भी दम भरते हैं, बस झूठी शोहरत के खातिर.


इंसानों से कब का रिश्ता, तोड़ चुके हैं ये साहिब,

इंसानियत कहरते है,बस झूठी शोहरत के खातिर.


लिए गुरूर-अहम सत्ता का,हैवानो से हाथ मिलाते,

हैवानियत से डरते हैं, बस झूठी शोहरत के खातिर.


हरकत गिरी हुई है,जिनकी आदत से लाचार हैं जो,

बड़ी बड़ी बातें करते हैं, बस झूठी शोहरत के खातिर.


रोज ग़रीबों की आहों पर, नाम लिखा होता है जिनका,

मानवता पर वो मरते हैं,बस झूठी शोहरत के खातिर.


गंगाजल को तरस गये, बाबू जी अंतिम वक्त में अपने,

मरघट पर आँसू गिरते हैं,बस झूठी शोहरत के खातिर.

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कोई नहीं देखेगा..सविता भौजाई को ..

सरकार की हुई पाबंदी, अब कोई,
नहीं देखेगा, सविता भौजाई को...

देखना अच्छी बात नहीं है,
यूँ किसी भी नार पराई को,

सविता भौजी के पति तो होंगे,
फिर काहे छूट मिले, पति के भाई को,

बलात्कार, यौनाचार,व्यभिचार न बंद हुआ तो क्या,
हर हाल में बंद करो , बेहयाई को...

सरकार ने माना , दिया है ताना,
बिगड़ रहे सब, देख के इस लुगाई को,

सुने हैं सविता भौजी भी हैं, दुखी
देख देवरवा सबका, बेवफाई को ,

चलो झगडा ख़त्म करो , अब तो ऐसा जतन करो,
भौजी की जरूरत नहीं, प्यार करेगा भाई-भाई को..

तो लैकंवा सब को सख्त ताकीद किया जाता है की भौजी...अरे सविता भौजी को खुल्लम खुल्ला नहीं देखना है जी....
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