श्रेष्ठता का पैमाना :लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान

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  • ravindra prabhat
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  • एक ऐसा उदीयमान लेखक और व्यंग्यकार जब सृजन के लिए कलम उठाता है तो जग के कंटीले करील-कुंजों को प्रयाग की पावनता प्रदान कर देता है ....!

    "वसुधैव कुटुंबकम" तक जाकर क्षितिज को भी अपनी बांहों के घेरे में भर लेने की प्रचेष्टा जिसकी रचनाओं में पूरी तरह प्रतिविंबित होती है और जो साहित्य की विभिन्न विधाओं से जन कल्याण के साथ ही साथ जग कल्याण करता है ...!

    जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने इस बार वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

    विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ किलिक करें

    एक ऐसी लेखिका जिसकी साधना के स्वर पाठकों के मन के सुदूर घाटियों में अन्तर्निहित स्वर को ध्वनित- प्रतिध्वनित करने में पूरी तरह सक्षम है ...!

    एक ऐसी लेखिका जिसकी साधना जब सरस्वती की अग्निविना पर सुर साधती है तो साहित्य की अग्नि धाराएं प्रवाहित होने लगती है ...! इन अग्निधाराओं में कहीं अग्नि की आंच धाह मारती है तो कहीं कलुषित परिवेश की कालिमा जलाकर उसके बदले एक खुशहाली से भरे विहान की ललक दिखा जाती है....!

    जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
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    ब्लोगोत्सव-२०१० पर अवश्य पढ़ें-
    सितारों की महफ़िल में आज प्रिती महेता
    सितारों की महफ़िल में आज दीपक मशाल

    आप शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो उसी पोस्‍ट के लिंक पर क्लिक करके परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्‍सव 2010 की संबंधित पोस्‍ट पर ही देंगे तो पाने वाले और देने वाले - दोनों को भला लगेगा। यह भलापन कायम रहे।

    2 टिप्‍पणियां:

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