मुखड़ा हुआ अबीर : कर गई कमाल टोपी * अमर उजाला से मिलिए, पढ़ने के बाद अपनी कहिए

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  • अविनाश वाचस्पति
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    अमर उजाला कह रहा है
    नहीं पढ़ पा रहे हैं अगर मुझे
    तो इस लिंक पर कीजिए क्लिक
    और पेज नंबर 14 पर माऊस
    का उपयोग कीजिए
    फिर कविताएं तो छपी हैं
    उनको अपने मानस के जरिए
    होली पर गुझिया रूपी भोग कीजिए
    लीजिए स्‍वाद और बतलाइए
    कैसा आया आस्‍वाद ?

    12 टिप्‍पणियां:

    1. badhai.खूबे रंग जमाया... सरा रा रा रा

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      1. अब जमे रंग को
        पिघला कर होली खेलिएगा।

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    2. कविताएँ अच्छी हैं...होली की शुभकामनाएँ...

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      1. शुभकामनाएं भी अच्‍छी हैं
        होली की कविताएं तो
        अभी आपने चखी हैं।

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    3. Waah!!! Avinashji... topi ne to sach mein kamaal kar diya:)

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      1. टोपी ने टोपी पहनाई
        और उतार भी दी
        शालिनी बिटिया।

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    4. होली की शुभकामनाएँ...कविता अच्छी हैं !

      उत्तर देंहटाएं
    5. होली की शुभकामनाएँ...कविता अच्छी हैं !

      उत्तर देंहटाएं

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