चौखट पर

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • चौखट के बाहर की आहट दूं या अंदर की
    गंभीरता चाहिए इंसान की या कूद बंदर की
    सब कुछ मिलेगा मेरे पास आपको मौजूद
    लिखता हूं सदा रहता इसीलिए है मेरा वजूद

    स्वीकार है आमंत्रण
    जल तरंग ममनतरम
    तरंगों की माफिक
    लहरता रहूंगा चौखट पर

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