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आओ एक भारत रत्‍न डॉ. आर के अग्रवाल को दिलाने की मुहिम चलाएं


और यह हैं वे दो बोतलें जो दवाईयां मुझे पीने की सलाह सिर्फ 1000 रुपये और दवाईयों की कीमत 5600 रुपये में दी गईं। हेपिटाइटिस सी जैसे कुख्‍यात रोग जिसकी दवाईयां तलाशने में अभी पूरा विश्‍व जुटा हुआ है। डॉक्‍टर साहब इतने सस्‍ते में देकर मानवता की सेवा कर रहे हैं। अगर इन दवाईयों के सेवन में मेरे शरीर में रिएक्‍शन हुआ है तो वो मेरे शरीर की गलती है न कि डॉक्‍टर साहब की बनाई-बेची गई दवाईयां इसके लिए दोषी हैं। आखिर वे रोजाना टीवी चैनलों पर अपने साक्षात्‍कार में जिन दवाईयों और चिकित्‍सा का प्रचार कर रहे हैं वो गलत कैसे हो सकता है। 

इस बिल से यह स्‍पष्‍ट है कि इसे कंप्‍यूटर पर बनाया गया है और डॉक्‍टर साहब झोलाछाप नहीं हैं क्‍योंकि झोले में कोई कंप्‍यूटर नहीं रखता है। इस से यह भी पुष्टि होती है कि जो राशि ली गई है, वो हेपिटाइटिस सी की कन्‍सल्‍टेशन और दवाईयों के एवज में ली गई राशि है। मतलब इतना सस्‍ता इलाज। 

वैसे आजकल भारत रत्‍न दिए जाने की चर्चा जोरों पर है तो क्‍यों नहीं देश भर के वे हजारों मरीज जो डॉक्‍टर साहब की चिकित्‍सा से स्‍वस्‍थ हुए हैं क्‍यों नहीं उन्‍हें भारत रत्‍न दिए जाने की मुहिम चलाते। यह उन मरीजों का कर्तव्‍य भी बनता है कि देशहित को ध्‍यान में रखते हुए इस प्रकार का मिशन चलाएं।

यह एक गंभीर पोस्‍ट है और इसमें दी गई जानकारी पूरी तरह तथ्‍यात्‍मक है इसलिए इस पर सुधिजन विचार करें।


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