पंकज मिश्रा (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की) के कंधों पर अब एक नई जिम्मेदारी आ गयी है। जब जिम्मेदारी आ ही गयी है तो निर्वहन भी करना ही है। यह जिम्मेदारी कुछ ऐसी है जिसे हंसते-हंसते उठाना पड़ता है। बस इसी चक्र में यह दुनिया भी चल रही है। कल उन्होने हमें एक खुशखबरी बताई, जिससे हम बहुत प्रसन्न हुए और सोचा की इस खुशी में आप सबको भी शामिल करलें।
उनके घर से टेलीग्राम आया है कि वे 18 जून को पिता बन गए, उन्हे अश्विनी नामक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। इन्होने हमे बिना मिठाई खिलाए नामकरण भी कर लि्या। हमने सोचा चलिए कोई बात नहीं मिठाई तो आती ही होगी। पहले यह खबर ब्लाग जगत के मित्रों तक पहुंचा ही दें। आइए इस खुशी के मौके पर सब शरीक होते हैं।



