इस आजादी पर
जो कल आ रही है
पर पहले तो हम
भारतवासियों के
मन पर छा रही है
उसके मनाने से
ठीक पहली संध्या को
आतंकवादियों ने दी है
धमकी कि वे लालकिला
उड़ायेंगे, पर मैं सोच
रहा हूं कि क्या उड़
सकता है लालकिला भी।
अवश्य ही वे कल
एक पतंग उड़ायेंगे
उस पर लालकिले
की तस्वीर लगायेंगे
और करेंगे अपनी
तमन्ना पूरी उड़ाने
को लालकिले की।
लग रहा है आतंकवादी
बच्चे हैं
बच्चों को ही किसी को
भी उड़ता देखने की
होती है ख्वाहिश।
चाहे वे उनके खिलौने ही
हों, या विचार हों अथवा
प्रश्न हों उनके, जिनके
उत्तर न मिल सकते हों
पर वे उड़ते नजर आयें
जैसे उड़ते हैं गुब्बारे
तो बच्चे खुश हो जाते
हैं, मौज मनाते हैं।
हम भारतीय भी
आजादी की इसी
पूर्व संध्या पर
करते हैं घोषणा
कि हम आतंकवादियों
को उड़ायेंगे, नहीं उड़ाया
गर तो बंद कर देंगे
बांध देंगे या निकाल देंगे
उनकी हवा, जैसे गुब्बारे
बिना हवा के हो जाते हैं।
वही हश्र इस दफा करना
है, आतंकवादियों को
और उनके कुत्सित
मंसूबों को दफा करना है।
पोतनी है कालिख
उनकी करतूतों पर
और उतारना है नकाब
उनका, करना है चिंदी
चिंदी, बोलो जय भारत
जय जय भारत और
जय जय जय जय हिंदी।
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जो कल आ रही है
पर पहले तो हम
भारतवासियों के
मन पर छा रही है
उसके मनाने से
ठीक पहली संध्या को
आतंकवादियों ने दी है
धमकी कि वे लालकिला
उड़ायेंगे, पर मैं सोच
रहा हूं कि क्या उड़
सकता है लालकिला भी।
अवश्य ही वे कल
एक पतंग उड़ायेंगे
उस पर लालकिले
की तस्वीर लगायेंगे
और करेंगे अपनी
तमन्ना पूरी उड़ाने
को लालकिले की।
लग रहा है आतंकवादी
बच्चे हैं
बच्चों को ही किसी को
भी उड़ता देखने की
होती है ख्वाहिश।
चाहे वे उनके खिलौने ही
हों, या विचार हों अथवा
प्रश्न हों उनके, जिनके
उत्तर न मिल सकते हों
पर वे उड़ते नजर आयें
जैसे उड़ते हैं गुब्बारे
तो बच्चे खुश हो जाते
हैं, मौज मनाते हैं।
हम भारतीय भी
आजादी की इसी
पूर्व संध्या पर
करते हैं घोषणा
कि हम आतंकवादियों
को उड़ायेंगे, नहीं उड़ाया
गर तो बंद कर देंगे
बांध देंगे या निकाल देंगे
उनकी हवा, जैसे गुब्बारे
बिना हवा के हो जाते हैं।
वही हश्र इस दफा करना
है, आतंकवादियों को
और उनके कुत्सित
मंसूबों को दफा करना है।
पोतनी है कालिख
उनकी करतूतों पर
और उतारना है नकाब
उनका, करना है चिंदी
चिंदी, बोलो जय भारत
जय जय भारत और
जय जय जय जय हिंदी।


