एक पत्र होली के नाम

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  • प्यारी होली 

    सादर रंगस्ते!

         स दिन ड्यूटी समाप्त कर घर वापस लौट रहा था कि अचानक पीठ पर पानी का गुब्बारा किसी ने दे मारा. पीछे मुड़कर देखा तो एक छोटा बच्चा मनमोहक मुस्कान के साथ तोतली आवाज में बोला, “ओली है”. तब जाना कि आपका आगमन होने वाला है. नौकरी की व्यस्तता इतनी अधिक हो जाती है कि कोई त्यौहार अथवा कोई विशेष दिन याद ही नहीं रह पाता. त्यौहार के दिन ही सुबह-सवेरे आने वाले एस.एम्.एस. द्वारा पता चलता है की आज ये त्यौहार है तथा त्यौहार का आधा दिन तो एस.एम्.एस. पढने व उनके जवाब देने में ही चला जाता है बाकि जो समय बचता है तो एक प्रकार की रस्म अदायगी ही हो पाती है.
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