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बढ़े रेट पेट्रोल के, नीलकंठ पी जाँय ।

बढ़े रेट पेट्रोल के, नीलकंठ पी जाँय ।
निगल-उगल सकते नहीं, सारा बदन तपाय ।।

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चित्र बोलते हैं भेद सारे खोलते हैं



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सकारात्मक गतिविधियों से ही होगा हिंदी ब्लोगिंग का विस्तार : समीर लाल
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आइये मिलकर सभी को पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति)


पहचानना मुश्किल नहीं होता
बस हम भीतर तक झांक नहीं पाते
भीतर तक यदि झांक पाते
तो सभी को पहचान भी पाते।
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वाह क्‍या पानी है यह तो शीला की राजधानी है


पानी की कहानी आजकल
बहुत गुल खिला रही है
पहले होती थी बिजली गुल
अब हो रहा है पानी गुल

कह रही है दिल्‍ली की बुलबुल

बुलबुल को पहचानो
पर पहले जरा इस चित्र
पर तो नजर डालो
यह पानी का फव्‍वारा नहीं है
पानी की बरबादी का नजारा है

दिल्‍ली जल बोर्ड वैसे तो
खूब विज्ञापन लगा रहा है
पानी की जगह पैसे खूब
बहा रहा है पर पानी नहीं
बचा पा रहा है।

वहां बूंद बचाता है
इधर कई सौ गैलन
व्‍यर्थ बहा चला जाता है.
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