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| मैं सरकारी लापरवाही का शिकार हुआ हूं |
साहित्यकार एवं डाक-कर्मी कालीचरण प्रेमी ब्लड कैंसर से पीडि़त और सरकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली से त्रस्त
सूचना जारी होने के बाद भी कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं हुई। स्थिति बिगड़ते देख दिनांक 20 अप्रैल 2011 को दूसरी पोस्ट लगाई गई।
और अंतत: सरकारी लापरवाही की विजय हो गई और हम सबके प्रिय साहित्यकार कालीचरण प्रेमी जी स्वर्ग सिधार गए। विस्तृत खबर यहां पर है।



