'गे' की गैल चलेंगे : दैनि‍क मिलाप स्‍तंभ 'बैठे ठाले'' 19 दिसम्‍बर 2013 में प्रकाशित


1 टिप्पणी:

  1. कुक्कुर के पीछे लगा, कुक्कुर कहाँ दिखाय |
    कुतिया भी देखी नहीं, जो कुतिया-मन भाय |

    कुतिया के मन भाय, नहीं पाठा को देखा |
    पढ़ते उलटा पाठ, बदल कुदरत का लेखा |

    पशु से ही कुछ सीख, पाय के विद्या वक्कुर |
    गुप्त कर्म रख गुप्त, अन्यथा सीखें कुक्कुर ||

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