दो कवियों की बेहद गोपनीय बातचीत विकिलीक्‍स ने लीक की है : पढि़ए और टिप्‍पणी दीजिए

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • दो कवियों की मोबाइल फोन से की गई संदेशीय लिखचीत को सार्वजनिक किया जा रहा है। समझा जा रहा है, यह गोपनीय जानकारी विकिलीक्‍स से लीक हुई है। 

    बातचीत को नीचे पेश किया जा रहा है
    आप आनंद लीजिए और पहचान सकें
    तो अवश्‍य पहचानिए भागीदारों को
    या जिनका संदर्भ इसमें है :-

    कवि नंबर 1
    कल फरीदाबाद में कविता पाठ करने चलेंगे

    कवि नंबर 2
    कितने नोट मिलेंगे

    कवि नंबर 1
    एनजीओ का प्रोग्राम है
    नोटों का मैंने मना कर‍ दिया है

    कवि नंबर 2
    बीमारी में कैसे जा सकता हूं
    बिना नोटों के अपनी जान, कैसे दांव पर लगा सकता हूं

    कवि नंबर 1
    रही बात बीमारी की तब तो ठीक है
    लेकिन धन के लिए दूषित मन मत करना

    कवि नंबर 2
    धन के न मिलने से भी भला कोई बड़ी बीमारी है
    दिग्‍गजों ने तो इसके इलाज में अपनी ईमानदारी भी लगा दी है

    कवि नंबर 1
    दिग्‍गजों की रीत मत अपनाना
    उनकी बातों में कभी न आना
    उन्‍हें पता है कि दो गज ही चाहिए जमीन
    फिर भी धन के लोभ में बन जाते हैं कमीन

    कवि नंबर 2
    उसी जमीन में तो ईंटें लगानी हैं
    मजबूत मरने वाली जमीन बनानी है
    न होता शब्‍द अगर मीन
    तो सोचो कैसे बनता शब्‍द कमीन

    कवि नंबर 1
    चलिए आप करना कवि सम्‍मेलन धनयुक्‍त
    अपन तो फिलहाल जा रहे हैं बिल्‍कुल मुफ्त

    कवि नंबर 2
    आपने उठा लिया इतना लुत्‍फ
    ये भी नहीं हैं मुफ्त
    कीमत बतलाओ इसकी और पाओ भरपूर गिफ्ट

    कवि नंबर 1
    लुत्‍फ लेते हैं हम तो संदेशों से बिल्‍कुल मुफ्त

    कवि नंबर 2
    बिना पैसों के तो संदेश भी नहीं जाते
    क्‍या एसएमएस के लिए पैक रिचार्ज नहीं कराते

    इसके बाद क्‍या हुआ, इस बारे में कवियों की सरकार जानकारी हासिल करने में जुट गई है। शीघ्र ही दिल्‍ली हाईकोर्ट में हुए बम से बड़ा धमाका कविता संसार में हो सकता है। 

    17 टिप्‍पणियां:

    1. ओह तो ये बात थी, मैं भी कहूं, सतीश भाई ने आजकल ब्लॉग पर लिखना कम क्यों कर दिया है...

      जय हिंद...

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    2. jai ho


      bhai , maine suna hai ki bloggers ke baare me bhi kuch wikileaks ko mila hai !!!!!

      vijay

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    3. अविनाश जी इसे नुक्कड़ लीक कहें तो कैसा रहे?

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    4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति , आभार

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    5. क्या विकिलीक्स के इतने बुरे दिन आ गए की , उसे कवियों की सुधि आई ..... बधाई हो इस लायक तो समझा .....
      शुक्रिया जी /

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    6. मैं तो डर गया था कि कहीं आपकी और मेरी वाली बातचीत तो नहीं लीक हो गई !!

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    7. विकिलीक्स को अब सरकारी लीक्स बना दिया जाए। हमारे नेताओं की कारगुज़ारी इसी से तो मिल रही है ... जेट आदि।

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    8. हा हा हा... विकलिक्स में कविलिक्स...!!

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    9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    10. धन्यवाद...
      बहुतों की बात लिख दी...
      मन में थी, सोचती थी कि शायद मैं ही गलत हूँ... पर अब लगता है कि मैं अकेली नहीं हूँ...

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    11. जब धमाका हो जायेगा ..हमें तो तब ही पता चलेगा :):)

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
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