सरकारी लापरवाही का शिकार हुए साहित्‍यकार कालीचरण प्रेमी गुजर गए

मैं सरकारी लापरवाही का शिकार हुआ हूं 
जब इंसान चाहकर भी कुछ न कर पाए और मन भर भर आए। आंखों के आंसू बेबसी को प्रकट करते रह जाएं। यही हुआ। नुक्‍कड़ पर दिनांक 14 अप्रैल 2011 को इस पोस्‍ट का प्रकाशन हुआ। नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकत हैं।

साहित्‍यकार एवं डाक-कर्मी कालीचरण प्रेमी ब्‍लड कैंसर से पीडि़त और सरकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली से त्रस्‍त 

सूचना जारी होने के बाद भी कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं हुई। स्थिति बिगड़ते देख दिनांक 20 अप्रैल 2011 को दूसरी पोस्‍ट लगाई गई। 

और अंतत: सरकारी लापरवाही की विजय हो गई और हम सबके प्रिय साहित्‍यकार कालीचरण प्रेमी जी स्‍वर्ग सिधार गए। विस्‍तृत खबर यहां पर है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. इस सरकारी व्यवस्था का भगवान ही मालिक है!
    कालीचरण प्रेमी जी को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ!

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  2. 'दुःख ही जीवन की कथा रही
    क्या कहूं आज जो नहीं कही '

    दुर्दिन पीड़ित महाप्राण निराला को भी यह दंश झेलना पड़ा ...
    आज के धनमानुष और सरकारें क्रिकेट और पार्कों पर तो बेतहासा धन लुटा सकते हैं किन्तु एक अभावग्रस्त साहित्यकार को अपने पास से क्या , उसकी मेहनत का बकाया भी नहीं दे सकते |

    कालीचरण प्रेमी जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि .....
    ईश्वर उनके परिवार को इतना साहस दे कि वे इस दुःख को सहन कर सकें |

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  3. कालीचरण प्रेमी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि .....
    ईश्वर उनके परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दें....

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