असामान्‍य ब्‍लॉग से परिचित हो जायें : अमर उजाला की खबर पर नजर

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • 24 जनवरी 2011 के अमर उजाल हिंदी दैनिक के पेज 13 पर प्रकाशित खबर पर आप भी नजर डालिए और क्लिक करके पढि़ए, फिर अपनी बात कहिए।

    3 टिप्‍पणियां:

    1. केन्द्र का मानना है कि जजों का काम सिर्फ और सिर्फ अदालत में बैठ कर फैसले करना है। जो कुछ कहें वहीं कहें उस के अलावा कहीं कुछ न कहें। वह एक स्वावलंबी न्यायपालिका नहीं चाहता।
      जज शैलेन्द्र कुमार ने कहीं भी अपने पद की मर्यादा को नहीं तोड़ा है। पर उन्हों ने जो कुछ अपनी इस साइट पर लिखा है। उस से सरकार और न्यायपालिका के अनेक फोड़े जनता को नजर आने लगे हैं। सरकार को यही कष्ट है।

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    2. वाह भाई आपके इस लेख मे दम है

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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