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सुनो मुन्‍नाभाई से अन्‍नाभाई बनने की एक कहानी : उलूक टाइम्‍स


अविनाश वाचस्‍पति
कभी थे मुन्‍नाभाई
अन्‍ना का हुवा अवतरण
जब देव रूप सा .......

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राह कौन सी जाऊं मैं, फेसबुक पर लगाऊं दुकान ....

राह कौन सी जाऊं मैं
दीपावली मनाऊं या
फेसबुक पर बस जाऊं मैं
यहीं पर खोल लूं दुकान
विचारों के बनाकर पकवान
सबको खूब खिलाऊं मैं
राह कौन सी जाऊं मैं
सुशील जोशी जी को बुलाऊं मैं

उनसे पटाखे चलवाऊं मैं
अमित त्‍यागी जी से कटवाऊं चालान
बम फटने पर उछल जाऊं मैं
राह कौन सी जाऊं मैं
फेसबुक पर बस जाऊं मैं

कहो तो सो जाऊं यहीं
या सोने के लिए
बिस्‍तर अलग लगाऊं मैं
आप कहें तो बिस्‍तर
यहीं पर बिछाऊं मैं
राह कौन सी जाऊं मैं

नगर कवियों का यहीं पर
सुनहरा भाव नगर बसाऊं मैं
राह कौन सी जाऊं मैं

दीपावली की दूं शुभकामनाएं
दीपावली पर लूं शुभकामनाएं
शुभकामनाओं का अंबार लगाऊं मैं
राह कौन सी सजाऊं मैं
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