नहीं मालूम
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आ रहा है
आपके तो
मन को इन्द्रधनुष का
हर रंग भा रहा है
मुझे तो भा रहा है
आभामंडल इसका।
प्रस्तुति एवं कविताकश : अविनाश वाचस्पति


