अविनाश जी के द्वारा दी गई खबर के कारण एक युगल मॅ नोक-झॉक हो गई
युवती बोली:
अविनाश जी तो कितना सुनदर लिखते है क्या तुम मुझ पर कोइ कविता नही लिख सकते... तो युवक बडे प्रेम से बोला:-
जितने भी दुनिया मै शायर हुए
वो पागल थे,
अपनी मेहबूबा की नज़ाकत के कायल थे,
किसी न किसी अदा से घायल थे,
मै तो अभी ठीक ठाक हूँ,
होशो-हवास के साथ हूँ,
किसी नज़ाकत का कायल नही हूँ,
अदाओ से भी घायल नही हूँ,
मुझे तो खुली हवा मॅ साँस आता है,
मर्दो का ब्रा ही अब मुझे भाता है,
अब तुम ही बताओ मै तुम पर क्यॉकर कविता लिखू ?
ये सुनकर युवती का दिल टूट गया,
और दोनो का दो माह पुराना बन्धन छूट गया,
अब खबर यही हवा मॅ उछ्ली है,
वो युवती बन्दूक लेकर
अविनाश जी की तलाश मॅ निकली है....
आइए, 2005 के नोबल विजेता विद्रोही साहित्यकार से मिलें (-काजल कुमार)
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कथादेश के फरवरी 2009 अंक में, 2005 के साहित्य के लिए नोबल पुरुस्कार से
सम्मानित हैरोल्ड पिंटर के बारे में पढ़ते हुए मुझे लगा कि क्यों न इसे उन
पाठकों...
8 घंटे पहले





6 टिप्पणियाँ:
क्या अविनाश जी ब्रा लेकर कही भाग गए है जो बेबी बन्दूक लेकर उनको ढूढने निकली है , बहुत जोरदार.
हा-हा युवती ने बन्दूक ख़्ररीदी या बिगैर लाइसेंस लिये घूम रही है
---यदि समय हो तो---
चाँद, बादल और शाम पर आपका स्वागत है|
:)
लग रहा है अभी तक खोज पूरी नहीं हुई.
पता नहीं खोज पूरी हुई या नहीं/
खोज पूरी हो गई है
और मैं वहीं से बैठा
हुआ ब्लॉग पर टिप्पणी
कर रहा हूं,
पता नहीं मैं जिंदा हूं
या गोली जिंदा है
अभी तक।
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