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चला गया हूं मैं, नजर फिर भी आऊंगा मैं, सोशल मीडिया अब मेरा ठिकाना है : अलबेला खत्री

ठिकाने बदल जाते हैं
ठिठक जाते हैं दौड़ने वाले
जीतने वाले, जिताने वाले
फिर भी सब मतवाले हैं
खुद को जिंदा मारे हैं
 
मालूम है उन्‍हें
जानते हैं वह
लटके हुए हैं सबके पैर
उस कब्र पर
जो चाहे अनखुदी है
दिखाई नहीं देती है
पर मौजूद है।
 
यह मौजूदगी
इंसान की है
इंसानियत की
भी हो सकती है
नहीं भी
यह सबके अपने
अपने निजी अनुभव हैं।
 
सांसों का मीटर
नहीं  आता नजर
पर चलता रहता है
रुकने पर भी
नहीं होता आभास
पर मीटर तो मीटर है
वही बनता किलोमीटर
उसका जीवन कोश है
कोष कब रिक्‍त हो जाए
न तुम जानते हो
न मुन्‍ना(अविनाश वाचस्‍पति)  
न अन्‍य कोई।
 
यही कोश निरंकुश लगता है
पर इस पर भी किसी का अंकुश
कसा तो जाता है
जब गहरे से कसता है
न तब और न जब धीरे से
कसने पर पीड़ा होती है।
 
जीवन को ढूंढा है पीड़ा मे
तुझमें ढूंढूंगा पीड़ा
पीड़ा जो सच है
पीड़ा ही दर्द है
सच मानो मित्रो मेरे
पीड़ा ही सच्‍चा जीवन है।
 
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अलबेला खत्री लाइव फ़्राम जबलपुर

सूरत से सिंगरौली व्हाया जबलपुर जाते समय जबलपुरियों हत्थे चढ़ गये राज़ दुलारे अलबेला के साथ आज न कल देर रात तक फ़ागुन की  आहट का स्वागत किया  गया बिल्लोरे निवास पर डाक्टर विजय तिवारी "किसलय" बवाल ,और हमने यक़ीं न हीं तो देख लीजिये और पढ़ भी लीजिये यहां सचित्र समाचार मिसफ़िट पर
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शालीमार बाग में दिल्‍ली ब्‍लॉगर मिलन के चित्र और संक्षिप्‍त समाचार

***राजीव तनेजा***

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चित्र में बाएं से दाएं : संजू तनेजा,शशि सिंहल,अविनाश वाचस्पति,बागी चाचा,एम.वर्मा,राजीव तनेजा,अलबेला खत्री,प्रवीण शुक्ल ‘प्रार्थी,कनिष्क कश्यप और पवन चन्दन

कुछ दिन पहले अलबेला खत्री जी के ब्लॉग पर खबर पढ़ने को मिली कि किसी कार्यक्रम के सिलसिले में वो दो दिन के लिए दिल्ली आ रहे हैं|बस!…फिर क्या था जनाब……उनसे मिलने की तमन्ना दिल में जाग उठी| आनन-फानन में अविनाश वाचस्पति जी को फोन लगाया और उन्हें सारी बात बताई| तय हुआ कि मिलने के स्थान का इंतजाम करने के लिए अजय झा जी को कहा जाए…क्योंकि लगातार दो बार मीटिंग करवा कर वो इस काम में सिद्धहस्त हो चुके हैं| अविनाश जी के जिम्मे इस काम को लगाने के बाद मैं निश्चिन्त हो कर चादर तान कर सो गया …चादर तान के इसलिए कि रजाई ओढने का मौसम तो कुछ दिन पहले ही दिवंगत हो चुका था….बाद में अजय जी से फोन पर हुई बातचीत में पता चला कि उस स्थान का मिलना संभव नहीं है…तो तय हुआ कि अलबेला जी से मिलने के इच्छुक ब्लोगर उनसे हमारे घर शालीमार बाग में ही मिल लें|

इससे आगे की रिपोर्ट तो मैं आपके समक्ष बाद में पेश करूँगा …पहले आप अविनाश वाचस्पति जी द्वारा आनन-फानन में जारी की गई इस तुरत-फुरत रिपोर्ट को पढ़ लें

***अविनाश वाचस्पति***

आज शनिवार दिनांक 27 मार्च 2010 की प्रात: 11 बजे शालीमार बाग में आयोजित ब्‍लॉगर मिलन संगोष्‍ठी में मौजूद रहे।
सर्वश्री/ राजीव तनेजा, संजू तनेजा, अलबेला खत्री, अविनाश वाचस्‍पति, कनिष्‍क कश्‍यप, पवन चंदन, इरफान, एम. वर्मा, बागी चाचा, शशि सिंहल, सतीश सक्‍सेना, खुशदीप सहगल, विनोद कुमार पांडेय और प्रवीण शुक्ल ‘प्रार्थी' | बैठक के मध्‍य डॉ. टी एस दराल, सुश्री प्रतिभा कुशवाहा की फोन काल प्राप्‍त हुईं। सबने अपनी अपनी रचनाएं भी सुनाईं। कई योजनाओं पर विस्‍तार पर चर्चा हुई। श्री कनिष्‍क कश्‍यप ने 25 मार्च 2010 से लांच हुए प्रहरी लाइव चैनल की संपूर्ण जानकारी दी। श्री अजय कुमार झा मेट्रो तक पहुंच गए थे परंतु उनके कार्यालय से फोन आने पर उन्‍हें वहीं से लौटने को विवश होना पड़ा। इस अवसर पर सामान्‍य जलपान, शीतल, गर्म पेयों से शुरू हुआ सफर गरमागर्म पकौड़ों, मिठाइयों से होता हुआ गरमागर्म पूरियों, पनीर की सब्‍जी, आलू टमाटर रसेदार, दही रायता, सलाद और फिर चाय पर पहुंच कर संपूर्णता पर संपन्‍न हुई सांय 4 बजे। इनके चित्र और विस्‍तृत रिपोर्ट आपको शीघ्र ही मिलेगी राजीव तनेजा जी और उनकी सक्रिय टीम के ब्‍लॉग पर।

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कार्टूनिस्ट इरफ़ान और बागी चाचा

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