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"विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण : परिदृश्य" और "यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी 2012"




`यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी 2012' और ग्रंथ का प्रकाशन :  (डॉ.) कविता वाचक्नवी 

विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण : परिदृश्य' और "यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी 2012"
- डॉ. कविता वाचक्नवी


आज का सुप्रभात दरवाजे पर तेज खटखटाए जाने पर टूटी नींद से हुआ ।

 डाक में हिन्दी बुक सेंटर से अभी अभी कुछ ही दिन पूर्व प्रकाशित -  " विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण : परिदृश्य : संगोष्ठी समग्र "  ग्रंथ की लेखकीय प्रति मिली है। 

यह ग्रंथ प्रोफेसर श्रीश चंद्र जैसवाल जी के सम्पादन में छपा है और स्पेन के वय्यादोलिद विश्वविद्यालय में हुई यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी (15-17 मार्च 2012)    में  प्रस्तुत किए गए सभी शोध पत्रों का संकलन है। 

पूरा ग्रंथ आर्ट पेपर जैसे कागज़ पर छपा है। ग्रंथ के स्वत्वाधिकार हिन्दी विभाग, विदेश मंत्रालय के पास सुरक्षित हैं। 

कुल 32 आलेख इसमें संकलित हैं।  लेखों का क्रम सत्रवार रखा गया है।
मेरे आलेख " भाषा प्रकार्यों के अधुनातन संदर्भ और हिन्दी " को पृष्ठ  46 से 51 पर पढ़ा जा सकता है।


प्रकाशक का पूरा पता है  -

हिन्दी बुक सेंटर 
4/5-बी, आसफ अली रोड, नई दिल्ली 110 002 


सम्मिलित लेखक हैं -

सर्वश्री


  • उदय नारायण सिंह (विश्वभारती शांति निकेतन )
  • अफजाल अहमद (Lisboa)
  • अलका आत्रेय चूडाल (ऑस्ट्रिया)
  • आलेसांद्रा कोंसोलारो (इटली)
  • यूस्तीना कुरोव्स्का (बॉन, जर्मनी)
  • महेंद्र किशोर वर्मा (यॉर्क)
  • रमेश चन्द्र शाह (बेल्जियम)
  • ऐश्वर्ज कुमार (केंब्रिज )
  • गेनादी श्लोम्पेर (इज़राईल)
  • हर्मन वान ऑल्फेन (अमेरिका)
  • कविता वाचक्नवी (लंदन )
  • अरुण प्रकाश मिश्रा (स्लोवेनिया)
  • बिलजाना ज़्रनिक (क्रोएशिया )
  • दानूता स्ताशिक (पोलैंड )
  • हैंज़ वेर्नर वैस्लर (उपासला, स्वीडन )
  • इंदिरा गाज़िएवा (मॉस्को)
  • लुदमीला खोखलोवा (मॉस्को)
  • सबीना पोपर्लान (बुखारेस्ट, रोमानिया )
  • विजया सती (बुदापैस्ट)
  • मोहन कान्त गौतम (नीदरलैंड)
  • जगन्नाथ वी. आर. (वर्धा )
  • वैश्ना नारंग (दिल्ली)
  • कैलाश नारायण तिवारी (पोलैंड )
  • नवीन चंद्र लोहानी (स्विट्जरलैंड)
  • एस. वी. एस. एस. नारायण राजू (बुल्गारिया)
  • तात्याना औरन्स्कया (हैम्बर्ग, जर्मनी)
  • शिव कुमार सिंह (लिस्बन, पुर्तगाल )
  • दीप्ति गोलानी (बार्सेलोना, स्पेन)
  • श्रीश चंद्र जैसवाल (वय्यादोलिद, स्पेन)
  • अशोक चक्रधर (दिल्ली)
  • विभूति नारायण राय (वर्धा)
  • पूनम जुनेजा (मॉरीशस)


स्पेन संगोष्ठी के बारे में अधिक जानने व चित्रों के लिए निम्नलिखित लिंक्स क्लिक कर देखें - 


योरोपीय हिन्दी कॉन्फ्रेंस 2012
यूरोपीय हिन्दी कॉन्फ्रेंस 2012, स्पेन से लौटकर 
यूरोपीय हिन्दी कॉन्फ्रेंस और स्पेन : जैसा मैंने देखा 
यूरोपीय हिंदी संगोष्ठी,स्पेन, 2012 :समग्र रिपोर्ट व विवरण

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क्या हिन्दी किसी की भी भाषा नहीं है ?



हिन्दी के बारे में पढ़ाया गया था कि पहले-पहल हिन्दी, खड़ीबोली के रूप में दिल्ली व इसके आस-पास के क्षेत्र में पनपी थी.

ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इस क्षेत्र में मूलत: रहने वाले लोग अपने-अपने घरों में हरियाणवी, ब्रज व दक्षिण उत्तर प्रदेशीय ज़ुबानों में बात करते हैं. थोड़ा इधर-उधर देखें तो लोग पंजाबी, डोगरी, सिंधी, पहाड़ी, राजस्थानी, गढ़वाली, कुमांउनी, अवधी, मगधी आदि बोलते दिखाई देते हैं. हिन्दी वाले इन्हें बोलियां, उपबोलियों, उपभाषाएं आदि बताते हैं न कि भाषाएं. कुछ अपना साहित्य लिख, भाषा के दर्ज़े की होड़ में लगी रहती हैं. दिल्ली जैसे नगरों में बसने वाले लोग अपने घरों में पंजाबी, सिंधी, अवधी, मगधी, गुजराती, तमिल, तेलुगू व दूसरी अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं. कुछ, जो पूर्वजों की भाषाओं से विलग हो रहे हैं, घर में भी हिन्दी अपना लेते हैं.  अलग अलग नगरों में हिन्दी अलग तरह से बोली जाती है. यहां लोग घर के बाहर हिन्दी बोलते हैं व दफ़्तरों बगैहरा में अंग्रेज़ी में भी बात/काम करते हैं.

नगरों में अंग्रेज़ी माध्यम वाले स्कूलों से निकलने वाली पीढ़ी एक नई ही हिन्दी को जन्म दे रही है. राजभाषा के नाम पर जो सरंक्षण इसे मिला है वह काग़ज़ पर ही है. पता नहीं कितनी दूर और कितनी देर तक चलेगी हिन्दी.

ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर हिन्दी किसकी भाषा है. क्या हिन्दी किसी की भाषा है भी या बस यह एक कृत्रिम भाषा भर है. मुझे पता है कि ये सवाल उठते ही हिन्दी-सेवक झंडाबरदारी पर उतरे ही समझो.
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-काजल कुमार
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अंतत: एंड्रायड हिन्दीमय हो ही गया :) हिन्दी ब्लागिंग की लाटरी

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बड़ी मुश्किल से विंडोज़ आधारित मोबाइल फ़ोन में हिन्दी की समस्या हल हुई ही थी कि बाज़ार  में एंड्रायड आधारित नए मोबाइल फ़ोन आने शुरू हो गए,  इन एंड्रायड मोबाइल ने हिन्दीभाषी ब्लागरों की दिक़्कतें फिर बढ़ा दी क्योंकि इनमें जहां एक ओर हिन्दी पढ़ने के लिए मिनी ओपेरा-5 ब्राउज़र से काम चलाना पड़ रहा था वहीं दूसरी तरफ हिन्दी में टिप्पणी करना तो संभव ही नहीं था.

पर अब वो दिन बीत गए (हालांकि लंबी-लंबी कहने में अभी काफी मेहनत है).

कुछ समय से मैं एक ऐसा मोबाइल लेने की सोच रहा था जिसमें कम से कम ये ख़ूबियों तो हों ही जैसे:- कम से कम 4 इंच का कैपेस्टिव टचस्क्रीन, WiFi व 3G, कम से कम 5MP कैमरा, उसमें एंड्रायड का नवीनतम संस्करण हो, कम से कम 16MB कार्ड की सुविधा हो, 1 GB का प्रोसेसर हो, 512 MB रैम व इतनी ही रोम, 512 MB internal memory, स्मार्ट-स्लीक व किसी अच्छे ब्रांड का हो, जिसपर हिन्दी साइट व हिन्दी मेल तो पढ़ ही सकूं….

मुझे
सोनी-एरिक्सन के एक्सपीरिया-आर्क में ये सभी ख़ूबियां तो मिली हीं, साथ ही कुछ चीज़ें तो मेरी आशा से भी अधिक मिलीं.  इसमें अंड्रायड का 2.3.2 संस्करण है. इसमें हिन्दी पढ़ने के लिए मिनी ओपेरा-5 ब्राउज़र की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसके अपने डिफ़ाल्ट ब्राउज़र में हिन्दी की सभी साइट बिना किसी हील-हुज्जत के आराम से पढ़ी जा सकती हैं लेकिन हिन्दी में टिप्पणी करना अभी भी  दूर की कौड़ी लगी क्योंकि इसमें अंग्रेज़ी के अलावा चाइनीज़ व जापानी कीबोर्ड की सुविधा तो है पर हिन्दी कीबोर्ड अभी भी नहीं है. 

हालांकि, यदि आप हिन्दी माध्यम चुनें तो सबकुछ अंग्रेज़ी के बजाय  हिन्दी में पढ़ा जा सकता है. कीबोर्ड से गूगल में raja लिखें तो यह हिंदी में ‘राजा’ शब्द वाले वाक्यों के विकल्प उपलब्ध करवा कर हिन्दी साइटें ढूंढ देता है.

हिन्दी में टिप्पणी करने के लिए इ-पंडित ब्लाग के
श्रीश बेंजवाल शर्मा का टचनागरी साफ़्टवेयर तो बस छा ही गया.
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ऊपर बाएं चित्र में एक्सपीरिया-आर्क पर टचनागरी का प्रयोग देखा जा सकता है. उसके वाद बस कापी कर टिप्पणी बाक्स में पेस्ट (यह रहा सबूत, दायां चित्र ) किया तो काम हो गया. भाई श्रीश जी का अनन्य आभार.

बस यदि यह कीबोर्ड कुछ और यूं निम्नत: व्यवस्थित कर दें कि इसे प्रयोग करते हुए स्क्रीन बार-बार ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं न करना पड़े तो बस बल्ले-बल्ले ही हो गई समझो :)
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(पोस्ट स्क्रिप्ट -31.5.2011)

यदि गूगल ट्रांस्लिट्रेशन या क्विलपैड जैसी साइट खोलें तो वर्चुअल कीबोर्ड एक्टीवेट नहीं होता है. लेकिन मैंने पाया कि अनूप शुक्ल जी की साइट पर पोस्ट के नीचे टिप्पणी बाक्स में टिप्पणी करने से पहले यदि " Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)" सक्षम कर दिया जाए तो वर्चुअल कीबोर्ड अपने आप ही एक्टीवेट हो जाता है और आप, 'भारत' लिखने के लिए 'bhaarat' टाइप कर हिन्दी में कनवर्ट करवा सकते हैं. इसके बाद इसे कापी कर पेस्ट करना भर बचता है.
(पोस्ट स्क्रिप्ट -1.6.2011) 
एंड्रायड मार्केट से "MultiLing keyboard"  डाउनलोड किया तो रही-सही क़सर भी पूरी हो गई. यह कीबोर्ड हिन्दी कीबोर्ड है. इसे इंस्टाल कर, किसी भी ब्लाग के टिप्पणी बाक्स में सीधे ही हिन्दी में टाइप किया जा सकता है. कापी पेस्ट की भी ज़रूरत जाती रही.

आज मैं पूरी तरह से कह सकता हूं कि  हां एंड्रायड अब पूरी तरह हिन्दी स्पोर्ट कर रहा है. हुर्रे :-))
-काजल कुमार
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