मिसफ़िट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मिसफ़िट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

वर्जनाओं के विरुद्ध एकजुट : सोच और शरीर

 जागरण जंक्शन का आभार अवश्य कहना होगा उनने जागरण रीडर्स ब्लाग पर  मेरे ब्लाग "मिसफ़िट" पर प्रकाशित आलेख वर्जनाओं के "विरुद्ध एकजुट : सोच और शरीर" को पसंद किया और मुझे श्रेष्ठ सप्ताह के ब्लागर होने का मौका दिया... मैं अभिभूत एवम आभारी हूं............

इस आलेख को मेरे ब्लाग स्पाट पर के ब्लाग "मिसफ़िट" पर यहां भी  देखा जा सकता है..!
कुछ अंश
" पिछले दस बरसों में जिस तेजी से सामाजिक सोच में बदलाव आ रहे हैं उससे तो लग रहा कि बदलाव बेहद निकट हैं शायद अगले पांच बरस में… कदाचित उससे भी पहले .कारण यह कि अब “जीवन को कैसे जियें ?” सवाल नहीं हैं अब तो सवाल यह है कि जीवन का प्रबंधन कैसे किया जाए. कैसे जियें के सवाल का हल सामाजिक-वर्जनाओं को ध्यान रखते हुए खोजा जाता है जबकि जीवन के प्रबंधन के लिये वर्जनाओं का ध्यान रखा जाना तार्किक नज़रिये से आवश्यक नहीं की श्रेणी में रखा जाता है.जीवन के जीने के तौर तरीके में आ रहे बदलाव का सबसे पहला असर पारिवारिक व्यवस्थापर खास कर यौन संबंधों पड़ता नज़र आ रहा है. बेशक विवाह नर-मादा के व्यक्तिगत अधिकार का विषय है पर अब पुरुष अथवा महिला के जीवन की व्यस्तताओं के चलते उभरतीं दैहिक (अनाधिकृत?) आकांक्षाओं के प्रबंधन का अधिकार भी मांगा जावेगा कहना कोई बड़ी बात नहीं."

Read More...

डू यू नो हू एम आय !


अमेरिकन बाला के हाथों
सजती हमारी तस्वीर 
ओबामा : सैम थिंग अबाउट
मिसफिट 
                    दीन दुनिया से बेखबर हमको पता ही न था कि हम भी सेलिब्रिटी बन गये हैं इस बात का पता लगते ही हमने खुद को खुद ही ज़ोर से च्यूँटी काटी पर हमको भरोसा न हुआ सो हमने पड़ोस में बैठे फत्तेदास जी को बोला -"भाई एक लप्पड़ तो मारो हमको ?"
 वे तो ऐसे मौके की तपास में बैठे ही थे बरसों से बचपन में उनको  अक्सर  लपड़याते थे रिवेंज का सही वक़्त पाते ही हमारे गुलाबी गाल उनके लप्पड़ से सुर्ख लाल हो गया. तब जाके हमको महसूस हुआ कि हम कोई सपना नहीं देख रहे हैं …………………… आगे मिसफ़िट ब्लॉग पर 
Read More...

फ़ुर्षोत्तम-जीव


किस किस को सोचिए किस किस को रोइए
आराम बड़ी चीज है ,मुंह ढँक के सोइए ....!!
साभार http://manojiofs.blogspot.in/2011/11/blog-post_26.html
"जीवन के सम्पूर्ण सत्य को अर्थों में संजोए इन पंक्ति के निर्माता को मेरा विनत प्रणाम ...!!''

आपको नहीं लगता कि जो लोग फुर्सत में रहने के आदि हैं वे परम पिता परमेश्वर का सानिध्य सहज ही पाए हुए होते हैं। ईश्वर से साक्षात्कार के लिए चाहिए तपस्या जैसी क्रिया उसके लिए ज़रूरी है वक़्त आज किसके पास है वक़्त पूरा समय प्रात: जागने से सोने तक जीवन भर हमारा दिमाग,शरीर,और दिल जाने किस गुन्ताड़े में बिजी होता है। परमपिता परमेश्वर से साक्षात्कार का समय किसके पास है...?
लेकिन कुछ लोगों के पास समय विपुल मात्रा में उपलब्ध होता है समाधिष्ठ होने का ।
इस के लिए आपको एक पौराणिक कथा सुनाता हूँ ध्यान से सुनिए
एकदा -नहीं वन्स अपान अ टाइम न ऐसे भी नहीं हाँ ऐसे
"कुछ दिनों पहले की ही बात है नए युग के सूत जी वन में अपने सद शिष्यों को जीवन के सार से परिचित करा रहे थे नेट पर विक्की पेडिया से सर्चित पाठ्य सामग्री के सन्दर्भों सहित जानकारी दे रहे थे " सो हुआ यूँ कि शौनकादी मुनियों ने पूछा -"हे ऋषिवर,इस कलयुग में का सारभूत तत्व क्या है.....?
ऋषिवर:-"फुर्सत"
मुनिगण:- "कैसे ?"
ऋषिवर :- फुरसत या फुर्सत जीवन का एक ऐसा तत्व है जिसकी तलाश में महाकवि गुलजार की व्यथा से आप परिचित ही हैं आपने उनके गीत "दिल ढूँढता फ़िर वही " का कईयों बार पाठ किया है .
मुनिगण:- हाँ,ऋषिवर सत्य है, तभी एक मुनि बोल पड़े "अर्थात पप्पू डांस इस वज़ह से नहीं कर सका क्योंकि उसे फुरसत नहीं मिली और लोगों ने उसे गा गाकर अपमानित किया जा रहा है ...?"
ऋषिवर:-"बड़े ही विपुल ज्ञान का भण्डार भरा है आपके मष्तिस्क में सत्य है फुर्सत के अभाव में पप्पू नृत्य न सीख सका और उसके नृत्य न सीखने के कारण यह गीत उपजा है संवेदन शील कवि की कलम से लेकिन ज्यों ही पप्पू को फुरसत मिलेगी डांस सीखेगा तथा हमेशा की तरह पप्पू पास हो जाएगा सब चीख चीख के कहेंगे कि-"पप्पू ....!! पास होगया ......"


आगे मिसफ़िट  पर बांचिये जी 
Read More...

खन्नात की नरबदिया आर्मो



नरबदिया आर्मो
मां दुर्गा की तस्वीर
बनाते हुए 
4 दिसम्बर 2012 को ब्रिसडन आस्ट्रेलिया में जन्में निक वुजिसिस  का जीवन सबसे सम्पन्न जीवन कहा जाए तो ग़लत नहीं है. निक वुजिसिस  विश्व का वो बेहतरीन हीरा है जिसे तराशने का काम ईश्वर ने खुद निक में आक़र किया. इस तथ्य की पुष्टि आप life without limbs http://www.lifewithoutlimbs.org पर जाकर कर सकते हैं. करंजिया जनपद के ग्राम खन्नात की नरबदिया आर्मो का शरीर भी निक की तरह ही भगवान ने बनाया है. बाइस साल की नरबदिया को भी ईश्वर ने खुद ब खुद तिल खिसकने के क़ाबिल नहीं बनाया  जैसे के निक को न तो हाथ ही दिये हैं और न ही ऐसे पैर जो शरीरी-मशीन के लिये ज़रूरी हुआ करते हैं. 
  दौनों का जीवन प्रेरणाओं से अटा पड़ा है. सर्वांगयुक्त अच्छी कद-काठी, रंग-रूप, वाले किसी भी व्यक्ति को यदि उसका चाहा हुआ हासिल नहीं हो पाता फ़ौरन वो भगवान के सामने यही सवाल करता-"भगवान ये क्या किया तुमने ."

(आगे मिसफ़िट पर )
Read More...
 
Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz