ब्‍लॉगर से ब्‍लॉगर मिले : आगरा ब्‍लॉगर मिलन : चित्र और चर्चा

आ से ही आगरा और आ से ही आनंद और आ से ही आया।
आगरा में असीम आनंद आया।
मन आंगन में भरी दोपहरी में भी बरस उठी घनी स्‍नेह की छाया।



आगरा में इस बरस पहली ब्लॉगर मुलाकात पिछली 8 मई को डॉ. सुभाष राय से हुई। उनका ब्लॉग बात-बेबात है। नाम का क्या। इसमें घूमने पर आपको महसूस होगा कि ऐसी कोई बात नहीं कि जिसे बेबात कहा जा सके। हम ऐसे मिले जैसे हमारी पहचान बहुत पुरानी हो। इससे पहले फोन पर भी हमारी एक-दो बार बातचीत जरूर हुई थी। मैंने उन्हें सायं 4 बजे के करीब फोन किया। वे बोले, कई दिन से आपसे मिलने का मन हो रहा है। मैंने कहा, इसमें कौन सी मुश्किल है, आप तो आगरा में ही हैं न। वे बोले, हां, पर आप तो लखनऊ में उत्सव में व्यस्त होंगे, वाचस्पति जी। मैंने कहा, आप इस समय जहां पर हैं वो पता बतलाइये। उन्होंने बताया कि ए-35, न्यू आगरा में दैनिक समाचारपत्र डीएलए के कार्यालय में हूं। मैंने कहा, आप व्यस्त होंगे। सुभाष जी ने कहा, नहीं अविनाश जी, आप आइये। आपका स्वागत है और तकरीबन 20 मिनिट बाद मैं उनसे रूबरू था। खैर ...

कॉम्बो ऑफर
इस दौरान एक और बड़ी बात यह हुई कि उनके साथ जो सज्जन मौजूद थे, वे भी अपनी ही बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। सुभाष जी ने उनसे मेरा परिचय कराया और लो जी, हम तीन ब्लॉगर हो गए। जहां पर दो या अधिक ब्लॉगर एक साथ मिल बैठ जायें, बातें कर लें तो उसे ब्लॉगर मिलन ही कहा जाएगा और वो भी तब जब कि तीनों ब्लॉगर हिन्दी के ही रहे। डॉ. एम. एस. परिहार मिले डॉ. सुभाष राय के साथ तो हो गया न कॉम्बो ऑफर। इनका ब्‍लॉग विचार-बिगुल है।

चाय भी हुई और चर्चा भी हुई। चर्चा आपस में बांटी जा सकती है चाय नहीं। चाय पीने के लिए तो स्‍वयं हाजिर होना जरूरी है। पर जब आप विचारों का आनंद लेंगे तो चाय भूल जायेंगे या विचारों में ही चाय की चुस्कियों का आनंद पायेंगे।

1. सुभाष जी ने सुझाव दिया कि हिन्दी ब्लॉगरों की स्थान के अनुसार ब्लॉगर डायरेक्टरी बननी चाहिए ताकि कोई अगर आगरा में कितने ब्लॉगर हैं, यह जानना चाहे तो उसे उस डायरेक्टरी में पूरा विवरण मिल सके। सुझाव बहुत ही उपयोगी है और इस पर अभी से अमल शुरू कर देना चाहिए। दिल्ली का मैं करता हूं और बाकी अपने-अपने क्षेत्रों का जिम्मा आप (इस आप में पाठक-ब्‍लॉगर शामिल हैं) सब संभाल लें। इसमें ब्लॉगर का नाम, ब्लॉग के नाम, ई मेल पते और फोन नंबर की जानकारी समेटना-सहेजना शुरू कर लें, पोस्टें लगाना भी व्यावहारिक रहेगा। फाइनल होने पर मेरी ई मेल avinashvachaspati@gmail.com पर भिजवाने का कष्ट कीजिएगा ताकि उन्हें समेकित रूप से इकट्ठा करके सबके पास भिजवा दिया जाए।

2. सुभाष जी बार बार बातचीत में स्वयं को नया ब्लॉगर बतला रहे थे। मैंने कहा कि रोजाना हिन्दी ब्लॉग बनाये जा रहे हैं। उनको क्या कहा जाएगा जबकि आपका ब्लॉग तो दो महीने पुराना है। इस बात का समर्थन डॉ. परिहार ने भी किया।


3. वैसे मेरा मानना है कि हिन्दी ब्लॉग जगत अभी अपनी शैशवास्था से गुजर रहा है और शीघ्र ही यह किशोर होगा और उसके बाद जवान होगा। जवानी तक तो इसकी भूलों को माफ करना और उन्हें सुधारने के लिए कृत संकल्प होना ही होगा।

4. सबसे अधिक जोर सुभाष जी ने वर्तनीगत दोषों की ओर दिलाया और यह भी कि इसका निदान सामूहिक प्रयासों से किया जा सकता है। उनका ख्याल था कि ब्लाग की इस नयी दुनिया के रूप में भाई-चारे की एक नयी दुनिया विकसित हो रही है। यह केवल लिखने, छपने, छपाने तक सीमित नहीं रहेगी, इससे भी आगे बढ़कर सब एक दूसरे की समस्याओँ, दुखों, खुशियों में भी शरीक होंगे, हो भी रहे हैं।

5. यह भी तय हुआ कि शीघ्र ही आगरा में एक विशाल हिन्दी ब्लॉगर मिलन आयोजित किया जाए और उसमें क्षेत्र के लेखकों इत्यादि को अपने ब्लॉग बनाने की ओर प्रेरित किया जाए जिसमें दिल्‍ली और आसपास के ब्‍लॉगर भी सक्रिय रूप से शिरकत करें।

6. इंटरनेट के कारण ही आज हमविचार लोग आपस में देश और विदेशों में मिल रहे हैं। यह एक सामाजिक क्रांति का सूत्रपात है।

7. मैंने सुभाष जी को राय दी कि सप्ताह में एक दिन या सातों दिन जैसा भी संभव और अनुकूल लगे, डीएलए में किसी एक हिन्दी ब्लॉग या ब्लॉगर की समीक्षा प्रकाशित किया करें। इस पर उन्होंने अपनी सहमति प्रदान की।

8. इंटरनेट और ब्लॉग एक दूसरे के पूरक हैं। इनकी संभावनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलना चाहिए। इस प्रकार के प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

9. सुभाष जी ने बताया कि उन्होंने डीएलए में उसके स्थानीय पाठकों के लेख छापना आरंभ किया है और इसे खूब सफलता मिली है। जोर इस बात पर रहता है कि वे लिखें। टूटी-फूटी भाषा में जैसा भी लिख पायें, उसे दुरुस्त करके प्रकाशित किया जाता है। जो पाठक लिख नहीं पाते हैं, उनसे बतिया लिया जाता है और जब वे अपने विचार प्रकाशित देखते हैं तो एक तो अपने मित्रों, शुभचिंतकों को समाचारपत्र देखने के लिए कहते हैं, खुद लिखने की ओर प्रेरित होते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। (आप भी डीएलए के लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं)


10. इसके बाद जब मैंने श्रीमती बीना शर्मा जी को फोन मिलाया तो वे तैयार बैठी थीं। एकदम से बोलीं तो आप फ्री हो गए अविनाश जी। मैंने बताया कि मैं दस मिनट में पहुंच रहा हूं और मैं आधे घंटे में पहुंचा। खैर ... शेष अगली पोस्‍ट में ।

जो सज्‍जन हम चारों के प्रोफाइल का चक्‍कर लगायेंगे वे वहां पर 50, 51 ,52 और 53 लिखा पायेंगे। यह भी एक पहेली ही है। बूझिएगा।

35 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया चल रहा है आगरा मिलन वृतांत...जारी रहिये.

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  2. ब्लॉगर मिलन अच्छा लगा, इंतजार अगले मिलन की किस्त का..

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  3. बहुत अच्छा रहा आपका ब्लागर मिलन

    हम भी जब आगरा पहुंचेगें तो रि्श्तेदारों से पहले
    डॉ. सुभाष राय जी,डॉ. एम. एस. परिहार एवं अन्य ब्लागरों से मिलेंगे।

    आगे की कथा का इंतजार है

    राम राम अविनाश जी

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  4. जारी रहे मिलन और हमारा सफ़र
    अविनाश जी प्रतीक्षा रहेगी

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  5. बहुत खुशी हुई आपके इस आगरा वृतांत को पढकर ।
    श्री अविनाश सर हिन्‍दी ब्‍लॉग्‍स को जितना व्‍यवस्थित और विकसित करने की दिशा में जो भागीरथी प्रयास कर रहे हैं, वो अविस्‍मरणीय हैं, वन्‍दनीय हैं और रहेंगे । आपके इस लख से हमें इस दिशा में और बेहतर काम करने की उर्जा मिली । श्री सुभाष जी के सुझाव वाकई बहुत अच्‍छे लगे। हिन्‍दी ब्‍लॉगर्स और हिन्‍दी को और अधिक सशक्‍त बनाने के साथ-साथ मानवीय मूल्‍यों में भी वृद्धि होगी । अगर मेरे लायक भी काम हो तो जरूर बताईयेगा, मैं अपना परम सौभाग्‍य समझूंगा । श्री अविनाशजी जैसे अगर सारथी हैं तो फिर भविष्‍य तो सुनहरा होगा ही । आगे के वृतांत के इंतजार के साथ प्रणाम । जय हिन्‍द ।।

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  6. अविनाश जी,

    आगरा की ब्लोग्गेर्स मीट की अगली कड़ी के इन्तजार में बैठी हूँ. आगरा में हुए विचार विमर्श का स्वागत करती हूँ. ब्लोग्गेर्स की डारेक्टरी होना बहुत जरूरी है. अभी हम अपने ही शहर के ब्लोग्गेर्स से परिचित नहीं हैं कि उनसे ही संपर्क साथ सकें. और उसकी पूरी जानकारी सबके पास होनी चाहिए. ताकि हम ब्लॉगर परिवार के सदस्य एक दूसरे से परिचित हों और कभी उधर जाना हो तो दर्शन और वार्ता का लाभ उठा सकें. एक शहर के ब्लोग्गेर्स तो कम सेकम दो चार महीने में एक मीट रख कर विचार विमर्श कर ही सकते हैं.

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  7. अविनाशजी, बहुत अच्छी प्रस्तुति। भाई मुझे तो सुमनजी का नाइस बहुत नाइस लगता है। जहां उनका नाइस चिपक गया, समझो आगे सब भला ही भला। आगरा के ब्लागर मिलन से लोग उत्साहित दिखते हैं, यह शुभ शकुन है। वाचस्पतिजी ठीक कहते हैं, अभी तो ब्लागिंग अपने शैशवकाल में है, लेकिन इसीलिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस शिशु को हम इस तरह पाले-पोसें, बड़ा करें कि वह बड़ा होकर निरोग और स्वस्थ दिखे। विचारों का अति स्वातंत्र्य या उनका प्रशस्तिपाठ की ओर पलायन, दोनों ही चीजें खतरनाक हैं। हमें कोशिश करनी होगी कि ब्लागलेखन सुरुचिपूर्ण, स्वस्थ और विचारोत्तेजक माध्यम बनकर उभरे और इसके लिए वैचारिक आकुलता के साथ संजीदगी की भी जरूरत होगी। गैर-संजीदा विचारों पर कोई न कोई अंकुश लगाना होगा। वर्तनी का विरुपण विचार प्रवाह को समझने में बाधा खड़ी करता है, इसलिए भाषा सही और पठनीय होनी चाहिए।

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  8. आम तौर पर पहेली जिस पन्ने पर छपती है, उसी के ओने कोने में उसका उत्तर भी छपा/छिपा रहता है। मैंने लैप टॉप घुमा घुमाकर देख डाला। उत्तर अब भी खोज रहा हूं।

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  9. बहुत खूब,
    आनद विभोर हो गया और पुराणी यादें भी एकदम ताजा तरीन हो गई,
    इसी आगरा नगरिया में तो मैं ब्लोगर बना था, भाई विनीत उत्पल जो कि उस समय भी ब्लॉग पर लिखा करते थे ने ब्लॉग लिखना सिखाया. मेरे ब्लॉग गुरु विनीत उत्पल और मेरी ब्लॉग जननी स्थल आगरा को नमन.
    जारी रहें प्रयास में हम सब साथ हैं .

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  10. यह क्या अविनाश भाई, आगरा आ गए और बगल में मैनपुरी के लिए समय नहीं निकाल पाए ??
    खैर फिर सही !! राय साहब से मिलवा दिया आपने इसका बहुत बहुत धन्यवाद !! अबकी बार आगरा जाने पर जरूर मिलता हूँ !!

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  11. अविनाश जी आगरा से लौटकर आए तो कैसी कैसी पहेलियां पूछने लगे। खैर आपकी पहेली तो मैं ही हल कर सकता हूं क्‍योंकि मैं भी इन्‍हीं नंबरों से ताल्‍लुक रखता हूं। भई आप चारों में से एक 50 साल का है,एक 51 का, एक 52 का तो एक 53 साल का है। ठीक है न। अ‍ब आप बताइए कि मेरा नंबर यानी आयु क्‍या ?

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  12. badiya.....Avinash ji...Blogging ke prati aapki nishtha pranamya hai.....

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  13. badiya.....Avinash ji...Blogging ke prati aapki nishtha pranamya hai.....

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  14. बहुत अच्छा लगा यह वृतांत पढ़कर ..और ब्लोगर डारेक्टरी का सुझाव तो बहुत ही बढ़िया है.

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  15. सुन्दर। आगरा में प्रतीक पाण्डेय से मिलना होता तो अच्छा रहता। प्रतीक उन लोगों ने में हैं जिन्होंने बिना हल्ला-गुल्ला किये बहुत काम किया है।

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  16. गुरू दाढ़ी? कहाँ गई??
    और आगरा तो हिन्दी की मानक खड़ी बोली के लिए जाना जाता रहा है, पहले से। यहाँ के ब्लॉगियों की जमात ज़रूर नाम करेगी।
    जारी रहिए…

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  17. अविनाश भैया ,अब तो बस क्रोध आ रहा है आपके ऊपर ,आपने अगर बता दिया होता कि आप आगरा आ रहे हैं तो कम से कम आपसे मिलने के बहाने मेरे दो काम हो गये होते -१-आगरा में चर्म रोगियों के अस्पताल के लिए कुछ चर्चा करनी है एक सज्जन से और ये आवश्यक काम लगातार टल जा रहा है २- मुझे आपसे ये उम्मीद तो है ही कि आपसे ताज महल दिखने की फरमाइश करूंगी तो आप पूरी कर देंगे ,पतिदेव और छोटा भाई दोनों साथ में आगरा गये मगर ताज नहीं दिखाया ,आज तक तरस रही हूँ

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  18. अविनाश जी था तो उस दिन मैं भी आगरा में लेकिन जानकारी नहीं होने के कारन शामिल ना हो पाया... आगे के वृतांत कि प्रतीक्षा है..

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  19. माफ़ कीजिएगा पिछली टिप्पड़ी में मेरे दिमाग की गाड़ी पटरी से उतर गयी थी
    वैसे ये अच्छा निर्णय है कि ब्लागरों की डाईरेकतरी प्रकाशित होनी चाहिए ,इसकी शिद्दत से कमी महसूस होती है ,कुछ अंकुश उन पर भी लगना चाहिए जो छद्म नाम से ब्लॉग लिखते हैं

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  20. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  21. @ अनूप शुक्‍ल

    प्रतीक जी से दो साल पहले
    हुई थी मुलाकात
    उसके बाद कई बार
    हुई है बात
    इस बात भी हुई थी
    पर वे कहीं अति-व्‍यस्‍त थे
    इसलिए नहीं हो सकी मुलाकात।

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  22. बहुत सुन्दर चर्चा और बलोग निर्देशिका बनाने का सुझाब तो बहुत ही बढिया है मै अल्का जी से कहना चाहुंगी जब भी आगरा आना चाहे तुरंत चले आइये हम भी आगरा मे रहते है और ताज के अलावा भी यहा बहुत कुछ है

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  23. बहुत ही बढ़िया वृत्तांत आगरा ब्लॉगर मिलन का...कई सारे सार्थक पहलू पर विचार हुआ...अगली कड़ी का इंतज़ार

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  24. वॆसे विचार तो अच्छा हॆ कि ब्लोगर डारेक्टरी बनायी जानी चाहिये.....इससे कम से कम हम अपने शहर के ब्लागर साथियो को जान समझ तो पायेगे..नही तो वही हाल हे कि इन्टरनेट से दुनिया के टच मे तो हे पर पडोस का हाल नही मालुम...

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  25. बहुत खूब,बहुत खुशी हुई आपके इस आगरा वृतांत को पढकर , ब्लोगर डारेक्टरी का सुझाव बहुत ही बढ़िया है.

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  26. आगे की किश्‍तों का इंतजार है

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  27. badiya hai main isse sehmat hu, jald hi main ajay jha k sath milkar aapko blogger bhaiyon ka jitna ho sake vivran bhijwata hu

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  28. जो तेरे शहर मे कुछ रोशनी लाये होन्गे
    उन चिरागो ने कई घर भी जलाये होन्गे

    अविनाश भाई जो मेरा नुकसान हुआ उसकी भरपई कैसे होगी?

    हम आस लगाये बैठे थे
    वो वादा करके चले गये

    वैसे मेरी भी ब्लोगर के रूप मे शुरुआत आगरा से ही हुई है लेकिन अफ़सोस वीना जी से परिचय बहुत बाद मे हुआ.

    शिवम मिश्रा जी हम मैनपुरी थे तब आपसे मुलाकात ना हुई, इसका अफ़सोस अब हो रहा है.


    अविनाश भाई बहुत सुन्दर ब्लोगर मिलन विवरन के लिये बधाई

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  29. aadrniy aadaab bhut khub blogrs kaa miln khdaa is bnaaye rkhe bhaai hm bhi cutbhyye blogr bnne ki koshishon men hen hmen bhi yaad rkhiye . akhtar khan akela kota rajastha my blog akhtarkhanakela.bogspot.com

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  30. वाह आप भी हर जगह ब्लागरों से मुलाकात कर ही लेते हैं.

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  31. मांफ कीजियेगा , आने में देर हो गई । ब्लोगर्स डायरेक्टरी का सुझाव बढ़िया है । अब कहीं भी जाएँ होटलों के बजाय ब्लोगर बंधुओं का पता ढूंढ लेंगे ।
    ये नम्बर्स वाली बात पर राजेश जी का उत्साह काम का लगता है।

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  32. bahut sukhad aur aanandpoorna hota hai aisa milan ..

    badhaai !

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  33. बढ़िया...विस्तृत विवरण...
    अगली कड़ी का इंतज़ार रहेगा

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