ब्‍लॉगिंग की जवानी बनाम साहित्‍य का बुढ़ापा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ब्‍लॉगिंग की जवानी बनाम साहित्‍य का बुढ़ापा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शीला (ब्‍लॉगिंग) की जवानी सुशील (साहित्‍य) का बुढ़ापा

सुशील कुमार ने कहा :- पूर्णिमा वर्मन हो या सुमन कुमार घई जी , इनको साहित्य की अद्यावधि गतिविधियों की जानकारियाँ नहीं रहती


मुझे ब्लॉग या मिडिया से विरोध ही है! सुशील आगे कहते हैं :-" पूर्णिमा वर्मन हो या सुमन कुमार घई जी , इनको साहित्य की अद्यावधि गतिविधियों की जानकारियाँ नहीं रहती।" .........। अविनाश वाचस्पति जी को ही ले लीजिये, नेट पर समय देने को तैयार हैं अपनी स्वास्थ्य खराब करके भी , टिप्पणी सवा एक बजे रात में जगकर लिखने की क्या जरुरत थी उन्हें? पर उन्होंने यह मुगलता पाल रखा है कि हिन्दी पर बहुत अच्छा काम नेट में हो रहा है। जितने भी आप्रवासी वेबसाईट हैं सब मात्र हिन्दी के नाम पर अब तक प्रिंट में किये गये काम को ही ढोते रहे हैं, वे स्वयं कोई नया और पहचान पैदा करने वाला काम नहीं कर रहे , कर सकते क्योंकि वह उनके क्षमता से बाहर है। पर ऐसा क्यों है, यही मूल चिंता का विषय है।

Read More...
 
Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz