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व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय का प्रेम पत्र
प्रिय/ सम्माननीय
आपको सूचित करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की प्रतिष्ठित पत्रिका 'गगनांचल' के मानद संपादक के कार्यभार से मैं मुक्त हो गया हूं। रेत में फंसी लेखन की अपनी नाव को अब मैं पुनः खेने का प्रयत्न कर सकता हूं तथा अपने मिशन, 'व्यंग्य यात्रा' पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरे हितचिंतक इस सूचना से, मेरी तरह, प्रसन्न ही होंगे।
अपने समय के उन सभी प्रतिष्ठित सृजनधर्मियों का मैं आभारी हूं,, जिनका मुझे निरंतर रचनात्मक सहयोग मिला। एक वर्ष पूर्व मैंनें 'गगनांचल' के अपने प्रथम संपादकीय में लिखा था- कुछ परंपराएं होती है जिनका महत्व शाश्वत होता है। जो समय के हाथ लगाने से मैली नहीं होती हैं। जो अशोक के फूल की तरह उपेक्षा का दंश नहीं झेलती है। 'गगनांचल' की प्रौढ़,सुदृढ एवं सशक्त परंपरा है जो हिंदी साहित्य का ऐतिहासिक अंग बन चुकी है। समय-समय पर 'गगनांचल' ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे प्रसन्नता है कि मैं भी इस समृद्ध परंपरा की एक बूंद बनने के लिए इसके द्वार पर दस्तक देने आया हूं।'
इस समृद्ध परंपरा की बूंद बनाने में निम्नलिखित रचनाकारों के रचनात्मक सहयोग के लिए मैं हृदय से कृतज्ञ हूं।( कृपया निम्नलिखित नामों में वरिष्ठता का कोई क्रम न ढूंढें)
सर्वश्री -राजेंद्र यादव, निर्मला जैन, पी सी जोशी, कन्हैयालाल नंदन, कैलाश वाजपेयी, नरेंद्र कोहली, अमरकांत,चित्रा मुद्गल, रवींद्र कालिया अभिमन्यु अनत ,हिमांशु जोशी, महीप सिंह, रामदरश मिश्र, उदय प्रकाश, असगर वजाहत, विश्वनाथप्रसाद तिवारी, आलोक मेहता, रमेश उपाध्याय, ममता कालिया , सुधीश पचौरी, सूर्यबाला, संजीव, सुषम बेदी,विष्णु नागर, विश्वनाथ सचदेव, रामदरश मिश्र,पुष्पा भारती, गंगाप्रसाद विमल,रामशरण जोशी, देवेंद्र राज अंकुर, नरेंद्र मोहन, अनामिका, बलराम अशोक चक्रधर, गोपाल चतुर्वेदी, ज्ञान चतुर्वेदी, अजित कुमार, कमलकिशोर गोयनका, सूरज प्रकाश, अनिल जोशी, तेजेंद्र शर्मा, सत्येंद्र श्रीवास्तव, महेश दर्पण, ज्ञान प्रकाश, हरजेंद्र चौधरी,विनोद संदलेश, नर्मदाप्रसाद उपाध्याय, अजय नावरिया, दिविक रमेश, प्रताप सहगल, सुरेश धींगरा, पूर्णिमा वर्मन, मारिया नेज्य़ेशी, रत्नाकर पांडेय, अविनाश वाचस्पति, राधेश्याम तिवारी, प्रभाकर श्रोत्रिय, राजेश जोशी, शिवनारायण, सुरेश सेठ, कृष्णदत्त पालीवाल, सुदर्शन वसिष्ठ, राजुरकर राज, राकेश पांडेय,,वेद राही, विश्वरंजन, विष्णुचंद्र शर्मा, विनय विश्वास, पद्मेश गुप्ता, उषा राजे सक्सेना, हरीश नवल,, विजय, सुधा ओम ढींगरा, जयप्रकाश मानस, कादंबरी मेंहरा, दिव्या माथुर, विमलेश कांति वर्मा, बालेंदु शर्मा दाधीच,, देवशंकर नवीन, गोविंद व्यास, तरसेम गुजराल, बलदेव वंशी, रति सक्सेना, सोमदत्त शर्मा, मुन्नवर राना, पुष्पा राही, राजेंद्र उपाध्याय, रमणिका गुप्ता, राजेंद्र सहगल, वीरेंद्र प्रभाकर,,यज्ञ शर्मा, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, हरदयाल, विनय वर्मा, विवेक,योगेंद्र शर्मा अरुण, अशोक गुप्त,नरेश शांडिल्य, निर्मिश ठाकर, चंद्रकांता, राजकमल, प्रदीप पंडित, वेद्रप्रकाश अमिताभ, वानिना, ज्ञानरंजन, बुद्धिनाथ मिश्र, रमेश मेहता, , अजय गुप्ता, अवधेश मिश्र, मंजीत चात्रिक, शमशेर अहमद खान, मनीष वर्मा अनूप श्रीवास्तव, अकेला भाई, रत्नावली कौशिक, गिरीश पंकज, लालित्य ललित, गिरिराजशरण अग्रवाल, अरविंद मिश्र, मनोहर पुरी, शशिप्रभा तिवारी, आदि
sadar
Dr. Prem Janmejai
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गगनांचल का मई-जून 2010 अंक * आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे
प्रिय / सम्माननीय
माननीय श्री प्रेम जनमेजय जी के संपादकत्व में, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की प्रतिष्ठित पत्रिका, ‘गगनांचल’ गगनांचल का मई-जून 2010 अंक
तथा और बहुत कुछ
यदि अंक प्राप्ति की आपको उत्सुक्ता हो तो आप निम्नलिखित पते से संपर्क कर प्राप्त कर सकते हैं-
श्री अजय कुमार गुप्ता
प्रबंध संपादक
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्
आजाद भवन, इंद्रप्रस्थ एस्टेट
नई दिल्ली- 110002
आगामी अंकों के लिए आपके रचनात्मक सहयोग एवं सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रेम जनमेजय
मानद सम्पादक ' गगनांचल '
Dr. Prem Janmejai
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माननीय श्री प्रेम जनमेजय जी के संपादकत्व में, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की प्रतिष्ठित पत्रिका, ‘गगनांचल’ गगनांचल का मई-जून 2010 अंक
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| मानद संपादक : प्रेम जनमेजय |
पक्ष विपक्षः प्रस्तुति राधेश्याम तिवारी, लालित्य ललित
पुरस्कार/ सम्मान: कितनी नीति, कितनी रणनीति
के अंतर्गत विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, रवींद्र कालिया,प्रभाकर श्रोत्रिय, राजेश जोशी,शिवनारायण, कृष्णदत्त पालीवाल, सुदर्शन वसिष्ठ तथा राजुरकर राज के विचार
विशेष: में अक्षरधाम पर मनोहर पुरी का आलेख
व्यक्तित्व में
अमरकांत के साथ मुरलीधर और हिमांशु रंजन की बातचीत, अमरकांत की कहानी ‘बउरैया कोदो’
अभिमन्यु अनत के साथ राकेश पांडेय की बातचीत
तथा
हरीश नवल का आलेख ‘अभिमन्यु अनत अभिमन्यु अनन्ता।
मारीशस का साहित्य और जातीय स्मृति पर गंगाप्रसाद विमल का आलेख
प्रथम दिवसे में पहली विदेश यात्रा के रोमांच पर पुष्पा भारती की रम्य रचना।
साहित्य चिंतन में डॉ0 अजय नावरिया का ‘प्रवासी हिंदी कहानी में स्त्री जीवन’ पर विचारोत्तेजक आलेख
सुरताल में पाकिस्तानी गायिका फरीदा खानम से महेश दर्पण की बातचीत
डोगरी लोक गीतों में भक्ति पर रमेश मेहता का आलेख
कथा साहित्य में रमेश उपाध्याय, ममता कालिया, बलराम, सुरेश सेठ, प्रत्यूष गुलेरी, कमलेश भारतीय, विमल सहगल
नरेंद्र मोहन की आत्मकथा का अंश ‘कौन जाये जौक पर...’
जयप्रकाश मानस की रम्य रचना‘ जरा सुन तो लीजिए’
कोई मैं झूठ बोल्या में ज्ञान चतुर्वेदी का व्यंग्य
कविता/ गजल में विश्वनाथ सचदेव, विश्वरंजन, मारिअस साम्परे,विष्णुचंद शर्मा,प्राण शर्मा,जय छांछड़ा,मानसी आदि
प्रणाम में मारिया नैज्यैशी पर पूर्णिमा वर्मन का आलेख
ब्लॉग की दुनिया का नक्शा - अविनाश वाचस्पति
भूमिका
युवाओं में हिंदी के प्रति भावनात्मक लगाव का स्त्रोत-
सुधा ओम ढींगरा का आलेख
कला चिंतन में पड़ चिंत्रांकन पर रजनी मिश्रा का आलेख
चलचित्र में अजित राय का प्रवासी सिनेमा में मीरा नायर पर आलेख
संस्कृतिक केंद्र में त्रिनिदाद के महात्मा गांधी सांस्कृतिक संस्थान पर
डॉ0 डी0पी0 सिंह की प्रस्तुति एवं भारतीय उच्चायुक्त मलय मिश्रा के विचार
अध्ययन कक्ष में डॉ0 नामवर सिंह की चार पुस्तकों पर डा0 विनय विश्वास का विचारात्मक आलेख
तथा और बहुत कुछ
यदि अंक प्राप्ति की आपको उत्सुक्ता हो तो आप निम्नलिखित पते से संपर्क कर प्राप्त कर सकते हैं-
श्री अजय कुमार गुप्ता
प्रबंध संपादक
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्
आजाद भवन, इंद्रप्रस्थ एस्टेट
नई दिल्ली- 110002
आगामी अंकों के लिए आपके रचनात्मक सहयोग एवं सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रेम जनमेजय
मानद सम्पादक ' गगनांचल '
Dr. Prem Janmejai
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(Mobile) 9811154440
गगनांचल के अंदर क्या है : एक आंचल में इतना गगन समाया कैसे : जानना चाहते हैं
आइये जानते हैं
गगनांचल क्या है
भीतर क्या है
बाहर तो दिखला दिया है
आवरण मनीष वर्मा का रचा है
प्रवासी साहित्य के पक्ष-विपक्ष पर पेश है प्रस्तुति
लालित्य ललित की, आंक रहे हैं
कितना है प्रवासी और कितना है साहित्य
विचार हैं सम्मिलित इसमें
राजेंद्र यादव के
वे कहते हैं द्विवेदीयुगीन लेखन से आगे नहीं
चित्रा मुद्गल का कहना है
सृजनात्मकता स्वयं बोलती है
हिमांशु जोशी बतला रहे हैं
पानी को फीते से नहीं नाप सकते
रमणिका गुप्ता निराश दिखती हैं
कुछ ज्यादा सकून नहीं मिला
अजित कुमार, गंगाप्रसाद विमल,प्रो. रामशरण जोशी
डॉ. रत्नाकर पाण्डेय, रामदरश मिश्र बतला रहे हैं जो
अंक लेकर पढ़ेंगे सब आनंद आएगा अद्भुत आएगी ग्लो।
कन्हैयालाल नंदन जी अविस्मरणीय में मान दे रहे हैं
भूल नहीं सकता, प्यारे लाल त्रिपाठी को
आप भी पढि़ए इस मार्मिक संस्मरण को।
व्यक्तित्व में सन 2009 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
कवि कैलाश वाजपेयी का जीवन और उनकी काव्य रचनाएं और
उनके वे अनमोल विचार जो हेमंत कुकरेती से बातचीत में निकले
व्यक्तित्व में ही अप्रतिम रचनाकार सत्येन्द्र श्रीवास्तव जी के रचनाकर्म के बारे में
अनिल जोशी बतला रहे हैं, कविताएं उनकी भी पढ़वा रहे हैं
शशिप्रभा तिवारी ने पेश की है
कुचिपुड़ी नृत्य की जुगलबंदी : जयराम राव एवं वनश्री राव
की जानकारी जिन्होंने कुचिपुड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर
नई पहचान दिलाई है।
इसमें मोती भी हैं
प्रथम दिवसे में निर्मला जैन बतला रही हैं
जीवन में पहला प्यार, पहला भ्रष्टाचार या पहली नौकरी
इन्हें नहीं भूल सकते कभी, या वे ही भूलने नहीं देते।
साहित्य चिंतन में नित्यानंद तिवारी
प्रेमचंद और हमारा समय पर विचारोत्तेजक आलेख लाए हैं।
कथा साहित्य में संजीव की खबर है
खबर में खबर जुड़ती रही
समय में जुड़ता रहा समय
तुम बाल बच्चेदार हुई
एक और समाचार हुई
..... अभी और है, यह तो शुरू का दौर है ।
नरेन्द्र कोहली का एक मात्र सत्य
उनके शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास
तोड़ो कारा तोड़ो-6 (समाहार) का एक अंश है।
सुषम बेदी का अतीत के शब्द
विष्णु नागर जी का अंत भला सो सब भला
पर यह अंत नहीं शुरूआत है
इसके आगे महेश दर्पण का तार है
जॉर्ज ऑरवेल की मुर्गियों का विद्रोह है
लघुकथा मंदिर है
नवाब की हवेली है जो ज्ञानप्रकाश विवेक की झोली से ली है
डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा 'अरुण' की बाबा की बेटी
गोपाल चतुर्वेदी का कोई मैं झूठ बोलया में
एन.आर.आई. का महत्व है
इसके साथ ही दिविक रमेश, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, रामबहादुर चौधरी 'चंदन'
राधेश्याम तिवारी, प्रताप सहगल, जैकी श्राफ़ की काव्य रचनाएं हैं
फिर बांध रहे हैं भूमिका अशोक चक्रधर
कवि सम्मेलनों से हिंदी विदेशों में खु़श हुई
हरजेन्द्र चौधरी का प्रणाम निवेदन प्रोफेसर कात्सुरो कोगा ।
अभी है भाषा-चिंतन में विनोद संदलेश की रचना
प्रयुक्ति की संकल्पना और अनुवाद
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय की कलम से कला चिंतन
मुग़ल क़लम से निसर्ग उपादानों के अंकन
अजित राय के नटरंग में
बारहवां भारत रंग महोत्सव
तेजेन्द्र शर्मा के निष्पक्ष विवरण
सांस्कृतिक संवाद का पुल : यू.के. का नेहरू सेंटर
देवेन्द्र राज अंकुर के अध्ययन कक्ष से
दिल्ली की कहानी दिल्ली की जु़बानी
(निर्मला जैन की पुस्तक दिल्ली शहर दर शहर)
अनिल महेश्वरी का एक मंच पर लाने का प्रयास
(विश्व हिंदी पत्रिका 2009)
विजय विद्रोही कर रहे हैं समीक्षा
महीप सिंह और मृदुला गर्ग के दो कहानी संग्रहों की
गतिविधियां हैं यज्ञ शर्मा को व्यंग्यश्री सम्मान की
और कनुप्रिया का मनोहारी नृत्य-नाट्य मंचन।
जो दिया है विवरण वो पूरे वर्ष भर का नहीं है
सिर्फ उस अंक का है आईना
जिसका आवरण चित्र आप ऊपर देखकर आए हैं
अगर आप इसे पूरा पढ़ने के इच्छुक हैं
तो विश्वास मानिए, आप इसे लेकर पूरा ही पढ़ेंगे
जानना चाहते हैं कि यह कहां मिलेगी
कैसे पहुंचेगी तो संपर्क करें 011 23379639 पर।
एक राज खोलते हैं, अब जल्दी से बोलते हैं
इसके संपादक प्रेम जनमेजय कह रहे हैं दृष्टिकोण में
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गगनांचल क्या है
भीतर क्या है
बाहर तो दिखला दिया है
आवरण मनीष वर्मा का रचा है
प्रवासी साहित्य के पक्ष-विपक्ष पर पेश है प्रस्तुति
लालित्य ललित की, आंक रहे हैं
कितना है प्रवासी और कितना है साहित्य
विचार हैं सम्मिलित इसमें
राजेंद्र यादव के
वे कहते हैं द्विवेदीयुगीन लेखन से आगे नहीं
चित्रा मुद्गल का कहना है
सृजनात्मकता स्वयं बोलती है
हिमांशु जोशी बतला रहे हैं
पानी को फीते से नहीं नाप सकते
रमणिका गुप्ता निराश दिखती हैं
कुछ ज्यादा सकून नहीं मिला
अजित कुमार, गंगाप्रसाद विमल,प्रो. रामशरण जोशी
डॉ. रत्नाकर पाण्डेय, रामदरश मिश्र बतला रहे हैं जो
अंक लेकर पढ़ेंगे सब आनंद आएगा अद्भुत आएगी ग्लो।
कन्हैयालाल नंदन जी अविस्मरणीय में मान दे रहे हैं
भूल नहीं सकता, प्यारे लाल त्रिपाठी को
आप भी पढि़ए इस मार्मिक संस्मरण को।
व्यक्तित्व में सन 2009 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
कवि कैलाश वाजपेयी का जीवन और उनकी काव्य रचनाएं और
उनके वे अनमोल विचार जो हेमंत कुकरेती से बातचीत में निकले
व्यक्तित्व में ही अप्रतिम रचनाकार सत्येन्द्र श्रीवास्तव जी के रचनाकर्म के बारे में
अनिल जोशी बतला रहे हैं, कविताएं उनकी भी पढ़वा रहे हैं
शशिप्रभा तिवारी ने पेश की है
कुचिपुड़ी नृत्य की जुगलबंदी : जयराम राव एवं वनश्री राव
की जानकारी जिन्होंने कुचिपुड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर
नई पहचान दिलाई है।
इसमें मोती भी हैं
प्रथम दिवसे में निर्मला जैन बतला रही हैं
जीवन में पहला प्यार, पहला भ्रष्टाचार या पहली नौकरी
इन्हें नहीं भूल सकते कभी, या वे ही भूलने नहीं देते।
साहित्य चिंतन में नित्यानंद तिवारी
प्रेमचंद और हमारा समय पर विचारोत्तेजक आलेख लाए हैं।
कथा साहित्य में संजीव की खबर है
खबर में खबर जुड़ती रही
समय में जुड़ता रहा समय
तुम बाल बच्चेदार हुई
एक और समाचार हुई
..... अभी और है, यह तो शुरू का दौर है ।
नरेन्द्र कोहली का एक मात्र सत्य
उनके शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास
तोड़ो कारा तोड़ो-6 (समाहार) का एक अंश है।
सुषम बेदी का अतीत के शब्द
विष्णु नागर जी का अंत भला सो सब भला
पर यह अंत नहीं शुरूआत है
इसके आगे महेश दर्पण का तार है
जॉर्ज ऑरवेल की मुर्गियों का विद्रोह है
लघुकथा मंदिर है
नवाब की हवेली है जो ज्ञानप्रकाश विवेक की झोली से ली है
डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा 'अरुण' की बाबा की बेटी
गोपाल चतुर्वेदी का कोई मैं झूठ बोलया में
एन.आर.आई. का महत्व है
इसके साथ ही दिविक रमेश, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, रामबहादुर चौधरी 'चंदन'
राधेश्याम तिवारी, प्रताप सहगल, जैकी श्राफ़ की काव्य रचनाएं हैं
फिर बांध रहे हैं भूमिका अशोक चक्रधर
कवि सम्मेलनों से हिंदी विदेशों में खु़श हुई
हरजेन्द्र चौधरी का प्रणाम निवेदन प्रोफेसर कात्सुरो कोगा ।
अभी है भाषा-चिंतन में विनोद संदलेश की रचना
प्रयुक्ति की संकल्पना और अनुवाद
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय की कलम से कला चिंतन
मुग़ल क़लम से निसर्ग उपादानों के अंकन
अजित राय के नटरंग में
बारहवां भारत रंग महोत्सव
तेजेन्द्र शर्मा के निष्पक्ष विवरण
सांस्कृतिक संवाद का पुल : यू.के. का नेहरू सेंटर
देवेन्द्र राज अंकुर के अध्ययन कक्ष से
दिल्ली की कहानी दिल्ली की जु़बानी
(निर्मला जैन की पुस्तक दिल्ली शहर दर शहर)
अनिल महेश्वरी का एक मंच पर लाने का प्रयास
(विश्व हिंदी पत्रिका 2009)
विजय विद्रोही कर रहे हैं समीक्षा
महीप सिंह और मृदुला गर्ग के दो कहानी संग्रहों की
गतिविधियां हैं यज्ञ शर्मा को व्यंग्यश्री सम्मान की
और कनुप्रिया का मनोहारी नृत्य-नाट्य मंचन।
जो दिया है विवरण वो पूरे वर्ष भर का नहीं है
सिर्फ उस अंक का है आईना
जिसका आवरण चित्र आप ऊपर देखकर आए हैं
अगर आप इसे पूरा पढ़ने के इच्छुक हैं
तो विश्वास मानिए, आप इसे लेकर पूरा ही पढ़ेंगे
जानना चाहते हैं कि यह कहां मिलेगी
कैसे पहुंचेगी तो संपर्क करें 011 23379639 पर।
एक राज खोलते हैं, अब जल्दी से बोलते हैं
इसके संपादक प्रेम जनमेजय कह रहे हैं दृष्टिकोण में
यदि कुछ अच्छा लगे तो मानिएगा कि ये सबके रचनात्मक सहयोग का परिणाम है और यदि कुछ खराब लगे तो वह संपादक की अक्षमता के कारण होगा।
कुछ अपरिहार्य कारणों से अंक के प्रकाशन में विलंब हुआ। प्रयत्न होगा कि भविष्य में ऐसा अवांछित वर्तमान न दोहराया जाए।
गगन को आंचल में लेने का श्री प्रेम जनमेजय का प्रयास (अविनाश वाचस्पति)

प्रिय / सम्माननीय
माननीय श्री प्रेम जनमेजय जी के संपादकत्व में, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की प्रतिष्ठित पत्रिका, ‘गगनांचल’ का पहला अंक, वर्षः33 अंक2, प्रकाशनार्थ प्रेस में चला गया है। जैसा कि संपादकीय में भी आपने लिखा है -
इस अंक में आपको कुछ नए रचनात्मक आयोजन दिखेंगें। कैसे हैं, ये जानने की उत्सुक्ता रहेगी।यदि अंक में कुछ अच्छा लगे तो मानिएगा कि ये सबके रचनात्मक सहयोग का परिणाम है और यदि कुछ खराब लगे तो वह संपादक की अक्षमता के कारण होगा।’
इस अंक में निम्नलिखित सामग्री है-
पक्ष विपक्ष
प्रवासी साहित्यः कितना साहित्य, कितना प्रवासी
के अंतर्गत राजेंद्र यादव, चित्रा मुद्गल, हिमांशु जोशी, रमणिका गुप्ता, अजित कुमार, गंगाप्रसाद विमल, रामशरण जोशी, रत्नाकर पांडेय, रामदरश मिश्र के विचार
विशेष : में पूरनचंद्र जोशी का रवीन्द्रनाथ टैगोर पर संस्मरणात्मक आलेख
अविस्मरणीय में कन्हैयालाल नंदन का अद्भुत अविस्मरणीय संस्मरण
व्यक्तित्व में कैलाश वाजपेयी, हेमंत कुकरेती, सत्येंद्र श्रीवास्तव , अनिल जोशी, गुरु जयरामरॉव श्रीमती वनश्री राव, शशिप्रभा तिवारी
प्रथम दिवसे में पहली विदेश यात्रा पर प्रो0 निर्मला जैन की रम्य रचना।
साहित्य चिंतन में प्रो0 नित्यानंद तिवारी का विचारोत्तेजक आलेख
कथा साहित्य में नरेंद्र कोहली, संजीव, सुषम बेदी , विष्णु नागर, महेश दर्पण,जार्ज ऑरवेल, ज्ञान प्रकाश विवेक, योगेंद्र शर्मा अरुण की रचनाएं
कोई मैं झूठ बोलया में गोपाल चतुर्वेदी का व्यंग्य
कविता/ गज़ल में दिविक रमेश, प्रताप सहगल, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, राधेश्याम तिवारी रामबहादुर चौधरी चंदन,
प्रणाम में प्रो0 कात्सुरो कोगा पर हरजेंद्र चौधरी का आलेख
भाषा चिंतन में विनोद संदलेश का आलेख
कला चिंतन में नर्मदाप्रसाद उपाध्याय का मुगलकालीन चित्रकला पर आलेख
नटरंग अजित राय बारहवें रंग महोत्सव की समीक्षा
सांस्कृतिक केंद्र में यू0के0 के नेहरू सेंटर पर तेजेंद्र शर्मा की प्रस्तुति
अध्ययन कक्ष में देवेंद्र राज अंकुर की ‘दिल्ली की कहानी, दिल्ली की जुबानी
तथा और बहुत कुछ
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श्री अजय कुमार गुप्ता
प्रबंध संपादक
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्
आजाद भवन, इंद्रप्रस्थ एस्टेट
नई दिल्ली- 110002
आगामी अंकों के लिए आपके रचनात्मक सहयोग एवं सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रेम जनमेजय
मानद सम्पादक ' गगनांचल '
Dr. Prem Janmejai
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A- 3 Paschim Vihar, New Delhi - 110063
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