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ब्‍लॉगर से ब्‍लॉगर मिले : शाम हो गई हसीन

(उपदेश सक्सेना)
आज का दिन जब शुरू हुआ था तब यह आशा नहीं थी कि इसकी सांझ इतनी हसीं होगी. दोपहर बाद अचानक अविनाश जी का फोन आया...कहाँ आफिस में हैं? मैंने कहा हाँ तो वे बोले- हम भी पास ही हैं, मैंने कहा स्वागत है. कुछ समय पश्चात ही अविनाश वाचस्‍पति जी के साथ अजय कुमार झा और रवीन्द्र प्रभात सामने नमूदार हो गए, बड़ी आत्मीयता के साथ चाय-पान के बीच ब्लोगिंग पर सार्थक चर्चा हुई।  काफी नई तकनीकी जानकारियों का आदान प्रदान हुआ, महज एक घंटा न जाने कब बीत गया. रवीन्द्र जी को लखनऊ वापस लौटना था, सो मजबूरी में सभी को विदा करना पड़ा. हाँ, इस अल्प काल में जो आत्मीयता सभी में देखने को मिली, उसका कायल हो गया हूँ. सुनील वाणी के सुनील कुमार और अजीत झा भी इस दौरान मौज़ूद थे, चित्र इसकी बानगी है.
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लो और कर लो ब्लोगिंग

(उपदेश सक्सेना)
यह तो ज़ुल्म की इंतहा ही है कि कंप्यूटर पर ज्यादा काम करने लोग ज़ल्दी दिल के मरीज़ हो जाते है. एक नए स्टडी में दावा किया गया है हर रोज महज 4 घंटे कंप्यूटर या टीवी स्क्रीन के आगे बिताने वाले लोगों को दिल की बीमारी होने का खतरा दोगुना हो जाता है. ऐसे लोगों की समय से पहले मौत के आसार बढ़ जाते हैं. यानि अब ब्लोगिंग पर नियंत्रण रखना होगा, वैसे मैं इस शोध के पहले से ही ब्लोगिंग कम ही कर पाता हूँ.
यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के रिसर्चरों ने इस बारे में एक स्टडी कर यह नतीजा निकाला है. उन्होंने पाया कि जो लोग रोजाना चार घंटे या इससे ज्यादा समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं या फिर टीवी देखते हैं.........पूरी पोस्ट यहां पर उपलब्ध है.
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ब्लॉग जगत के मित्रों-शुभचिंतकों को धन्यवाद

व्यक्ति के जीवन में जन्मदिन ऐसा दिन होता है जब गम में डूबने (जीवन का एक दिन कम होने का गम) की बजाये हर कोई इसे हर्ष से मनाकर खुशियों में डूब जाता है. खुशी उस वक्त दोगुनी हो जाती है जब आपके बच्चे इस मौके पर खास आयोजन करें, मेरे साथ भी ऐसा हुआ अपने 42 वें जन्मदिन पर. इस साल मुझे यह सुखद अनुभूति हुई कि मेरे तीनों बेटों उन्मुक्त-उत्सव-उत्कर्ष ने स्वयं मेरे जन्मदिन पर एक भव्य आयोजन रखा. भोपाल के मेरे निवास पर इस साल 10 मई मेरे लिए यादगार बन गई. तमाम शुभचिंतकों-मित्रों की भीड़ में घिरकर मैं इतना अभिभूत था जितना शायद मेरे पैदा होते वक्त मेरे माता-पिता हुए होंगे.इस मौके पर मुझे अपने कुछ उन साथियों की कमी काफी खली, जिन्हें मैं अपने ही शरीर का अंग मानता आया हूँ. अब आज लंबी छुट्टी से वापस दिल्ली लौटकर आप सभी की प्रतिक्रियाएं देखीं, मन भर सा गया कि मुझे भी चाहने वालों की कोई कमी नहीं है.
ब्लॉग जगत के मेरे तमाम मित्रों-शुभचिंतकों की मुझे शुभकामनाएँ प्राप्त हुईं, भाई अविनाश वाचस्पति जी और मनोज कुमार जी की टिप्पणियों ने मन को द्रवित कर दिया. मेरे तमाम मित्रों की शुभकामनाएं मेरे लिए साहस बढाने का काम करेंगी, फेस बुक पर दिनेश जुगरान जी,हर्षवर्धन जी, रक्षा मेहता जी,उमाकांत मांकड जी,अलका सैनी जी, राकेश गुप्ता जी, रेदोस्तिना पेत्रोवा, मनोज जोशी जी, स्टीफन डिमेलो, संजीव शर्मा जी, फर्मिना मुक्त सिंह, अशोक कुमार गारेकर जी, प्रतिभा वाजपेई जी, महेन्द्र जैन, दीपाली नार्सिकर, नन्दलाल भारती जी, अनुपमा शेट्टी जी, किशोर श्रीवास्तव जी, पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल जी, विजय पाण्डेय जी, सुनील सिंहल जी, राजा चौधरी जी, सुरेन्द्र सिंह राजपूत जी, पेनी सिम्पसन, जयेन्द्र नाथ ठाकुर जी, लीना मिस बालीवुड खान जी, सचिन खरे जी समेत तमाम मित्रों का मैं आभारी हूँ कि उन्होंने मेरे जन्मदिन पर मुझे शुभकामनाएँ, अपना प्यार भेजा. और हर दिल अजीज श्री पाबला जी ने अपने ब्‍लॉग पर भी हमेशा की तरह शानदार तरीके से आयोजन कर डाला। मैं नहीं जानता कि उन्‍हें यह सूचना कहां से मिली परंतु शुभकामनाएं पाकर मन हर्ष से भर उठा और हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की ताकत से मुझे भी शक्ति का अहसास हुआ है। आरकुट के तमाम मित्रों और शुभचिंतकों को भी धन्यवाद. धन्यवाद उन्हें भी जिन्होंने एसएमएस की तकनीक का लाभ उठाकर शुभकामनाएं भेजीं. अब आज से फिर ब्लॉगिंग शुरू,आगे भी स्नेह मिलेगा इसी आशा और विश्वास के साथ, आप सभी मित्रों का आभार....- उपदेश सक्सेना
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