रंग-रंग जीवन

Posted on
  • by
  • Fazal Imam Mallick
  • in
  • Labels:


  • फ़ज़ल इमाम मल्लिक

    आज़ादी से पहले भारत के नक्Þशे पर कई राजा-महाराजाओं और नवाबों की रियासतें दिखाई पड़ती थीं। इन रियासतों की अपनी संस्कृति, अपनी सभ्यता और अपनी परंपरा थी। ज़ाहिर है कि इन रजवाड़ों और रियासतों की एक अलग दुनिया थी, जिनमें जिंदगी अलग-अलग रंग में दिखाई देती थीं। मशहूर लेखक लुइस रॉसेट की पुस्तक ‘इंडिया एंड इट्स नेटिव प्रिंसेस’ में इन रजवाड़ों और रियासतों को देखने-समझने में मदद मिलती है। उन्नीसवीं सदी के आखिर में लिखी गई इस पुस्तक में मध्य भारत के साथ-साथ बंगाल और बंबई के इलाकों और वहां से जुड़ी संस्कृति से हम रूबरू होते हैं। लुइस रॉसेट ने 1882 में इस पुस्तक की रचना की थी और क़रीब छह साल तक भारत की रियासतों और वहां के जीवन पर गहन शोध के बाद यह पुस्तक लिखी थी। तब इस पुस्तक का प्रकाशन बिकर्स एंड संस ने किया था। बाद में इस पुस्तक का संपादन लिफ्टेनेंट कर्नल बकल ने किया और नियोगी बुक्स ने इसका पुनर्प्रकाशन कर हमारे सामने उन्नीसवीं सदी के इतिाहस, सभ्यता और संस्कृति को सामने रखने की कोशिश की है।
    यह कोशिश इसलिए और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि पुस्तक में कई अनकही कहानियों के साथ-साथ उन्नीसवीं सदी के राजा-महाराजाओं और उनकी रियासतों से जुड़े कई ऐसे अनछुए पहलू हमारे सामने आते हैं जिनसे हम जैसे लोग अनजान ही थे। छह साल तक भारत के इन हिस्सों में घुमक्कड़ी कर इस फ्रांसीसी लेखक ने पाठकों के सामने एक नई और अनोखी दुनिया को सामने रखा है। इस दुनिया में इतिाहस भी है, धर्म-संस्कृित भी है, आस्था, धार्मिक विश्वास के साथ-साथ जीवन से जुड़ा हर वह रंग है जो उन्नीसवां सदी में उन रियासतों में पसरे हुए थे। भाषा की सहजता और रवानी इन रंगों को और चोखा करती है। रॉसेट हमें भीलों की दुनिया में ले जाते हैं तो कोणकन से लेकर अंबरनाथ के मंदिरों की हमें सैर कराते हैं। डाकबंगलों की कहानियां भी वे बताते हैं और चीतल-हिरणों की रफ्तार के साथ पाठकों को वे खेत-खलिहानों, जंगलों और पहाड़ों पर ले जाते हैं।
    बड़ौदा, पुष्कर, अजमेर, अलवर, आगरा, जयपुर, धौलपुर, ग्वालियर, भरतपुर सहित सांची, पन्ना, ओरछा, झांसी, गोविंदगढ़, मालवा, भोपाल, बनारस, गया होते हुए मुर्शिदाबाद के रास्ते वे बंगाल ले जाते हैं। सफ़र में सांभर झील भी मिलती है और मंदार की पहाड़ियां भी। भीलों की दुनिया से भी वे रूबरा कराते हैं और संथालों के जीवन से भी वे हमें जोड़ते हैं। इस यात्रा के दौरान भारत कई-कई रूपों में हमारे सामने आता है। बेहतरीन रेखाचित्रों के ज़रिए अपनी सभ्यता और संस्कृति को पहचानने-समझने में हमें मदद लिमती है। इन स्केचों ने पुस्तक का महत्त्व और भी बढ़ा दिया है। नियोगी बुक्स ने इस पुस्तक को प्रकाशित कर एक बड़ा काम किया है। सरल और सहज भाषा इस पुस्तक की बड़ी ख़ूबी है यह ख़ूबी पुस्तक को पठनीय बनाती है।
    इंडिया एंड इट्स नेटिव प्रिंसेस (यात्रा वृतांत), लेखक: लुइस रॉसेट, प्रकाशक: नियोगी बुक्स, डी-78, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, फेस-1, नई दिल्ली-110020, मूल्य: 795 रुपए।

    1 टिप्पणी:

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz