इस से सच्चा उस से झूठा...
तुम से मीठा हम से कड़वा
इनसान हुआ मतलब का यारो
जाने वो कितने रंग बदलता है
इस पल तोशा उस पल माशा
हर क्षण सैंकड़ों अक्स बदलता है
इनसान हुआ मतलब का यारो
जाने वो कितने ढंग बदलता है
इससे छीना उससे झपटा
इसको लूटा उसको काटा
इनसान हुआ पत्थर का यारो
देखो...
अब पत्थर में वो रब्ब ढूँढता है
***राजीव तनेजा***


