अजन्ता शर्मा की कविता - मल्हार

Posted on
  • by
  • सुशील कुमार
  • in
  • Labels: , ,
  • छवि- अजन्ता शर्मा

    परिचय- अजन्ता शर्मा


    अजंता शर्मा नोयडा से हिंदी की अत्यंत संभावनशील युवा कवयित्री हैं। ‘नुक्कड़’ के सुधी पाठकों के लिये मैं उनकी यहां एक कविता मल्हार प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसमें इस मौसम के अनुकूल एक सरस-सलिला प्रेम-विरह की बानगी निखर कर सामने आयी है जिससे आशा है, आप अभिभूत हुये बिना नहीं रहेंगें। आपसे अनुरोध होगा कि इनकी हौसला-आफ़जायी के लिये आप कविता पर अपनी ओर से टिप्पणी देना न भूलें- सुशील कुमार।

    मल्हार

    अचानक
    किसी बसंती सुबह
    तुम गरज बरस
    मुझे खींच लेते हो
    अंगना में .
    मैं तुममें
    नहा लेने को आतुर
    बाहें पसारे
    ढलक जाती हूँ .
    मेरा रोम रोम
    तुम चूमते हो असंख्य बार .
    अपने आलिंगन में
    भिगो देते हो
    मेरा पोर पोर.
    मेरी अलसाई पलकों पर
    शीत बन पसर जाते हो.
    माटी के बुलबुलों में छुपकर
    मेरी पायल का
    उन्माद थामते हो.
    मेरा हाथ पकड़
    जिस डार तले
    तुम खींचते हो,
    उसकी कनखियों से
    मैं लजा जाती हूँ.
    नाखूनों से खुरचती हूँ
    जमीन.
    और हाथ पसार
    कुछ मुक्ता जुटाती हूँ.
    शिख नख
    तुम ह्रदय बन झरते हो.
    मुझे हरते हो .
    बारिश संग
    जब
    तुम बरसते हो

    25 टिप्‍पणियां:

    1. बेजोड़ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
      शब्दों का मधुर सामंजस्य.....................
      अजन्ता, बस यही कहूँगा कि आपके अन्दर अपार संभावनाएं हैं.............
      इस प्रतिभा को और निखारते रहिये......... लोगों तक पहुंचाते रहिये.....
      मेरी ढेरों शुभकामाएं ...............

      उत्तर देंहटाएं
    2. बहुत बढ़िया लगा! अजंता जी के लिए ढेर सारी शुभकामनायें!

      उत्तर देंहटाएं
    3. पहले भी ये बेजोड कविता पढ चुकी हूँ इस गतीशील कलम को बहुत बहुत आशीर्वाद लाजवाब्

      उत्तर देंहटाएं
    4. सच कहूं तो यकीं करने को जी नहीं करता कि इतनी सब्स्टेंस वाली सामयिक कविता इतने युवा मन की उपज है.

      शब्दों में तरलता, नपा तुला लेआउट , और सबसे लाजवाब नारीसुलभ भाव और रोमांस एवं रोमांच की अनूभूति का नजुक वर्णन.

      कवि नहीं हूं मगर प्रफ़ुल्लित हूं , तो अदबी लोगों का क्या हाल होगा.

      उत्तर देंहटाएं
    5. lajawaab bundo me bhigne ki itni sundar mahimaa shayad hi kisi ne ko ho!!

      उत्तर देंहटाएं
    6. सचमुच बहुत बढिया .. शुभकामनाएं !!

      उत्तर देंहटाएं
    7. KAVITA BAHUT ACHCHHEE LAGEE HAI.
      BADHAAEE.

      उत्तर देंहटाएं
    8. kya khoob likha hai.........bejod shabd,bejod bhav aur bejod prastuti.

      उत्तर देंहटाएं
    9. यह कविता इससे पूर्व भी पढ़ी थी और इसबार भी पढना उतना ही सुखद लगा......बहुत बहुत लाजवाब लिखती हैं अजंता जी.....

      सतत सुन्दर लेखन के लिए इन्हें अनंत शुभकामनायें.....

      उत्तर देंहटाएं
    10. |बेटा ! मैं श्रीयुत सुशील कुमार जी का आभारी हूँ जो उन्होंने इस उभरते साहित्यकार की रचना तक मुझे पहुचाया |सादगी पूर्ण तरीके से साधारण शब्दों में ,कोई शब्दआडम्बर नहीं ,कोई पांडित्य प्रदर्शन नहीं सरल सुबोध रचना और प्राकृतिक वर्णन |आपको बहुत बधाई और उज्जवल भविष्य की शुभकामना

      उत्तर देंहटाएं
    11. अति भावपूर्ण रचना.. सावन की सौंधी महक अपने संग पिरोती हुई ...

      उत्तर देंहटाएं
    12. खुबसुरत मल्हार ।
      अजन्ता शर्मा से रुबरु करने के लिये धन्यवाद ।

      उत्तर देंहटाएं
    13. सुन्दर रचना प्रेषित की है।आभार।

      उत्तर देंहटाएं
    14. कवियत्री अजंता शर्मा की कविता पहली वारपढ़ने का सुअवसर मिला,सहज और सघन अनुभूति की ताजगी से परिपूर्ण कविता के लिए कवियत्री और प्रस्तुतकर्ता दोनों को बधाई.

      उत्तर देंहटाएं

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz