चला गया हूं मैं, नजर फिर भी आऊंगा मैं, सोशल मीडिया अब मेरा ठिकाना है : अलबेला खत्री

ठिकाने बदल जाते हैं
ठिठक जाते हैं दौड़ने वाले
जीतने वाले, जिताने वाले
फिर भी सब मतवाले हैं
खुद को जिंदा मारे हैं
 
मालूम है उन्‍हें
जानते हैं वह
लटके हुए हैं सबके पैर
उस कब्र पर
जो चाहे अनखुदी है
दिखाई नहीं देती है
पर मौजूद है।
 
यह मौजूदगी
इंसान की है
इंसानियत की
भी हो सकती है
नहीं भी
यह सबके अपने
अपने निजी अनुभव हैं।
 
सांसों का मीटर
नहीं  आता नजर
पर चलता रहता है
रुकने पर भी
नहीं होता आभास
पर मीटर तो मीटर है
वही बनता किलोमीटर
उसका जीवन कोश है
कोष कब रिक्‍त हो जाए
न तुम जानते हो
न मुन्‍ना(अविनाश वाचस्‍पति)  
न अन्‍य कोई।
 
यही कोश निरंकुश लगता है
पर इस पर भी किसी का अंकुश
कसा तो जाता है
जब गहरे से कसता है
न तब और न जब धीरे से
कसने पर पीड़ा होती है।
 
जीवन को ढूंढा है पीड़ा मे
तुझमें ढूंढूंगा पीड़ा
पीड़ा जो सच है
पीड़ा ही दर्द है
सच मानो मित्रो मेरे
पीड़ा ही सच्‍चा जीवन है।
 

25 टिप्‍पणियां:

  1. जाना तो सबका तय है
    श्रद्धासुमन चढ़ाना भी तय है
    वैसे ही जैसे आप जीतेंगे
    बाकी सब दल भय से रीतेंगे।

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  2. रुला कर चला गया हंसाने वाला

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    1. उसकी रचनाएं यहीं पर हैं वह हंसाएंगी हमें ताउम्र

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  3. Bahut hi badi kshati hai jana to hai sbko ek din par n Jane kyun inke jaane ka gam jyada hai gahraiyo se shraddha Suman

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    1. जाने की गहराईयों को दिल तक मत उतरने दो

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  4. विश्वास ही नहीं हो रहा है.
    दुखद समाचार .
    अलबेला जी को विनम्र श्रद्धांजलि.

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    1. विश्‍वास अल्‍पना जी
      उनकी रचनाओं पर है
      वह तो करना है
      सभी रचनाकार करते हैं

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  5. उत्तर
    1. श्रद्धासुमन के हकदार उसके हंसी के दुकूल

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  6. VAH VAKAEE ALBELA THAA . MAINE USKO EK BAAR KAHAA THAA - YAA TO COMEDIAN BHAGWAAN ALBELE THE
    YAA TUM HO . USKAA DUNIYAA SE JAANA VISHWAAS NAHIN HO RAHAA HAI . ISHWAR USKEE ATMA KO SHANTI PRADAAN KARE .

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    1. गया नहीं है वह कहीं
      आसपास मौजूद है
      प्राण हंसी के
      उसके हंसी हंसी में
      यूं हंसाकर चले गए
      नहीं होता विश्‍वास
      यह विशवास भी तो
      पक्‍का भरोसा है
      सुबह फिर से जीवन का आना
      बंधन विश्‍वास का न टूटा है
      और न टूटेगा कभी।

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (09-04-2014) को चुनाव की नाव, पब्लिक का लक; चर्चा मंच 1577 में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हास्य-व्यंग्य के सशक्त आयाम
    अलबेला खत्री का असमय में जाना
    जमीन से जुड़े एक महान कलाकार का जाना है...
    चर्चा मंच परिवार की ओर से भाव भीनी श्रद्धांजलि।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. इतनी जल्दी क्या थी प्यारे -
    सादर नमन -

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  9. दुखद .. विनम्र श्रृद्धांजलि

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  10. यह सबको हंसाने वाला, सबको रुला गया... विश्वास ही नहीं हो रहा है इस अलबेले के जाने का :-(

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  11. अलविदा अलबेला भाईजी !
    काश आप ऐसे नहीं जाते...
    अश्रुपूरित श्रद्धांजलि !


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  12. आना है तो जाना भी है।
    आने जाने के बीच जीव सार्थक और रचनात्मक कर्म करे तो उसके जन्म का उददेश्य पूरा हो जाता है। जो चले गए उनका जाना यही याद दिलाता है उन्हें जिन्हें अभी जाना बाक़ी है।
    मरने वाले के कर्मों का खाता बन्द हो चुका है और अब वह पूरी तरह अपने जीवनदाता के दया और न्याय के फ़ैसले पर आश्रित है।

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  13. मेरी विन्रम श्रद्धांजलि , वाशी , नवी मुंबई की ओर से

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  14. मैं हतप्रभ हूँ और शोक संतप्त भी एक मित्र के असमय चले जाने से ..... ।

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  15. वो नहीं जाएगा दादा He can't go like this.

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