अविनाश जी अपना ही फोन अपने ही फोन नंबर से डायल करेंगे तो मिलेगा ही नहीं। हा हा हा
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खाने का इंतजाम करते करते हाजिरी भी लगा रहे हैं तनेजा जी, दोनों व्यवस्थाएं एक दूसरे पर अन्योन्याश्रित हैं। हा हा हा
खूब हंसा रहे हैं तनेजा जी और अविनाश जी तो हंसाने में माहिर ही हैं, जो मेरे इस कथन से इत्तेफाक रखते हैं, वो यहां पर अपनी सहमति अवश्य दर्ज करें।
जहां तक पहली नुक्कड़ संगोष्ठी में चर्चा के लिए विषय के चयन की बात है, मैं शैलेश भारतवासी की सलाह से इत्तेफाक रखता हूं कि विषय :-
ब्लॉगिंग प्रोफेशनल यानी व्यावसायिक ब्लॉगिंग की ओर कैसे बढ़े ?
शैलेश जी द्वारा सुझाए गए विषय पर चर्चा के लिए हर भारतवासी ब्लॉगर तो तैयार मिलेगा। आखिर विषय ही धांसू सुझाया है, मंदी के इस दौर में .......
मेरे विचार से सिर्फ एक विषय ही काफी है चर्चा के लिए
और तनेजा जी विषय काफी हो तो इसका आशय यह कदापि न ले लें कि कॉफी का इंतजाम नहीं करना होगा। कॉफी का काफी इंतजाम होना चाहिए।
1 अप्रैल 2009 दिन रविवार को नुक्कड़ संगोष्ठी के लिए मैं दिन प्रस्तावित करता हूं।
तो तैयार हैं न आप ?
मैं तो तैयार हूं।


