हंसते रहो हंसाते रहो
http://hansterahohansateraho.blogspot.com/2009/07/blog-post_04.html
नुक्कड़ वाले भी वंचित न रहें
आइए, 2005 के नोबल विजेता विद्रोही साहित्यकार से मिलें (-काजल कुमार)
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कथादेश के फरवरी 2009 अंक में, 2005 के साहित्य के लिए नोबल पुरुस्कार से
सम्मानित हैरोल्ड पिंटर के बारे में पढ़ते हुए मुझे लगा कि क्यों न इसे उन
पाठकों...
8 घंटे पहले





3 टिप्पणियाँ:
ha ha ha bahut hi majedaar .
भाई, इस लिंक को कापी कैसे करूं ? यहां तो ताला लगा है न त.
लिंक के उपर हंसते रहो हंसाते रहो जहां हिंदी में लिखा है वहां पर क्लिक करने से उपर एड्रेस बार में लिंक आ जाता है। अब यह तो बतलाने की जरूरत तो नहीं है कि वहां पर सलेक्ट करके कापी किया जाता है।
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