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तकनीकी जानकारी देने वाले ब्‍लॉगरों और ब्‍लॉगों के लिंक भेजिए

इंटरनेट जगत के समस्‍त वाहकों और प्रवाहकों से विनम्र अनुरोध है कि तकनीकी जानकारी देने वाले ब्‍लॉगरों और उनके द्वारा संचालित ब्‍लॉगों के नाम और लिंक एवं संपर्क सूत्र ई मेल पते, फोन नंबर इत्‍यादि nukkadh@gmail.com पर ब्‍लॉगहित में तुरंत भिजवाएं।
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नवभारत टाइम्‍स ई पेपर की वेबसाइट पर बनाए गए हिन्‍दी ब्‍लॉगों और ब्‍लॉगरों से मिल लीजिए

आपका नाम न हो तो निराश मत होइयेगा। अगली बार आपका ही नंबर होगा। नंबर मतलब आपकी या आपके ब्‍लॉग की भी चर्चा होगी। अगर आपने अभी तक अपना ब्‍लॉग नवभारत टाइम्‍स ई पेपर की वेबसाइट पर न बनाया हो तो देरी मत कीजिए।


कहा गया है कि शुभ कार्य में देरी नहीं करनी चाहिए। सबसे पहले तो हम हिन्‍दी प्रेमी और नुक्‍कडडॉटकॉम नवभारत टाइम्‍स समूह का आभारी है कि उन्‍होंने हिन्‍दी ब्‍लॉगहित में अपनी साईट पर पाठकों को अपने ब्‍लॉग बनाने का अवसर देकर एक उल्‍लेखनीय कार्य किया है। इस कार्य के लिए नवभारत टाइम्‍स की जितनी सराहन (यहां क्लिक करके आप अपना ब्‍लॉग बना सकते हैं ) की जाए, कम है।


 चंद दिनों में हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के अग्रणी हस्‍ताक्षरों ने अपने ब्‍लॉग बनाकर यह साबित कर दिया है कि उन्‍हें नभाटा का यह कदम कितना मन भाया है। इन दिनों वैसे भी हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत एग्रीगेटरों की समस्‍या से जूझ रहा था जबकि ब्‍लॉगवाणी और चिट्ठाजगत जैसे शीर्ष एग्रीगेटरों ने अपने कार्य पर विराम लगा दिया था।

मेरा सदा से यही मानना रहा है कि इस जहां में जो भी होता है, सदैव अच्‍छे के लिए होता है। इसी का प्रतिफल है कि नवभारत टाइम्‍स समूह ने हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की इस परेशानी को दूर करने के लिए तुरंत कार्य किया, नतीजा आपके सामने है।


नवभारत टाइम्‍स के संपादकों और स्‍तंभकारों के ब्‍लॉग की सुविधा तो साइट पर काफी समय से रही है परंतु पाठकों के लिए यह सुविधा देकर नभाटा समूह ने हिन्‍दी ब्‍लॉगरों का दिल जीत लिया है। जिन पाठकों/लेखकों ने  अभी तक अपने ब्‍लॉग नभाटा पर न बनाए हों वे अपने पुराने ब्‍लॉग तो इनके एग्रीगेटर से जोड़ें ही, अपना एक स्‍वतंत्र ब्‍लॉग भी अवश्‍य बना लें।

आने वाले सोमवार को नुक्‍कड़ पर जो चर्चा की जाएगी वो विशेष तौर पर नवभारत टाइम्‍स ई पेपर और इसकी साईट पर बनाए गए ब्‍लॉगों पर केन्द्रित रहेगी। इसलिए आप अपना ब्‍लॉग बना लें, हो सकता है सोमवार को होने वाली चर्चा में आपके ब्‍लॉग की भी चर्चा हो।


हिन्‍दी ब्‍लॉगहित में प्रकाशित एवं प्रसारित।


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ब्‍लॉग गायब हो रहे हैं, सावधानी बरतें : फिर मत कहियेगा खबर न हुई

कल एक मासूम ब्‍लॉगर का अमन का पैगाम गायब हो गया और आज अरूण सी. राय के सरोकार के निराकार होने की सूचना लिखचीत पर मिली है। एक दो जगह टिप्‍पणियों में भी ऐसे ही समाचार मिल रहे हैं। यह दुखद हैं परंतु नियति पर सिर्फ सावधानी का ही बस है। 
इमेज पर क्लिक करके देखें
नीचे दिए गए स्‍नैप शॉट देख लें। अपने ब्‍लॉग के डेशबोर्ड में जाकर सैटिंग्‍स पर क्लिक करें। फिर ब्‍लॉग का निर्यात करें पर क्लिक करें परंतु और भी अधिक सावधानी के साथ अगर, गलती से भी ब्‍लॉग हटाएं पर क्लिक हो गया तो सब मटियामेट हो जाएगा। जिससे बचने के लिए कार्यवाही की जा रही है, मतलब अपने हाथों से ही अपने ब्‍लॉग की खुदकुशी हो जाएगी। जो जाहिर है खुदखुशी से नहीं की गई होगी। 
क्लिक करें और देखें
इसके बाद ब्‍लॉग डाउनलोड पर क्लिक करे और नीचे देखें 
क्लिक करें और देखें
लिखा दिखलाई दे रहा होगा This type of file can harm your computer. Are you sure you want to download blog-12-09-2010,xml? आप save पर क्लिक कर लें। कुछ ही समय में फाईल डाउनलोड हो जाएगी। अब आप डाउनलोड की गई तिथि तक सुरक्षित हैं। ऐसी फाईलें सीधे कंप्‍यूटर पर नहीं खोली जा सकती हैं परंतु आप एक और ब्‍लॉग बनाकर उन्‍हें अपलोड कर सकते हैं। 

अब आपके ब्‍लॉग की सामग्री आपके कंप्‍यूटर की हार्डडिस्‍क में सुरक्षित है।
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जबलपुर में अदा जी यानी स्वपन मंजूषा जी की उपस्थिति

समयचक्र:''पर  प्रकाशित इस आलेख में जो बात नहीं बताई गई थी वो थी जबलपुर में अदा जी यानी स्वपन मंजूषा जी की उपस्थिति उनका आगमन ठीक दिनांक 31 मार्च को रात्रि 12 :00 बजे डुमना हवाई-अड्डे पर चार्टर प्लेन से हुआ. जहां भाई महेंद्र मिश्र जी एयर पोर्ट पर उनको लेने गए थे वहीं सर्र से यूनिवर्सिटी के पीछे वाली पहाड़ियों की तराई में एक चमकीली सी वस्तु उतरती दिखाई दी . मिश्र जी समझ गए कि समीर लाल पधार चुके हैं सभी आगंतुकों को ''मानव-घसीट-त्रिचक्र-वाहन'' से शहर लाया गया . इधर मै और डूबे जी रेलवे स्टेशन पर ठीक सवा नौ बजे से रायपुर से आने वाली ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे जिससे आने वाले थे ललित शर्मा और पाबला जी  गाडी ने ठीक 12 :00   बजे रात प्लेट फ़ार्म पर लगी . उधर भाई महफूज़ ने पहले इंदौर से आई ट्रेन से उतरे ताऊ और कुलवंत  का लगभग अपहरण कर लिया.  कानपुर वाली सवारियां आ न सकीं . जिसमे बैठे थे अनूप महाराज वे कटनी रेलवे स्टेशन पर उतर गए थे. फोन पर ज्ञात हुआ कि उन्हौने सह यात्री से पूछा : भाई जबलपुर आ गया..?
सहयात्री बोला-''साहब आ ही गया समझो ''
अनूप महाराज:-''फेक्ट्री वाला न ''
सहयात्री:-हाँ,फेक्ट्रीया है यहाँ
इत्ता सुनते ही अनूप जी उतर गए. गाडी निकालने पर जब वे बाहर पहुंचे तो उन्हौने पलट के देखा तो समझ में आया कि  यह तो ''चूना-फेक्ट्री'' वाला शहर कटनी है - जबलपुर तो दूर है.  फिर वे अल्लसुबह जबलपुर पहुंचे , इस सम्बन्ध में खरीले बवाल ने ख़बर देने के लिए फोन किया मैंने फोन उठाया भी बात कर ही रहा था बवाल से कि श्रीमती बिल्लोरे ने डपटते हुए जगाया कि ''सुबह के दस बज गए अभी तक उठे नहीं ऊपर से नीद में भी बर्रा रहे हो  डाक्टर-ज्वैल  को दिखाती हूँ आज तुमको और मेरा सपना टूटा नींद खुल गई ''  
आगे का सपना इधर है देशनामा पर 
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एक नए ब्‍लॉगर का शिकायतनामा (अविनाश वाचस्‍पति)

मित्र मेरे जो पढ़ते हैं मेरा लिखा
मेरी रचना का कहते हैं स्‍वाद चखा

न जाने कैसे टिप्‍पणी तो कर जाते हैं
चाहे टिप्‍पणी हो कैसी भी पर वे मेरे
तो मन को खूब भाते हैं
, शिकायत :
पर पसंद पर चटका लगाना भूल जाते हैं ?

पसंद चटकाने से रचना का मजा हो जाता है दूना
जितनी पसंद चटकती हैं आनंद बढ़ता है कई गुना।


एक नए ब्‍लॉगर का शिकायतनामा है। जिसको भावों में मैंने बांध दिया है। इतना गूढ़ संदेश खुले शब्‍दों में उतार दिया है।
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चुनाव और हम ब्‍लॉगर्स की जिम्‍मेदारी

चुनाव एक यज्ञ
(सामयिक चर्चा)

चुनाव एक यज्ञ है। इस यज्ञ में वो सब लोग जो वोट देने के अधिकारी हैं, यज्ञ करने वाले हैं और जो अभी वोट देने की उम्र तक नहीं पहुचे हैं वे यज्ञ में सम्मिलित ऐसे सदस्‍य हैं जो इससे ज्ञानार्जन और पुण्‍य दोनों अर्जित कर रहे हैं।

आज किसको वोट दिया जाए और किसको न दिया जाए, ये एक यक्ष प्रश्‍न बन गया है। हम कोई सीधा सादा फार्मूला नहीं लगा सकते कि जो ऐसा है उसको वोट दो और जो ऐसा नहीं है उसको वोट न दो। जो इस पार्टी का है उसको वोट दो और जो उस पार्टी का नहीं है उसको वोट न दो। आज का यह सबसे बड़ा बहस का मुद्दा है कि हम किस प्रत्‍याशी को जिताएं।

हम सभी ब्‍लॉगर्स की भी यह नैतिक जिम्‍मेदारी है कि इस यज्ञ में शरीक हों और इस बहस को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाये कि आखिर हम किस तरह के लोगों को चुनकर लोकसभा में भेजें। क्‍योंकि एक गलत चुना हुआ नुमाइंदा सदन में कितना व्‍यवधान पैदा करता है, एक बेईमान मंत्री (
सुखराम जैसे लोगों को याद करो) देश को कितना बड़ा नुकसान पहुचाता है इस का लेखा जोखा करना आसान नही है। यहां तक कि सदन के लिए चुने हुए व्‍यक्ति द्वारा दिए हुए एक एक बयान, एक एक स्‍टेटमेंट के अपने मायने होते हैं और अगर वो गलत हैं, मूर्खतापूर्ण हैं, गैर जिम्‍मेदाराना हैं तो पूरे देश का और समाज का अतिशय अहित होता है।

पिछले सदन के कार्य काल में, हम सभी ने यह जरूर महसूस किया होगा कि सदन के समय की खूब बर्बादी हुई है, सदन बहुत ही कम समय के लिए चला है (पिछले सदनों की अपेक्षा बहुत कम समय तक चला है) और सदन में गंभीर से गंभीर विषयों पर चर्चा या विचार विमर्श बौद्धिक स्‍तर पर नहीं हुआ है। खाली सहमति और असहमति के नारे लगाए गए हैं। कार्यवाही में बाधा पहुचाई गई है। और कई बार तो ऐसा लगा है कि पूरे सदन को गुमराह करने की कोशिश की गई है।

सदन कोई बच्‍चों के खेल का मैदान नहीं है। कुछ विवेकशील लोगों ने यह सोचा कि यदि सदन की कार्यवाही का टी वी पर जीवंत प्रसारण किया जाएगा तो शायद सदन के सदस्‍यों को इस बात का डर रहेगा कि हमें पूरा देश देख रहा है लेकिन यहां तो हालत ये हो गई कि किसी बेशर्म का लोगों ने एक बार कपड़ा उतार दिया तो अब वो कपड़ा ही नहीं पहनना चाहता। हां, सदन में जो शर्मदार सदस्‍य हैं, वे विचारे या तो चुप बैठे रहते हैं या आंखें बंद किए रहते हैं।

हमें अपने गरिमामय राष्‍ट्र के सदन के लिए जिम्‍मेदार और विवेकशील सदस्‍य चाहिएं। हमारे सोमनाथ दादा ने ठीक ही कहा है कि तुम सब लोग इस बार हार जाओगे। उनका तात्‍पर्य सीधे सीधे सदस्‍यों की गैर जिम्‍मेदाराना हरकतों और सदन के गरिमा को कम करने के कारणों से ही रहा होगा। क्‍योंकि यह श्राप किसी विशेष पार्टी या किसी विशेष सदस्‍य के नहीं ये सिर्फ उन लोगों के लिए है जिन लोगों ने सदन की गरिमा को घटाया है।

अंत में, मैं यही कहूंगा कि हम सब अपने अपने ज्ञान के आधार पर तजुर्बे के आधार पर ऐसे छोटे छोटे सूत्रों का प्रतिपादन करें जिससे हमारे समाज के हर व्‍यक्ति को यह संदेश जाए कि वो किसको वोट दे और किसको वोट न दे।

From the desk of : MAVARK
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नुक्‍कड़ ब्‍लॉग/ब्‍लॉगर गोष्‍ठी का आयोजन

प्रतिक्रिया पर प्रति‍प्रतिक्रिया दीजिए

जैसे दी है मैंने
और दीजिए ज्ञान

इसी से आगे खुलेंगे
आंख, नाक और कान।

बच्‍चा काफी समझदार है
नटखट नाम तो है इसका
पर काम दिमाग खटखटाने के कर रहा है
पर विदेशी या विदेश में रहने वाले इस
प्‍यारे से खटखट बच्‍चे को ढेर सारा प्‍यार।

सही खटखटाया है इसने दिमाग का दरवाजा
ऐसी नौबत ही न आने दें कि हो झगड़ा
करें ऐसा कि झगड़े का न हो तनिक रगड़ा

नुक्‍कड़ संगोष्‍ठी में आने का हो पक्‍का इरादा
वे पूरा होमवर्क अभी से करना कर दें शुरू
कह सकते हैं गुरू हो जायें शुरू
चाहे हों वे मौजूद इन चुरू

पर करनी है जिन मुद्दों पर चर्चा
उस पर अभी से दिमाग का कर लें खर्चा
अपने विषय सुझायें उस पर राय भी बतलायें

सब अपना अपना आइडिया इसी प्‍लेटफार्म पर लायें
उस पर अपने विचार बतलायें, सबके विचार सुनें
मनन करें, मंथन करें और निकालें निष्‍कर्ष
तभी संगोष्‍ठी का सोपान बनेगा नया उत्‍कर्ष

सिर्फ मिलने के लिए मिलना
अपने घरों से इतनी दूर निकलना
मेरा घर पास है तो इसका मतलब
यह तो नहीं है कि मुझे अन्‍यों की
चिंता नहीं है, जबकि आज खाली कोई नहीं है

वैसे भी समय खराब करने के लिए
नेटजगत से अच्‍छा कोई और प्‍लेटफार्म नहीं है
पर सभी नहीं कर रहे हैं समय खराब
और
न ही करना है हम सबने बेकार

चाहे कार में न आयें पर बेबस भी न हों
रचें, लिखें, मथे, ऐसा जो जचे जमाने को
बदल दे कहानी को, पूरी रवानी को

ऐसा माहौल बनाना है, अच्‍छे विचारों को
जगमगाना है, ब्‍लॉग का सदुपयोग करके
सबको करके दिखलाना है

नुक्‍कड़ चाहे न बने मिसाल, पर न खराब हो इसमें लगे साल
साल दर साल नहीं तो यूं ही बढ़ते रहेंगे
पर सच्‍चाई में पीछे हटते रहेंगे

इसलिए अच्‍छी तरह सोचें
अपनी योजनायें नुक्‍कड़ पर लगायें
जिसमें अपना संपूर्ण ज्ञान आजमायें
सबकी मानें और अपनी मनवायें
जो भी हों अच्‍छी सच्‍ची बातें

नहीं तो कल यही बच्‍चा हमें डांट रहा होगा
कहेगा अंकल, देखना मैं करता हूं क्‍या कल
पर उसे न होने दें विकल
और पर्यावरण अनुकूल चलायें शब्‍दों की साईकिल।

मैं इस साईकिल से उतरता हूं
अब दूसरा बैठे और अपनी बात कहे।
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