आइये मिलकर सभी को पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति)

Posted on
  • by
  • अविनाश वाचस्पति
  • in
  • Labels: , ,

  • पहचानना मुश्किल नहीं होता
    बस हम भीतर तक झांक नहीं पाते
    भीतर तक यदि झांक पाते
    तो सभी को पहचान भी पाते।

    20 टिप्‍पणियां:

    1. पहचानना मुश्किल नहीं होता
      बस हम भीतर तक झांक नहीं पाते
      ..........विल्कुल सही पहचाना.....
      अब पहेलियाँ पहचानिये.....
      ...........
      विलुप्त होती... .....नानी-दादी की पहेलियाँ.........परिणाम..... ( लड्डू बोलता है....इंजीनियर के दिल से....)
      http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_24.html

      उत्तर देंहटाएं
    2. बिलकुल सही बात!!कई बार तो पहचानने में पूरी उम्र लग जाती है...

      उत्तर देंहटाएं
    3. पहचानना मुश्किल नहीं
      पर
      पहुँचे हुए को पहचानना -----------

      उत्तर देंहटाएं
    4. बस, इतना समझ आया कि ’यहाँ मैं घर घर खेल” का सेट है और आलोक नाथ दिख रहे हैं तैयार...बाकी को झाँकते हैं अभी!!

      उत्तर देंहटाएं
    5. जिन्हे हम जानते है उन्हे आज तक नही पहचान पाये जी ... तो इन तीनो को केसे पहचाने, वेसे आप तो बिलकुल नही है, क्योकि किसी की भी दाडी नही दिख रही

      उत्तर देंहटाएं
    6. गलत पहचानने पर जुर्माना नहीं है

      इसलिए पहचानने के लिए ट्राई तो कर ही सकते हैं

      उत्तर देंहटाएं
    7. आलोक नाथ,अविनाश जी और केक बस बाइ आप बताइये जी

      उत्तर देंहटाएं
    8. जुरमाना नहीं होने कि बात पर गेस करने कि हिम्मत जुटाया हूँ..
      "गब्बर सिंह"??

      उत्तर देंहटाएं
    9. अविनाश नहीं
      ये अरविन्‍द हैं
      अशोक के छोटे भाई
      अब पहचाना
      पहचाना तो पूरा नाम बतलायें?

      उत्तर देंहटाएं
    10. पहचान लिया जी!
      सब अपने ही तो हैं!
      नाम तो आपने बता ही दिये हैं!

      उत्तर देंहटाएं
    11. अभी तक तो मैं खुद को ही पहचान न पाया.

      उत्तर देंहटाएं
    12. बड़ी गूढ़ बात कह दी...बस हम भीतर तक झांक नहीं पाते
      भीतर तक यदि झांक पाते
      तो सभी को पहचान भी पाते।..:)

      उत्तर देंहटाएं
    13. इसमें सिर्फ आलोकनाथ को पहचान सकते हैं ...

      उत्तर देंहटाएं
    14. आलोकनाथ जी के अलावा अरविन्द श्रॉफ़ हैं शायद। महिलाओं को एक तो मैं पहचानता कम हूँ, दूसरे अगर पहचान लिया तो धर्मपत्नी के नाराज़ होने का ख़तरा है।

      उत्तर देंहटाएं

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz