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सोमवार, ५ जनवरी २००९

मर्दो की ब्रा और टूटते रिश्ते

अविनाश जी के द्वारा दी गई खबर के कारण एक युगल मॅ नोक-झॉक हो गई

युवती बोली:
अविनाश जी तो कितना सुनदर लिखते है क्या तुम मुझ पर कोइ कविता नही लिख सकते... तो युवक बडे प्रेम से बोला:-
जितने भी दुनिया मै शायर हुए
वो पागल थे,
अपनी मेहबूबा की नज़ाकत के कायल थे,
किसी न किसी अदा से घायल थे,
मै तो अभी ठीक ठाक हूँ,
होशो-हवास के साथ हूँ,
किसी नज़ाकत का कायल नही हूँ,
अदाओ से भी घायल नही हूँ,
मुझे तो खुली हवा मॅ साँस आता है,
मर्दो का ब्रा ही अब मुझे भाता है,
अब तुम ही बताओ मै तुम पर क्यॉकर कविता लिखू ?
ये सुनकर युवती का दिल टूट गया,
और दोनो का दो माह पुराना बन्धन छूट गया,
अब खबर यही हवा मॅ उछ्ली है,
वो युवती बन्दूक लेकर
अविनाश जी की तलाश मॅ निकली है....

6 टिप्पणियाँ:

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

क्या अविनाश जी ब्रा लेकर कही भाग गए है जो बेबी बन्दूक लेकर उनको ढूढने निकली है , बहुत जोरदार.

विनय ने कहा…

हा-हा युवती ने बन्दूक ख़्ररीदी या बिगैर लाइसेंस लिये घूम रही है


---यदि समय हो तो---
चाँद, बादल और शाम पर आपका स्वागत है|

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

:)

COMMON MAN ने कहा…

लग रहा है अभी तक खोज पूरी नहीं हुई.

COMMON MAN ने कहा…

पता नहीं खोज पूरी हुई या नहीं/

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

खोज पूरी हो गई है
और मैं वहीं से बैठा

हुआ ब्‍लॉग पर टिप्‍पणी

कर रहा हूं,
पता नहीं मैं जिंदा हूं

या गोली जिंदा है

अभी तक।

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