प्रख्यात हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स में यह विज्ञापन आज प्रकाशित हुआ है। क्या आपको नहीं लगता कि डॉक्टर साहब की विशेषज्ञता को देखते हुए भारत सरकार को इन्हें पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित कर देना चाहिए। इस बिल से यह स्पष्ट है कि इसे कंप्यूटर पर बनाया गया है और डॉक्टर साहब झोलाछाप नहीं हैं क्योंकि झोले में कोई कंप्यूटर नहीं रखता है। इस से यह भी पुष्टि होती है कि जो राशि ली गई है, वो हेपिटाइटिस सी की कन्सल्टेशन और दवाईयों के एवज में ली गई राशि है। मतलब इतना सस्ता इलाज।
वैसे आजकल भारत रत्न दिए जाने की चर्चा जोरों पर है तो क्यों नहीं देश भर के वे हजारों मरीज जो डॉक्टर साहब की चिकित्सा से स्वस्थ हुए हैं क्यों नहीं उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मुहिम चलाते। यह उन मरीजों का कर्तव्य भी बनता है कि देशहित को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का मिशन चलाएं।
यह एक गंभीर पोस्ट है और इसमें दी गई जानकारी पूरी तरह तथ्यात्मक है इसलिए इस पर सुधिजन विचार करें।



